श्रीमान जी
(91 8595234502)
जनाब, मैं सर्वोच्च न्यायालय से हूं और कोलोजियम सिस्टम के आगे भी बहुत कुछ है, जो दलितों के शोषण से जुड़ा हुआ है। मैं भली-भांति जानता हूं कि न्यायपालिका में दलित क्लाइंट और दलित अधिवक्ताओं का कैसे शोषण होता है।
1. सर्वोच्च न्यायालय में दलित अधिवक्ताओं की स्थिति
सर्वोच्च न्यायालय में दलित एडवोकेट (AOR - एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड) की संख्या नगण्य है।
बिना किसी संगठन के, इस मुद्दे पर सार्थक कार्य करना कठिन है।
दलित समाज के कितने लोग सर्वोच्च न्यायालय में केस दर्ज कराते हैं?
जो लोग किसी तरह आ भी जाते हैं, वे भी दलित अधिवक्ताओं की बजाय तथाकथित "पंडित जी" को ही वकील बनाते हैं।
2. दलित नेताओं का दोहरा रवैया
मायावती जैसी दलित नेता भी अपने समाज के वकीलों को केस नहीं देतीं।
ऐसे में, सर्वोच्च न्यायालय में दलित समाज के एडवोकेट टिक ही नहीं पाते।
इस स्थिति में, उच्च न्यायपालिका में आरक्षण की मांग कौन उठाएगा?
3. कॉलेजियम सिस्टम और आनुपातिक प्रतिनिधित्व
कोलोजियम सिस्टम के माध्यम से भी न्यायपालिका में आरक्षण लागू किया जा सकता है।
आनुपातिक प्रतिनिधित्व को न्यायपालिका में लागू करना समय की मांग है।
परंतु, कॉलेजियम सिस्टम हटाकर 'न्यायिक नियुक्ति आयोग' बनाया गया तो न्यायपालिका सरकार के नियंत्रण में आ जाएगी, जो संविधान की मूल भावना (Basic Structure) के खिलाफ है।
ऐसी स्थिति में, देश में राजतंत्र लागू होने में अधिक समय नहीं लगेगा।
4. अन्य आयोगों की निष्क्रियता
भारत में अधिकांश आयोग निष्क्रिय हैं—कई में तो अध्यक्ष ही नहीं है।
जो कार्यवाहक अध्यक्ष होते हैं, वे भी मंत्री से पूछ-पूछकर काम करते हैं।
क्या हम न्यायपालिका को भी इसी स्थिति में लाना चाहते हैं?
5. न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर खतरा
कांग्रेस ने आज़ादी के बाद ही न्यायपालिका की स्वतंत्रता को कमजोर कर दिया।
अमेरिका में लोअर कोर्ट का जज भी राष्ट्रपति को चुनौती दे सकता है।
परंतु, भारत में जस्टिस लोया की मौत का सच आज तक सामने नहीं आया।
सर्वोच्च न्यायालय भी अपने अधीनस्थ जस्टिस लोया को न्याय नहीं दिला सका—यह कांग्रेस द्वारा कमजोर की गई न्यायपालिका का ही परिणाम है।
6. भाजपा के इरादे और न्यायपालिका की स्वायत्तता
क्या हम भारतीय जनता पार्टी को सफल होने देना चाहते हैं और न्यायपालिका को सरकार का अंग बनने देना चाहते हैं?
मैं कॉलेजियम सिस्टम के पक्ष में हूं, लेकिन उसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व का समर्थन करता हूं।
7. आर्थिक संकट और आंदोलन की बाधाएं
मैं 2 लाख रुपये का लोन लेना चाहता हूं, परंतु कोई भी बैंक एडवोकेट को लोन देने को तैयार नहीं है, क्योंकि एडवोकेट ITR नहीं भरते।
एडवोकेट्स के लिए ITR भरना अनिवार्य भी नहीं है।
आर्थिक संसाधनों के अभाव में, मैं अपने आंदोलन को तेजी से आगे नहीं बढ़ा पा रहा हूं।
क्या आप इसमें मदद करना चाहेंगे?
8. अनुसूचित जाति आयोग की उदासीनता
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी मंगतराम वाली को दलितों की समस्या से कोई लेना-देना नहीं है।
मैंने उनसे कई बार इस विषय पर चर्चा की है, लेकिन उन्होंने कभी गंभीरता नहीं दिखाई।
हर महीने की 10 तारीख को तुगलकाबाद स्थित रविदास मंदिर में न्याय का विषय उठाया जाता है, परंतु श्री मंगतराम वाली की ढुलमुल स्थिति के कारण किसी भी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सका है ।
9. 10 अप्रैल को संत रविदास मंदिर में आपका स्वागत है
जहांपनाह पार्क स्थित संत शिरोमणि गुरु रविदास मंदिर में 10 अप्रैल को एक महत्वपूर्ण सभा आयोजित की जा रही है।
आपका वहां स्वागत है—आइए, इस विषय पर विस्तार से चर्चा करें।
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा
📞 9335122064
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