Thursday, 17 July 2025

शिक्षा का निजीकरण

 भ्राता (श्री राजकिशोर) जी, 


समस्या विद्यालयों का मर्जर नहीं है, बल्कि शिक्षा का निजीकरण है, जिसका समर्थन मायावती ने किया था अटल जी की सरकार में, शिक्षा के निजीकरण को चुनौती देनी होगी, क्योंकि हमारे समाज कोई भी व्यक्ति एक करोड रुपए खर्च करके अपने बच्चों को डॉक्टर इंजीनियर नहीं बन सकता है, जब हम हमारे समाज कहते हैं तो इसमें EWS SC, ST, और OBC सम्मिलित होता है🙏


आपके लेख में दी गई उपरोक्त चिंताओं के संदर्भ में मेरे पास कोई जानकारी नहीं है कि इस मामले में कोई केस माननीय सर्वोच्च न्यायालय में डाला गया है। 🙏 जबकि यह विषय केवल सर्वोच्च न्यायालय का है। 🙏


मुझे इस संदर्भ में सिर्फ दो चीजों की आवश्यकता है क्योंकि अधिवक्ता की कुछ सीमाएं होती हैं। 🙏


1. किसी भी मामले में अधिवक्ता स्वयंवादी नहीं होता। 🙏

2. केस डालने वाले वादी का क्षेत्रीय अधिकार क्या है? 🙏

3. PIL सामाजिक संगठन डालते हैं, अभी तक मेरे पास ऐसा कोई सामाजिक संगठन नहीं आया है। 🙏


हमारे समाज का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि जो व्यक्ति पैसा खर्च करता है, वही दूल्हा बनना चाहता है, इसीलिए समाज की प्रगति नहीं हुई है। 🙏 दलित समाज में उन लोगों के पास ही पैसा आया है जो सरकारी नौकरियों में गए हैं। प्राइवेट नौकरी वाले तो अपनी जीविका चलाने के संसाधन अभी तक नहीं जुटा सके हैं। 🙏 सरकारी नौकरी में से जुड़े हुए लोग ऊंचे-ऊंचे मकान बनाने का शौक रखते हैं, एक से अधिक मकान बनाने का शौक रखते हैं। 🙏 अथवा शेयर मार्केट में पैसा इन्वेस्ट करते हैं, कोई सरकारी बॉन्ड या पॉलिसी खरीदते हैं। 🙏 समाज की प्रगति के लिए कोई धन नहीं खर्च करते हैं। 🙏


समाज के वे लोग जो व्यापार जगत से जुड़े हैं, उनको भी अपनी रोजी-रोटी चलाने की बहुत बड़ी दिक्कत है क्योंकि व्यापारी को एक बैकअप मनी रखना पड़ता है। 🙏 जो कुछ बड़े व्यापारी हैं, वे राजनीति में अपने भाग्य को चमकाने की कोशिश करते हैं और राजनीतिक पार्टियों को चंदा देते हैं। समाज के उत्थान के लिए कोई कार्य नहीं करते हैं। 🙏


समाज में परिवर्तन के तीन आधार हैं: 🙏


अ. न्यायिक आंदोलन, अर्थात् न्यायपालिका के माध्यम से रिट पिटिशन। 🙏  

ब. सामाजिक आंदोलन, अर्थात् समाज का सशक्त संगठन, एक धार्मिक विचारधारा। 🙏  

स. राजनीतिक आंदोलन, अर्थात् राजनीतिक पार्टी बनकर समाज के लिए कार्य करना। 🙏  


द. हमारे समाज द्वारा चलाए गए राजनीतिक आंदोलन उच्च महत्वाकांक्षाओं के कारण असफल हुए हैं। 🙏  

य. हमारा समाज धर्म में विश्वास नहीं रखता है, इसलिए कोई धार्मिक संगठन नहीं खड़े हो सके हैं। समाज का अधिकांश वर्ग दूसरों के धार्मिक संगठन पर निर्भर है। 🙏  

र. समाज में जिन लोगों के पास पैसा है, वे अपने कार्य भ्रष्टाचार के साथ आसानी से कर लेते हैं, इसलिए उनको समाज की पीड़ा नहीं है। 🙏 परिणाम स्वरूप कोई न्यायिक आंदोलन शुरू नहीं होता है। 🙏  

ल. बाबा साहब ने चार स्तरीय व्यवस्था दी है ताकि हमारा समाज सुरक्षित रहे। 🙏 तीन कार्य संविधान के माध्यम से और एक कार्य धर्म के माध्यम से। बाबा साहब ने कार्यपालिका बनाई, सांसद और विधायिका बनाई, न्यायपालिका का गठन किया। 🙏 बाबा साहब ने आर्टिकल 25 में बौद्ध, जैन और सिखों का एक परिसंघ बनाया, जिसे हिंदू कहा जाना था। 🙏  


परंतु हिंदू शब्द पर पिछले 70 साल से कुछ अन्य लोग कब्जा किए बैठे हैं। यह एक सौभाग्य है कि आजकल वे खुद को सनातनी कहने लगे हैं। 🙏 यही वह समय है जब जैन, बौद्ध, सिख के परिसंघ को मजबूत किया जाए, क्योंकि तीनों की आंतरिक विचारधारा एक जैसी है। 🙏


मैं सामाजिक और न्यायिक आंदोलन चलाने में सक्षम हूँ। समाज के धनाढ्य और शुभचिंतक वर्ग को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना होगा। ऐसा इसलिए भी किया जाना आवश्यक है क्योंकि उनके पास खुद करने का समय नहीं है, यदि उनके दिमाग में अवधारणा है कि धन मैं खर्च कर रहा हूं इसलिए दूल्हा मैं ही बनूँगा तो फिर यह सामाजिक व्यवस्था नहीं है 🙏 उच्च जातियों के संगठन में धनपति और शुभचिंतक संगठन का अध्यक्ष नहीं होते, बल्कि संगठन के संरक्षक होते हैं🙏 जबकि हमारे समाज में वह संगठन का अध्यक्ष होने की इच्छा रखते हैं और अध्यक्ष पद का अहंकार भी रहता है इस कारण संगठन मजबूत नहीं रहते, उनका विस्तार नहीं हो पता है🙏


1. आपने जो चिंताएं जाहिर की हैं, उन पर सामाजिक आंदोलन चलाया जा सकता है। 🙏 इसकी रूपरेखा तैयार की जा सकती है। राजनीतिक दलों से कोई अपेक्षा न करें, क्योंकि वे उच्च महत्वाकांक्षाओं के कारण एक-दूसरे की टांग खींचने में व्यस्त हैं। 🙏  

2. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के माध्यम से उपरोक्त विषय पर सरकार को घेरा जा सकता है, अन्य किसी कोर्ट के द्वारा इस विषय पर कोई सुनवाई नहीं होगी और सरकार तो हमारे समाज के लोगों की हत्या करने पर तुली है इसलिए उससे कोई उम्मीद करना बेकार है🙏 


माननीय सर्वोच्च न्यायालय भी उन विषयों पर ध्यान देता है, जिनका आंदोलन सड़क पर चल रहा होता है। बाकी केसों को सुनने के लिए उसके पास वक्त नहीं होता है। 🙏 स्थापित सरकार जन आंदोलन और न्यायपालिका के आगे घुटने टेकती है। 🙏


मैंने सारी रणनीति आपको बता दी है। 🙏 यदि आप चाहें तो मैं आगे काम कर सकता हूँ। 🙏


सन 2002 में आईईआईटी में मैं अधिकारों के आंदोलन में इसलिए कूदा था, क्योंकि मेरा भ्रम था कि हमारा खानदान और रिश्तेदारी संपन्न है। 🙏 यदि मुझे जरा भी अंदेशा होता कि यह सब लोग हमारी जमीन खींच लेंगे और हमारे ही परिवार को तोड़ डालेंगे, तो मैं इस अधिकार के आंदोलन में नहीं कूदता। 🙏


मैं पिछले 20 साल से संसाधनों के अभाव के बावजूद इस संघर्ष में संलग्न हूँ। 🙏 समाज और कानून व्यवस्था का गहराई से अध्ययन करता रहा हूँ। 🙏 परंतु ना तो सरदार की तरफ से, और ना ही किसी अन्य की तरफ से मुझे सामाजिक आंदोलन के लिए कोई आर्थिक सहयोग दिया गया है। अपने संसाधनों से मैं जितना कर सका, कर रहा हूँ। 🙏


आपके पर्याप्त सहयोग के बिना आपका उपरोक्त लेख केवल वाणी विलास है। 🙏 जब मैंने पतंजलि योगपीठ छोड़ा था, तब मेरी चार क्विंटल पुस्तकों को रखने के लिए कोई जगह देने को तैयार नहीं हुआ, और मेरी चार क्विंटल पुस्तकें पतंजलि योगपीठ में खो गईं। 🙏 मैं नए सिरे से साहित्य एकत्र कर रहा हूँ। 🙏 संसाधनों का अभाव है। 🙏


उपरोक्त मामले में मुझे एक वादी चाहिए और संसाधन चाहिए, ताकि न्यायपालिका के माध्यम से मैं केस को आगे बढ़ा सकूँ, शिक्षा के निजीकरण चुनौती दे सकूं, असमान मूल वेतन में शिक्षा के निजीकरण को चुनौती दी जा सकती है क्योंकि यह जन्म के आधार पर भेद- भाव है जो मूल अधिकार का उल्लंघन है। 🙏


 सामाजिक आंदोलन में तो समाज को समझाना पड़ेगा कि वह क्या कर सकता है। इसके लिए डोर-टू-डोर जाना होगा और बड़ी बैठकों का आयोजन करना होगा। 🙏 जैसे बालाजी के महंत धीरेंद्र शास्त्री और अन्य लोग करते हैं, वे अपना प्रवचन विषमता को फैलाने के लिए करते हैं। मुझे यही कार्य उनके विपरीत, समता और समानता को फैलाने के लिए करना पड़ेगा। 🙏


पतंजलि योगपीठ में रहकर मैंने बहुत कुछ सीखा है। 🙏 राजनीतिक लाभ पाने के लिए आरएसएस समय-समय पर धर्म गुरुओं की नई ब्रांड लाती रहती है। 🙏 बाबा रामदेव हो, धीरेंद्र शास्त्री हो, या कोई अन्य गुरु, वे विषमता फैलाने वाले मॉडल का हिस्सा हैं। 🙏


अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

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