मिशन गुरु रविदास मंदिर तुगलकाबाद
प्रबुद्ध समाज के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों की बैठक
आयोजक :मानव सेवा संगठन
निमंत्रण
आप सादर आमंत्रित है
दिनांक - शनिवार 15/06/2024
समय - प्रात: 9 बजे
स्थान- सागर रत्ना, C - 52, Atul Grove Road, जनपथ, कनॉट प्लेस , नई दिल्ली
विषय : 1-मिशन गुरु शिरोमणि रविदास मंदिर पुनर्निर्माण तुगलकाबाद
2-भारत की संसद के प्रांगण में स्थित बाबा साहब डॉ अंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, शिवाजी महाराज महात्मा गांधी की प्रतिमाओं को हटाए जाने पर गहन चर्चा
कार्यक्रम की अध्यक्षता - गुरु जी के सी रवि जी
.
प्रायोजक : ज्वाइंट एक्शन कमेटी दिल्ली स्टेट एससी एसटी ओबीसी माइनॉरिटी ऑर्गेनाइजेशंस. .
मो-9999881590,9818722988,7982397630
ज्वाइंट वेंचर क्या है🙏?
किसी भी आंदोलन को चलाने के लिए क्या आवश्यक होता है हम सभी को पता है? क्योंकि सभी प्रबुद्ध वर्ग से हैं 🙏
फिर भी मैं अपनी बात कुछ इस प्रकार रखता हूंl
आंदोलन दो प्रकार के होते हैं
जनहित के आंदोलन
और स्वाभिमान के आंदोलन
आंदोलन को शक्ति दो प्रकार से मिलती है
जनशक्ति और मन शक्ति
हम सभी जानते हैं अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के अंदर ना जनशक्ति पैदा हो सके ना मन शक्ति पैदा हो सके इसके लिए उन्होंने आईपीसी में धारा 144 बनाई है l
जनजातियाँ अंग्रेजों के नियंत्रण में नहीं थी, वह जंगल के फल फ्रूट पर निर्भर थी, आंदोलन को सफल बनाने के लिए उनको हिंदू बनाया गया l परंतु आज ऐसा नहीं है l आज अधिकांश जनता का भोजन शहरी सभ्यता पर निर्भर है l
विगत सरकारों ने आम आदमी की आर्थिक रूप से कमर तोड़ दी, समाज में चंद्र पूंजी पति हैं, और उसमें समाज को समर्पित भी चंद लोग हैं 🙏
ऐसी दशा में आंदोलन कैसे चलाया जा सकता है🙏 आंदोलन की प्राथमिकता निर्धारित करनी होगी🙏
किसानों ने अपना आंदोलन 1 साल तक चलाया 🙏
क्या ज्वाइंट एक्शन कमेटी एक साल तक आंदोलन चलाने में सक्षम हैl
कौन सा आंदोलन पहले चला जाना चाहिए और कौन सा आंदोलन बाद में चलाया जाना चाहिए हमारे प्रबुद्ध वर्ग को इस पर भी विचार करना पड़ेगा🙏
आज की बैठक में इस विषय पर तो चर्चा हुई ही नहीं कि
संसद के अंदर की अंबेडकर मूर्ति से अनुसूचित जाति के सांसदों को कोई फर्क नहीं पड़ता है, तो आम जनता इस आंदोलन में क्यों भाग लेगी 🙏
अगर आम जनता इसमें भाग लेती है तो उसके लंगर की व्यवस्था कौन करेगा 🙏
एक विद्वान अधिवक्ता ने स्पष्ट कर दिया था कि यह 2014 से सुनियोजित सडयंत्र के तहत किया जा रहा है l
4 तारीख को रिजल्ट आने से पहले 3 तारीख की रात्रि में मूर्तियों को विस्थापित किया गया, उनकी सरकार भी बन गई🙏
क्या वे इतनी आसानी से मान जाएंगे 🙏
दिल्ली जैसे शहर में प्राइवेट नौकरी 12 घंटे की है, तब आंदोलन के लिए आप जनबल कहां से लाएंगे, दिल्ली के बाहर से जनता बुलाएंगे तो उसके लंगर की व्यवस्था कहां से होगी🙏
इसलिए मेरा सुझाव है, अगली बैठक में सभी 131 दलित सांसदों को आमंत्रण दिया जाए और उन पर मीटिंग कराये जाने का आर्थिक भार भी डाला जाए🙏
एक आंदोलन के साथ दूसरा आंदोलन जोड़ देने से, पहले वाले आंदोलन को आर्थिक रूप से कमजोर कर देना उचित नहीं है 🙏
आंदोलन चलाने के लिए
जन बल, धन बल और बुद्धि बल की आवश्यकता होती हैl
मोदी सरकार द्वारा 12 घंटे की ड्यूटी कर देने के बाद, इसके खिलाफ किसी संगठन ने आंदोलन नहीं चलाया तो आज जनबल कहां से लाओगे l
संगठन आम आदमी की समस्या के लिए संघर्ष नहीं करते हैं, वह सामाजिक संगठन हो या राजनीतिक संगठन🙏
ऐसी दशा में कोई भी आंदोलन सफल नहीं होगा अगर एक ही घोड़े पर अधिक भार डालते रहोगे🌹🙏
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा
मो. 9335122064
नोट :- समान विषय पर काम कर रहे संगठनों को जॉइंट वेंचर बनाना चाहिए🙏 अलग-अलग विषय पर काम कर रहे संगठनों को जॉइंट वेंचर नहीं बनना चाहिए, बल्कि स्वतंत्र रूप से अतिरिक्त जनबल धनबल और बुध्दिबल का सहयोग देना चाहिए 🙏
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