सामान्य चर्चा दिनांक 21 जुलाई 2024
2 दिन से एक प्रश्न बार-बार उठाया जा रहा है🙏
संज्ञा के रूप में-
रविदास राज कहना उचित है
या श्री रविदास राज कहना उचित है 🙏
यह साहित्य का विषय है, साहित्य के जानकार लोग इस विषय पर चर्चा करें🙏
संत शिरोमणि गुरु रविदास की चरण वंदना करना श्रेष्ठ है 🙏
अथवा संत शिरोमणि गुरु रविदास ने जो कहा उसको कृत में बदलना श्रेष्ठ है 🙏
कर्म की प्रधानता और कृपा की प्रधानता चर्चा का विषय है 🌹🙏
कृपया उपरोक्त दोनों विषयों पर स्वतंत्र रूप से चर्चा करें🙏
परंतु मैं जानता हूं-
जो श्री रविदास राज कहेंगे, वह कहेंगे इस विषय की चर्चा ही निरर्थक है🙏
चर्चा में वही लोग उतरेंगे जो रविदास राज कहेंगे 🙏
कल एक ने अपनी अभिव्यक्ति कहते हुए उपरोक्त विषय पर प्रश्न चिन्ह लगाया, मैंने उनको विषय दे दिया, आप पोस्ट बनाकर भेज दीजिए मैं सर्कुलेट करा देता हूं 🙏
मेरे पास उपरोक्त विषय से संबंधित पोस्ट अभी तक नहीं आयी है🙏
क्योंकि एडिटर में शब्दों की सीमा होती है, आप किस चीज को हटाएंगे, निश्चय ही आपको उपमा को हटाना पड़ेगा 🙏
उपमा को हटा देने से श्रद्धा में कमी नहीं आ जाती, लेकिन विवादियों के लिए विवाद करने का विषय मिल ही जाता है 🙏
भाषा वैज्ञानिक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏
मो. 9335122064
नोट :-
हिंदी भाषा आयोग की पुस्तकों का अध्ययन करें, तब आपको पता लगेगा, शब्द कैसे बनाए जाते हैं,
भाषा विज्ञान पर मेरे पास 15 से अधिक पुस्तक थी, 🙏उसके आधार पर मेरा ऐसा दृष्टिकोण है, अन्य लोगों का पृथक दृष्टिकोण हो सकता है 🙏
संत शिरोमणि रविदास राज के लिए जितना कार्य मैं कर रहा हूं, वर्तमान समय में मुझे कोई करता हुआ दिखाई नहीं देता, अतीत के कार्य के बारे में मुझे पता नहीं है, भविष्य में कौन करेगा इसका भी मुझे पता नहीं 🙏
श्रद्धा व्यक्तिगत विषय है, थोपी गई श्रद्धा श्रद्धा नहीं होती 🙏
थोपी गई श्रद्धा एक प्रकार का आतंकवाद है, आतंकवादी धार्मिक नहीं होते है 🌹👏
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