समय कम है और मैं कटु सत्य की ओर बढ़ रहा हूं 🙏
1. उपरोक्त वे पत्र है, जिन में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का विरोध किया गया था और माननीय सर्वोच्च न्यायालय को लिखा गया था, उसके आधार पर, जस्टिस अरुण मिश्रा ने तुगलकाबाद रविदास मंदिर का भ्रमण किया था🙏
2. अधिवक्ता भी सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का विरोध नहीं कर पाते हैं, और जो जैसा हो उसे स्वीकार कर लेते हैं,
3. इन साहसी पत्र लेखकों की भूरे भूरे प्रशंसा करनी चाहिए जिन्होंने जस्टिस अरुण मिश्रा को अपने निर्णय पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया 🙏
उस समय उछलने को तो बहुत से बंदर उछल रहे थे, 😭
परंतु बंदरों की एक कथा आपने सुनी होगी, जिसमें एक बार बंदर को राजा बना दिया गया था, और वह विपत्ति काल में एक डाल से दूसरी डाल पर उछल रहा था, जबकि जंगल के सभी प्राणि कह रहे थे महाराज कुछ कीजिए, तब वह एक डाली से दूसरी डाली पर उछलता था और कहता था कर तो रहा हूँ 😭
4. मंदिर पर राजनीति करने वाले-
राजनीतिक लोग भी होते है
सामाजिक लोग भी होते हैं
और धार्मिक लोग भी राजनीति करने से नहीं चूकते 🙏
उपरोक्त हस्तलिखित पत्र हैं, लोग हस्ताक्षर करने से भी डरते हैं, कि कहीँ सरकार और न्यायपालिका जेल में ना डाल दे 🙏 कोर्ट की अवमानना का केस न लग जाए🙏
5. जिन पत्रों के आधार पर जस्टिस अरुण मिश्रा का हृदय परिवर्तन हुआ, उनका नाम तो कोई नहीं जानता, अन्य लोगों को जानने की जरूरत भी नहीं है परंतु 96 गुरु भाइयों को पता होना चाहिए🙏
6. एक सूचना और दे देना चाहता हूं, कुछ राजनीतिक और धार्मिक (तथाकथित धार्मिक लोग ) लोग 96 गुरु भक्तों को वोटिंग राइट देने के पक्ष में नहीं है, मंदिर तैयार हो जाने पर शाहिद के रूप में केवल उनकी पट्टीका लगा देना चाहते हैं 🙏 ताकि भविष्य में आने वाली मलाई है उनके परिवार की पुस्तियां खाती रहें, वह इस मंदिर पर पूर्ण कब्जा कर लेना चाहते हैं 🙏 मंदिर संपूर्ण समाज का है संपूर्ण समाज का रहेगा, ऐसे ही जस्टिस अरुण मिश्रा का आदेश है, उसका पालन करना ही होगा🙏
7. श्री रिशिपाल जी की के लेनदार उनको आगे कर देते हैं, बदनाम श्री रिशिपाल जी हो रहे हैं, जबकि वह तो किसी अंग्रेजी के पत्र को पढ़कर समझ भी नहीं सकते है l
8. उन्हीं को ध्यान में रखते हुए मुझे अपनी सभी बातें हिंदी में कहनी पड़ती है 🙏
9. श्री रिशिपाल जी के लेनदार रिशिपाल जी को परेशान करना छोड़ दें, जो आपने दिया वह दान में गया, मंदिर संघर्ष में गया, संत शिरोमणि श्री रविदास जी के मंदिर पर लाला-गिरी छोड़ दो, निष्पक्ष कार्यकारिणी का गठन होने दो, अन्यथा मुझे आपको रडार पर लेना पड़ेगा 🙏 और अपनी मान प्रतिष्ठा धूमिल होने के लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे 🙏
कटु आलोचक :- अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 🙏
मो. 9335122064
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