Friday, 26 July 2024

ज्ञान चर्चा। ( 28 Jun 2024)

 ज्ञान चर्चा। 

आत्मज्ञान प्रचार केंद्र की ओर से जिज्ञासुओं के कल्याण हेतु संत शिरोमणि श्री गुरु रविदास जी द्वारा प्रदत्त ज्ञान पर, गुरु रविदास जी मिशन का प्रचार कर रहे गद्दी नशीन गुरुओं के रूप में कार्य कर रहे संत महापुरुषों से उनके अनुभव आधार ज्ञानार्थ चर्चा के लिए कुछ प्रश्न प्रस्तुत किए जा रहे हैं सभी से निवेदन है इनका उत्तर

देने की कृपा करे। यह प्रश्नोतर ज्ञान चर्चा किसी भी संत या गुरु

की परीक्षा हेतू नहीं आपसे प्रार्थना है की जिस भी प्रश्न का उत्तर कोई व्यक्ति देता हैं वह केवल अपने अनुभव और विवेक के आधार पर दें।ताकि जिज्ञासुओं का कल्याण हो।

गुरु रविदास जी महाराज ने कहा है "सो अक्षर तो ब्रहम है,अहम अक्षर है जीव कहे रविदास इसी को जपो यही तुम्हारा पीव" 

सो महाराज जी की वाणी से यह प्रमाणित होता है की "सोहंग" ही परमात्मा है उन्होंने "पीव" अर्थ परमात्मा से लिया है।

प्रश्नः

1.क्या सोहंग ही परमेश्वर है?

2.यदि सोहंग ही परमेश्वर है तो परमेश्वर का नाम क्या है?

3.संत रविदास जी महाराज का संतों में शिरोमणि होने का क्या आधार है? 

4.संत रविदास जी महाराज की वाणी के आधार पर उनके  प्रमाणित गुरु कौन हैं? 

5.सोहं नाम, सतनाम, और सारनाम में क्या अंतर है?

6.संत रविदास जी महाराज ने जो सोहंग नाम संसार को जणाया है उसकी क्या विशेषता है?

7 नाम का रुप, कारण, फल और अवधि क्या है?

8.इस नाम को सुनने वाला, जपने वाला, और सिमरन करने वाला कौन है?

9.इस नाम का उपादान कारण, निमित्त कारण, और समवाय कारण क्या है, नाम का जाणाये है कारण?

10.नाम का लाभ क्या है नाम का खर्च क्या है नाम का स्वाद क्या है?

11.नाम का साधन क्या है,नामी कौन है, नाम वस्तु क्या है नाम कौन से आसन पर बैठकर विचार जाता है?

12.संत रविदास जी महाराज को ज्ञान विधा में कौन सी उपाधि प्राप्त है?

13.संत मार्ग में श्रमण संस्कृति कौन सी विधा है?

प्रिय गुरु प्रेमियों ज्ञान का कोई अंत नहीं है परंतु सतगुरु ज्ञान के भंडार होते हैं यह जिज्ञासुओं द्वारा पूछे गए प्रश्न है संत महापुरुषों से निवेदन है की पूछे गये प्रश्नों पर ज्ञान चर्चा अवश्य करें ताकि जिज्ञासुओं का कल्याण हों तभी हम सतगुरु रविदास जी महाराज के सच्चे अनुयाई होंगे।कोई बाणा

पहनने,धूणा लगाणे, जट्टां बढाने, 

माला पहने,नाम दीक्षा देने,शास्त्रों

से पढ कर ज्ञान देने,आश्रम बनाने,चेले बनाने आदि गूरू नहीं 

बन जाता गुरु तो नाम की कमाई 

कर अनुभव प्राप्त करने से बनता

और जो शब्द विवेकी पुरुष होगा 

वही सतगुरु पद का अधिकारी होता है। जो पूर्ण सतगुरु होता है 

उसके पास सभी प्रश्नों का उतर

होता है।


आप सभी से अनुरोध है कि इस मैसेज को गुरु रविदास जी महाराज की जितनी भी संस्थाएं चल रही हैं जितने भी हमारे संत महापुरुष हैं आपके संपर्क में है सब को भेजने की कृपा करें। आपका मंगल होगा।

जय गुरु रविदास जी

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