मान्यवर,
दो चीज होती हैं
सामाजिक संगठन
और सामाजिक कार्य
भले ही बुलाकी जी का सामाजिक कार्य दिखाई ना दे, परंतु उनके पास सामाजिक संगठन है इस बात को स्वीकार करना होगा🙏
अन्य लोगों का जो सामाजिक कार्य दिखाई देता है, वहां पर सामाजिक संगठन नहीं है, उनके द्वारा किया गया कार्य समाज को समर्पित भी नहीं है 🙏
इसलिए वह किए गए कार्य पर व्यक्तिगत अधिकार समझते हैं, इस कारण सामाजिक उत्थान दिखाई नहीं देता है 🙏
अभी हरियाणा की एक टीम तुगलकाबाद रविदास मंदिर के लिए 10 जुलाई की पूजा में आई थी, वह हरियाणा के मंदिरों जैसी व्यवस्था यहां के मंदिरों में समझती थी, बैसी व्यवस्था न मिलने के कारण वह लोग बहुत दुखी हुए 🙏
उसकी शिकायत उन्होंने मुझे की, परंतु मैं उनके लिए कुछ नहीं कर सका हूं, क्योंकि मैं किराए के मकान में रहता हूं, और इस महीने का किराया देना बाकी है 🙏
सामाजिक कार्य सामाजिक संगठनों में रहकर किए जाते हैं,
जब अन्य संगठन में रहकर मैंने काम किया तो वहां की सुविधाओं का भोग किया, परंतु जब से अपने समाज के लिए कार्य कर रहा हूं तो अपनी जेब से पैसा भी लग रहा हूं 🙏
संगठनों की तरफ से कोई सहयोग नहीं है, कुछ लोगों का व्यक्तिगत सहयोग जरुर मिल जाता है, उसे सामाजिक सहयोग नहीं कह सकते हैं 🙏
जो जैसा है उसको वैसा ही देख लेना, और वैसा ही कहना साधना और साहस का अंग है, जो है उसको ना देख पाना मानसिक विकार है, बढ़ा चढ़ा कर कहना या तो प्रेम है अथवा ईर्ष्या है 🙏
हर व्यक्ति में कुछ अच्छे गुण होते हैं, उनकी चर्चा से अच्छे गुणो का विस्तार होता है 🙏
हमें अच्छे गुणो की चर्चा करनी चाहिए, उससे सामाजिक संगठन की मजबूती बढ़ेगी, समाज में बैठकर अतिप्रेम और अतिईर्ष्या दोनों से बचना चाहिए🙏
यदि आप अतिईर्षा या अतिप्रेम में लिप्त होते हैं, तो अपने समाज को दो भागों में विभाजित कर देंगे,
इस से प्रतिद्वंदिता अपने समाज में ही आरंभ हो जाएगी, और विरोधी समाज इसका लाभ उठाकर दमन कर देंगे 🙏
हजारों वर्षों से हमारे समाज के साथ ऐसा ही होता रहा है, जितनी जल्दी सजग हो जाओ उतना अच्छा है 🙏
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏
मो. 9335122064
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