ज्ञानचंद जी,
क्रांति दूध नहीं क्रांतिदूत 😂
🌹80 लाख संस्थओं में से कुछ को छोड़कर शेष काम चोरी और दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने के कारण सुचिता नहीं बना पा रहे हैं 🙏
धार्मिक आंदोलन धन के नाम पर राजनीतिक व्यक्तियों अथवा व्यापारिक व्यक्तियों के ऊपर निर्भर है 🙏
राजनीतिक आंदोलन जन के लिए धार्मिक आंदोलन पर निर्भर है 🙏
सामाजिक आंदोलन की स्थिति ज्यादा डगमग है, ना तो वह धार्मिक आंदोलन के हो पा रहे हैं, ना ही राजनीतिक आंदोलन के हो पा रहे हैं 🙏
उनका झुकाव व्यापारिक लोगों के प्रति, उन्होंने सामाजिक आंदोलन को भी व्यापार बना दिया है,
सभी सोसाइटियां समाज से धन उगाही करने के लिए अथवा सरकार से चंदा पाने के लिए प्रपंच करती है काम कोई नहीं करता है, अपवाद को छोड़कर 🙏
इसीलिए मैंने वर्गीकरण की बात की, परंतु समता सैनिक दल वाले इतने रुष्ट हो गए कि उन्होंने मुझे अपने ग्रुप से अलग कर दिया😂🙏
जिसका भांडा फोड़ होता है वह हमसे रूठ जाता है, संत प्रमुख के चुनाव में दुसंत हमसे रूठ गए,
डॉ अंबेडकर की मूर्ति विस्थापन पर प्रपंच करने वाले हमसे रूठ गए🙏
मेरा तो कहना है जो भी काम करो विशुद्ध रूप से करो, जिन चार प्रकार के आंदोलन की हमने बात की वह चारों समाज के लिए जरूरी है, जनता से सीधे संपर्क करो, दूसरे के कंधे पर बंदूक रखकर मत चलाओ 🙏
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏
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