भाई नीमचंद जी 🌹
बहुत सरल बात है🙏 मूल वेतन और पेंशन समान होना ही चाहिए, उसी को रविदास राज की मूल अवधारणा कहा जा सकता है👏
आजकल जो वेतन आयोग बना हुआ है, वह मूल वेतन में अंतर करके आर्थिक विषमता फैलता है 🙏
1. जबकि मूल वेतन तो मनुष्य मात्र होने के लिए समान मिलना चाहिए,
2. उसके कार्य के घंटे को मिलना चाहिए,
3. मानव मानव की समनता के लिए मिलना चाहिए,
4. मानवीय जीवन स्तर के लिए मिलना चाहिए🙏
5. योग्यता और अनुभव के लिए, रिस्क के लिए, कुछ और धन राशि दी जा सकती है जो कि अन्य भक्तों की श्रेणी में आएंगे 🙏 और हर व्यक्ति की अलग-अलग होंगे, कोई शारीरिक रूप से मजबूत है तो कोई बौद्धिक रूप से मजबूत है, 🙏 प्रतियोगिता समान गुण के लिए होगी, ताकि उन गुणों सकारात्मक वृद्धि हो 🙏
6. परंतु मानवता के लिए मिलने वाला मूल वेतन तो समान होना ही चाहिए,
इसी में रविदास राज का सूत्र है,
ऐसा चाहूं राज मैं मिले सावन को अन्न - ---- छोटे बड़े सब सम बसें...
जब मूल वेतन समान होगा, तो कोई छोटा बड़ा नहीं होगा🙏 मनुष्य को वेतन मनुष्यता के लिए मिलेगा उसके कार्य के लिए मिलेगा, उसके कार्य के घंटे के लिए मिलेगा 🙏
जब पेंशन समान होगी तो कोई अहंकार नहीं होगा🙏 क्योंकि सबको पता रहेगा कि एक दिन समान हो जाना है 🙏
आजकल अन्न तो किसी को नहीं दिया जाता वेतन दिया जाता है, इसलिए वेतन सभी को मानवी स्तर का मिलना चाहिए, समान मिलना चाहिए 🙏 फिर ना तो जीवन यापन करने के लिए कोई किसी का शोषण करेगी ना ही कोई शोषण का शिकार होगा 🙏
कब्र में जाकर सभी एक समान हो जाते हैं, तो रिटायरमेंट के बाद भी सभी एक समान हो जाए 🙏
रविदास राज के चिंतक
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏
मो. 9335122064
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