वकील साहब,
बहुत सरल सा उत्तर है 🙏
( आपका प्रश्न है आर्थिक और मानसिक कमजोरी कैसे दूर हो बात करनी चाहिए- मैं थोड़े सी बात कर लेता हूं, परंतु इस विषय में ऐसा है जितने मुंह उतनी बातें 😂)
मानसिक कमजोरी कुपोषित भोजन के कारण और कुसंस्कारों के कारण उत्पन्न होती है🙏🙏🙏
कुपोषित भोजन को पौष्टिक भोजन में बदलना होगा, कुसंस्कारों को कुशल संस्कारों में बदलना होगा🙏
आर्थिक विषमता से कुपोषित भोजन उत्पन्न होता है, आर्थिक विषमता को फैलाने में कुसंस्कारों का महत्वपूर्ण योगदान है 🙏
संस्कार एक जड़ विद्या है, जैसी है वैसा ही बना रहना चाहता है, मनुष्य के लिए क्या उचित है यह आत्मबोधी से प्राप्त होता है🙏
आत्मबोधी गहन साधना के बाद प्राप्त होती है, हर व्यक्ति को अलग-अलग प्राप्त करनी पड़ती है
अथवा मानकर चलना पड़ता है, मानकर चलना ही संस्कार होता है 🙏
मनुष्य में जब विकार उत्पन्न होता है तो संस्कार विकार में बदल जाता है🙏 विकार शरीर में पड़ने वाले जुएँ की तरह है, अगर मन की सफाई न की जाए तो विकार पड़ ही जाता है 🙏
और प्रतिवादी समाज एक दूसरे का शोषण करने लगता है, जो जीतता है वह कुशल है, जो हारता है वह मानसिक और सामाजिक रूप से कमजोर हो जाता है 🙏
अर्थात :- पाखंड को छोड़कर साधना की तरफ बढ़े, साधना से मन मजबूत होता है, जब मन मजबूत होता है तो संकल्प मजबूत होते हैं, जब संकल्प मजबूत होंगे तो आर्थिक उन्नति के संसाधन प्राप्त करने में सफलता प्राप्त होने लगती है, क्योंकि संकल्प की निरंतर बनी रहती है, 🙏
जिनके संकल्प बार-बार बदलते हैं, संकल्प में निरंतर नहीं रहती, वह आर्थिक रूप से कमजोर हो जाते हैं, यही सनातन सत्य है 🌹🙏👏
साधक कमलेश कुमार मित्रा 👏
मो. 9335122064
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