Friday, 9 August 2024

क्रिमी लेयर :- एक राजनीतिक

 😍🌹सूचना दिनांक 9 अगस्त 2019 (संशोधित सूचना 2019 को 2024 पढे एवं अन्य )


🌹 क्रीमी लेयर अनुसूचित जाति पर आरएसएस की सोच का असर, एक खतरनाक राजनीति है 🙏 बाबा साहब द्वारा बनाए गए संविधान का बार-बार अपमान कैसे सहेगा भारत 🙏🌹


संत रविदास का भक्ति आंदोलन, आरएसएस द्वारा थोपा गया पाखंडवाद है 🙏


 संत रविदास का रविदास राज, पाखंडवाद का विरोधी है 🙏


बाबा साहब का भारतीय संविधान, दलगत और जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर है 🙏 परंतु क्रिमी लेयर चमारों ( SC/ST 131 सांसद) (अपवादों को छोड़कर) ने अपने लोभ के लिए भारतीय संविधान को बार-बार घायल किया है🙏


आरएसएस के प्रवक्ता राजीव दीक्षित के कथन अनुसार बाबा साहब भारतीय संविधान 1950 के समर्थक नहीं थे, उन्होंने( बाबा साहब) भारतीय संविधान को कचरा कहा था🙏


 आरएसएस के दूसरे प्रवक्ता पूर्व जस्टिस डीडी बसु ने जो संविधान का पोस्टमार्टम किया उससे भारतीय संविधान के प्रति लोगों की आस्था कम हुई🙏


 जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संविधान की भूरी भूरी प्रशंसा की जाती है 🙏


 भारतीय संविधान में 105 संशोधन 131 सांसदों की मूर्खता के कारण हुए भारतीय संविधान 1950 के अनुसार, सन 1951 में ही अनुसूचित जाति जनजाति आयोग का गठन कर दिया गया होता, तो भारतीय संविधान में एक भी संशोधन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती🙏


 कांग्रेस की मूर्खतापूर्ण नीति के कारण, अनुसूचित जाति जनजाति आयोग का गठन बीपी सिंह के शासनकाल में 1989 में हुआ, जिसने 1995 से कार्य करना शुरू किया🙏


 इसके लिए क्रीमी लेयर वाले चमार दोषी हैं 🙏 इन सभी चमारों की पेंशन बंद कर देनी चाहिए🙏 चाहे वह राजनीति में रहे हो अथवा प्रशासनिक अधिकारी🙏


क्रीमी लेयर वाले चमारो ने - गरीब चमारों का भी कोई संरक्षण नहीं किया है, केवल अपनी औलादो को विदेश में सेटल करते रहे हैं, और उनके लिए कोठियां बनाते रहे हैं 🙏


 इन चमारों ने अपने परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी कार्य नहीं किया है,🙏


 मैं खुद चमार हूं और इस सच्चाई को भली भांति जानता हूं, इसलिए टीका टिप्पणी बहुत सोच कर करना 🙏 हमारे परिवार खानदान और रिश्तेदारों में अधिकारियों की एक बहुत बड़ी फौज, ब्रिटिश काल से ही रही है 🙏


 पुनः कह दूँ मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पक्ष में हूं, परंतु राजनीति इसका जिस प्रकार से अनुपालन करेगी उसके विरोध में हूँ 🙏 


बिना आर्थिक गणना के क्रीमी लेयर जातियों को अलग नहीं किया जा सकता है, इसके लिए संपूर्ण देश के नागरिकों की सभी जातियों की आर्थिक और सामाजिक हैसियत की गणना होना आवश्यक है🙏 उसी के बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय लागू किया जा सकता है, ( इंदिरा साहनी केस में पहले भी ऐसा कहा जा चुका है, परंतु सरकारों ने उसका पालन नहीं किया है, यह आदेश उसी के क्रम में है ) अन्यथा नही, अगर कोई राज्य सरकार ऐसा करती है तो उसे न्यायालय में चुनौती दिया जाना चाहिए 🙏


 बिना संविधान संशोधन किये इस समस्या का समाधान हो सकता है, परंतु 21 अगस्त 2024 का आंदोलन, राजनीतिक रोटी सेकने के लिए होगा और भारतीय संविधान को एक बार फिर घायल किया जाएगा👏


यह क्रीमी लेयर चमारों की बेवकूफी के कारण होगा🙏


सभी की मंगल कामनाओं के साथ अपनी बात को समाप्त करता हूं 


अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064


नोट :- भारतीय संविधान के अनुसार, सदन के नेता का किसी पार्टी का नेता होना जरूरी नहीं है 🙏


 परंतु दल बदल विरोधी कानून संसद में बनाया गया और संसद में लागू होता है, और विप भी जारी की जाती है🙏


यह गैर संवैधानिक गतिविधि है, किसी भी सांसद ने इसको न्यायालय में चुनौती नहीं दी, क्योंकि हमारे 131 सांसद बुद्धि विवेक से पैदल रहे हैं 🙏


अधिवक्ता की मजबूरी यह है कि वह अपने ही मामले में अधिवक्ता नहीं हो सकता है 🙏 और दलित समाज में विवादी बहुत पाए जाते हैं परन्तु खोजो तो वादी एक भी नहीं मिलता है 🙏


अनुसूचित जाति समाज की रक्षा तभी हो सकेगी जब संविधान की रक्षा भी होती रहे 🙏


मीठा मीठा गप-गप कड़वा कड़वा थू थू से काम नहीं चलेगा🙏


आर्थिक समानता के लिए संघर्ष जरूरी है, देश की संपूर्ण संपत्ति का एक बार समान बटवारा हो जाना चाहिए 🙏


हजार साल में हुए असंतुलन को फिर नए सिरे से संतुलित किया जाएगा, यह भविष्य की बात है🙏


105 संशोधन ने बाबा साहब को केवल दलितों का नेता बना दिया है, जबकि बाबा साहब ने भारतीय संविधान को जातिवाद की मूल भावना से ऊपर उठकर लिखा था🙏


पहली संसद के पढ़े लिखे गद्दारों ने बाबा साहब को धोखा दिया था, बाबा साहब ने उस समय के पढ़े-लिखे लोगों के लिए कथन किया था 🙏 आज के लोगों के लिए नहीं कहा था 🙏 परंतु उन गद्दारों की फसल आज भी अनुसूचित जाति समाज को हानि पहुंचा रही है 🙏


 सामाजिक संगठन राजनीतिक संगठन की तरह काम कर रहे हैं 🙏


 और धार्मिक संगठन, मनुवादी शहंशाह की तरह काम कर रहे हैं 🙏

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