🙏शुभ संध्या सूचना दिनांक 30 अक्टूबर 2024
हमारे ग्रुप में सभी विचारों का स्वागत है, मैंने आपसे कहा था यदि आपका कोई विचार, विचार करने योग्य होगा तो हमारे ग्रुप में भी रिफ्लेक्ट होगा🙏
1. विचार तो और भी आ रहे हैं🙏 कुछ विचार तो ऐसे आ रहे हैं कि उनको ग्रुप का एडमिन बनाया जाए 🌹🙏
2. कुछ विचार राजनीतिक प्रतिद्वंदिता वाले हैं, वह चाहते हैं इस ग्रुप में प्रसारित किया जाए 🙏 आर्थिक समानता ग्रुप खुल ग्रुप है आप अपने विचार वहाँ दे सकते हैं, यहां पर मर्यादाएं रहेगी 🙏
3. मैं इस महत्वपूर्ण पोस्ट के बारे में कुछ कहना चाहता हूं 🙏इस अनुक्रम में इस स्क्रीनशॉट को डाला है 🙏
4. रोहिणी सेक्टर 16 निवासी को मैंने फोन किया और चर्चा आरंभ की 25-30 मिनट की चर्चा के बाद उन्होंने फोन काट दिया🌹
5. मेरा अंतिम प्रश्न था?
एक टेबल पर बैठकर आप भी चाय पी रहे हैं, उसी टेबल पर बैठकर मैं भी चाय पी रहा हूं 😂
आप कहते हैं चाय मीठी है, मैं भी कहता हूं चाय मीठी है 🙏
कृपया बताएं कौन किसकी नकल कर रहा है😂 इतना सुनते ही उन्होंने फोन काट दिया😂🌹🙏
6. जिनको अध्यात्म जगत की एबीसीडी पता ना हो, उनको धैर्य से सुनना चाहिए 🙏
वैसे उन्होंने परिचय देते हुए मुझसे कहा कि उन्होंने विपासना साधना के तीन शिविर किये है 🙏 मैंने अपना परिचय देते हुए उन्हें बताएं कि मैं विपासना का लॉन्ग मेडिटेटर हूं 🙏
7. परंतु आजकल मैं मेडिटेशन नहीं कर रहा हूं इसलिए निंदा रस में खूब डूबा हुआ हूं, अहंकार चरम पर है 😂 निंदा करना आनंददायक लगता है, फिर भी मैं सजग रहता हूं अति निंदा और अति अहंकार से बचा रहूँ 🙏
8. विपासना का ध्यान तराजू के कांटे के समान है, यदि व्यक्ति जरा भी चूकेगा, तो व्यक्ति आत्र ध्यान और रौद्र ध्यान में उतर जाएगा 🙏 ऐसे लोगों को धन की कमी नहीं होती, परंतु फिर भी दरिद्रता बनी रहती है🙏 दु:ख पीछा नहीं छोड़ता है 😭 बेज्जती होती रहती है 🙏
9. विपासना का ध्यान करने वालों से अक्सर यह चूक होती है, और वह विपासना का ध्यान ना करके आत्र ध्यान और रौद्र ध्यान करने लगते हैं जोकि भगवान बुद्ध का दर्शन नहीं है! ऐसे लोगों को ही दिखाई देता है, बौद्ध धर्म भविष्य का धर्म है🙏 जबकि भगवान बुद्ध ने कभी नहीं कहा कि धम्मा, धर्म है 🙏 भगवान बुद्ध ने कोई भी पारिवारिक सामाजिक अथवा राजनीतिक दर्शन नहीं दिया है 🙏
10. पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक बातों पर केवल उतनी ही बातें कहीं जो ध्यान करने के मार्ग में बाधा थी उनसे कैसे निपटा जाए 🙏
11. बाकी चीजे बाद में माह-थेर द्वारा जोड़ी गई है 🙏 यह सब तीसरी संगीति में सम्राट अशोक के समय हुआ🙏 क्योंकि इसमें मौर्य वंश के आदि गुरु चाणक्य का दर्शन भी जोड़ दिया गया🙏 मैं इस पर अभी बहुत चर्चा नहीं करूंगा🙏
12. पुनः लेख के मूल बिंदु की तरफ लौटता हूँ -
बुद्ध का दर्शन चित्त के विकारों को जानने की कला है, बीमारी को जान लिया तो बीमारी खत्म🙏 यदि दूध में पड़ी मक्खी दिख जाए, तो कोई मूर्ख ही मक्खी के साथ उस दूध को पिएगा, मक्खी निकाल कर पिएगा अथवा दूसरा दूध पिएगा 😂 इसी प्रकार चित्त के विकारों को जान लेने की कला विपश्यना है जोकि तराजू के कांटे के समान है, जरा सा चूके तो रौद्र ध्यान अथवा आत्र ध्यान करने लगोगे, विपासना छूट जाइएगी, अधिकांश को तो पता ही नहीं चलता कब वह विपासना से फिसल गाये 🙏
13. इसीलिए कुछ जागृत गुरुओ ने नाम दान की परंपरा शुरू की, जैसे कुम्हार की मिट्टी की घुलाई पैरों से होती थी, साथ ही एक डंडा पकड़े रहते थे ताकि गिर ना जाएं 🙏"नाम दान" इसी प्रकार का काम करता था 🙏
14. थेरवादियों से अलग महायानियों ने भी, नाम दान जैसा ही सूत्र निकाला, जिसे "अनिच्चा" कहते हैं🙏
15. "अनिच्चा", "ॐ ", "सोहम", "राधेराधे", "हरे रामा हरे राम" " राम राम" की तरह मंत्र है 🙏
जिससे मन सांसों पर रुका रहता है, भटकता नहीं है, परंतु यह सब बच्चे के ढकेले की तरह है 🙏 ढकेले को बच्चा जितनी जल्दी छोड़ दे, उतनी जल्दी दौड़ने लगता है🙏 जो ना छोड़ पाए यह जान लेना, वह पोलियो का शिकार हो गया 😂
16. मुझे सन 2018 की बात याद आती है, मैं लॉन्ग शिबिर समाप्त करके अपनी आध्यात्मिकता यात्रा का कोर्स पूरा कर चुका था🙏 अध्यात्म जगत में भी शिक्षा अनंत है 🙏 परंतु मैं परास्नातक हो चुका था 🙏 डॉक्टर के लिए किसी मास्टर की जरूरत नहीं होती है 🙏 स्वयं के प्रयास से कोई डॉक्टर होता है🙏
17. विपश्यना संस्थानों में एक कृतज्ञता शिविर होता है, जो गुरु सत्यनारायण गोयनका के जन्म दिन के अवसर पर होता है, कम से कम 14 दिन का होता है🙏 बाहरी वातावरण से बिल्कुल दूर, पूर्ण मौन, इस में कम से कम पांच 10 दिवसीय शिविर कर चुके साधक को ही बैठने का अवसर मिलता है🙏
18. मैं इस शिविर में बैठा था फरवरी 2019 का समय था 🙏शिविर संचालक शिक्षक ने मुझे बुलाया और अपना ज्ञान देने लगा, "शरीर में संवेदनाएं अनंत जब तक जीवन है संवेदना रहेंगे, इसलिए अनिच्चा (शाब्दिक अर्थ अनित्य है) करते रहिए" 🙏 मुझे उस शिक्षक की क्लास लगानी पड़ी, मैंने कहा "जो संवेदन प्रत्यक्ष रूप में मुझे दिखाई पड़ रही है, उसको मैं अनित्य मान लूं क्या यह एक नई संज्ञा (संस्कार : चैत्सिक दुख का मूल कारण) नहीं होगी" हमारे शिक्षक महोदय की जमीन हिल गई 🙏
19. क्योंकि भगवान बुद्ध का दर्शन है "यथा भूत दर्शन" जो जैसा है उसको वैसा देख लेना, "प्रत्यक्ष दर्शन " तब कोई भी आंखों का धोखा नही रह जाता है 🙏
20. विज्ञान विद्या से जुड़े हुए लोग जानते हैं, जब 26 फ्रेम से अधिक फ्रेम एक साथ गुजारने लगते हैं तो आँख उसमें अंतर नहीं कर पाती है. इसी प्रकार चलते हुए पंखे के ब्लेड दिखाई नहीं पड़ते हैं 🙏 जबकि तीनों ब्लेड अलग-अलग होते हैं 🙏
21. चलते हुए पंखे में तीनों ब्लेड को ना देख पाना, एक रिंग को देखना, इसी को भासमान सत्य कहा जाता है 🙏 चलते हुए पंखों में तीनों ब्लेड़ों को अलग-अलग देख लेना " यथा भूत दर्शन" कह लाता है🙏
22. पांच इंद्रियां संपूर्ण जगत का केवल भासमान सत्य देखती है, ध्यान इंद्री सक्रिय हो जाने पर, प्रत्यक्ष सत्य दिखाई देने लगता है 🙏
23. बुद्ध का संपूर्ण दर्शन, मनुष्य को भासमान सत्य से प्रत्यक्ष सत्य का दर्शन करना है 🙏 जिस रोग के कारण मनुष्य देख नहीं पता वह विकार हैं 🙏
24. यदि कोई व्यक्ति कहता है कि भविष्य का धर्म बौद्ध धर्म है, भले ही यह सत्य हो, परंतु उस व्यक्ति का अपना यह विकार, यथा भूत दर्शन करने नहीं देगा🙏 उसे बाकी संत वजनदार नहीं दिखेंगे 😂
25. ऐसा व्यक्ति फसादी व्यक्ति होगा, वर्टिकल विचारधारा का व्यक्ति होगा, बुद्ध को मानने वाला व्यक्ति नहीं होगा 🙏 भले ही वह बुद्ध की प्रतिमा को सिर पर उठाया चल रहा हो 😂
26. मूर्खता अनंत है, संत ही नहीं साधकों में भी मिल सकती है 🙏जो आत्र ध्यान और रौद्र ध्यान करते है 🙏 विपासना के शिविर में 90% साधक आत्र ध्यान और रौद्र ध्यान करने लगते हैं जोकि विपासना नहीं है, भगवान बुद्ध की ध्यान पद्धति नहीं है 🙏😂🌹
27. इसलिए जिन मूर्खों को टेबल पर बैठे अन्य लोगों की बातें नकल लगती है, उन्हें भी साथ में बैठकर चाय पी लेना चाहिए🙏
28. तब जाकर पता लगेगा, कौन से संत ऋषि पंडित पुरोहित भिक्षु वर्टिकल विचारधारा के हैं 🙏
29. और कौन से पुरोहित पंडित ऋषि मुनि पुरोहित होरिजेंटल विचारधारा के हैं🙏🌹
30. बुद्ध ने कब कहा कि मैं अंतिम पैगंबर हूं,🙏अरहनतो ने तो कहा है कि अभी बहुत से बुद्ध, पचेक बुद्ध आना बाकी है 🙏🌹 तुमको नानक, संत रविदास, कबीर, ओशो आदि समक्ष बुद्ध दिखाई नहीं देते तो यह तुम्हारी आंख का दोष है 🙏👏
क्रमशः.........
साधक : कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064
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