🌹सूचना दिनांक 1 अक्टूबर 2024
बिल्ली के गले में घंटी कौन बंधेगा?🙏
1. हमारे रविदास समाज के असंगठित संगठन में लगभग सभी प्रमुख लोगों की सूचनायें, विगत 5 वर्षों में हमारे पास आ गयी है, परंतु उसके आधार पर मैं कोई निर्णय नहीं लेता हूँ क्योंकि बाबा रामदेव ने मुझसे कहा था कि केवल एक या दो लोगों की सूचना पर संगठन के किसी व्यक्ति के खिलाफ कोई अवधारणा मत बनाना, क्योंकि मैं उनके टॉप प्रबंधन में था मेरे कंधों पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थी 🙏
2. अपने रविदास समाज के असंगठित संगठन में भी मैं पूरी तरह से इस सावधानी को रख रहा हूं कि केवल सूचनाओं के आधार पर किसी के खिलाफ कोई अवधारणा नहीं बनता हूँ, कोई टीका टिप्पणी नहीं करता हूँ 🙏 यदि कोई व्यक्ति मेरे साथ एक दो बार छल-कपट भी कर ले तो भी मैं उसको कुछ नहीं कहता हूँ 🙏
3. उपरोक्त बातों के साथ, जब कोई व्यक्ति समाज को मेरी नजरों में धोखा देने लगता है, और मेरे समझाने के बाद भी नहीं मानता तो खुलासा करना ही पड़ता है 🙏क्योंकि बिल्ली के गले में घंटी किसी को तो बांधनी है 😂
4. फिर भी मैं उस व्यक्ति से कोई बैर नहीं रखता जिसके गले में मैंने घंटी बंधी है, क्योंकि यह सब चित्त के विकार हैं🙏 और चित्त विकार अस्थाई होते हैं, हत्यारा अंगुलिमल भिक्षु हो सकता है, डकैत ऋषि वाल्मीकि हो सकता है🙏
5. कोई खुद को कितना भी बड़ा संत क्यों ना कहे परंतु वह बिल्ली के गले में घंटी नहीं बांध सकता तो उसमें भय का विकार समाप्त नहीं हुआ है, ऐसा समझना चाहिए, जिसमें भय का विकार समाप्त नहीं होता है वह पूर्ण संत नहीं होता है🙏
6. इसके साथ ही जिस व्यक्ति में भय का विकार समाप्त नहीं होता है, वह कभी निष्पक्ष रूप से बात नहीं करता है, उसमें अपनी गलती को सहज स्वीकार करने की क्षमता नहीं होती है जब तक कि उसको भय ना दिखाया जाये 🙏 ऐसा व्यक्तियों को खुद को कभी संत नहीं कहना चाहिए, भले ही अन्य लोगों उन्हें संत कहते हो🙏
7. संत होने का पहला गुण है जो भय मुक्त है, ममत्व तो संत में भी होता है परंतु बृहद्द रूप में होता है, वह स्वयं को जगत-पिता की तरह देखता है और निष्पक्ष रहता है🙏 ऐसे व्यक्तियों को ही संगठन प्रमुख के पद पर होना चाहिए, चुनाव में अथवा सर्वसम्मति से ऐसे ही व्यक्ति को चुना जाना चाहिए, जो कम से कम भय मुक्त हो, चोर प्रकृति का ना हो, छल कपट करने वाला ना हो🙏 समय की चोरी (समाज का समय खराब करना) करने वाला ना हो 🙏
8. किसी भी चिर परिचित संत के जीवनी को उठाकर आप देख ले, सभी में यह गुण आपको मिल जाएंगे- नानक, कबीर, रविदास, दादू, सहजो, फरीद, मीरा, गुरु तेग बहादुर और गुरु गोविंद सिंह आदि
9. गुरु ग्रंथ साहिब में ऐसे ही गुरु के वाणी को एकत्र किया गया है, जो भय मुक्त थे, कथित संत तो उस समय और भी थे🙏 जिनको गुरु ग्रंथ साहिब में नहीं संजोया गया वह मिट गये 🙏
10. पूरा दलित समाज बिखरा हुआ है, मैं असंगठित समाज के संगठन के लिए काम कर रहा हूँ🙏 खतपतवार छाटते हुए चोट भी लग जाती है, मैं उसके लिए तैयार हूं, पर अच्छी फसल उगाने के लिए मैदान तो साफ करना ही पड़ेगा, कौन जाने खरपतवार में ही कोई हीरा मिल जाए, जिसे समय ने मिट्टी के ढेर से ढक दिया हो 🙏
11. सभी से तन, मन, धन के सहयोग का आवहन करता हूं 🙏 कौन जाने कल मैं रहूं, ना रहूं, जब तक हूं मेरा सद-उपयोग कर लो🙏
12. महर्षि दयानंद सरस्वती ने सन 1875 में जब आर्य समाज की स्थापना की, उसके 8 साल बाद उनकी हत्या कर दी गई🙏 महर्षि दयानंद सरस्वती ने पुराणो का खंडन करते हुए, ब्राह्मण ग्रंथो का खंडन किया, केवल वेद वचनों को स्वीकार किया, पाखंडी-ब्राह्मणों से पंगा लिया🙏 और समाज को सुव्यवस्थित संस्कृति देने के लिए सत्यार्थ प्रकाश की रचना की जो जाति प्रथा से मुक्त थी 🙏( ऋग्वेद का दशम मंडल की पुरुष सूक्त राजनीति से संबंधित है, उसका समाज व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है )
13. महर्षि दयानंद सरस्वती की हत्या के बाद महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा बनाए गए मठो पर महर्षि दयानंद सरस्वती के विरोधियों ने खुद को सनातनी कहते हुए कब्जा कर लिया, और महर्षि दयानंद सरस्वती द्वारा बनाए गए आर्य समाज के सिद्धांतों को अपने हिसाब से बदल दिया🙏
14. इसका सबसे खतरनाक रूप 19वीं शताब्दी के आरंभ में दिखाई देने लगा, जब 1893 में विश्व धर्म सम्मेलन में विवेकानंद ने सभी भारतीयों को हिंदू कह दिया, हिंदू ऊपरी लेप था और अंदर से ब्राह्मण धर्म था जिसको सनातनी कहते थे, बाद में सनातनी शब्द भी छोड़ दिया गया, हिंदू महासभा के गठन के साथ, खुद को हिंदू कहने लगे🙏
15. बाबू मांगूराम इसी छल फरेब में आ गाये और उन्होंने आदधर्म की स्थापना कर दी, यदि बाबू मंगूराम ना होते, या उनके द्वारा स्थापित आदधर्म ना होता तो बाबा साहब बौद्ध नहीं सिक्ख होते 🙏
16. क्योंकि बाबा साहब द्वारा लिखा गया ग्रन्थ "बुद्ध और उनका धर्म" से पता लगता है बाबा साहब को आध्यात्मिक ताकत का पता ही नहीं था, अन्यथा वह 22 प्रतिज्ञाए नहीं लिखते 🙏 पंचसील और अष्टसील अपने आप में प्रायप्त हैं, बुद्ध धर्म में निंदा के लिए कोई स्थान नहीं है 🙏 22 प्रतिज्ञाएं निंदा सिखाती हैं 😂 इसलिए मैं बाबा साहब को बुद्धिस्ट नहीं कह सकता हूँ👏 अंबेडकर का बौद्ध धर्म कहूंगा🙏 भगवान बुद्ध का बुद्ध धर्म नहीं कहूंगा🙏 जिसको उन्होंने धारण किया🙏बाबा साहब के धर्म पुस्तक है "भारतीय संविधान" उसमें बौद्ध-धर्म और रविदास-राज दोनों के गुण समाहित हैं 🙏
17. मंदबुद्धि के जस्टिस डीडी बसु ने भारतीय संविधान की समीक्षा करते हुए केवल विदेशी संविधान के तत्वों को तो देखा, और उसको अपनी पुस्तक में संकलित कर दिया, परंतु वह इस बात को देखने में सक्षम नहीं रहा कि तमाम संविधानों में से बाबा साहब ने केवल उन्हीं तत्वों को क्यों लिया? उसने अपनी पुस्तक में इस बात की समीक्षा नहीं की, क्योंकि उसको भारतीय संविधान को कट पेस्ट दिखाना था🙏
18. जबकि बाबा साहब ने भारतीय संविधान को लिखते हुए रविदास राज की अवधारणा और बुद्ध धर्म की अवधारणा के आधार पर भारतीय संविधान को लिखा है, बाबा साहब ने भारतीय संविधान में किन-किन धर्म को प्रमुखता दी यह आर्टिकल 25 के परन्तुक से पता चलता है👏
19. कुटील बुद्धि के ब्राह्मण सदैव वर्टिकल धर्म ही स्थापित करते रहते हैं, उनको होरिजेंटल धर्म पचता ही नहीं है इसलिए उनको जहां भी घुसने का मौका मिलता है, उस धर्म का सत्यानाश कर देते हैं 🙏 आजकल भारतीय संविधान का सत्यानाश करने पर तुले हैं, वह चाहे विधि आयोग में बैठकर करें या भारतीय न्यायपालिका में, उनका अंतिम उद्देश्य है वर्टिकल धर्म स्थापित करना, जबकि भारतीय संविधान इसकी इजाजत नहीं देता है 🙏
20. जैन धर्म एक खुला हुआ धर्म था, जैन धर्म के सिद्धांतों को अपनाते हुए कोई भी व्यक्ति जैन धर्म का हो सकता था 🙏
21. परंतु आज ऐसा नहीं है, क्योंकि वहाँ भी कुटिल बुद्धि के ब्राह्मण भरे हुए हैं जैनी की धन संपत्ति बंट ना जाए, इसलिए वह आपस में ही वैवाहिक संबंध करते हैं, क्योंकि ऋग्वेद के दशम मंडल का यम-यमी प्रकरण उनको ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करता है और यह बात ब्राह्मण ही उनको समझाता है🙏
22. यही हाल पारशियों का भी है, उनकी धन संपत्ति बंट ना जाए वह भी अपने घर परिवार में ही वैवहारिक संबंध करता है, इसका दुष्परिणाम यह होता है कि आनुवांशिक रोग उनके यहां चरम पर पाए जाते हैं 🙏 मानवता उन में नाम मात्र की होती है, उस अमानविता का शिकार बाबा साहब को भी होना पड़ा था🙏
23. नालंदा तक्षशिला यूनिवर्सिटी को जला देने के बाद, भारतीय संस्कृति जैसी तो कोई चीज है नहीं, कोई नहीं कह सकता यह हमारी संस्कृति है, इसलिए जो पैगंबर आते रहे अपनी-अपनी संस्कृति बनाते रहे, थोपते रहे🙏
24. ब्राह्मण सदैव कुटिल बुद्धि का रहा है और हर परिस्थिति में हर राज्य व्यवस्था के निकट रहा और आज भी है, अपने मन माफी काम कराता रहा, जहां नहीं करा सका युद्ध करा दिये, गुरु तेग बहादुर को भी मरवा दिया, और और खुद की उंगली भी नहीं काटने दी 😂 खुद को सरवाइव कर ले गया, उसने समाज के भले के लिए कभी काम नहीं किया, सदैव वर्टिकल धर्म के लिए काम किया है 🙏
25. ब्राह्मण वत्सयान का कामसूत्र उसकी श्रेष्ठ को दर्शाता है, युवराज और राजपूत का अंतर, इस ग्रंथ की ही देन है🙏
26. भारत सरकार UCC पर जोर दे रही है, रविदासिया समाज की इसमें क्या तैयारी है? रविदासिया समाज में इस विषय पर भारत सरकार को कितने पत्र लिखें, क्या संगठन को अपने समाज को उन पत्रों के बारे में नहीं बताना चाहिए?
27. मेरी जानकारी में नहीं है, रविदासिया संगठन ने भारत सरकार को कोई पत्र लिखा हो, वह तो केवल हरि और सोहम में लटके हैं 🌹🙏
28. इन सभी विषयों पर किसी को तो घंटी बांधनी है, मैं तो अपना फर्ज निभाउंगा, चार दिन बाद जाना है, चार दिन पहले चला गया तो भी कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि धरती को बनाने वाला मैं नहीं हूं 😂🙏🌹
सामाजिक चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064
नोट :-
1. गुरु कहते समय उनका नाम भी लिया जाना चाहिए, ताकि समाज में भ्रम की स्थिति ना रहे कि किस गुरु की बात चल रही है, सबके अपने-अपने गुरु हैं, सबका अपना अपना डफली और अपना-अपना राग है 😂🙏
2. किस गुरु का अपमान हुआ, जो तुम्हारा गुरु है यह जरूरी नहीं कि वह सब का गुरु हो, जो तुम्हारा बाप है यह जरूरी नहीं वह सबका बाप हो, तुम्हारे गुरु के साथ दूसरे का दूसरा संबंध हो सकता है🙏
3. आप चौधरी क्यों बन रहे हो, और अगर चौधरी बना रहे हो तो गुरु के नाम का स्पष्ट उल्लेख करो ताकि भ्रम की स्थिति ना रहे, जिसे तुम गुरु कह रहे हो क्या वह गुरु होने योग्य है 🙏
4. चोरों का भी गुरु होता है😂 ठागो का भी गुरु होता है 🙏 इसलिए गुरु का नाम स्पष्ट रूप से कहना चाहिए कि किसका अपमान हो रहा है, और सटीक आधार भी होने चाहिए, यह आवश्यक नहीं तुम्हारा गुरु भी हमारा गुरु हो 🙏 अपने गुरु को मेरे ऊपर थोपने की कोशिश मत करें🙏
5. यदि कोई गुरु किराए के गुंडे पलता है, तो यह स्पष्ट है उसका गुरु आध्यात्मिक गुरु नहीं है😂डॉन जरूर हो सकता है🙏
6. मुझे धमकाने के लिए को जो लोग फोन कर रहे हैं, (आज भी एक प्रमुख व्यक्ति ने फोन कर दिया) वह लोग केवल अपनी बात कह कर फोन काट देते हैं, मेरी बात सुनते ही नहीं हैं 😂 भाई मेरे टेप रिकॉर्डर मत बनो, आदमी बनो,🙏 कुछ अपनी कहो कुछ मेरी सुनो 🙏
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