🌹रविदास राज का दुखड़ा : रात्रि सूचना 16 अक्टूबर 2024🙏
1. श्री गुरु ग्रंथ साहिब में गुरु अर्जन देव जी का संकलन बहुत ही प्यारा है🙏
2. श्री गुरु ग्रंथ साहब को पढ़ाते हुए पता लगता है कि कौन सी नानक जी ने कहीं है, कौन सी बात किसी अन्य गुरु ने कही है🙏
3. नानक परंपरा के केवल 6 गुरुओं की बात ही श्री गुरु ग्रंथ साहिब में है, चार अन्य गुरु की बात नहीं है🙏
4. किसी विषय पर इन 6 गुरुओं का क्या विचार है, वह किसी बात पर 6 से काम भी हो सकते हैं🙏 उनकी अनुभूति का सारांश सार रूप में पाउड़ी नाम से प्रचलित है 🙏
5. श्री गुरु गोविंद साहब ने पुनः संकलित करते हुए, उपरोक्त 6 गुरुओं की बात के समर्थन में भक्तों और भटो की वाणी का संकलन किया है 🙏
6. भक्तों (वह गुरु ही मानते हैं परंतु एक विभाजन रेखा सिर्फ बात कहने मात्र के लिए है ) और भटो की वह बातें जो गुरु ग्रंथ साहब के उपरोक्त 6 गुरु की अनुभूति से अलग है, का कोई और उलेख नहीं है🙏
7. सत्य की अनुभूति सभी की एक जैसी होती है, वह चाहे कोई गुरु करें, कोई भक्त करें अथवा कोई भट्ट करें 🙏
8. परंतु जिनकी कोई अनुभूति नहीं होती, जो ग्रंथ का केवल पाठ करते हैं उनको ग्रंथि कहा जाता है, वास्तव में ग्रंथि भी पाठ नहीं करते बल्कि रागी पाठ करता है🙏
9. राग से उठने वाली तरंगें निकट बैठे व्यक्ति के शरीर और मन को प्रभावित करती हैं, ऐसा केवल उस राग के कारण होता है, यह आवश्यक नहीं कि व्यक्ति को पंजाबी का ज्ञान हो 🙏 तभी वह उनके मन पर असर करेंगे❤️
10. राग की माया बड़ी अद्भुत है, राग के साथ उठने वाली चित्त की तरंगे जो रागी के शरीर से निकलती है, पूरे वातावरण को ऊर्जा और शांति से भर देती हैं 🙏
11. यदि कोई रागी किसी कारण से विचलित चित्त में हो तो निकट बैठे भक्तों पर वह उतना अच्छा असर नहीं डाल पाता है 🙏
12. मैं धीरे-धीरे पंजाबी सीख रहा हूं, परंतु मैं तरंगों को समझने में कुशल हूँ क्योंकि मैं साधक हूं , मुझे गुरुद्वारे में बैठकर सुनना अच्छा लगता है🙏
13. जब संत शिरोमणि गुरु रविदास के प्रांगण में श्री बनारसी दास जी वचन कर रहे थे, अति ऊर्जावान था 🙏 भले ही पाठ का वाचन वह मोबाइल से देखकर कर रहे थे🙏
14. ग्रंथ पाठी और रागी में यही अंतर होता है, रागी को ग्रंथ नहीं खोलना पड़ता है, उसका पूरा ध्यान राग पर होता है 🙏
15. यदि उदाहरण के रूप में मैं बात को कहूं तब मुझे अपने बचपन की कुछ चीज याद आती है 🙏
16. मेरे दादा जी बारहमासी गाने में कुशल थे, उनको सुनाने के लिए लोग दूर-दूर से आते थे या उनको बुलाया जाता था 🙏
17. जब तक परिवार में पुरानी परंपराएं थी, साल में एक दो बार सामूहिक रूप से आल्हा गाया जाता था 🙏 उसमें दादाजी की बारहमासी भी गई जाती थी🙏
18. आल्हा इस प्रकार का होता था, वह जब बिरहा रस में गाया जाता था तो सबको रुला देता था,
19. यदि सिनेमा जगत की बात करूं तो आज भी बहुत से गाने ऐसे हैं जो आपको रुला देते हैं, क्योंकि उसमें राग पर विशेष ध्यान दिया जाता है🙏
20. जब हमारे पिताजी का शासन काल आया 🙏 वह अपने घर परिवार के पहले सरकारी नौकरी करने वाले व्यक्ति थे🙏 और इस पारिवारिक परंपरा पर प्रतिबंध सा हो गया🙏 दादा जी गुजर गए तो बारहमासी गाने का परंपरा भी चली गई, दादा जी की मंडली के एक भाई को, सांप ने डस लिया तो मंडली भी अधूरी हो गई थी दादाजी अकेले पड़ गए थे 🙏 यूं कह सकता हूं पूरे खानदान और मोहल्ले (गांव)की खुशियां ही चली गई 🙏 और यह सांस्कृतिक परंपरा हमारे गांव से समाप्त हो गई 🙏😭
21. अब 5 साल में एक बार प्रधानी के चुनाव के समय एकत्र होते हैं 🙏 उसमें भी जो सरकारी नौकर है नहीं पहुंचते, किसी को छुट्टी नहीं मिलती तो किसी की चुनाव में ड्यूटी होती है🙏👏
22. यदि मैं कभी कुछ गाने लगता, तो मेरे बाप का जूता तैयार मिलता "और उनकी भाषा में कहा जाता, साला नाच कहिए बनेगा" इतने में मेरे पजामे में पेशाब छूट जाती थी 🙏 उनकी मार से बचने का ही एक रास्ता था, मैं बेटा तो नहीं बागी जरूर बन गया🙏 ध्यान रहे बागी अपराधी नहीं होता, अनुशासनहीनता पाप नहीं है, यदि अन्याय का विरोध किया जा रहा है🙏🌹
23. बाल संरक्षण अधिनियम 2005 में आया यदि उसे समय आ गया होता तो मैं अपने बाप को जेल में डाल देता 😭 अमेरिका जैसे देशों में बाप को जेल में डालने की व्यवस्था है, परंतु भारत में अभी तक इसका अनुपालन ईमानदारी से नहीं होता है 🙏
24. फिलहाल मैं बात कर रहा था सांस्कृति के विकास की, 11 घंटे की ड्यूटी के बाद मेरे ऊपर जूता चलाना एक आम बात थी, आज ड्यूटी 12 घंटे की है,
25. ना तो कोई मजदूर संगठन बात उठा रहा है और ना ही कोई धार्मिक संगठन, सरकार युद्ध के हथियार खरीदने में व्यस्त है, विश्व की सरकारों के पास पैसा है, और वह संपूर्ण विश्व की अर्थव्यवस्था को चौपट किए हैं 🙏 ध्यान रहे आने वाले समय के लिए वृद्ध आश्रम बना लीजिए, क्योंकि मेरे जैसा कोई भी व्यक्ति आपकी सेवा नहीं करेगा🙏😂 गृह त्यागी होना पसंद करेगा🙏 हमारे एक मित्र और सचिवालय में सेवारत एक भाई, वृद्ध आश्रम बनाने की तैयारी में है 😂 क्योंकि प्रतियोगिता वादी मानसिकता के कारण वह अच्छा समाज नहीं बना सकते है🙏😂
26. भारत में तमाम राष्ट्रीय संगठन है, भारत में तमाम अंतरराष्ट्रीय संगठन है, और सभी संगठन लोगों की जेब में पड़े हैं 🙏 हथियार खरीदने की होड़ में अमेरिका, रूस इसराइल फ्रांस भारत अग्रणीय भूमिका निभा रहे हैं 🙏 और धार्मिक संगठन घंटा बजा रहे हैं 😂
27. मेरा निवेदन है आप कर क्या रहे हो, ना तुम्हें धर्म का पता, ना तुम्हें धातु का पता, ना तुम्हें ध्यान का पता, ना तुम्हें भक्ति का पता, ना तुम्हें अर्थव्यवस्था का ज्ञान 🙏
28. कैसे तुमने अमृतवाणी की रचना कर ली? संसार का विष जाता ही नहीं है 😂 संसार को तो छोड़ो, तुम्हारे संतों का विष नहीं जा रहा है, ना वह 105 मंदिर जोड़ने को तैयार है, ना 96 गुरु भाइयों को सम्मिलित करने को तैयार है, DDA की करोड़ों रुपए की जमीन के मालिक बन जाना चाहते हैं 🙏 तो समाज में सुख शांति कैसे आएगी 🙏😭 अमृतवाणी पर प्रश्न चिन्ह तो लग ही जाता है, कि यह मनुष्य के विकारों को दूर करने में सक्षम नहीं है 🙏❤️👏
29. कैसे रविदास राज की व्यवस्था लागू करोगे, "जब आप खुद को रविदासिया कहते हो तो मुझे आप पर हंसी आती है "
30. अमृतवाणी विषय के लेख पर दो व्यक्तियों के कमेंट आ चुके हैं, परंतु उनका नहीं आया जो खुद को अखिल भारतीय रविदासिया संगठन का सदस्य कहते हैं अथवा पदाधिकारी कहते हैं 🙏
आखिर कब तक भागोगे😂
शोध साधक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064
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