Friday, 22 November 2024

आध्यात्मिक चेतावनी

 🌹आध्यात्मिक चेतावनी सूचना दिनांक 23 नवंबर 2024 


कल विशुद्ध ध्यान पद्धति की विधि, और अन्य धर्म में ध्यान की पद्धतियों के प्रकार का संक्षिप्त वर्णन किया था🙏


मेरा जोर विशुद्ध ध्यान पर था, और जो चीज जितनी विशुद्ध होती है उतनी तेज और खतरनाक भी होती है, अगर उसका पालन ईमानदारी से कर दिया जाए, यदि बेईमानी से किया जाए तो और भी खतरनाक हो जाती है 😂


1. बात उन दिनों की है जब मैं भोगल के रविदास मंदिर में रहता था, और एक मिलने वाले ने आकर मुझसे पूछ लिया था कि मैं किस प्रकार ध्यान करता हूं, तो मैंने उन्हें बता दिया🙏 जैसे मैं करता हूं

2. वे भी दूसरी पद्धति से ध्यान किया करते थे🙏 बिना सील का अनुपालन किये उन्होंने मेरे द्वारा बताई गई पद्धति से अपने नथुनों के पास ध्यान की प्रक्रिया आरंभ कर दी🙏लगभग 15-20 दिन बाद वे मुझे पुनः मिलने आए तो उनका मुंह बंदरो की तरह फूल गया था 😭

3. उन्होंने मुझसे कहा कि आपकी ध्यान की पद्धति गलत है, मेरा मुंह फूल गया है 🙏 मेरी उनसे दूसरी या तीसरी मुलाकात थी , मैंने उनका व्यक्तिगत परिचय लिया, और पाया कि वह सील का पालन नहीं कर रहे थे, उसका परिणाम उनके चेहरे पर दिखाई दिया🙏

4. विशुद्ध ध्यान की पद्धति में सील का अनुपालन किया जाना अति आवश्यक है 🙏 वह भी त्रिविधि सील विशुद्धी होना आवश्यक है🙏 अन्यथा विशुद्ध ध्यान पद्धति के साथ अनजाने ही व्यक्ति आर्तध्यान करने लगता है, अथवा रौद्रध्यान करने लगता है, तो उसके दुष-परिणाम सामने आने लगते हैं🙏


5. सील क्या है?


अ. हिंसा ना करने का व्रत लेना🙏( इसके अंतर्गत बौद्धिक कर्म और शारीरिक कर्म दोनों सम्मिलित है )

ब. चोरी न करने का व्रत लेना🙏

( इसके अंतर्गत काया कर्म और बौद्धिक कर्म दोनों सम्मिलित है) 

स. झूठ ना बोलने का व्रत लेना 🙏( इसके अंतर्गत प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों बौद्धिक कार्य सम्मिलित है, अर्थात सच को छिपा लेना भी झूठ के अंतर्गत आता है )

द. नशे का सेवन न करने का व्रत लेना🙏( इसके अंतर्गत शारीरिक कर्म सम्मिलित है तथा अन्य मानसिक विकार भी सम्मिलित है)

ड़. असमयक जीविका का अनुपालन ना करने का व्रत लेना 🙏( इसके अंतर्गत रहन-सहन उठना बैठना, जीविका के संसाधन, प्राकृतिक नियमों के अनुसार सम्यक होना चाहिए)


6. उपरोक्त पंचशीलों का अनुपालन करने पर ही कोई साधक सुबह शाम की विशुद्ध ध्यान साधना कर सकता है🙏 अन्यथा वह ध्यान साधना के लिए समय ही नहीं निकाल सकेगा, और अगर उसने निकाल भी लिया तो ध्यान में बैठना संभव नहीं होगा🙏 उपरोक्त सील को भंग कर देने के कारण उसका मन अत्यंत व्याकुल हो जाएगा, और साधक आर्तध्यान अथवा रौद्रध्यान करने लगेगा 😭 अथवा ध्यान से उठ, भाग खड़ा होगा😂


7. आर्त ध्यान करने से मानसिक विकार बढ़ जाएंगे, रौद्र ध्यान करने से शारीरिक विकार बढ़ जाएंगे, उसका अंतिम परिणाम दु:ख ही होगा😭


8. इसीलिए हमारे संत शिरोमणियों ने, भगवान बुद्ध की पद्धति से अलग, सहज ध्यान योग की परंपरा बनाई, जिसमें किसी शब्द का सहारा लिया जाता है, ताकि व्यक्ति आर्तध्यान अथवा रौद्रध्यान से जाने से बच जाए🙏


9. परंतु जाना विशुद्ध ध्यान तक ही है, इसलिए संत शिरोमणियों के शब्दों समान नहीं है, एक ही संत शिरोमणि ने कई शब्दों को पकड़ा है, बदलते रहे, कभी सोहम सोहम कभी हरि हरि कभी मुकुंद मुकुंद कभी राम राम....... परंतु जो शब्द को पकड़ कर बैठ जाता है वह कहीं नहीं पहुंचता, केवल फसादी हो जाता है 😂 कहा जाता है, गोरखनाथ की परंपरा में हजारों पद्धतियां हैं 🙏 परंतु वह विशुद्ध ध्यान पद्धति नहीं है🙏


10. बुद्धिस्म की महायान शाखा ने भी एक शब्द पड़ा है जिसे अनिच्चा कहते हैं, कुछ लोग वहां पर भी माला का सहारा लेते हैं और अनिच्चा अनिच्चा का जप करते रहते हैं 😂 परंतु वह बुद्ध की विशुद्ध ध्यान पद्धति नहीं है 🙏 और जो अनिच्चा शब्द को पकड़ कर बैठे रहते हैं वह भी भटक जाते हैं


11. इसीलिए बुद्ध की विशुद्ध ध्यान पद्धति में संघ का विशेष महत्व, अर्थात 10-15 दिन अथवा एक दो माह तक किसी संघ में रहकर ध्यान को सीखना चाहिए🙏 एक बार विशुद्ध ध्यान पद्धति पर मन टिक गया तो फिर आगे तकलीफ नहीं होती, और छोटी सी भी गलती हो रही हो तो तुरंत पता लग जाता है कि हम गलत तरह से ध्यान कर रहे हैं, जैन धर्म में इसी को प्रेक्षा ध्यान कहा जाता है 😂 अर्थात अपनी गलती को भी देखते रहना😭 बुद्धिस्म में इसको बोधी का जाग्रत रहना कहते हैं 👏


12. हम आपसे जो बातें कर रहे हैं इसी को बुद्धमं शरणमं गच्छामि कहा जाता है, अर्थात विशुद्ध ध्यान पद्धति की बातो को जानना कि ध्यान कैसे किया जाए, अर्थात बुद्धिमता की बातें 😂 परंतु मूर्खों ने इसे भगवान बुद्ध की शरण में जाना कह दिया है, जैसे वह कोई जमीदार हो, और कोई उनकी शरण में जा रहा हो🙏 किसी धर्म विशेष की शरण में जाना कह दिया, पूरी तरह मूर्खतापूर्ण बातें हैं, यह ना कोई भिक्षु आपको बतायागा ना कोई समण-संघ वाला बतायागा, ना नव बुद्धिस्ट अंबेडकरवादी आपको बताएंगे, क्योंकि अधिकांश को तो पता ही नहीं है 🙏 महायान शाखा वाले तो सांप्रदायिक है वह कभी नहीं बताएंगे 🌹🙏

13. किसी को धार्मिक संगठन बना कर नेतागिरी करनी है, और किसी को राजनीतिक संगठन बनाकर नेतागिरी करनी है, दिल्ली की कुर्सी पर काबिज होना है 🙏 इसलिए कोई नहीं बताया यही अंतिम लेख है, ना भूतों ना भविष्यति 🌹 इसी लेख को आधुनिक युग का आध्यात्मिक सत्य मानना सर्वोचित होगा 🙏


14. समता समानता बंधुत्व उनका उद्देश्य नहीं है, जो धार्मिक अथवा राजनीतिक सत्ता के लोलुपता से ग्रस्त है अति निंदा से बचते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं 🙏 सबका मंगल हो, कल्याण हो 🙏🌹


साधक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


नोट : यदि किसी के प्रश्न हो तो वह व्यक्तिगत रूप से मुझसे पूछ सकता है 🙏

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