Sunday, 29 December 2024

शुक्ला जी की पहली और दूसरी पोस्ट का जवाब

 श्रीमन शुक्ला जी,


हर वर्ग और शब्द का विश्लेषण आप अपने चश्मे से कर रहे हैं 😂


देशभक्ति का विश्लेषण भी आप अपने चश्मे से कर रहे हैं 🙏


भूखे व्यक्ति की देशभक्ति

और पेट भरे व्यक्ति की देशभक्ति में कुछ तो अंतर है😂😂😂


आतंकवादी भी देशभक्त होते हैं 🙏और आतंकवाद विरोधी भी देशभक्त होते हैं🙏


एक ही भूभाग पर दोनों के देशभक्त होने की अवधारणा अलग-अलग होती है 🙏


मनमोहन का देशभक्त होना पूंजीवाद के पक्ष में था इसलिए पूंजीवादी लोग की नजर में मनमोहन सिंह देशभक्त हो सकते हैं 😂


अंतर्राष्ट्रीय श्रम नीतियों को भारत में आज तक लागू नहीं किया गया है, भारत में श्रमिकों का शोषण चरम पर है 🙏


भारत की देखा देखी अन्य देश भी अपने श्रमिकों का शोषण करने लगे हैं 🙏


 WTO के अंतर्गत बनाई श्रमिक नीतियां आज तक धरातल पर नहीं आयी 🙏 इसके लिए उत्तरदाई तो मनमोहन सिंह ही हैं 🙏


और सबसे जवालंत उदाहरण दे दूं🙏 भारतीय दूतावास, अमेरिका में अपने श्रमिक का शोषण करते हुए एक भारतीय IFS अधिकारी पकड़ा गया था, अमेरिका के श्रम संगठनों ने इसका जबरदस्त विरोध किया, उसके अमेरिका में जेल जाने की नौबत आ गई परंतु भारत सरकार ने तत्काल उसे भारत बुला लिया, ना तो अमेरिका में उस पर मुकदमा चल पाया ना भारत में चलाया गया😭


 इन सब नीतियों के लिए और श्रमिकों का शोषण करने के लिए मनमोहन सिंह ही जिम्मेदार है 🙏 कुछ और जानकारी चाहिए हो तो बता देना😂 एक-एक परते खोल कर रख दूंगा कि मनमोहन सिंह किसके लिए देशभक्त थे 🙏


आजादी बचाओ आंदोलन के पूर्व सक्रिय कार्यकर्ता अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064




शुक्ला जी, 


कांग्रेस परिवार 2


 ग्रुप के नाम से कुछ स्पष्ट नहीं होता है कि यह (भक्तो)समर्थक, विरोधी या आलोचक का गुरूप 🙏


आपका ग्रुप एडमिन फ्री है मुझे अपने ग्रुप से अलग करने के लिये 🙏परन्तु मैं वह कहूंगा जो सत्य है🙏


1. देश के पास 15 दिन का खर्च बचा था, बड़ी जटिल समस्या थी 😂


2. सभी सांसदों और प्रशासनिक अधिकारियों को दो महीने तक वेतन नहीं लेना चाहिए था 😂 राष्ट्रभक्ति होने का परिचय देना चाहिए था😂 तो ढाई महीने का खर्च हो जाता परंतु किसी ने ऐसा नहीं किया 🙏


3. सरकार का खर्च चलाने के लिए 15 दिन का पैसा बचा था अर्थात शैर-सपाटा🙏 फिलहाल 2 महीने तक का वेतन राष्ट्र को समर्पित किया जा सकता था 🙏


4. यदि ऐसा किया गया होता तो भारतीय मुद्रा का 30% अवमूल्यन ना होता 🙏 भारतीय श्रमिकों के श्रम की वैल्यू 30% ना घटती, भारतीय खनिज संपदा का मूल 30% ना घटता, भारतीय कृषि उत्पादों का मूल्य 30% ना घटता 😂


5. शुक्ला जी मैं कुछ गलत कह रहा हूं😂 भारतीय श्रमिकों के श्रम मूल्य को 30% घटाया गया और आप उनको अच्छा वित्त मंत्री कह रहे हैं 🙏


6. विश्व बैंक की किताबों से जो उन्होंने पढ़ा था उसी को लागू कर दिया🙏 विश्व बैंक, IMF, अमेरिका को लाभ देने के लिए कार्य करने वाली संस्थाएं है उसी के निर्देशों पर उन्होंने काम किया, भारत के कल्याण के लिए कोई नया अविष्कार तो नहीं किया था🙏 जैसा कभी बाबा साहब ने किया था, और लंदन की अर्थव्यवस्था को चुनौती दे दी थी 🙏 मनमोहन के कार्य में मुझे ऐसी कोई झलक दिखाई नहीं देती है 🙏


7. उसके बाद लगातार भारतीय रुपए का अवमूल्यन होता रहा जिसे रोकने के लिए मनमोहन सिंह ने कोई भी ठोस उपाय नहीं किया 🙏


8. देश की अर्थव्यवस्था को पांचवें नंबर पर लाना, क्या बहुत बड़ी उपलब्धि है जिसकी आबादी विश्व में द्वितीय स्थान पर हो 🙏 सभी देश भारत में बाजार की तलाश में है, अर्थात भारत से रुपया कमाना चाहते हो🙏


9. और आप भारत की गरीबी का रोना रो रहे है क्योंकि मनमोहन सिंह ने उन्ही आर्थिक नीतियों को भारत में लागू किया जो अमेरिका सहित यूरोपीय देशों के लिए कल्याणकारी थी 🙏



10. मुझे लगता है आपने भी भारतीय अर्थव्यवस्था को अंग्रेजी किताबों से पढ़ा 😂 इसीलिए मनमोहन की अर्थव्यवस्था आपको हरी हरी दिखाई देती है 🙏


11. यदि गरीब की झोपड़ी से निकलने वाली पुस्तकों से, चूल्हे से निकलते हुए धुएं को आपने पढ़ा होता तो, चार बच्चों की मम्मी के अर्थशास्त्र को आपने पढ़ा होता तो नया आविष्कार हो जाता 🙏


12. किसी संप्रभु राष्ट्र की अर्थव्यवस्था उसके देश की जरूरत के अनुसार होनी चाहिए ना कि किसी पराश्रित देश की अर्थव्यवस्था द्वारा थोपी गई अर्थव्यवस्था पर🙏


13. आज भारत रूस से तेल खरीद रहा है, क्या जरूरत थी कि उस समय भारत डॉलर में तेल अरब देश से खरीदता 🙏 मनमोहन सरकार का झुकाव अमेरिका के प्रति ज्यादा रहा है 🙏


14. मैं यह नहीं कहता कि चंद्रशेखर की सरकार बहुत अच्छी थी😭 संपूर्ण विश्लेषण करने के बाद मैं इतना ही कह सकता हूं मूर्ख में से हमने कम मूर्ख को चुना था परंतु उन्हें अकलमंद अर्थशास्त्री अथवा प्रधानमंत्री मैं कदापि नहीं कहूंगा 🙏


15. 10 साल में मनमोहन सिंह का ध्यान भारतीय संविधान की उद्देशिका में स्थापित आर्थिक समानता की नीति की तरफ कभी नहीं गया है 🙏 इसलिए मैं मनमोहन सिंह को राष्ट्रभक्ति प्रधानमंत्री तो कभी नहीं कह सकता हूँ 🙏


16. वह अमेरिका भक्त और लंदन भक्त प्रधानमंत्री जरूर हो सकता है जैसा कि वहां की संसद में उन्हेंने तारीफ की कसीदे पढ़ी थी, और देश की अर्थव्यवस्था को लूटाकर डॉक्टर की उपाधि हासिल की थी 😂


17. और कुछ सुना हो तो भी बता दीजिएगा,🙏 फिर मैं 1994 का प्रोफेसर बनवारी लाल शर्मा का लिटरेचर निकलता हूं, और 2014 तक मनमोहन सिंह के किए गए कार्यों की लिस्ट आपको सौंप दूंगा😂 जिसको भारत में अच्छा प्रधानमंत्री कहां जाता था उसे उसी समय फ्रांस में अमेरिका का पोपट कहा जाता था 😂


18. यदि अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ पर आपकी पकड़ रहती है तो आपको पता होगा 1994-95 में WTO पर हस्ताक्षर करने के बाद यह निश्चित हो गया था कि भारत का अगला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह होगा क्योंकि वह अमेरिकी नीतियों के अनुकूल था🙏


आजादी बचाओ आंदोलन के पूर्व सक्रिय कार्यकर्ता अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

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