Monday, 6 January 2025

3-7 जनवरी की पोस्ट

 [03/01, 3:17 pm] kamleshmittra: प्रिय समकक्ष साधक एवं शिविर संचालक श्रावस्ती विपस्सना सेंटर 🙏🌹


आपके व्याख्यान पर टिप्पणी करने योग्य कुछ भी नहीं है 🙏

क्योंकि जो बुद्ध का वचन है उस पर कोई क्या टिप्पणी करेगा🙏

जो बुद्ध के नाम से प्रचारित है, उस पर तो कोई विवादी पंडित ही टिप्पणी कर सकता है🙏


परंतु आपने मुझे टिप्पणी करने के लिए कहा है इसलिए मैं आपको कोटि-कोटि धन्यवाद करूंगा कि आपके मार्गदर्शन में रहकर ही मैं गंभीर साधना कर सका, आप पग पग पर मेरे साथी बने और हर प्रकार से मेरा सहयोग और मार्गदर्शन करते रहे उसके लिए मैं आपको आज भी कोटि कोटि नमन करता हूं🙏


1. मेरे लेख तो बोधी पर आधारित होते है, जो समस्या प्रथम संगिति के समय 499 अर्हन्त भिक्षुओं के साथ थी, वही समस्या मेरी है 🙏 मैं यह नहीं कह सकता कौन सा बुद्ध का वचन है और कौन सा मेरा अपनी बोधि का वचन है 🙏 इसकी व्याख्या तो कोई आनंद ही कर सकता है, फिर भी रसगुल्ला का स्वाद बताते समय कोई यह कैसे निर्धारित करेगा कि मैं दूसरे की कही बात कह रहा हूं जबकि मैंने रसगुल्ला का खुद सेवन कर लिया हो 🙏


2. जहां तक सनातन शब्द के संबंध में बुद्ध का कथन है, वह स्थिति अलग थी, उसका भावार्थ अलग था 🙏


3. परंतु आज के संदर्भ में मेरी टिप्पणी इस प्रकार है, जिन्होंने महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार को नहीं माना और 8 साल के अंदर सन 1883 में उनकी हत्या कर दी, अंग्रेजों के दंड विधान से बचने के लिए वह खुद को हिंदू कहने लगे थे, उससे पहले वह खुद को सनातनी कहते थे 🙏


4. महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार का वह यह कहकर विरोध करते थे कि हम सनातनी हैं, सती प्रथा, मानव बली, देवदासी प्रथा जातिवाद, सदियों से होती चली आई है और ब्राह्मण ग्रंथो के अनुसार ब्रह्म रचित है, को बनाए रखने के लिए वे लोग खुद को सनातनी कहते थे 🙏


5. मनुवादियों का खुद को सनातनी कहने के भावार्थ अलग है, धम्म में प्राकृतिक नियम को सनातन कहा गया है, वह अलग अर्थों में है 🙏


6. जैसे तारों में प्रकाश और गर्मी दोनों होती है, सूर्य एक तारा है सनातन सत्य है 🙏


7. आसाराम बापू सनातनी है यह पूरी तरह से असत्य कथन है 😂


8. जिस प्रकार भगवान शब्द का मुख्ता दो प्रकार से प्रयोग होता है 🙏


9. भग +वान = भगवान अर्थात स्त्री पुरुष के अंगों के मिलने से जीव की उत्पत्ति होती है इसलिए प्राणियों का जन्मदाता भगवान है 🙏


10. दूसरे अर्थों में भग्ग रागो, भग्ग दोषो, भग्ग मोहो अर्थात जिसने अपने राग दोष और मोह को भंग कर दिया अर्थात भस्म कर दिया जो समस्त विकारों से विमुक्त है, चित्त और शरीर के बंधन से मुक्त है, भंग की अवस्था को प्राप्त कर चुका है, जो भंगी हो गया है भगवान है 🙏


गंभीर साधक का अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[03/01, 4:27 pm] kamleshmittra: सूचना दिनांक 3 जनवरी 2025 🌹सर्व-साधारण को सूचित किया जाता है कि 🙏 कृपया जल्दी करें, जीवन साथी चुनने का सुनहरा सीमित अवसर 😂


1. एक सेल्फ डिपेंडेंट श्रीमती की आवश्यकता है, जिनकी आयु 30 से 40 वर्ष के बीच हो, रेडीमेड एक बच्चा भी हो तो भी चलेगा 😂


2. आवश्यकता के मुख्य वजह श्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली सरकार की तरफ से लांच की जाने वाली अधिवक्ताओं की वेलफेयर योजना है 🙏 इसके अंतर्गत दिल्ली के अधिवक्ताओं के लिए 5 लाख का मेडिकल इंश्योरेंस, और 10 लाख का बीमा है 🙏 कल मैं इस फॉर्म को भर रहा था 🙏 जिसमें नॉमिनी के रूप में श्रीमती और बच्चे का नाम भरना था🙏


3. मेरे पास कोई विकल्प नहीं था इसलिए मैं इसको बाईपास करके आगे बढ़ जाना चाहता था परंतु केजरीवाल ने इसकी कोई व्यवस्था नहीं की है इसलिए मैं अभी तक फॉर्म कंप्लीट नहीं कर पाया हूं, फॉर्म भरने की अंतिम तारीख 15 जनवरी 2025, अब मुझे ही श्रीमती और बच्चे की व्यवस्था करनी पड़ेगी🙏 इसलिए हमारे सहयोगी शीघ्रता करें🙏


4. मेरे पूर्व विवाह का अनुभव है कि लड़की हो या लड़की के मां-बाप सिर्फ लड़के के वेतन को देखकर शादी करते हैं परंतु उनका समर्पण नहीं होता है इसलिए हमारी पहली शर्त है कि लड़की सेल्फ डिपेंडेंट हो और उसे जीवनसाथी की आवश्यकता हो 🙏 संत शिरोमणि गुरु रविदास, डॉ. अंबेडकर तथा बुद्ध के प्रति समुचित ज्ञान रखती हो, किचन विज्ञान के बारे में भी पर्याप्त जानकारी रखती हो🙏


5. मैं सुप्रीम कोर्ट का अधिवक्ता हूं, और AOR की परीक्षा में व्यस्त हूं, बात करने के लिए समय कम ही रहता है, वैसे भी अन्य लोगों के दुख दर्द पढ़ते-पढ़ते, और माननीय सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट पढ़ते-पढ़ते, अपने दुख दर्द व्यान करने के लिए समय कम ही होता है 🙏


6. इसलिए ऐसे जीवनसाथी की तलाश है जो आवश्यकता को इशारों में समझ ले, सूंघ ले🙏 पिछला सन्ग-साथ 2007 में छूटा गया था, जीवन के अनुभव बहुत बुरे रहे इसलिए विगत 18 सालों में दोबारा से हिम्मत नहीं कर सका हूं 🙏 


7. परंतु जीवन के तीसरे पड़ाव में दिल्ली सरकार ने जीवन साथी खोजने के लिए मजबूर कर दिया है🙏


8. इस ग्रुप के सभी सदस्यों से सहयोग की अपेक्षा करता हूं, जिस जीवनसाथी को दिल्ली की समझ हो, हमारे गरीब खाने पर उसका स्वागत है😂


भाईयों मैं मजाक नहीं कर रहा हूं मेरी आवश्यकता है, आपसे सहयोग की अपेक्षा है 🌹


जीवनसाथी की तलाश में अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


नोट :-माननीय पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की योजनाओं का मारा अधिवक्ता

[07/01, 12:50 am] kamleshmittra: प्रतिक्रिया लेख दिनांक 7 जनवरी 2025 


🌹प्रोफेसर आनंद साहब,


आजाद जी के द्वारा सोशल मीडिया कि ग्रुप चर्चा में जिस तरह से तथ्यों को रखा गया, वह कई दृष्टिकोण से आपत्तिजनक है और परिवारों को तोड़ने वाला है 🙏 उनको एक मेच्योर व्यक्ति की तरह अपनी बात को रखना चाहिए था ना की प्रतियोगिता के प्रतिवादी की तरह 🙏 बात को अपना विचार कह कर रखना चाहिए ना कि अंबेडकर और बुद्ध के नाम से प्रचारित करना चाहिए👹


यदि सोशल मीडिया ग्रुप पर आप इस तरह की प्रतियोगिता रखते हैं, तो द्वितीय पक्ष को भी तत्काल काउंटर करने का मौका दिया जाना चाहिए, अन्यथा समाज में बहुत ही भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी और बौद्ध धर्म बदनाम हो जाएगा, बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर बदनाम हो जाएंगे🙏 बुद्ध और अंबेडकर को बदनाम करने वाले कि मैं अच्छे से बजाता हूं 👹


1. मैं दलित समाज का अधिवक्ता हूँ और दलितों की पारिवारिक समस्याओं से ही जूझता रहता हूं 🙏 दलितों की पारिवारिक उन्नति और सामाजिक उन्नति ना होने का कारण उनके परिवारों का विखंडन बहुत बड़ी समस्या है 🙏

2. मिस्टर आजाद जैसे लोगों को ना तो बौद्ध धर्म की ए बी सी डी पता है, और ना ही डॉ अंबेडकर की विचारधारा से परिचित है 🙏 

3. डॉ अंबेडकर की संपूर्ण विचारधारा संविधान के अनुच्छेद में नहीं है बल्कि संविधान में लिखे हुए परंतुक से परिलक्षित होती है 🙏 जिसे मूर्ख अधिवक्ता तक नहीं पढ़ते है, और कई बार मनुवादी जज उसी का फायदा उठाकर अपना जजमेंट लिख देते हैं जिसको कोई वकील चैलेंज नहीं करता है क्योंकि माननीय सुप्रीम कोर्ट में हमारे समाज के अधिवक्ता ही नहीं है🙏 

4. और हाई कोर्ट में भी हमारे समाज के अधिवक्ताओं की संख्या सीमित है और हाई कोर्ट को संवैधानिक विषयों पर सुनने का अधिकार भी नहीं है वह केवल कानून पर विचार कर सकता है कि कानून संविधान के अनुरूप है अथवा नहीं है 

5. किसी मनुवादी पब्लिकेशन से छपी हुई डॉ अंबेडकर के नाम की पुस्तकों को अंबेडकर की विचारधारा नहीं कहा जा सकता है 🙏


फिलहाल में अपनी बात को पुस्तकों से पृथक रखने का आदी हूं इसलिए मुझे यह मत पूछना कि किस पुस्तक में पढ़ा, जैसे चाय पीने वाले को चाय की पुस्तक पढ़ कर चाय का स्वाद बताने की जरूरत नहीं है 🙏 इस अनुक्रम में अपनी बात स्पष्ट कर देता हूं यदि हो सके तो आप इस मैसेज को आजाद जी तक पहुंचा दें 🙏


6. प्राणी जगत दो तत्वों से बना है, जिसे जीव और आत्मा कहते हैं 🙏 बुद्धिस्म में आत्मा को ही चित्त कहा जाता है🙏 अर्थात जिसके कारण मनुष्य जीवित कहा जाता है 🙏 कोमा में व्यक्ति जीवित होता( अर्थात जीव होता) है परंतु चेतन नहीं होता है🙏 

7. चेतन पर विकारों की मोटी परत होती है, जिसे बुद्धिस्म में राग दोष और मोह कहा गया है - विस्तृत रूप में इसे काम क्रोध लोभ वासना ईर्ष्या ममत्व आदि कहा जाता है

8. संसार में कई इंद्री वाले प्राणी पाए जाते हैं, एक इंद्री दो इंद्री तीन इंद्री चार इंद्री पांच इंद्री 🙏 मनुष्य छे इंद्री का प्राणी है 🙏 छठी इंद्री को विकसित करना पड़ता है 🙏 कुछ प्राणियों के कुछ खास इंद्रिय बहुत ज्यादा सक्रिय होती हैं, जैसे चींटी की गंध सूंघने की क्षमता, हाथी की सुनने की क्षमता आदि 

9. अधिकतम वनस्पतियां एक इंद्रीय प्राणी है, कुछ दो इंद्रिय वनस्पतियां भी हैं, जो प्राणी को देखकर उस पर आक्रमण करती हैं इस बात से ऐसी वनस्पतियों को अच्छे से पहचाना जा सकता है कि वह स्पर्श इंद्री के साथ सुनने अथवा देखने में भी सक्षम है 🙏

10. आजाद जी को डिस्कवरी चैनल देखना चाहिए, जो वनस्पति हो और प्राणी विज्ञान पर विशेष अध्ययन कराता है 🙏

11. अब मैं अपने मुख्य विषय पर लौटता हूँ 🙏 स्त्री और पुरुष में चैतिक समानता है, परंतु शारीरिक समानता नहीं है🙏 स्त्री पुरुष की छह ज्ञान इंद्रियां समान है, परंतु पांचो कर्मेंद्रियां सामान नहीं है 🙏

12. स्त्री पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं समान नहीं, आजाद जी को संविधान को ध्यान से पढ़ना चाहिए आर्टिकल 14 स्त्री पुरुष में भेद न करने की बात कहता है उसके साथ-साथ परंतुक में महिला कल्याण से संबंधित योजनाओं के लिए सरकार को कार्य करने की छूट देता है 🙏 फिर भी इसे समानता का भेद न होना कहता है,

13. ऐसा संविधान इसलिए कहता है क्योंकि स्त्री पुरुष शारीरिक रूप से सामान नहीं है, उनकी भौतिक आवश्यकता और भौतिक जिम्मेदारियां अलग-अलग है, प्राकृतिक प्रदत्त कर्तव्य अलग-अलग है 🙏 इसलिए प्राकृतिक प्रदत्त कर्तव्यों को समाज में भी अग्रसारित किया गया है 

14. इसीलिए मैंने आपसे मौखिक चर्चा में कहा था कि आपके यहां पर चर्चा बड़ी सताई स्तर पर होती है, और मैं उसमें मूक दर्शक बनकर सुनता रहूंगा तो मैं अपनी बुद्धि गवा दूंगा 🙏


भगवान बुद्ध ने कहा है मूढ़ो के संगत ना करें 🙏😂🌹


गंभीर साधक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

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