मित्र रघुवीर जी, आपका प्रश्न बहुत ही तकनीकी है🙏🙏🌹
इसके लिए आपको लोअर कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के निर्णय को समझाना पड़ेगा🙏
श्री रिशिपाल जी ने मुकदमे की शुरुआत 1986 में की थी, उनकी पूरी जिंदगी मुकदमा लड़ते बीती है 🙏
परंतु सर्वोच्च न्यायालय के जज मिस्टर अरुण मिश्रा की चूक अधिवक्ताओं की देन है🙏 ऐसे अधिवक्ताओं की देन है जो हमारे समाज के नहीं थे, मंदिर बने या बिगड़े उन पर कोई फर्क नहीं पड़ता था🙏
परंतु हमारा समाज, अपने समाज के अधिवक्ताओं की इज्जत नहीं करता है तो ऐसा होता रहेगा 🙏
परंतु आज उस पर राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही है, 🙏
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने अगर कोई आदेश दे दिया है तो उसका अनुपालन होना चाहिए, परंतु कुछ लोग व्यक्तिगत गुंडागर्दी पर उतरे हुए हैं और प्रशासनिक अधिकारियों से गलत काम कराना चाह रहे हैं
उसी का परिणाम है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को प्रशासनिक अधिकारियों ने अधर में फंसा दिया है 🙏
मैं काफी कुछ अपडेट अपने विधिक ग्रुप में देता हूं कृपया उससे जुड़े रहें और उनकी पोस्टों पर ध्यान दें
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा
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