Friday, 16 August 2024

वार्ता प्रतिक्रिया लेख 16 अगस्त

 🌹वार्ता-प्रतिक्रिया लेख दिनांक 16 अगस्त 2024 


मैं कहूंगा तो लोगों को ज्यादा बुरा लगेगा, इसलिए कबीर की वाणी से कुछ प्रसंग उठाता हूं 


(1)

 गुरु लोभी शिष लालची,

 दोनों खेल दांव,

 दोनों बूड़े बापूरे,

 चढ़ी पाथर नाव 🙏


(2)

जाका गुरु है आंधरा,

चेला खरा निरंध 

अंधे को अंधा मिला,

पड़ा काल के फंद🙏 


(3)

 गुरु किया है देह का,👌

 सतगुरु चिन्नहा नँही 👌

 भवसागर के जाल में,

 फिर फिर गोता खांहि 🙏


(4)

 गुरु कीजिए जानि के,

पानी पीजे छानि

बिना विचारे गुरु करें 

परै 84 खानि 🌹


अनेकार्थी शब्द बहुत भ्रम पैदा करते हैं 🌹 और कबीर तो उलट वास के उस्ताद - पता नहीं कौन सा शब्द किस अर्थ में प्रयोग कर देवें, जिन्होंने जाना है वही कबीर की वाणी को समझ सकेंगे 🌹 "गुरु" शब्द का वास्तविक अर्थ स्थान के अनुसार समझ सकेंगे 🌹


 देह धारी गुरु तो केवल घंटा बज-बाएंगे, और फिजूल के विषय पर चर्चा करे और कराएंगे🌹 


दलित उद्योगपति हों अथवा सवर्ण उद्योगपति, जब तक की सरकार की अर्थनीति चेंज नहीं होती, उसी अर्थव्यवस्था में काम करना होगा 👏


इसलिए व्यापारिक संगठनों की समस्याएं अलग है 🌹 और सभी धार्मिक संगठनों को व्यापारिक संगठनों से अपनी जीविका के लिए धन मिलता है 👏


परंतु रविदास राज के समर्थकों को, आर्थिक समानता के विषय पर काम करना होगा, और भारत में फैली मनुवादी अर्थव्यवस्था को समाप्त करने के लिये काम करना होगा 🌹


सामाजिक संगठन कर्मठ होते हैं, परंतु किसी भी आध्यात्मिक सोच को नहीं रखते, अधिकांश समय उनका झुकाव व्यापारिक संगठन जैसा होता है🌹


धार्मिक संगठन ही अपने ज्ञान से सामाजिक और व्यापारिक संगठन का मार्गदर्शन कर सकते हैं🌹 शासन की नीति व्यवस्था को बदल सकते हैं 🌹


धार्मिक संगठन ने मनुष्य को पशु समाज से श्रेष्ठ बनाया है, परंतु जो धार्मिक संगठन पशु की ही पूजा करने लगे, उनका समाजवाद पशु संस्कृति से अधिक नहीं हो सकता है 🌹


शब्दों, चिंन्हो और झंडे के लिए लड़ना, उद्देश्य विहीन हो जाना है 🌹👏🌹


 गुरु ग्रंथ साहिब गुरु है,

 गुरु ग्रंथ साहब के अंदर के सभी गुरु को भक्त कहा जाता है, ताकि गुरु ग्रंथ साहब को गुरु कहा जा सके🌹


कभी कल्पना करके सोचिए, गुरु ग्रंथ साहब में संत शिरोमणि गुरु रविदास के 40 शब्द ना होते तो संत शिरोमणि गुरु रविदास कहां होते हैं 😭 क्या कोई और पुराना ग्रंथ है, जो संत शिरोमणि गुरु रविदास के बारे में कुछ कहता हो 🌹


सिख धर्म से दलित संतो को अलग करने का अभियान सन 1928 में बाबू मांगू राम ने चलाया, और उसके बाद आदधर्म की स्थापना की, आदधर्म का पृथक ग्रंथ श्री ईश्वर दास द्वारा संकलित किया गया है, जो सन 1960 में पूरा हुआ🌹


इसने तथाकथित हिंदुओं के महाकाव्य को इतिहास बना दिया है, अर्थात ब्राह्मणवाद के ही समर्थन में लिखा गया प्रतिवादी ग्रंथ है 🌹


 सन 2010 में अखिल भारतीय रविदासिया धर्म बनाया गया🌹 और गुरु ग्रंथ साहब से रविदास वाणी को निकाल कर अमृतवाणी बनाया गया 🌹


 क्या हमें गुरु ग्रंथ साहब के प्रति कृतज्ञता नहीं होना चाहिए 🌹 मूर्ख सिख, मूर्ख ग्रंथ पाठी और सिक्ख समाज विरोधी लोगों के कारण अर्जुन देव द्वारा संकलित गुरु ग्रंथ साहिब की महिमा काम नहीं हो जाती है 🌹 उसको उसी रूप में याद किया जाना चाहिए👏


 मेरा बाप मेरा बाप है, सभी मेरे बाप को बाप कहें यह कहलाना कदापि उचित नहीं है, गुरु ग्रंथ साहब में 14 भक्त और 10 भट्ट के ज्ञान से सुशोभित होता है, ग्रंथ गुरु है - गुरु गोविंद साहब भी गुरु नहीं है 🌹 गुरु अर्जन देव भी गुरु नहीं है 🌹 कोई भी देह धारी गुरु नही है, जब जब गुरु ग्रंथ साहब के परिपेक्ष में बात रखी जाएगी🌹


कल तीन लोगों से बड़ी महत्वपूर्ण चर्चा हुई, इसमें अंतरराष्ट्रीय संत, अंतरराष्ट्रीय संगठन के गणमान्य सदस्य, और दिल्ली के प्रतिष्ठित रविदास मंदिर के प्रबंधक रहे 🌹


 मेरी एक छोटी सी पोस्ट पर प्रश्न उठाकर उन्होंने चर्चा को आरंभ किया, मैं "रविदास" कहता हूं🌹 उन्होंने मुझ पर आरोप लगा कि मैंने उनके गुरु का नाम सम्मान से नहीं लिया, यह तो बिल्कुल बच्चों वाली बात है " मेरी मम्मी मेरी मम्मी का झगड़ा है" मेरी मम्मी कहे या अम्मी क्या फर्क पड़ता है


🌹 रविदास के अतिरिक्त लगने वाले सभी शब्द उपाधियां है 🌹यदि मैं उन्हे परमपिता रविदास कहूं तो? कहना है तो उनको यही कहा जाना चाहिए, क्योंकि वह चमार जाति के परमपिता हैं, संपूर्ण चमार जाति उनसे सुशोभित होती है🌹


 परंतु देहधारी गुरुओं को तो अपना संगठन पृथक दिखाना है, इसलिए उनका उपसर्ग और प्रत्ये अलग होना चाहिए😂


 उन्होंने अभी एक बड़ी कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए जो कि चंडीगढ़ में हुई, सिख धर्म के संतों को निर्देशित कर दिया है कि वह संत शिरोमणि गुरु रविदास को भक्त ना कहे, गुरु कहे, अगर कोई सिख संत रविदास जी के मंदिर में आता है, और संत रविदास को भक्त कहता है, तो अमृतवाणी पढ़ने का अधिकारों उससे ले लिया जाएगा, उसे अपने मंदिर में नहीं बुलाया जाएगा 😂


 मुझे वीडियो भी भेजा गया मेरे साथ चर्चा भी हुई, परंतु मैं यह नहीं समझ पाया इसमें धार्मिक बात कौन सी थी 🌹 यह सभी बातें तो फसादी थी 👏


 यह सब तो फसाद के बिंदु है, इससे समाज का कोई कल्याण नहीं होता है, संगत में आए समाज के लोगों का समय खराब किया गया, और पैसा बर्बाद किया गया, इस कांफ्रेंस से गुरु रविदास को कोई खुशी नहीं मिली होगी 🌹


अगर चर्चा इस विषय पर होती कैसे रविदास राज को स्थापित किया जाए, तब संत शिरोमणि गुरु रविदास को खुशी होती, क्योंकि उनकी इच्छा तो थी ऐसा चाहूं राज मैं.......


 गुरुओं की जीविका व्यापारियों पर निर्भर है, उनके मंदिरों की भव्यता व्यापारियों पर निर्भर है👌

व्यापारी सरकारी अर्थव्यवस्था की नीति पर निर्भर है, और अर्थव्यवस्था मनुवादी है, वह पहले भी शूद्र कहे जाने वाले श्रमिकों के शोषण की पक्षधर थी और आज भी व्यापारिक है जाने वाले शूद्र का ही शोषण करती है 


ऐसी दशा में किसी भी मंदिर गुरुद्वारा को व्यापारियों द्वारा दान इस बात के लिए होगा, जिन कर्मचारी और श्रमिकों ने मनुवादी अंधविश्वास को जानकार छोड़ दिया है, उनको संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम पर अंधविश्वास में फंसाए रखो, संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम पर घंटा बजाओ, संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम पर आरती और अरदास कराओ ताकि संत शिरोमणि गुरु रविदास के दर्शन के हिसाब से यह कभी भी " सब सम बसें" की मांग ना करें 🌹


 और गुरु भक्ति में लीन रहे, व्यापारियों के खिलाफ कोई विद्रोह ना करें🌹


 जहां तक गुरु शब्द का सवाल है, गुरु शब्द बहू अर्थी है - कबीर साहब शरीर वाले गुरु की महिमा का बखान नहीं कर रहे हैं, उनका गुरु तो कोई और है, 



 जिस प्रकार संत रविदास ने भी कहा है कि मेरा राम अयोध्या का राजा राम नहीं है, और उन्होंने सभी से राम-राम करवाया 🌹


यह कौन मूर्ख गुरु है, जिसने जय रविदास का सूत्र बनाया😂


 जहां जय होगी तो दूसरे की पराजय होगी, मतलब सदैव फ़साद चलता ही रहेगा🌹


 मनुवादी पहले सीताराम कहते थे, जब उसको राजनीति का रंग दिया गया, तो जय श्री राम कहां जाने लगा🌹 ताकि दूसरों को नीचा दिखाया जा सके, हमेशा तनाव बना रहे👏 और राजनीतिक रोटी सिकती रहे 👏


 जय श्री राम कहने वाले

 और जय रविदास कहने ने वाले दोनों ही फसादी हैं, जब बाबू मांगू राम जी ने जय रविदास कहा , तब राजनीतिक हालात कुछ और थे 🌹


 परंतु आजाद भारत में आप जय रविदास कह रहे हैं, इसका मतलब आप फसाद फैला रहे हैं, जो संत रविदास ने कहा आप वहीं कहें 🌹


 मेरी सबको राम राम 👏


 अब देता हूं अपनी वाणी को विराम 🌹


 साधक कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064

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