🌹अति आवश्यक सूचना दिनांक 17 अगस्त 2024
आर्थर डंकल की अर्थव्यवस्था बनाम संत शिरोमणि रविदास की अर्थव्यवस्था 🙏
भारत में दलितों का शोषण लंबे समय से हो रहा है, बाबा साहब ने इस शोषण को रोकने के लिए जिस संविधान का प्रतिपादन किया, उसका आधार संत शिरोमणि गुरु रविदास का दिया गया सिद्धांत रविदास राज था 🙏
रविदास राज आर्थिक समानता का सिद्धांत देता है वही डंकल की अर्थव्यवस्था का सिद्धांत आर्थिक विषमता को जन्म देता है 🙏
डंकल की सोंच 1985 तक केवल यूरोपिय देशों में लागू थी, जो दो तरह के समाज बना रहा था एक पूंजीवादी दूसरे गरीब 🙏
यह इस प्रकार का सिद्धांत है, जो पूंजी का केंद्रीकरण करता है, और जिन राष्ट्रॉ के पास पूंजी अधिक होगी, उनके अहंकार भी बड़े होंगे 🙏 इस सिद्धांत में पूंजी सरकार के पास तो होती है परंतु आम जनता के पास नहीं होती है, 🙏 धन कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास आकर एकत्रित हो जाता है, आम जनता कंगाल हो जाती है 🙏 बहुराष्ट्रीय कंपनियां, राज्य सरकारों से ज्यादा ताकतवर हो जाती है 🙏
भारत अभी जातिवाद के कोढ़ से मुक्त भी नहीं हुआ था कि मनुवादी अर्थव्यवस्था के समान डंकल अर्थव्यवस्था को संपूर्ण विश्व पर लागू कर दिया गया 🙏 और सन 1991 में भारत में उत्पन्न हुए राजनीतिक हालातो के कारण भारत को भी इसका सदस्य होना पड़ा, और सन 1991 में नई औद्योगिक नीति भारत में लागू की गई 🙏
भारत में तो पहले ही पूंजी कुछ चंद्र लोगों के पास होती थी, जिनको जमींदार/ सामंती कहा जाता था, जिन्हे आम जनता को लूटने की खुला छूट थी, इस लूट में जातिगत आर्थिक शोषण की प्रमुख था 🙏 जाति-जाति का अंतर करके विभिन्न आधार पर जातियों की आर्थिक लूट की जाती थी 🙏
दूसरी तरफ पुरोहित और पंडित आम जनता से घंटा बज-बाया करते ताकि आम जनता विद्रोह ना करें और भाग्य भरोसे रहे 🙏
रविदास राज के सिद्धांत के आधार पर भक्त डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान में रविदास राज को स्थापित कर दिया, और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में बता दिया सरकार को क्या करना है! और मूल अधिकारों के अंतर्गत यह बता दिया कि सरकार को क्या नहीं करना है 🙏
सन 1935 में जब ब्रिटिश सरकार ने भारत के धर्म को मान्यता देने की व्यवस्था की तो बाबू मांगू राम के प्रयास से बाबा साहब रविदास राज की व्यवस्था से परिचित हुए 🙏 बाबा साहब ने संविधान बनाते समय विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन किया और उसमें रविदास राज की व्यवस्था को खोजा और उसके परिणामों का अध्ययन किया 🙏
परन्तु जो खुद को रविदासिया कहते थे अहंकार से ग्रस्त थे, अहंकार उनके शीर्ष पर था, एक अच्छी राज्य व्यवस्था का सिद्धांत होने के बावजूद सिखों के आपसी मतभेद होने के कारण बाबा साहब ने इस धर्म को ग्रहण नहीं किया 🙏
क्योंकि धर्म का पहला मूल है, मानव को मानसिक रूप से स्वस्थ करें, इसका सिद्धांत बाबा साहब को, बौद्ध धर्म में मिला 🙏 बाबा साहब बौद्ध धर्म की मात्रा एक ही पुस्तक लिख सके जोकि बौद्ध धर्म का संक्षिप्त इतिहास बताती है 🙏
बाबा साहब जीवित रहते तो अगली पुस्तक में बताते कि बौद्ध धर्म क्या है परंतु यह हो ना सका, और बाबा साहब की अकाल मृत्यु हो गई 🙏बौद्ध धर्म को समझने की जिम्मेदारी उन्होंने भिक्षुओं पर डाल दी🙏 परंतु यह (भिक्षु) अज्ञानी पुरोहितों और पंडितों के ही मौसेरे भाई निकले, गणेश के प्रतिमा को ना पूजकर बुद्ध की प्रतिमा को पूजने लगे🙏 क्योंकि ब्राह्मण कुल के अधिकतम लोग भिक्षु होने लगे 🙏 जिन्होंने बाबा साहब द्वारा पुनः स्थापित बौद्ध धर्म का सत्यानाश कर दिया 🙏
सचखंड डेरा बलला जो आज अपनी आयु 100 वर्ष बताता है, उस समय शैशव अवस्था में था, और आगे चलकर, इसके अपने ही संत इतने अहंकारी हो गए कि उन्होंने अपने डिसीप्लिनरी कमेटी को भंग कर दिया, और उस से पृथक हो गये 🙏
बिना नियंत्रण इकाई के कोई भी संगठन किसी भी समय अहंकारी हो सकता है, सचखंड डेरा बल्ला में यह साफ-साफ दिखाई देता है 🙏 और यह दोनों आपस में लड़ने लगे, जो आजकल हरि और सोहम के नाम से जाने जाते हैं 🙏
इसको भारतीय संविधान के परिपेक्ष में देखना चाहे तो आसानी से समझ सकते हैं, जिस प्रकार भारत में न्यायपालिका और कार्यपालिका है, और दोनों आपस में टकराते रहते हैं, परंतु भारतीय संविधान के कारण अभी भी दोनों का अस्तित्व बना हुआ है🙏 इसी प्रकार खुरालगढ़ आदबांशियों की न्यायपालिका है, और सचखंड डेरा बल्ला कार्यपालिका थी 🙏
आगामी पीढ़ी इस चीज को ना समझ पाए, इसलिए मूर्खतापूर्ण ढंग से सन 2010 में अखिल भारतीय रविदासिया धर्म बना दिया गया 🙏 इसमें आज भी कोई बौद्धिक कार्य नहीं हो रहा है,🙏 रविदास राज स्थापित करने का काम नहीं हो रहा है 🙏
ऑथर डंकल के आर्थिक सिद्धांत के विपरीत रविदास राज को कैसे स्थापित किया जाए इस पर कोई काम नहीं हो रहा है, बल्कि घंटा बजाना और आरती अरदास सिखाया जा रहा है🙏
विदेशी रविदास संगठन भी इस षड़यंत्र को समझने में सक्षम नहीं है 🙏 जबकि रविदास राज की स्थापना के लिए वे सचखंड डेरा बल्ला को भरपूर दान दे रहे हैं 🙏
कृपया नीचे के बिंदुओं को फिर से समझो
आर्थर डंकल (26 अगस्त 1932 - 8 जून 2005) एक स्विस ( पुर्तगाली में जन्मे) प्रशासक थे। उन्होंने 1980 और 1993 के बीच टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौते के महानिदेशक के रूप में कार्य किया। डंकल ने जिनेवा में ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से शिक्षा प्राप्त की।
व्याख्या-डंकल प्रस्ताव नाम का एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता हुआ था। वही डंकल प्रस्ताव वर्तमान में विश्व व्यापार संगठन के रूप में अस्तित्व में है। जबकि पहले डंकल प्रस्ताव को गैट के नाम से जाना जाता था, गैट वार्ता के आठवें दौर (उरुग्वे दौर) की वार्ता में मंतभेद उत्पन्न होने से 1990 में ब्रुसेल्स वार्ता भंग हो गई।
दिसंबर 1990 में अमेरिका एवं यूरोपीय समुदाय के मध्य उभरे कृषि सब्सिडी विवाद के कारण जब उरुग्वे वार्ता टूट गयी तब तत्कालीन गैट महानिदेशकऑर्थर डंकल द्वारा दिसंबर 1991 में प्रस्तावों की एक सूची प्रस्तुत की गयी, जिसे डंकल ड्राफ्ट या डंकल टेक्स्ट कहा गया।
डंकेल मसौदा पाठ - आर्थिक उपनिवेशवाद का प्रस्ताव अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा भारत सरकार द्वारा GATT वार्ता के 8वें दौर पर हस्ताक्षर करने के लिए दी गई सहमति पर कड़ी आपत्ति जताती है (डंकेल मसौदा)।
नगोजी ओकोन्जो-इवेला ने 1 मार्च 2021 को डब्ल्यूटीओ महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया। वह एक वैश्विक वित्त विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री और अंतर्राष्ट्रीय विकास पेशेवर हैं, जिन्हें एशिया, अफ्रीका, यूरोप, लैटिन अमेरिका और उत्तरी अमेरिका में काम करने का 40 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
इसी के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं 🙏
अर्थशास्त्री, समाजवादी अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏
मो. 9335122064
नोट :- उपरोक्त विषय की डिग्रियां तो मेरे पास है, परंतु उपाधियाँ स्वनिर्मित है 🙏 ताकि पाठक समझ सके उपरोक्त लेख में किन-किन विषयों को सम्मिलित किया गया 🙏
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