Monday, 19 August 2024

क्रीमी लेयर और आरक्षण कोटा


🐘 *बसपा का भारत बंद आंदोलन को पूर्ण समर्थन*

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🍁 *एससी एसटी वर्गों के आरक्षण में उपवर्गीयकरण व आरक्षण में क्रीमीलेयर लागू करने के दिनांक 01/08/24 के फैसले के विरुद्ध कल दिनांक 21/08/24 के भारत बंद को बहुजन समाज पार्टी द्वारा पूर्ण समर्थन प्राप्त हैं ।*


🍁 *इस भारत बंद में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आवाहन किया जाता है की* 👇

*1) मा.सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायधीशों की पीठ ने एससी एसटी वर्गों के आरक्षण में उपवर्गीयकरण व क्रीमीलेयर लागू करने का जो फैसला सुनाया हैं उसे संसद तुरंत रद्द किया जाए ।*

*2) केंद्र सरकार द्वारा संसद में विशेष सत्र बुलाकर संविधान संशोधन विधेयक बिल लाकर उसे भारी बहुमत से पास कर ओबीसी एससी एसटी वर्ग के आरक्षण को संविधान की 9वी सूचि में डालकर उसे पूर्णतः संविधानिक सुरक्षा प्रदान की जाए ।*

*3) न्यायधीशों की नियुक्ति में कॉलेजियम सिस्टम बंद कर न्यायधीशों की नियुक्ति के लिए आल इण्डिया जुडेशरी सर्विस का गठन करके उसमे संविधानिक आरक्षण लागू करके न्यायधीशों की नियुक्ति की जाये ।*

*4) जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी भागीदारी के तहत सम्पूर्ण देश में जातिनिहाय जनगणना की जाए ।*

*5) सभी देशवासियों को समान न्याय के तहत ओपन कैटेगिरी का भी वर्गीकरण करके उनपर भी क्रीमीलेयर की शर्त लगाईं जाए ।*

*6) देश में प्रायवेट सेक्टर में भी ओबीसी एससी एसटी वर्ग के लिए सक्तिपूर्ण आरक्षण लागू किया जाए ।*

*7) देश में जाती निर्मूलन के लिए TC में जाती का उल्लेख करना बंद किया जाए व जाती का दाखला बंद करके सिर्फ प्रवर्ग का ही प्रमाणपत्र दिया जाए ।*

*8) सम्पूर्ण देश में विभिन्न सरकारी संस्थानों विभागों में ओबीसी एससी एसटी के लिए आरक्षित सम्पूर्ण रिक्त पदों को सक्तिपूर्वक भरा जाए ।*

 *9) बीजेपी की NDA सरकार मा.सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायधीशों की पीठ ने एससी एसटी वर्गों के आरक्षण में उपवर्गीयकरण व क्रीमीलेयर लागू करने का जो फैसला सुनाया हैं उसे लागू ना करने का सिर्फ आश्वासन ही ना दे । जबकि संसद में विशेष सत्र बुलाकर उपरोक्त सभी मांगो को संविधान संशोधन बिल लाकर उसे पास करे ।*


🍁 *बहुजन समाज पार्टी नागपुर के सभी जिल्हा शहर विधानसभा सेक्टर बूथ स्तरीय सभी आजी माजी पदाधिकारियों कार्यकर्ताओ तथा आम जनता को सूचित किया जाता हैं की देश की सबसे बड़ी बहुजन नेता बीएसपी सुप्रीमों परमादरणीय बहन कुमारी मायावतीजी इनके दिशानिर्देशों से तथा केंद्रीय प्रभारी व राज्यसभा सांसद मा.रामजी गौतम व बहुजन समाज पार्टी महाराष्ट्र के सम्मानीय प्रदेशाध्यक्ष मा.एड.सुनील डोंगरे सर के मार्गदर्शन में व नागपुर जिल्हाध्यक्ष मा.योगेश लांजेवार के आदेशों से एससी एसटी वर्ग के आरक्षण में उपवर्गीकरण के विरुद्ध दलित आदिवासी बहुजनों के बुधवार दिनांक 21 अगस्त 2024 के भारत बंद को बहुजन समाज पार्टी का पूर्ण समर्थन प्राप्त हैं ।*


🍁 *अतः नागपुर ग्रामीण की तहसीलों में बसपा के बैनर और झंडे के साथ सामूहिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते हुवे माननीय महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबंधित तहसील के मा.तहसीलदार को निवेदन सौंपा जाए । साथ ही नागपुर शहर की अपनी अपनी विधानसभा में बसपा के बैनर और झंडे के साथ सामूहिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते हुवे फिर नागपुर के संविधान चौक में एकत्रित होकर वहा भी शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते हुवे जिल्हाधिकारी कार्यालय में जाकर माननीय महामहिम राष्ट्रपति के नाम मा.जिल्हाधिकारी को निवेदन दिया जाए ।*


🍁 *साथ ही पुरे देश के बसपा कार्यकर्ताओ से अपील हैं की सम्पूर्ण देश में भी शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों की तहसीलों एवं गावों में बसपा के बैनर और नीले झंडे के साथ शांतिपूर्वक प्रदर्शन करके महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबंधित जिल्हाधिकारी/ तहसीलदार को निवेदन सौंपा जाए ।*


🍁 *क्या हैं पूरा मामला ?* *जानने समझने के लिए पूरी पोस्ट पढ़े* 👇


🍁 *देश की सर्वोच्य अदालत मा. सुप्रीम कोर्ट में डॉ. न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय बेंच ने 01 /08 /24 को SC -ST वर्ग के आरक्षण के उपवर्गीकरण (Subclassification) के पक्ष में फैसला सुनाकर SC - ST वर्ग के आरक्षण के उपवर्गीकरण को मान्यता प्रदान की हैं और जिसको लेकर और भी बहोत सी बाते कही गई है ।*


🍁 *मा. सुप्रीम कोर्ट ने "दविंदर सिंह बनाम" पंजाब राज्य मामले में पारित आदेश के अनुसार टिपणी की है की अब राज्य सरकारे अनुसूचित जाती के रिज़र्वेशन कोटे में भी कोटा दे सकेगी । याने एससी एसटी कैटेगिरी में आनेवाली अलग-अलग जातियों में रिजर्वेशन कोटे का बटवारा किया जा सकेगा । सामान्य शब्दों में अब राज्य सरकारे अनुसूचित जाती व जनजाति के आरक्षण की सूचि के भीतर आरक्षण के उपवर्गीकरण के अंतर्गत नई सूचि बना सकेगा।*


🍁 *सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध सबसे पहले हम बहुजनों की सबसे बड़ी राष्ट्रीय नेता बीएसपी सुप्रीमों परम आदरणीय बहन कुमारी मायावतीजी ने दिनांक 04 अगस्त 2024 को व उसके बाद x (ट्विटर ) में कई पोस्ट करके और उसके बाद फिर दिनांक 10 अगस्त 2024 को पुनः प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर इस फैसले पर अपनी असहमति जताई हैं । माननीया बहनजी ने चिंता जताई की मा.सुप्रीम कोर्ट के इस गलत फैसले से अनेको समस्याएं सामने आने लगेगी ।*


🍁 *माननीया बहनजी ने बताया की मा.सुप्रीम कोर्ट ने 01 /08 /24 को एससी एसटी वर्ग के उपवर्गीकरण (subclassification)के पक्ष में फैसला सुनाकर बिस वर्ष पूर्व साल 5 नवंबर 2004 के पांच न्यायधीशों के संविधानिक पीठ द्वारा "ई.वी.चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य" मामले में दिए गए फैसले को ही पलट कर रख दिया हैं । जिसमे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जातियों के भीतर किये जानेवाले वर्गीकरण को मान्यता देने से इंकार कर दिया गया था. उस मामले में ये भी कहा गया था की "अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर उपवर्गीकरण नहीं किया जा सकता हैं । क्योकि वे एक ही समूह याने सामान वर्ग में आते हैं ।"* 


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2004 के अपने निर्णय में ये भी कहा था "क्योकि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगो ने जो अन्याय अत्याचार सहे है वे एक वर्ग और एक समूह के रूप में सहे हैं तथा ये एक बराबर का वर्ग हैं । जिसके भीतर किसी भी प्रकार का वर्गीकरण करना उचित नहीं होगा।"* 


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2004 के निर्णय में ये भी कहा था की "अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर किसी भी प्रकार का उपवर्गीकरण भारतीय संविधान के मूल भावना के विपरीत होगा।"*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट ने अपने वर्ष 2004 के इस फैसले के द्वारा समानता के अधिकार का उल्लंघन करने के कारण आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा पारित "आंध्रप्रदेश अनुसूचित जाती अधिनियम 2000 "को भी रद्द कर दिया था।*

 

🍁 *अपने साल 2004 के निर्णय में मा.सुप्रीम कोर्ट ने ये भी माना था की "ये वर्गीकरण इन जातियों के भीतर अलग अलग व्यवहार करके समानता के अधिकार का उल्लंघन करेगा।"*


🍁 *लेकिन इस वर्ष 2024 में मा.सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायधीशों की पीठ के दिनांक 01/08/2024 के निर्णय ने वर्ष 2004 के निर्णय को ही पलट के रख दिया हैं । जबकि इस निर्णय से अनेकों मतभेद उतपन्न होंगे।*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 01/08/2024 को निर्णय लेने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के बिच में ही मतभेद की स्थिति उतपन्न होगी। क्योकि अभी तक केवल संसद के पास किसी भी जाती को या जनजाति को अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति में सम्मिलित करने या बाहर करने का पावर हैं। जिसे माननीय राष्ट्रपति द्वारा अपने आदेशों से क्रियान्वित किया जाता हैं और जिसे बदलने का किसी भी राज्य सरकार को अधिकार नहीं हैं ।*


🍁 *परन्तु अब दिनांक 01/08/2024 के निर्णय के बाद जहा जो पार्टी सत्ता में होगी वो अपनी अपनी राजनीति के हिसाब से इस निर्णय का सही गलत फायदा उठाकर इस वर्गीकरण को ही अदलती-बदलती रहेगी।जिसके साथ साथ राज्य की सरकारे अपने अपने वोट बैंक के लिए मनचाही जातियों को आरक्षण का अनुचित लाभ देने का प्रयास करेगी ।*


🍁 *इस प्रकार से इस आदेश से ऐसी अनेको समस्याएं उतपन्न होगी जिसके कारण एक प्रकार से एससी व एसटी को मिल रहा आरक्षण ही समाप्त हो जाएगा। फिर इसका नतीजा ये होगा की अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति वर्ग आरक्षण से ही वंचित रह जाएगा और उनके हिस्से का आरक्षण भी किसी ना किसी रूप में सामान्य वर्ग को ही दे दिया जाएगा।*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनी दिनांक 01/08/2024 के इस निर्णय में इस बिंदु पर भी पर्याप्त विचार व्यक्त नहीं किये गए हैं की अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति के किन लोगो को क्रिमिलियर की श्रेणी में रखा जाएगा और ये तय करने का क्या मानक होगा की किन लोगो को अब आरक्षण की आवश्यकता नहीं हैं. इस कार्य के लिए अब राज्य सरकारों को राजनीति करने का पूरा मौक़ा मिल जाएगा ।*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद यदि अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति के भीतर उपवर्गीयकरण किया जाता हैं तो वर्तमान में लागू आरक्षण के अनुसार सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अनेकों पद रिक्त रह जायेगे। क्योकि जिन सिमित वर्ग की उपजातियों को आरक्षण दिया जाएगा उसमे वित्त सापेक्ष उतने अभियार्थी उपलब्ध नहीं हो पाएंगे और ऐसी स्थिति में बची हुई रिक्तिया अंत में सामान्य वर्ग के हिस्से में ही चली जायेगी । जिससे समूचे दलित व् आदिवासी समाज के पिछड़े हुवे लोगो को काफी नुकसान होगा और उनमे असंतोष की भावना उतपन्न होगी ।*


🍁 *इसके साथ साथ मा.सुप्रीम कोर्ट के दिनांक 01 ऑगस्ट 2024 के निर्णय अनुसार अब राज्य सरकारों को ये अधिकार होगा की वे संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के अंतर्गत माननीय महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा घोषित एससी व एसटी जातियों के समूह का उपवर्गीकरण करके आरक्षण का लाभ उन विशिष्ट कुछ जातियों को दे सकते है और ऐसा करते समय एससी व एसटी के समूह में बची हुई जातियों को उससे वंचित रख सकती हैं । क्योकि राज्य सरकार की निगाह में उन जातियों को अब आरक्षण की आवश्यकता नहीं हैं।क्योकि उन जातियों में से कुछ लोग सामाजिक तौरपर एससी व एसटी वर्ग की अन्य जातियों से बेहतर स्तर पर हैं । मा.सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस उपवर्गीयकरण के पक्ष में जो जोरदारी से दलील रखते समय बीजेपी द्वारा केंद्रशासित सरकार के Attorney General , Solicitor General, पंजाब में आम आदमी पार्टी के महाधिवक्ता, हरियाणा व चंडीगढ़ से अधिवक्ताओ द्वारा ये महत्वपूर्ण तथ्य नहीं रखा गया की वर्गीयकरण के तहत जिन जातियों को लाभ से वंचित कर दिया जाएगा उन जातियों में अभी भी लाखो व्यक्ति ऐसे होंगे जिनको आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया हैं और अब उन्हें अनुच्छेद 341 एवं 342 के तहत एससी व एसटी वर्ग के समूहों में होते हुवे भी हमेशा के लिए आरक्षण से वंचित रहना पडेगा । जो की किसी भी प्रकार से न्यायसंगत व उचित नहीं होगा ।*


🍁 *ये पूर्ण रूप से असंवैधानिक भी होगा तथा ये सभी उपवर्गीयकरण वाली जातिया आपस में ही कोर्ट कचहरी अदालतों में वर्षों तक लड़ते झगड़ते रहेंगे और अंत में ये सभी लोग फिर आरक्षण से वंचित रह जायेगे ।* 


🍁 *साथ ही मा.सुप्रीम कोर्ट के समक्ष "दविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य" मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र के वकीलों और राज्य सरकार के तरफ से भी सत्ताधारी दल के वकीलों ने ही अपना पक्ष रखा हैं। परन्तु माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिनांक 01/08/2024 के निर्णय पे अब तक किसी अन्य राज्यों की सरकारों ने अपना पक्ष नहीं रखा हैं । जिससे अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति के लोगो में मा.सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर काफी भ्रान्ति की स्थिति बनी हुई हैं।*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद जो की वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं तथा इनके साथ साथ बीजेपी ने केंद्र में अपनी सरकार की ओर से मा. Attorney General , Solicitor जनरल तथा कुछ राज्य सरकारों के वकीलों द्वारा उसमे भी खासकर आम आदमी पार्टी द्वारा शाषित पंजाब सरकार की ओर से पंजाब के एडवोकेट जनरल, हरियाणा एवं चंडीगढ़ में बीजेपी की ओर से उनके वकीलों द्वारा उपवर्गीयकरण के पक्ष में तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करते हुवे बाबासाहेब डॉ भीमराब आंबेडकर द्वारा संविधान सभा में लंबे विचारविमर्श के बाद बनाये गए आरक्षण के सिद्धांतों के साथ छेड़छाड़ करने का कार्य किया गया हैं जो की आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करने की मानसिकता के तहत उठाया गया गंभीर गलत कदम हैं ।*


 🍁 *साथ ही मा.सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 01/08/2024 को दिए गए निर्णय के बाद अनुसूचित जाती एवं जनजाति के लोगो के भीतर आपसी द्वेष की भावना बढ़ेगी । जिससे समाज में विभाजन की भावना को और अधिक बढ़ावा मिलेगा । जो की राष्ट्र की एकता और अखंडता पर करारा प्रहार करने जैसा होगा । जबकि "अनुसूचित जाती व जनजाति कोई साधारण जाती नहीं हैं । ये केवल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के अधिसूचना के जरिये अस्तित्व में आई हैं और ये अनुसूचित जातियों व जनजातियो का एक मिश्रण हैं और एक बार अधिसूचित होने के बाद फिर ये समरूप समूह बन जाता हैं।"*


🍁 *साथ ही राज्यों की सरकारों के द्वारा ये उपवर्गीयकरण अनुच्छेद 341 एवं 342 के तहत मा.माननीय राष्ट्रपतिजी के अधिसूचना का उल्लंघन होने के साथ साथ ये पूर्ण रूप से असंवैधानिक भी होगा ।क्योकि कोई भी राज्य सरकार मा.माननीय राष्ट्रपतिजी के पावर को खत्म नहीं कर सकती हैं। क्योकि ये संविधान के अनुच्छेद 341 भाग 2 एवं 342 का उल्लंघन होगा।*

 

🍁 *साथ ही इससे ये हमेशा ही खतरा बना रहेगा की अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति को दिया जाने वाला आरक्षण ही ख़त्म हो जाएगा। जबकि अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगो के वर्गीयकरण का एकमात्र मुलभुत आधार "सामाजिक गैरबराबरी अर्थात छुवाछुत व जातपात" रहा हैं। ऐतिहासिक तोर पर "सामाजिक गैरबराबरी की वजह से ही आरक्षण दिया गया है।" तो ऐसे में जाती के आधार पर प्रताड़ना झेलने वाले समुदाय के बिच आरक्षण का बटवारा करना पूर्ण रूप से अनुचित असंवैधानिक व गलत हैं। क्योकि "दलित व आदिवासियों के आरक्षण का उद्देश्य ही जातपात और छुवाछुत की बुराइयों को दूर करना था।"*


🍁 *साथ ही दिनांक 01/08/2024 के मा.सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार अब राज्य सरकारे अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति का उपवर्गीयकरण कर सकती है जो की असंवैधानिक है अनुचित हैं। इतना ही नहीं बल्कि अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति समुदाय का ये उपवर्गीयकरण जिसे मा.सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है उसे अब राजनैतिक दलों द्वारा राजनैतिक हथियार के रूप में उपयोग किया जाएगा। जहा एक तरफ राजनैतिक दल अपने राजनैतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कुछ अनुसूचित जाती व कुछ अनुसूचित जनजाति के लोगो को हाशिये पर धकेल देंगे और उनके लिए पक्षपात का माहौल बनाकर अपना उद्देश्य पूरा करेंगे। वही दूसरी तरफ अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति के इस उपवर्गीयकरण के कारण काफी पद रिक्त रह जायेगे और आगे चलकर उन पदों के अनारक्षित श्रेणी में तबदीली हो जाने के प्रबल संभावनाएं होगी ।*


🍁 *अतः जिस मुख्य उद्देश्य के लिए परमपूज्य बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर जी ने संविधानिक अधिकार के तहत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण दिया था उसे अब एक प्रकार से प्रभावहीन बना दिया जाएगा अर्थात ख़त्म कर दिया जाएगा ।*

 

🍁 *वैसे भी खासकर बीजेपी कांग्रेस व समाजवादी पार्टी आदि हमेशा से ही एससी एसटी को मिल रहे आरक्षण के विरुद्ध रहे हैं और इसलिए इनके वकीलों ने उपवर्गीयकरण की काफी जोरदारी से सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी दलीले भी रखी हैं और इसे ख़त्म करने की सिफारिश में ये बीजेपी कांग्रेस समाजवादी जैसी पार्टिया हमेशा प्रयासरत रहती है।*


🍁 *समाजवादी पार्टी ने तो संसद के भीतर ही पदोन्नति में आरक्षण संबंधी बिल को बीजेपी और कांग्रेस की मिली भगत से फाड़ दिया था । जिसे आज तक केंद्र सरकार संसद में दुबारा नहीं ला सकी हैं। जिसकी वजह से मा.सुप्रीम कोर्ट ने "नागराज" के निर्णय के तहत आज एससी व एसटी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण संबंधी लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। तथा अब इसी प्रकार से दिनांक 01/08/2024 के निर्णय के तहत हमेशा के लिए ही एससी व एसटी वर्ग को आरक्षण से वंचित कर दिया जाएगा। इससे फिर बीजेपी कांग्रेस व समाजवादी पार्टी आदि को आरक्षण ख़त्म करने के लिए संविधान बदलने की भी जरुरत नहीं पड़ेगी।*


🍁 *ये ही कारण है की इन पार्टियों ने केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की तरफ से उचित पैरवी भी नहीं की हैं और क़ाफी कुछ उपवर्गीयकरण के पक्ष में दलीले रखी है। जिससे मौजूदा चल रहे आरक्षण के विरुध्द निर्णय आया हैं।*


🍁 *यदि बीजेपी का NDA गठबंधन व इंडिया अलायंस के सभी पार्टियों की नियत ठीक होती और वो एससी व एसटी को मिल रहे आरक्षण में छेड़छाड़ आदि करते हुवे उसे ख़त्म नहीं करना चाहते तो फिर परमादरणीय बहन कुमारी ने सभी पार्टियों से अपील करि की है की ये सभी पार्टिया इस विषय पर इस मुद्दे पर देश के समूचे एससी व एसटी समाज के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करे और इसी चल रहे संसद सत्र में संविधान में उचित संशोधन लाकर ये स्पष्ट करे की अनुच्छेद 341 व अनुच्छेद 342 के तहत माननीय राष्ट्रपति द्वारा घोषित एससी व एसटी जातियों के संबंध में भविष्य में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ व उपवर्गीयकरण करने का अधिकार किसी को भी नहीं होगा। तथा इन सभी जातियों को आरक्षण प्राप्त होने के लिए एक समूह के रूप में ही देखा जाएगा। ये इनको संविधान में उचित संशोधन विधेयक लाकर उसे पास करना चाहिए। ये सब लाकर इनको संविधान की 9वी अनुसूची में इसको शामिल करना चाहिए ताकि फिर भविष्य में कभी भी जो एससी एसटी का जो आरक्षण हैं, उसके साथ किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ उपवर्गीयकरण आदि ना हो सके ।*


🍁 *हालांकि ये जो नौबत आई है ये नौबत नहीं आती यदि इसको बहोत पहले ही संसद द्वारा संविधान की 9वी सूचि में डाल दिया जाता ।*


🍁 *बहुजन समाज पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा में भी इस मामले को अनेको बार उठाया हैं। लेकिन पूरी साजिश के तहत हर बार इसे ताल दिया गया । क्योकि जब बीजेपी पावर में रहती है तो वो भी उसको टालमटोल करती हैं और जब कांग्रेस पावर में रहती हैं तो वो भी इस मामले को टालमटोल कर देती हैं।*

 

🍁 *इससे स्पष्ट हैं की चाहे कांग्रेस हो बीजेपी हो या अन्य पार्टिया हो इनकी एससी एसटी के मामले में इनकी विकृत जातिवादी सोच कतई बदली नहीं हैं। परमादरणीय बहनजी ने कहा हैं की मुझे नहीं लगता है ऐसा कुछ ये पार्टिया कर पाएगी । उन्होंने आगे कहा की इसके साथ साथ मेरी इस देश की सभी अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति वर्गों के लोगो से ये ख़ास अपील भी हैं की इस समय इस निर्णय से उतपन्न स्थिति को अपने व अपने बच्चो के भविष्यों तथा अपने संविधानिक अधिकारों को नुकसान होने से बचाने के उद्देश्य से तथा परमपूज्य बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर के द्वारा अपने अथक प्रयासों से इन वर्गों को जो संविधानिक अधिकार दिलाये गए हैं तो उन्हें खत्म होने से बचाने के लिए इस स्थिति को अपने लिए एक "आपातकालीन की स्थिति" समझते हुवे हमे एकजुट होना पडेगा । तथा मात्र अपने अपने राजनैतिक स्वार्थ व दबाव से प्रेरित व भयभीत ना होकर यहाँ सभी राजनैतिक पार्टियों के ऊपर दबाव डालकर उपवर्गीयकरण के विरुद्ध संविधानिक संशोधन लाने के लिए इन्हें मजबूर करना पडेगा ।*


🍁 *परमादरणीय बहन कुमारी मायावतीजी ने इस खास अपील के साथ ही मा.सुप्रीम कोर्ट से भी पुरजोर अपील करि की वे देश में एससी व एसटी वर्गों के हितो में अपने दिनांक 01/08/2024 को दिए गए फैसले पर खुद ही पुनर्विचार करके इसमें मेरी इन सब बातो को ख़ास ध्यान में रखते हुवे जरुरी बदलाव लाये, तबदीली लाये, वरना इन वर्गों में से आरक्षण के पात्र लोगो को बड़ा भारी नुकसान होगा ।*


🍁 *परम आदरणीय बहन कुमारी मायावतीजी ने मा.सुप्रीम कोर्ट से इस ख़ास अपील के साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुवे कहा की बीजेपी कांग्रेस द्वारा नियुक्त वकीलों के कारण ही मा.सुप्रीम कोर्ट को ये उपवर्गीयकरण का आदेश देने में आसानी हुई हैं । इससे इनका इंटेंशन साफ़ दिख रहा है की बीजेपी कांग्रेस स्वयं एससी एसटी वर्ग के आरक्षण को खुद खत्म ना कर मा.सुप्रीम कोर्ट के न्यायधिशो के फैसलों के जरिये खत्म करना चाहते हैं और इसमें ये लोग काफी हद तक कामयाब भी हो गए हैं और बहुजन समाज पार्टी इस फैसले को लेकर बहोत चिंतित हैं ।*


🍁 *परम आदरणीय बहन कुमारी मायावतीजी ने बताया की जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब एससी एसटी वर्ग के पदोन्नति में आरक्षण मामला जब प्रभावहीन हो गया था तो तब हमने इसे प्रभावशाली बनाने के लिए कांग्रेस पे दबाव बनाकर एससी एसटी वर्ग के पदोन्नति में आरक्षण के संशोधन विधेयक बिल को संसद में लाया ।तब कांग्रेस बीजेपी नहीं चाहती थी की एससी एसटी वर्ग के लोगो को पदोन्नति में आरक्षण मिले इसलिए कांग्रेस बीजेपी ने खुद कुछ ना कर सपा के जरिये भरी संसद में इस पदोन्नति में आरक्षण के बिल को फाड़ा और इस बिल को पास नहीं होने दिया और अभी तक ये बिल पास नहीं हो पा रहा हैं ।*

 

🍁 *माननीया बहन कुमारी मायावतीजी ने बताया की आरक्षण के कारण एससी एसटी वर्ग के मुश्किल से 10% लोगो की हालत ठीक हुई होगी लेकिन बाकी 90% लोगो की हालत तो जस की तस बनीं हुई हैं।*


🍁 *ऊपर से जिन 9-10 % लोगो की हालत सुधरी भी होगी लेकिन सामान्य जनरल लोग तो फिर भी उनको पुरानी नजरो से ही देखते हैं । उनके प्रति इनकी जातिवादी मानसिकता में सुधार कहा हुवा हैं।*


🍁 *ऊपर से माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यदि उन जातियों को निकाल दिया जाएगा तो जो 90% लोग जिनको अभी आरक्षण की जरूरत हैं, वो तो और ज्यादा पिछड़ जायेगे। क्योकि इस निर्णय के अनुसार उनको आरक्षण अब मिलेगा ही नहीं ।*

 

🍁 *बीजेपी कांग्रेस चाहे तो संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदल सकती हैं। "सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदलने का पावर संसद में हैं।"*


🍁 *गर बीजेपी की NDA सरकार ऐसा नहीं करती और ये संविधान संशोधन बिल लाने के लिए उसे संविधान की 9वी सूचि में लाने के लिए इंडिया गठबंधन के कांग्रेस सपा ऐसा करने को बीजेपी की NDA सरकार को मजबूर नहीं करते है तो एससी एसटी और ओबीसी वर्ग ने समझ जाना चाहिए की बीजेपी कांग्रेस समाजवादी पार्टियों की एससी एसटी ओबीसी वर्ग के प्रति नियत साफ़ नहीं हैं।*


🍁 *जबसे मा.सुप्रीम कोर्ट का एससी एसटी वर्ग के विरुद्ध उनके आरक्षण में उपवर्गीयकरण और क्रीमीलेयर का फैसला आया है तबसे इस मुद्दे को लेकर संविधान की किताब दिखा दिखा कर बीजेपी द्वारा संविधान बदलने का डर दिखा–दिखा कर जिस कांग्रेस सपा ने संविधान बचाने के लिए वोट माँगा था। वो ही कांग्रेस सपा इस मुद्दे पर मुँह में टाला लगाकर बैठी है । इस बात को हमारे उन उच्चशिक्षित लेकिन भावनिक लोगो ने समझने की जरुरत है जिन्होंने कांग्रेस सपा को भर भर के वोट दिया हैं ।*


🍁 *साथियों बीजेपी कांग्रेस ये अलग ना होकर एक ही पार्टिया हैं । दोनों चोर चोर चचेरे फुफेरे मौसेरे भाई हैं । इस बात को हमे समझकर अब तो भी भविष्य में बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस सपा को भी अपने वोटिंग पावर का सही उपयोग करके करारा जवाब देने की जरुरत आन पड़ी हैं...* 


✍️

*–मा.अभिलेश वाहाने*

*बसपा नागपुर जिल्हा सचिव व पश्चिम नागपुर विधानसभा इंचार्ज*

8806088007

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