Friday, 20 September 2024

13 से 19 सितंबर की पोस्ट

 [13/09, 9:56 am] kamleshmittra: 🌹निंदा रस (संशोधित)👏


सूचना दिनांक 12 सितंबर 2024


मैं 2019 से एक वाक्य अक्सर सुनता रहा हूं 🙏🌹


"वह आरएसएस का एजेंट है, वह भाजपा का आदमी है" सरकारी कमेटी का कौन-कौन आदमी आरएसएस का एजेंट है, कौन-कौन आदमी भाजपा का एजेंट है आदि 🌹


आज मुझे एक सूचना प्राप्त हुई जिसमें मुझे भी आरएसएस का आदमी कह दिया गया 😂


वह सेंट्रल कमेटी के पूर्व अध्यक्ष बताए जाते हैं, मैंने कभी उनको नहीं देखा, जहां तक मुझे याद आता है हमारी उनकी कभी बात नहीं हुई है 🙏


बड़ा आसान है मांस की जुबान को उठाओ और दे मारो 🙏🌹


मैं पतंजलि योगपीठ में रहा हूं, पतंजलि योगपीठ पर आरएसएस का असर है, बाबा रामदेव और आरएसएस प्रमुख की बातचीत होती रहती है🙏

अशोक सिंघल जब दिल्ली आए थे, तब बाबा रामदेव से उनकी भेंट हुई, संयोग से उस समय मैं दिल्ली में था, यह वार्ता पतंजलि योगपीठ के फार्म हाउस पर हुई थी 🙏


विषय उठता है आरएसएस कहां नहीं है ?


जहां-जहां होरिजेंटल धर्म है, वहां वहां आरएसएस नहीं है 🙏शेष सभी जगह पर आरएसएस है 🌹


आरएसएस तुम्हारे दिमाग में है, आरएसएस तुम्हारे विचारधारा में है, अगर तुम वर्टिकल धर्म का पालन करते हो, अगर तुम वर्टिकल विचारधारा की पुस्तकों का समर्थन करते हो 🙏


आप किसके साथ खड़े हो किसके साथ उठते-बैठते हो, यह बिल्कुल ही महत्व नहीं रखता है 🙏 आरएसएस एक विचारधारा है 🙏 वर्टिकल विचारधारा, समाज को वर्टिकल रूप से स्थापित कर देने की विचारधारा है 🙏


मा. काशीराम जी ने इस बात को बहुत पहले समझाया था🙏


माननीय काशीराम होरिजेंटल विचारधारा के व्यक्ति हैं, जबकि बसपा प्रमुख मायावती वर्टिकल विचारधारा की व्यक्ति हैं🙏


इस हिसाब से मायावती आरएसएस की व्यक्ति है, अन्य लोग इसी प्रकार से जाने जा सकते हैं 🙏कौन किसका आदमी है😂😭


केंद्रीय कमेटी के पूर्व अध्यक्ष से मिलने के बाद ही पता लगेगा वह किस विचारधारा के व्यक्ति हैं🙏 परंतु एक बात तो साफ हो गई, अफवाह फैलाओ, आरएसएस की विचारधारा के व्यक्तियों का यह सूत्र वचन है 🙏


केंद्रीय कमेटी के पूर्व अध्यक्ष के संपर्क में लीगल नोटिस के कई वादी है, और वह तुगलकाबाद रविदास मंदिर मिशन को छति पहुंच रहे हैं🙏 ऐसा प्रतीत होता है वह अपनी नाकामयाबी पर पछता रहे है 🙏 जब उनके पास करने का समय था तब उन्होंने कुछ किया नहीं, अब वह क्या कर लेंगे? 😂😭


मैं इस विषय को विधिक गंभीरता से ले सकता हूं, यदि एक भी व्यक्ति मुझे गवाही के रूप में मिल गया 🙏


अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏9335122064

[14/09, 10:41 am] kamleshmittra: श्रीमान शाशी जी,


कबीर का वचन है :-


पोथी पढ़ी पढ़ी जग मुआ पंडित हुआ ना कोई,


ढाई अक्षर प्रेम का पढ़े से पंडित होए 🙏


परम श्रद्धेय कबीर जी ने यह वचन पंडितों के साथ शास्त्रार्थ में कहे थे, जब वेदों को ब्रह्म वचन कहते हुए, वह अपना पांडित्व दिख रहे थे🙏


संत कबीर ने हिंदी शब्द का मात्र एक शब्द उठाकर पंडितों को धो दिया "प्रेम" "प्यार"🙏


संपूर्ण जगत केवल इसी पर आधारित है 🙏


पराग कणों का एक जगह से उठकर दूसरी जगह जाना प्रेम का प्रतीक है, पुरुष का उठकर स्त्री के पास जाना प्रेम का प्रतीक है, चंद्रमा का पृथ्वी का चक्कर लगाना प्रेम का प्रतीक है, पृथ्वी का सूर्य का चक्कर लगाना प्रेम का प्रतीक है 🙏आदि 


वैज्ञानिक भाषा में जिसको सासंजक बल और आसंजक बल कहते हैं यह सब प्रेम का प्रतीक है🙏प्यार का ही प्रतिक है 🌹


समान अणुओ के बीच उत्पन्न होने वाला आकर्षण बल को सासंजक बल कहते हैं, असमान अणुओ के बीच उत्पन्न होने वाले आकर्षक बल को आसंजक बल कहते हैं 🙏


मनुष्य का शरीर हो, या वनस्पतियों का शरीर हो, या पत्थर, पहाड़ और पानी हो, आज तो वैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध हो चुका है कि सभी परमाणुओं के जोड़ हैं 🙏 और उनके बीच ससंजक बल और आसंजक बल लगता है 🙏


अग्नि तो फोटान का जोड़ है, परंतु अणुओ से बने सूखे पत्ते की और आकर्षित हो जाती है 🙏 यह प्रेम का प्रतीक है, और एक दूसरे को जलाकर सब नष्ट कर देती है, फिर ना अग्नि रहती है ना सूखे पत्ते😂 केवल कुछ राख बचती है 🙏 राख फिर खाद बनाकर किसी नए पौधे को जन्म देती है🙏 जन्म देना फिर प्रेम का प्रतीक है🌹


इसी प्रकार स्त्री पुरुष का प्रेम जब परवा चढ़ता है तो केवल कुछ रस टपकता हैं एक दूसरे से मिलने को, यह आसंजक बल है 🙏 सृष्टि के अनुक्रम में जैसे उनका मिलाया जाता है, मिले और बिछड़ गए 🙏 मैं मात्र भारतीय परिवार परंपरा की बात नहीं कर रहा हूँ, मैं संपूर्ण प्राणी जगत की बात कर रहा हूं😍


स्त्री पुरुष अलग हो जाते हैं, इतने अलग हो जाते हैं कि फिर कभी नहीं मिलते, परंतु संसार चल पड़ता है🙏 मनुष्य का वनस्पतियों से प्रेम, पशुओं से प्रेम, पत्थर और पहाड़ से प्रेम, चांद से प्रेम, खुद के होने से प्रेम, अपने अंगों से प्रेम, सब कुछ तो ससंजक बल अथवा आसंजक बल का आकर्षण है😂


इस संपूर्ण गाथा को कबीर ने ढाई अक्षर में पिरो दिया 🙏 सोचो कबीर का ज्ञान किस उच्च कोटि का है, संपूर्ण ज्ञान को शब्दों में पिरो पाना अत्यंत कठिन काम होता है शब्दों की सीमाएं हैं, ज्ञान अनंत है 🙏


यदि कबीर अपने उपरोक्त छंद की व्याख्या करते तो ऐसे ही करते🙏


 इन सभी ज्ञान पूर्ण बातों के आगे, पंडितों की पोथी किसी काम की नहीं जो जातिवाद से भरी हुई है🙏 मानव मानव में भेद करती है, प्रेम की कोई बात नहीं करती है 🙏


 जिसको मैं अपनी भाषा में कहता हूं, पंडितों की पोथीयां केवल वर्टिकल धर्म की बात करती हैं, कबीर का उपरोक्त छंद केवल होरिजेंटल धर्म की बात करता है🙏 एक दूसरे का हो जानने की बात करता है, प्रेम की बात करता है, प्यार की बात करता है, ग्रामर की भाषा में इसी को ढाई अक्षर कहते हैं क्योंकि इसमें दो अक्षर और आधा अक्षर मिला हुआ है🙏


मुझे लगता है आपकी जिज्ञासा के संदर्भ में लगभग सारी जानकारी दे दी गई है, यदि जानकारी मांगी गई है तो, अहंकार की संतुष्टि नहीं की जा सकती है, अहंकार नए अहंकार खोज लेता है, और कभी खुद को संतुष्ट नहीं होने देता है 😂


 साधक कमलेश कुमार मित्रा 👏9335122064


नोट :- आप लोगों के चर्चा में हस्तक्षेप करने के लिए खेद है, परंतु आप लोगों की बातें केवल वाणी विलास होकर ना रह जाए इसलिए मुझे हस्तक्षेप करना पड़ा👏

[15/09, 9:42 am] kamleshmittra: 🙏 हमारे दु:ख का अंत क्यों नहीं होता है 😭


अमृतवाणी के शबद विभिन्न रागों में है 🙏


और उन के साथ प्रयोग होने वाले वाद्य यंत्र अलग-अलग होंगे 🙏


मैं उन रागो में प्रयोग होने वाले वाद्य यंत्र में कोई अंतर नहीं पा रहा हूं, रागों की त्वरा में भी कोई अंतर दिखाई नहीं देता है 🙏


मेरे शरीर में उत्पन्न होने वाली तरंगें रागो को अलग-अलग नहीं देख पा रही हैं 🙏


मुझे ऐसा प्रतीत होता है, रागो को बहुत अधिक दूषित कर दिया गया है🙏


10 सितंबर 2024 को मैं बंगला साहब गुरुद्वारा में था, तुगलकाबाद रविदास मंदिर से निकलने के बाद, रात लगभग 8:00 बजे तक मैं बंगला साहब में ही था 🙏 रागो को अलग-अलग परखने की कोशिश कर रहा था🙏


शाम को मैं ग्रंथि साहब से मिला, जब इस विषय की मैंने उनसे चर्चा की तो उन्होंने बताया कि रागो के विषय में तो केवल रागी बतायेगा 🙏 वह तो ग्रंथि है 🌹


रागी के पीछे ग्रंथि बैठता हैं, रागी जब मदमस्त होकर गाता है, तो वह ग्रंथ के शब्दों का ध्यान नहीं रखता है, उससे कोई चूक ना हो जाए, इसलिए ग्रंथि पीछे बैठता है🙏क्योंकि आम आदमी की समझ में तो केवल शबद आते हैं, शबद ठीक रहने चाहिए🙏


 मैं तो बंगला साहब गया था अमृतवाणी का गुरु ग्रंथ साहब से मिलान करने, परंतु यह खोज का नया विषय मिल गया है 🙏


जिसे आप लोग धर्म के रूप में धारण करके, दुख से विमुक्त होना चाहते हो, जिस भाषा में गुरु का आवाहन करते हो, चित्त की वह भाषा अनंत में विद्यमान आपके गुरु तक पहुंचती भी है, कभी इसको भी जानने का प्रयास करो 😂


विज्ञान का नियम है, ऊर्जा कभी नष्ट नहीं होती है, त्वरा में परिवर्तन होता रहता है🙏

यदि संत शिरोमणि गुरु रविदास की कृपा आप पर नहीं हो रही है, आपका सामाजिक संगठन सुधार नहीं रहा है, आपके घर परिवार में शांति नहीं आ रही है, कहीं कोई बड़ी चूक हो रही है 🙏 जागो जागने का वक्त आ गया🌹😂


साधक कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[15/09, 8:28 pm] kamleshmittra: राग सिखाये तो जाते हैं परन्तु 8-15 साल के सिक्ख बच्चो को, 5 साल का रेजिडेंशियल कोर्स है 🙏


गुरुद्वारा माता सुंदरी जी में उम्र का कोई बाउंडेशन नहीं है 🙏 केवल गुरबाणी में आस्था होनी चाहिए, गुरु ग्रंथ साहब में आस्था होना चाहिए 🙏🌹


 आज का शोध निष्कर्ष🙏


साधक कमलेश मित्रा @9335122064

[16/09, 11:14 am] kamleshmittra: 🌹 राग सूचना 16 सितंबर 2024 ( नवीन शोध कार्य )


1. सिरी रागु 

2. रागु गउड़ी 

        a. रागु गउड़ी बैरागणि

         b.रागु गउड़ी पुरवी 

3. रागु आसा 

4. रागु गुजरी 

5. रागु सोरठि 

6. रागु घनासरी 

7. रागु जैतसरी 

8. रागु सूही 

9. रागु बिलावलु 

10. रागु गोंड 

11. रागु रामकली 

12. रागु मारु 

13. रागु केदार 

14. रागु भैरउ 

15. रागु बसंत 

16. रागु मलार 


उपरोक्त 16 राग और 02 उपराग में गाये जाने वाले अमृतवाणी के 40 शबद 🙏


 जबकि गुरु ग्रंथ साहब में लगभग 5000 शबद 31 राग सहित 64 उपराग सहित कई महल है,, पूरा ग्रंथ लगभग डेढ़ हजार पेज का है 🙏 पूरा अध्ययन करके मैं एक बार फिर लिखूंगा 🙏 अब आगे की बात करते हैं👏



कोई आर्केस्ट्रा गाने वाला इन रागो को नहीं गा सकता है 🙏 राग शरीर को कम्पित करते हैं🙏 राग की उत्पत्ति शरीर के कंपन से होती है🙏 परंतु अब बहुत कम लोग हैं जो ऐसा कर पाते हैं, गुरुद्वारा माता सुंदरी जी में भी जब मुख्य रागी से मेरी लगभग 2 घंटे चर्चा हुई, तब उन्होंने भी पृथक रूप से रागो को निकालने में असमर्थता व्यक्त की,


 क्योंकि परंपरा के अनुसार वह उसे वाद्य यंत्रों के साथ करते हैं, और राग उस्ताद के रूप में गुरु ग्रंथ साहब का प्रयोग करते हैं 🙏 


उन्होंने मेरा स्वागत किया जब भी मैं गुरु ग्रंथ साहब को राग के साथ सीखना चाहूं, मैं वहाँ जा सकता हूं🙏 इसके साथी ही चर्चा समाप्त हो गयी 🙏🌹


यदि पुराने गानों के जानकार लोग हैं तो उन्हें पता होगा, लता मंगेशकर, किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, मुकेश हो या अन्य कोई पुराने गायक🙏 सबको इस बात की ट्रेनिंग होती थी कि वह रागो पर गाने के शब्दों को चढ़ा सके, अथवा नहीं चढ़ा सके है 🙏


इसलिए पहले राग बनाया जाता था, और उसके ऊपर गाने को चढ़ाया जाता था🙏


 जो भी राग बनाया जाता था वह फिल्म किस सिचुएशन के अनुसार होता था, अर्थात घटना रात्रि की है, घटना सुबह की है, घटना प्रेम की है, घटना व्यंग्य की है, आदि सिचुएशन को देखकर राग बनाए जाते थे🙏 उसके ऊपर गाने को चढ़ाया जाता था🙏


 राग को बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाता था, क्या वह श्रोता के शरीर में कंपन उत्पन्न कर रहा है, वारिस के मौसम के लिए बनाया गया संगीत, क्या कृत्रिम रूप से श्रोता को बारिश का एहसास दिला पता है🙏 पहाड़ों की वादियों में गाए जाने वाले गीत, राग पहाड़ी पर आधारित होते थे🙏आदि 🙏


इसी प्रकार प्रभु परमात्मा आदि की अरदास के लिए बनाए जाने वाले राग एक विशेष प्रकृति के होते हैं, स्वयं से की गई प्रार्थना के लिए किसी राग का मोहताज नहीं होना पड़ता, शरीर में स्वत: कंपित होता है, और वह ब्रह्मांड को हिला देने के लिए काफी होता है🙏


आज भी आप हिंदू मंदिरों में जाएं, और सिखों के गुरुद्वारे में जाएं, यदि आप संप्रदायवाद के चश्मे से नहीं देखते हैं तो आपको गुरुद्वारे में बैठकर ज्यादा शांति मिलेगी 🙏


आपको चर्च में बैठकर ज्यादा शांति मिलेगी, चर्च में तो केवल शून्यता होती है, एक निस्तव्यता जो अंदर तक झक-झोर जाती है 🙏


उस असीम शांति में, चित्तधारा के विकार पिघलने लगते हैं और दु:ख से बाहर निकलने का रास्ता मिलने लगता है 🙏


चित्तधारा पर पहले ही बहुत शोर है, एक क्षण में दर्जनों विचार आते हैं और निकल जाते हैं, अगर स्थाई हो जाए तो वह मनुष्य पागल हो जाता है 🙏


इन सभी बातों का शोध कार्य तब आरंभ हुआ था जब मैं नैनीताल हाई कोर्ट एक केस के सिलसिले में गया था बात सन 2012 की है, नैनी झील के निकट एक आर्य समाज मंदिर में रुका था🙏 उस मंदिर में रुकने की एक ही शर्त थी कि सुबह 5 बजे यज्ञ में सम्मिलित होना होगा 🙏 पतंजलि योगपीठ में रहने के कारण यह मेरे लिए समस्या नहीं थी क्योंकि पतंजलि योगपीठ यज्ञ होता रहता था, और मैंने उसके लिए हामी भर दी 🙏 परंतु सुबह में लेट हो गया और थोड़ी देर से पहुंचा, वह अकेला ही हवन कुंड पर चारों सीटों पर उछाल-उछाल कर माइक से प्रवचन कर रहा था 😂 उस हवन कुंड के अगल-बगल अन्य कोई नहीं था🙏 और माइक लगाकर अगल-बगल पड़ोसियों को परेशान कर रहा था😂


ऐसे ही मेरे साथ तब हुआ जब मैं भोगल के रविदास मंदिर में रह रहा था, पहले तो कुछ लोग आकर बैठते अरदास करते घंटी और शंख बजाते थे, ढोलक बजाते थे, कुछ देर मेरे अध्ययन कार्य डिस्टर्ब होता था परंतु सब ठीक चल रहा था🙏


उसके बाद एक दिन म्यूजिक सिस्टम लगा दिया गया, घंटी तबला ढोलक यांत्रिक रूप से बजता था 🙏 और इतनी तेज बजता था कि उसके अगल-बगल किसी का खड़ा रहना संभव नहीं था🙏


परिणाम भी कुछ ऐसा ही हुआ, एक बार मैंने देखा वहां कोई नहीं था, ढोलक घंटी तबला बहुत जोर से बज रहा था, कोई इलेक्ट्रिक स्विच ऑन करके चला गया था 😂


भाई मेरे यह धार्मिकता नहीं है, इससे संत शिरोमणि गुरु रविदास की कोई कृपा नहीं मिलने वाली है 🙏


बुद्धि वादी लोगों ने अमृतवाणी को बुद्धि के आधार पर भले ही अलग कर लिया हो, परंतु गुरु ग्रंथ साहिब में महल है, राग को शरीर में पकने में समय लगता है🙏 जब कोई राग शरीर में पक जाता है उसे एक महल कहते हैं🙏


 परंतु आपने अमृतवाणी को अलग करके, अधपकी सब्जी को खाने का काम कर रहे हो, आपका और आपके समाज का स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा 😂 और ऐसा हो भी रहा है 🙏


राग विहीन शबद का उच्चारण उसी प्रकार हैं जैसे बिना मात्रा की जानकारी के किसी सब्जी में मसाले मिला दिए गए हैं 😂 रागो पके बिना उतार लेना अधपकी की सब्जी खाने के समान है 🙏


जो व्यक्ति इनकी जानकारी रखता है, और अपने शरीर से राग उत्पन्न करने में सक्षम है वही आरती और अरदास कर सकता है😂


 स्वामी ईश्वर दास जी ने आदधर्म ग्रंथ की रचना करके ब्राह्मणों की कथाओं को इतिहास बना दिया है🙏 इससे बाबू मांगू राम के आंदोलन को बहुत हानि हुई है🙏 


हमें सभी बातों को नए सिरे से विचार करना ही होगा, धर्म और राजनीति को अलग-अलग रखना होगा, राजनेता धर्मसीट पर ना बैठे अन्यथा उनका अपना सर्वनाश होने में ज्यादा समय नहीं लगेगा🙏🌹


तुगलकाबाद का रविदास मंदिर इसका सबसे अच्छा उदाहरण है, यदि धर्म का पालन हो रहा होता तो यह विपत्ति कभी ना आती 🙏 और आज भी लोग धर्म का पालन करने को राजी नहीं है, मेरे साथ शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं, 


मुझे चार लाइन लिखने में बहुत अधिक शयही का प्रयोग नहीं करना होगा है परन्तु मामला कई दशकों के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय में लटक जाएगा, फिर कुछ नहीं कर सकोगे🙏👏


जितनी जल्दी जाग जाओ सवेरा हो जाएगा🙏🌹


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश मित्रा@9335122064

[16/09, 1:24 pm] kamleshmittra: 🙏शोध अनुष्ठान, दिनांक 16 सितंबर 2024 


मूल राग श्री और राग श्री पर गुरु ग्रंथ साहब के वचन, 


 यह वचन भी आठ प्रहर के अनुसार राग को बदल देते हैं🙏


 राग दिन के प्रहार के अनुसार, ऋतु के अनुसार, चित्त दशा के अनुसार बदलते रहते हैं🙏


यदि रागी उपरोक्त बातों का ध्यान नहीं रखता, तो उसके द्वारा गाया जाने वाला संपूर्ण वचन प्रभावहीन हो जाता है🙏


 रागी तो आनंदित हो भी सकता है, क्योंकि उसके चित्त की दशा वह हो सकती है🙏 परंतु श्रोता के ग्रहण योग्य परिस्थितियों का ध्यान रखा जाना चाहिए🙏


तभी गुरुद्वारा अथवा रविदास मंदिर में गुरुवाणी अथवा रविदास वाणी का असर होगा 🙏


गुरु ग्रंथ साहिब या अमृतवाणी का वाचन करने से कोई फायदा होगा 🙏


धर्म स्थान विद्यालय की पाठशाला की तरह नहीं होता है 🙏 कि केवल मन में पढ़ा जाए, गायन करना होता है, इसी को भजन कहा जाता है, भजन कभी मौन नहीं होता है 🌹🙏


इस क्षेत्र में भी बहुत काम किए जाने की आवश्यकता है, घर स्त्री से होता है, बच्चों से होता है🙏


ठीक इसी प्रकार, धर्म स्थान भक्तों से होता है, गुरुवाणी से होता है 🙏


प्रबंधक की भूमिका मात्र पुरुष की तरह से होती है, वह ना तो घर बना सकता है और ना ही धर्म स्थान बना सकता है अगर उसका अहंकार सर्वोपरि रहता है अनावश्यक टीका टिप्पणी करता है 🙏


साधक कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[16/09, 2:55 pm] kamleshmittra: संत दास जी,


भारतीय दर्शन की सोच ऐसी नहीं थी 🙏 गोरखपुर की गीता प्रेस स्थापित होने से पहले, भगवान केवल शिवलिंग के रूप में होता था जिसमें स्त्री पुरुष के यौन-अंगों का संयुक्त रूप होता था उसी को भगवान कहते थे, खजुराहो की कलाकृतियां उसी का प्रदर्शन करती हैं 🙏


गीता प्रेस स्थापित होने के बाद भगवान के नाना प्रकार के रूप आ गए🙏 जो विदेशी भारतीय दर्शन में खोज कर रहे थे वह चक्कर में पड़ गए, और वैज्ञानिक बुद्धि के लोग चकरघिननी खा रहे हैं 🙏


जब ईसाई धर्म के पैगंबर श्री ईसा मसीह ने कहा कि परमात्मा ने मुझे अपने रूप में बनाया है 🙏 तब तथाकथित पुरोहितों को दिक्कत हो गई, और उन्होंने अपने सभी भगवान मनुष्य के रूप में बना दिए 😂


वैज्ञानिक बुद्धि के व्यक्तियों को यही सोच सोच कर परेशानी होती है, कि भगवान ने मुझे बनाया है या मैंने भगवान को बनाया है बस सारा खेल यही है 👏


जिस दिन वैज्ञानिक बुद्धि के व्यक्ति अपनी इस मानसिक संकीर्णता से बाहर निकल आएंगे कि ईश्वर परमात्मा खुदा अल्लाह मनुष्य के रूप में नहीं है, वल्कि मनुष्य के यौन-अंगों में स्थित है, उसका रूप और कार्य बिन देखा बिन जाना है🙏 वैज्ञानिकों को उस भगवान ईश्वर परमात्मा को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं होगी 😂


साधक कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[16/09, 3:57 pm] kamleshmittra: 🌹किस पर करें सिंगार पिया मोरे अंधरे 👌 दिनांक 16 सितंबर 2024 🙏


माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दलितों के केस पहले ही सुने नहीं जाते, सिर्फ तरीके दी जाती है, उसके बाद सर्वोच्च न्यायालय की स्थिति निम्नवत है 


1 अप्रैल 2024 के अनुसार माननीय सुप्रीम कोर्ट में 80 हजार 194 केस पेंडिंग है,


सुप्रीम कोर्ट के सबसे अच्छे आंकड़े, जनवरी 2024 के हैं, जिसमें 1966 नए कैसे डाले गए, और 2420 केस का निस्तारण हुआ 🙏 यानी एक माह में लगभग 400 से ज्यादा पुराने केस का निस्तारण नहीं होता है 


😂 कृपया बुद्धिजीवी बताएं, क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय में मुझे केस फाइल कर देना चाहिए, या किसी अन्य विकल्प पर विचार करना चाहिए, मैंने अपने स्तर से सारे प्रयास कर लिए हैं, कुछ प्रयास हमारे प्रतिवादियों को भी करना चाहिए, क्योंकि यह समाज केवल मेरा नहीं है उनका भी है 😂


गुरुद्वारा रकाबगंज दिल्ली हर साल अपने समाज के 200 बच्चों को तैयार करता है, जो गुरु वाणी को आगे बढ़ायें गुरु ग्रंथ साहब को आगे बढ़ायें उनके समाज में धर्म का प्रचार प्रसार करें🙏


 200 बच्चों की भर्ती निष्पक्ष रूप से होती है, क्या हमारा समाज अपने 96 बच्चों को स्वीकार नहीं कर सकता है, उनकी जिम्मेदारी अपने कंधों पर नहीं ले सकता है 🙏


क्या इंन 96 बच्चों के बुनियादी खर्च को उठाने के लिए 105 मंदिर अपना सहयोग नहीं कर सकते हैं, संगठन तो बनना पड़ेगा🙏


जिन्होंने दो महीने की जेल की सजा भुगति, दर्जनो लाठियां खाई , समाज के ताने सुने, पुलिस वालों की गलियां खाई,


 इस उम्मीद में कि हम अपने समाज के लिए कुछ अच्छा कर रहे हैं, आज समाज उन्हें ही अपराधी की तरह देख रहा है, अधिकतम बच्चों ने तो तब तक समाज को समझा भी नहीं था 🙏


 उम्र के दो पड़ाव पार कर चुके समाज के लोगों के ऊपर क्या कोई जिम्मेदारी नहीं है🙏


मुझे लगता है आप सभी को इस विषय पर विचार करना चाहिए, मुझसे जितना अच्छा हो सकेगा मैं अच्छा करने का प्रयास करूंगा, मैं इंसान हूं खुद नहीं🙏


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[18/09, 10:32 am] kamleshmittra: इस ग्रुप में जुड़ने के लिए किसी भी मंदिर का पदाधिकारी होना आवश्यक है, अथवा पूर्व पदाधिकारी होना आवश्यक है🙏


आप हमको व्यक्तिगत सूचना भेज सकते हैं उस आधार पर हम आपको ग्रुप में जोड़ देंगे, 


जिन मंदिरों का मैं भ्रमण कर रहा हूं उनके पदाधिकारी को इस ग्रुप में जोड़ा जाएगा🙏


इस ग्रुप का उद्देश्य 105 मंदिरों का सहयोग प्राप्त करना है, ताकि तुगलकाबाद रविदास मंदिर को भव्य बनाया जा सके, और उसमें सभी मंदिरों की भागीदारी हो 🙏


पंजाब हरियाणा एवं अन्य राज्यों के, गुरु रविदास मंदिर के पदाधिकारी भी इस ग्रुप के मार्गदर्शक के रूप में इस ग्रुप के सदस्य हो सकेंगे l 


कोई भी राजनीतिक पोस्ट डालना इस ग्रुप में वर्जित होगा, 

ग्रुप से हटाने के लिए इतनी निर्योग्यता काफी होगी🙏 किसी काल्पनिक देवी देवता की पोस्ट भी वर्जित है🙏


इस ग्रुप में समाज को संगठित करने के लिए, संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के वचनों का, श्री गुरु ग्रंथ साहब के वचनों का सही रूप में संपादन हो इस बात की चर्चा होगी 🙏 जब मैंने श्री गुरु ग्रंथ साहब कह दिया, इसका अर्थ है सभी भक्तों की वाणी पर भी इसमें चर्चा की जा सकेगी 🙏 जिन्होंने होरिजेंटल समाज स्थापित किया है, जो होरिजेंटल विचारधारा के सूत्रधार हैं 🙏


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 🙏@9335122064

[19/09, 1:19 am] kamleshmittra: 🌹सामाजिक जागरूकता अभियान👏 सूचना दिनांक 19 सितंबर 2024 


सन 2018 से अब तक मैंने 9 ग्रुप क्रिएट किए थे, दो ग्रुप हैक हो गए🙏 इस प्रकार अभी भी सात ग्रुप हैं जिनका मैं सीधे संपादन करता हूं एडमिन हूं 🙏 तीन अन्य ग्रुप में लोगों ने मुझे एडमिन बनाया है, उन ग्रुप में मैं संयुक्त एडमिन हूं 🙏


वर्तमान समय में पांच ग्रुप ऐसे हैं, जिन पर मैं अधिक फोकस करना चाहूंगा🙏


1. विधिक सूचना ग्रुप : तुगलकाबाद रविदास मंदिर 

2. आर्थिक समता के समर्थक ग्रुप 

3. SC/ST दिल्ली का अधिवक्ता संघ 

4. SC/ST के मा. MPs और MLAs 

5. SC/ST का व्यापारी संघ 


नीचे के तीन ग्रुप ऊपर के दो ग्रुप के समर्थन में बनाए गए हैं, ऊपर के दो ग्रुप को बल प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं 🙏


नीचे के तीन ग्रुप सशक्त होते जाएंगे, तो ऊपर के दो ग्रुप अपने आप सशक्त हो जाएंगे, कुल मिलाकर हमारा समाज मजबूत हो जाएगा🙏


ग्रुप एडमिन अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 🙏9335122064


 अन्य सहायक ग्रुप 

1. दिल्ली के 105 रविदास मंदिर (दिल्ली में अपने समाज को संगठित और मजबूत बनाने का हमारा प्रयास है )

2. करुणाकर बुद्ध विहार ( बुद्धिस्ट दर्शन संस्थाएं और विचार एक प्रयास )

3. धर्म चक्र कल्याण मित्र मियापुर (पारिवारिक ग्रुप है)

4. चमार महासभा ( संत श्री रविदास जी का दर्शन शास्त्र )

5. बहुजन दंगल ( राजनीतिक ग्रुप )


 जिन ग्रुप को हैक कर लिया गया : 

1. प्रबुद्ध चमार

2. प्रबुद्ध भारत

[19/09, 10:30 am] kamleshmittra: 🌹जातिगत सामानता की बात छोड़ो आर्थिक समानता की बात शुरू करो🙏


जाति की जरूरत शादी करते समय और पड़ोसी बनाते समय पड़ती है🙏


पंरतु आर्थिक असमानता का दंश हमेशा झेलना पड़ता है, आर्थिक समानता का संघर्ष आरंभ करो🙏आर्थिक समता के लिए आंदोलन करो 👏


आर्थिक समानता के विचारक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[20/09, 9:05 am] kamleshmittra: शुक्ला जी,


मैं पुनः निवेदन करूंगा, आरएसएस का काल्पनिक साहित्य पढ़ना बंद करो 🙏


भगवान बुद्ध का कार्य चित्त विकार को दूर करना था🙏


दुख है, दुख का कारण है, दुख का निवारण है, निवारण की प्रतिपदा है 🙏


भगवान बुद्ध के कार्य में उपरोक्त चार आर्य सत्य है 🙏


राज्य व्यवस्था उनका विषय नहीं है 🙏 इसलिए किसी मूर्ख राजा के कार्यों को, बुद्ध दर्शन से नहीं जोड़ा जा सकता है 🙏


जो व्यक्ति खुद अपना चित्त विकार दूर नहीं करता, जो राजा अपने समाज के चित्त विकारों को दूर के लिए कार्य नहीं करता है, पड़ोसी राज्यों के चित्त विकारों को दूर करने के लिए कार्य नहीं करता है 🙏 उसके राज्य में उथल-पुथल होती है 🙏 सम्राट अशोक ने जब बौद्ध धर्म को धारण किया तब उसने पड़ोसी राज्यों में भी बौद्ध धर्म फैलाया इसलिए वह विशाल साम्राज्य आर्यावर्त का सम्राट कहलाया 🙏


चित्त विकार दूर करना एक भौतिक प्रक्रिया है इसके लिए साधन और समाधि में बैठना होता है🙏 कोई दूसरा नहीं कर सकता है 🌹


मात्र भजन गाकर, भक्ति करके चित्र विकार को दूर नहीं किया जा सकता है🙏


जिस प्रकार दूसरे के नहाने से अपना शरीर पवित्र नहीं होता है स्वयं पवित्र होने के लिए स्वयं नहाना पड़ता है 🙏


इसी प्रकार दूसरे के साधना करने से, अथवा भक्ति भाव कर लेने से, खुद का चित्त विकार विमुक्त नहीं होता है 🙏


आप बुद्ध से नफरत करते हो, क्योंकि अभी तक आपने आरएसएस का ही साहित्य पढ़ा है, आरएसएस बुद्ध को नष्ट करेंगी, बुद्ध दर्शन में कमियां दिखाएंगे तभी अपने पाखंडवाद को फैला सकेगी 🙏 रामाराज ( दुष्टराज ) ला सकेगी 🙏


पत्थर पूजा शंकर या गणेश की हो, अथवा बुद्ध, रविदास और कबीर की हो, चित्त के विकार दूर नहीं होते है 🙏


मौका मिलते ही लोभ सिर चढ़कर बोलता है, अपनी भी मान प्रतिष्ठा खोता है और दूसरों की भी मान प्रतिष्ठा को धूमिल करता है🙏 इसको चित्त का विकार कहते हैं🙏


केवल ऊंची ऊंची बातें फेंकने से कोई संत नहीं हो जाता है 🙏 परिस्थितिया उत्पन्न होने पर वह किस प्रकार आचरण करता है, इस पर उसका संत होना अथवा ना होना निर्भर करता है🙏


बहुत पुरानी कहावत है "मन में राम बगल में छुरी" इस आदत को छुड़ाने के लिए बुद्ध का समस्त दर्शन है🙏 राजव्यवस्था स्थापित करने के लिए दर्शन नहीं है 🙏 त्रिविधि सील विशुद्धि की जाती है, जो त्रिविधि सील विशुद्ध नहीं करता मुसीबत में पड़ता ही है 🙏 कोई राजा का राज्य हो अथवा सामान्य व्यक्ति, दुख आता ही आता है🙏


जो महा मूर्ख कहते हैं बुद्ध की शांति के कारण भारत पर आक्रमण हो रहे थे, वे महामूर्ख बताएं जब राजपूत काल था, दूसरों की बहन बेटियां उठाना एक परंपरा थी, जिसे शौर्य काल कहा जाता है🙏


ऐसी राजव्यवस्था में मुस्लिम कैसे प्रवेश कर गाये?🙏


 इन बकवास विषयों पर मैं ज्यादा चर्चा करना नहीं चाहता हूँ 🙏


अपने चित्त विकारों को देखो और उन्हें दूर करने का उपाय करो 🙏


हर व्यक्ति सभी विषय से जुड़ा होता है, परंतु कार्य वह किसी एक विषय के लिए ही करता है🙏 जिस विषय पर उसने कार्य किया हो केवल उसके लिए उसकी चर्चा की जानी चाहिए, उसमें कुछ छूटा हो तो बात की जा सकती है, 👏चार आर्य सत्य पर बुद्ध दर्शन संपूर्ण है 🙏 अन्य सभी तर्क मूर्खता पूर्ण हैं, निंदा रस का सेवन करना बंद करो🙏


आपका शुभचिंतक कमलेश कुमार मित्रा 🙏9335122064

[20/09, 10:11 am] kamleshmittra: *एससी नेता और उनकी ब्राम्हण पत्निया*

👉 रामनाथ कोविंद - पत्नी ब्राह्मण

👉 रामविलास पासवान - पत्नी ब्राह्मण

👉 प्रकाश अंबेडकरजी - पत्नी ब्राह्मण

👉 सांसद उदित राज- पत्नी ब्राह्मण

👉 रामदास अठावले - पत्नी ब्राह्मण


*ब्राह्मण राजनेता और उनके दामाद* 😗

👉 अशोक सिघंल, बेटी सीमा सिघंल - मुख्तार अब्बास नकवी.

👉 मुरली मनोहर जोशी, बेटी रेणू जोशी - शाहनावाज हुसैन

👉 लालकृष्ण आडवाणी की बेटी रोशन आडवाणी की दूसरी शादी - सलीम

👉 लालकृष्ण आडवाणी, भतीजी प्रतिभा आडवाणी - अल्ताफ हुसैन

👉 सुबहरण स्वामी, बेटी सुहासिनी - नदीम हैदर.

👉 बालसाहब ठाकरे की पोती - सहजाद

👉 प्रवीण तोगडिया की लडकी - असफाक मीर

👉 मोहन भागवत की भतीजी उर्मिला मातोडकर - मोहसीन अख्तर.

👉 शीला दीक्षित, बेटी लतीका दीक्षित - सैय्यद मौहम्मद इमरान 

👉 अशोक मणी, बेटी अखिला मणी - शफीन जहाँ.



*Some others*.....


👉 मोनिका बेदी - अबू सलेम.

👉 संगीता बिजलानी - मोहम्मद अजहरूदीन.


*मुस्लिम राजनेता और ऊनकी ब्राह्मण पत्निया*

👉 उमर अब्दुला की पत्नी - पायल नाथ ब्राह्मण

👉 शाहरुख़ खान की पत्नी - गौरी छिब्बर ब्राह्मण

👉 आमिर खान की पहली पत्नी - रीमा दत्त ब्रह्माण और दूसरी पत्नी - किरण राव ब्राह्मण


👉 सैफ अली खान के पिता नवाब पटौदी मसूंर अली खान - पत्नी शर्मीला टैगोर,ब्राह्मण

👉 फरहान अखतर (बॉलीवुड हीरो) - पत्नी अधूना भवानी, ब्राह्मण

👉 फरहान आजमी - पत्नी आयशा टाकिया (फिल्मी हीरोइन) ब्राह्मण

👉 शकील लदाक - पत्नी अमृता अरोडा़, ब्राह्मण(फिल्मी हीरोइन)

👉 सलमान खान के भाई अरबाज खान - पत्नी मलाईका अरोडा़, ब्राह्मण .

👉 सलमान खान के छोटे भाई सुहेल खान - पत्नी सीमा सचदेवा,ब्राह्मण

👉 आमिर खान के भांजे इमरान खान - पत्नी अवितंका, ब्राह्मण 

👉 सजंय खान के बेटे जायद खान (बॉलीवुड हीरो) - पत्नी मलिक पाऱेख, ब्राह्मण

👉 फिरोज खान के बेटे फरदीन खान - पत्नी नताशा पांड्या, ब्राह्मण.

👉 इरफान खान (बॉलीवुड हीरो ) - पत्नी सुतपा, ब्राह्मण .

👉 नसीरुद्दीन शाह (फिल्मी हीरो ) - पत्नी रतना पाठक,.

ब्राह्मण ।

*अब सवाल ये है की, इन धर्म के ठेकेदारो को......... गरीब एससी-"अछूत लगता" है, अमीर एससी-"दामाद" !!!*


*गरीब मुस्लिम तो "गद्दार और देशद्रोही" लगता है,.... अमीर मुस्लिम-"दामाद" !!!*


बड़ी मेहनत से लिस्ट तैयार hui है सबको शेयर kariye !!!


*ये पूरी जनता को बेवकूफ समझते हैं...ये धर्म के नाम पर केवल हमें आपस में लड़वाते हैं,*

[20/09, 10:43 am] kamleshmittra: 🌹उपरोक्त सच और परदे के पीछे की बात 👌


सूचना दिनांक 20 सितंबर 2024


उपरोक्त आंकड़ों को देखकर यह प्रतीत होता है, अंतरजातीय विवाह करने से जीवन में प्रगति आती है🙏😂


परंतु मेरा अनुभव अलग है,


मेरे अपने मामा के सुपुत्र ने एक गुप्ता लड़की से शादी की उनके तीन बच्चे हुए🙏


मामा रेलवे दिल्ली में क्लास वन अधिकारी थे उन्होंने दिल्ली में मकान नहीं बनाया, क्योंकि रिटायरमेंट के बाद वह अपने गांव में बसना चाहते थे. गांव में पुस्तैनी संपत्ति थी, अंग्रेजों के जमाने से ही शौर्य स्थापित था, भारत विभाजन के समय गांव के सभी मुसलमानों को संरक्षण दिया था🙏 इसलिए गांव के सभी मुस्लिम आज भी एहसानमंद होते हैं🙏


परंतु रिटायरमेंट के बाद मामा गांव ना जा सके, इकलौता पुत्र था और उसकी बीवी गांव जाने को तैयार नहीं थी, अधिकारियों के बच्चे बड़े खर्चे वाले होते हैं, कुछ इस समय में सारी जमा पूंजी खत्म हो गई🙏


गांव का मकान बेचकर दिल्ली में मकान बनाना पड़ा, ममेरे भाई भी समय से पहले गुजर गए, मामा भी गुजर गए, सभी बच्चे अपने नाम में गुप्ता लगाते हैं, और अपने खानदानी रिश्तेदारों से कोई संबंध नहीं रखते है, अपनी मां के परिवार से ही संबंध रखते हैं 🙏 हमारे नाना आठ भाई हुआ करते थे 🙏🌹


इस प्रकार दलितों की संपत्ति, सवर्ण के पास ट्रांसफर हो गई ❤️


अंतरजातीय विवाह में हमें सामाजिक प्रतिष्ठा का भी ध्यान रखना होगा, अगर सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होती है, सामाजिक प्रगति में बाधा पड़ती है तो ऐसे विवाह को रोकना होगा ऐसे अंतर-जातीय विवाह करने वालों को उचित दंड देना होगा, उनको आरक्षण के लाभ से, अथवा अनुसूचित जाति को मिलने वाले किसी भी लाभ से पृथक करना होगा🙏


एक अन्य भतीजे ने भी श्रीवास्तव लड़की से शादी की, वह दो-चार दिन रही, क्योंकि शहर से लेकर गांव तक ऊंची मान प्रतिष्ठा थी, परंतु गांव तो गांव ही होता है🙏 उसका शहर में रहने का ख्वाब था, परंतु भतीजे का कामकाज गांव से चलता था उसका गांव में रहना जरूरी था इसलिए रिश्ता टूट गया🙏


हमें सदैव ध्यान रखना चाहिए सवर्ण बिरादरी की लड़कियां अधिक चतुर होती हैं, और हमारे समाज में विषकन्या के रूप में आती हैं, हमारे समाज में विष घोलकर चली जाती हैं🙏 इसलिए विगत 70 सालों में हमारी प्रगति नहीं हो सकी है, आगे अधिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से काम करना होगा🙏


पुनः कहता हूं आर्थिक समानता पर जोर दो, जातिवाद कुछ नहीं है, यह केवल आर्थिक विषमता को दर्शाता है, जिस जाति के लोग आर्थिक रूप से समान होते हैं, अथवा आर्थिक रूप से मजबूत होते हैं, उन में अंतर-जातीय वैवाहिक संबंध बन ही जाते हैं🙏


छोटी कही जाने वाली जातियों को गुलाम बनाने के लिए उनका आर्थिक शोषण करने के लिए जातिवाद फैलाया जाता है🙏


सामाजिक एवं राजनीतिक चिंतक कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[20/09, 3:56 pm] kamleshmittra: 🌹खोज अभी जारी है, सूचना दिनांक 20 सितंबर 2024 


मैं संगीत का टीचर तो नहीं हूँ 🙏


अभी विद्यार्थी जरूर हूँ -


सात स्वरों पर आधारित संगीत


उच्च मध्यम और निम्न स्वर को धारण करते हुए 21 भागों में विभक्त हो जाता है 🙏


 रागो को बनाते हुए, कभी कोई स्वर पूर्ण वर्जित कर दिया जाता है 🙏कभी कोई स्वर अल्प वर्जित कर दिया जाता है 🙏


संतों की वाणी परमात्मा में लीन होकर अंतर चित्त से उत्पन्न होती है, रागो की मोहताज नहीं होती🙏 शरीर में सैकड़ो केमिकल रिएक्शन होते हैं, शरीर से सुगंध उठाती है 🙏 इसीलिए कहा जाता है भगवान बुद्ध जिस रास्ते से गुजरते थे वे मौसम फूल खिल जाते थे 🙏 वास्तव में यह सील की सुगंध है 🙏 सील वान व्यक्ति की सुगंध है 🙏


कोई शिष्य बाध्य यंत्रों पर उसको उत्पन्न नहीं कर सकता है 🙏

 परंतु फिर भी उतारा जाता है 🙏


वास्तविक रस से कोसों दूर होता है, कृत्रिम वाद्य यंत्रों से उत्पन्न किया गया रस 🙏 सामान्यत: किसी संत का यह रस बार-बार उत्पन्न नहीं होता, भक्ति/संत आगे के महल में बढ़ जाता है, प्रवेश कर जाता है 🙏 जैसे जवानी बार-बार नहीं आती है, इस प्रकार भक्त की वह अवस्था बार-बार नहीं आती है, जो जवानी को बार-बार लाने का प्रयास करता है, ठरकी कहलाता है 😂 और विभिन्न बीमारियों का शिकार हो जाता है🙏


परंतु जब लोगों को भक्तमय बनाया जाता है,, तो कृत्रिम यंत्रों के माध्यम से उनके चित्त को उद्दीपित किया जाता है🙏


उद्दीपन की प्रक्रिया में वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है, सामान्यतः कोई साधक अपनी उम्र के 28 वें पड़ाव के बाद इस अवस्था को धारण कर पाता है 🙏


परंतु प्रोफेशनल धार्मिक संस्थान बच्चों को इस रस में डुबोने के लिए कृत्रिम विधि का प्रयोग करते हैं🙏इसलिए अधपके बच्चों के राग से रस उत्पन्न नहीं होता है 🙏


इसीलिए बुद्ध का बताया गया मार्ग, सील समाधि प्रज्ञा सरल और सहज है, शरीर में इन सभी रसों को उत्पन्न करने के लिये 🙏 इन रसों को उत्पन्न करने के पश्चात चित्त सभी विकारों से विमुक्त हो जाता है 🙏


भय, क्रोध, ईर्ष्या, निंदा, मोह लोभ कामवासना, मममत्व आदि जो हमारे सांसारिक दुख का कारण बनता है, उनकी तीव्रता कम हो जाती है 🙏


संसार में दुख को खूंटी पर लटकाने के बहुत से तरीके हैं, किसी भी मार्ग से चले जाओ, अच्छी खूंटी, सस्ती खूंटी आदि मिल ही जाएंगी, कुछ लोग अपने घर को सुंदर बनाने के लिए कबाड का प्रयोग करते हैं🙏 कपड़े लटके भी रहते हैं और किसी को दिखाई भी नहीं पड़ते हैं 🙏


कुछ लोगों के घरों में जाइए तो चारो तरफ कीलें ही किलें ठुकी मिलती है, आप अपना दुख:(कपडे) किसी भी कील पर लटका सकते हो 🙏


इसी प्रकार हमारे मंदिरों की हालत है🙏


सैकड़ो भगवान मिल जाएंगे, सैकड़ो गुरु की प्रतिभाएं मिल जाएंगी, सैंकड़ो कृत्रिम देवी देवता मिल जाएंगे🙏 किसी देवता पर अपना दुख: लटका दो🙏


बुद्ध के नाम पर दुख लटका दो, कबीर के नाम पर दुख लटका दो, रविदास के नाम पर दुख लटका दो, शंकर जी के नाम पर दुख लटका दो, हनुमान जी के नाम पर दुःख लटका दो, निरंकार के नाम पर दु:ख लटका दो, नानक के नाम पर दु:ख लटका दो, अल्लाह मियां के नाम पर दु:ख लटका दो आदि 🙏


 मनुष्य बहुत कमजोर है उसे अपना दुख कहीं ना कहीं तो लटकाना ही पड़ता है 🙏


दुखों को लटकाने की विधियां है,


भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ, ध्यान-साधना, ज्ञय-हवन, नवाज़, पर्थना आदि 


कुछ भी करो भाई पर विशुद्ध रूप में करो हम आपके साथ हैं 🙏


तुम राम कहो या रहीम चित्त ही दूषित होगा, जब दूषित ना हो उसी को मुक्ति कहते हैं🙏 निर्वाण कहते हैं, कैवल्य कहते हैं, कयामत कहते हैं, एक दिन जरूर आएगी 🙏 मर्जी आपकी दु:ख के साथ मिलोगे या विमुक्ति के साथ 😂


साधक कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064


नोट :- अभी बहुत कुछ बाकी है 😍

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