🌹सत्य की खोज (परिष्कृत)🌹
सूचना दिनांक 7 सितंबर 2024🙏
आज तीन गुरुद्वारा का भ्रमण किया, अमृतवाणी की जांच की 🙏
क्या 40 शबद वास्तव में वही है, जैसा गुरुग्रन्थ साहिब में है 🙏
यह पाया 40 शबद वही हैं परन्तु व्यख्या और आरती समरूप नहीं है🙏
जबकि सारा खेल समझने और समझाने का है, आरती का है अरदास का है,😂 कौन आरती कर सकता है? किस अवस्था में अरदास की जाती है?🙏
अमृतवाणी को पढ़ते हुए मुझे संदेह हुआ था, इसकी शिकायत मैंने सचखंड डेरा बल्ला में भी की थी 🙏
जिसने उस परम ब्रह्म को नहीं जाना, दूसरी किताबों से नकल करके वह 40 शब्दों की व्याख्या नहीं कर सकता है 🌹
आज का मिशन पूरा हुआ 🙏
1. सामान्य चर्चा में एक बात और पता लगी 🙏 ग्रंथि साहिब (गुरुवाणी का पाठ करने वाले ) जब गुरुवाणी का पाठ करते हैं तब गुरु नानक देव जी और गुरु अर्जुन देव जी को भी भक्त नानक जी और भक्त अर्जुन देव जी के नाम से ही संबोधित करती है🙏
2. इसलिए 2 अगस्त 2024 को रविदासिया संघ द्वारा उठाया गया विवाद केवल अपने अहंकार की पूर्ति मात्र है 🙏कि पाठ करते समय संत रविदास को गुरु कहा जाए, जबकि आदि ग्रंथ के नवीन रूप गुरु ग्रंथ साहिब में केवल गुरु-ग्रंथ साहिब को ही गुरु कहा गया है 🙏 सभी 35 संतो को भक्त ही कहा जाता है 🙏
3. मुझे तो लगता है रविदासिया धर्म हर जगह पर लड़ाई के मौके खोजता है इससे समाज का कोई भला नहीं होने वाला है 🙏 बल्कि सन 1925 में स्थापित हमारे आदि संत की प्रतिष्ठा को धूमिल करने वाला है 🙏
गलती जितनी जल्दी सुधर जाए समाज के लिए अच्छा है 🙏
4. सामान्य चर्चा में एक प्रश्न और उठाया गया, अपमान और शोषण तो पंडितों ने किया, मुझसे दूर जाने का क्या फायदा है 🙏
5. ग्रंथि साहब के इस प्रश्न का उत्तर मेरे पास नहीं था🙏 किसी अखिल भारतीय रविदासिया संघ के संत के पास इस प्रश्न का उत्तर हो तो मुझे दें ताकि मैं ग्रंथि साहब को बता सकूं🙏
शोध साधक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏9335122064
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