कड़वी बात - 2
सूचना दिनांक 9 सितंबर 2024
कड़वी बात तो कड़वी बात ही होती है, और जब मैं खुद कह रहा हूं बात कड़वी है तो जरूर ही कड़वी होगी🙏 पिछली बार जब कड़वी बात पोस्ट लिखी थी तो लोगों ने पोस्ट डिलीट करने का प्रयास किया, और उसके बाद परिणाम हुआ कि आगे की पोस्ट 24 घंटे में डिलीट होती रही क्योंकि सेटिंग बदल दी गयी 😂
1. यह बात ठीक वैसे ही है, जब बच्चे को कड़वी दवा खिला दो, तब मौका पाते ही वह दवा को कचरे में फेंक देता है😂 इसको अबोधता कहते हैं, भले दवा कड़वी है परंतु वह उस बच्चों को ही स्वस्थ करेगी 🙏
2. बातें तो बहुत सी करनी है, और आज कुछ विधिक कार्य भी करने थे, कोर्ट की तरफ जाना था🙏 परंतु मैं 10:00 बजे सो कर उठा हूं, मन में इतने विचार आते हैं, कि नीद नही आती, क्या ना लिखूं यह सोच सोच कर परेशान होता हूं 🙏
3. मुझे जो काम करना पड़ रहा है यह करने के लिए मैं दिल्ली नहीं आया था, भारतीय न्याय व्यवस्था में जो हमारे समाज का शोषण हो रहा है, केवल हमारे समाज के केसो की तारीख नहीं लगती है, मैं उस कुव्यवस्था को ठीक करने आया हूं 🙏
4. एक लंबे संघर्ष के बाद सूचना अधिकार अधिनियम बना, कई लोगों और संगठनों का योगदान रहा है 🙏सन 2005 में पांच सौ से अधिक पत्र मैंने व्यक्तिगत रूप से सांसदों को लिखे थे उसके बाद यह कानून अस्तित्व में आया 🙏यह अब तक का पहला और आखिरी कानून है जो जनता के लिए है, जनता को लोकतांत्रिक अधिकार देता है 🙏 परंतु इस अधिकार को भी प्रशासन का अधिकार बनाकर रख दिया गया है 🙏 इस अधिकार को भी अन्य अधिनियम की तरह प्रशासन की जागीर बना दिया गया है 🙏
5. अधिनियम कहता है सूचना 30 दिन के अंदर दी जाएगी, उसके बाद अपील की जा सकती है, प्रथम अपील द्वितीय अपील 🙏
6. प्रथम अपील की अपील 45 दिन के बाद आरंभ होती है जो 90 दिन तक की जा सकती है🙏 प्रथम अपील का निस्तारण न होने पर, पुनः 90 दिन तक आप द्वितीय अपील कर सकते हैं🙏
7. परंतु केंद्रीय / राज्य सूचना आयोग आपकी शिकायत का संज्ञान कब लेगा, और कब तक आपको सूचना दिलायेगा यह निश्चित नही है 🙏
8. राष्ट्रीय सूचना आयोग में, तीन अपील पिछले एक साल से पड़ी है और लगभग 6 माह से एक अन्य अपील पड़ी है 🙏 और अब तक दो अपील और मैच्योर हो चुकी है🙏 परंतु अभी तक किसी की सुनवाई आरंभ नहीं हुई है 🙏
9. उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में दो केस को मैंने 12, और 10 साल तक लड़ा, सूचना आयोग की आंख के नीचे प्रतिवादी ने समस्त सूचनाओं ( पत्रावली को बीट आउट कर दिया ) को जला दिया 🙏 सूचना आयोग ने उसको दंडित नहीं किया, मेरे अनुरोध करने के बाद भी दंडित नहीं किया🙏
10. इस प्रकार यह सूचना अधिकार अधिनियम केवल सूचना आयोग प्रशासन का अधिकार बनकर रह गया है, आम जनता का अधिकार नहीं है 🙏
11. उपरोक्त मामला लखनऊ हाई कोर्ट की बेंच में विचाराधीन है, इस मुकदमे को 2022 में कायम किया गया था, अभी तक लखनऊ हाई कोर्ट प्रतिवादी से WS नहीं मंगा सका है 🙏 इसमें उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग भी प्रतिवादी है 🙏
12. हाई कोर्ट के लिस्टिंग बाबू को पता है, कि केस को कितने नंबर पर लगाया जाए तो सुनवाई में नहीं आएगा, इसलिए लिस्टिंग एप्लीकेशन से भी कोई फर्क नहीं पड़ता है 🙏और धोखे से केस आ भी गया तो प्रतिवादी वकील के पास सैकड़ो बहाने है🙏 क्योंकि सामने की सीट पर उनके जीजा जी बैठे हैं 🙏
13. पतंजलि योगपीठ के ट्रस्टी जो इलाहाबाद में रह रहे थे उनके केस की फाइल को मैंने 33 वर्ष बाद पुन: चालू कराया था, इलाहाबाद में हाई कोर्ट में भ्रष्टाचार का यह लेवल है, तब जस्टिस चंद्रचूड़ हाई कोर्ट इलाहाबाद के चीफ जस्टिस हुआ करते थे 🙏 जब तक बाबू को पैसा नहीं मिलेगा वह फाइल दबाए रखेंगा 🙏
14. उपरोक्त संपूर्ण संघर्ष में मैंने अपनी जेब से पैसा खर्च किया, क्योंकि तब मैं पैसा कमा सकता था, मेरा पैसा किताबें और कानूनी प्रक्रिया में खर्च होता था🙏
15. मेरा संघर्ष उपरोक्त विषयों को लेकर था, इसका समाधान करने के लिए मैं दिल्ली आया था परंतु यहाँ पर हमारे समाज के लोग मुझे अन्य कार्यों में फंसाए हुए हैं 🙏
16. जब तक मैं पतंजलि योगपीठ में नहीं आया था, मुझे जानने वालों की संख्या 1 2 3 4 होती थी, इंजीनियरिंग कॉलेज के क्लास के विद्यार्थियों को छोड़कर 🙏
17. एक लंबे एकाकी जीवन के बाद सितम्बर 2022 में मैंने अपने एक चचेरे भाई के साथ बेगमपुर में रहना स्वीकार किया, सन 2004 से मैं एकाकी जीवन ही जी रहा हूं🙏 और अपनी लाश को अपने कंधे पर उठाया हूं 👏
18. जनवरी 2024 में तुगलकाबाद रविदास मंदिर के आरटीआई एक्टिविस्ट ने हाई कोर्ट में आगे बढ़ने से आर्थिक असमर्थता व्यक्त की तब, श्री के. सी. रवि जी से आर्थिक सहयोग हेतु मैंने भेंट की थी 🙏
19. मैं गुरु रविदास मंदिर संघर्ष के जो भी पेपर उनको दिखता था, वह तुरंत उसकी फोटो कॉपी करा लेते मुझे उनकी नियत पर शक तो होने लगा था क्योंकि मैं अपने किसी भी क्लाइंट का पेपर बिना उसकी अनुमति के दूसरे को नहीं दे सकता हूँ 🙏
20. मेरे पास कोई विकल्प नहीं था संत शिरोमणि गुरु रविदास की इच्छा को मानते हुए मैं उनके साथ चलता रहा उसी का परिणाम यह हुआ कि मैं 96 गुरु भक्तों सहित 105 रविदास मंदिरों के संपर्क में आ चुका हूं, और अन्य गुरु भक्त भी हमसे अपेक्षा करते हैं🙏
21. परंतु रवि जी इस मुद्दे को भाजपा के खिलाफ भुनना चाहते हैं, वह 96 गुरु भाईयों के कल्याण के पक्ष में नहीं है, उनको अधिकार देने के पक्ष में नहीं है, जिस प्रकार उन्होंने मेरे साथ जो नीति अपनाई "यूज़ एंड थ्रो" वह वही रणनीति 96 गुरु भाइयों के साथ अपनना चाहते हैं 🙏
22. 96 गुरु भाइयों के एड्रेस लिस्ट मुझसे लेने के बाद, खुद को उनका नेता बनने के प्रयास में है 😂 और खुद को राष्ट्रीय धार्मिक नेता दिखाने के षड्यंत्र में है 🙏
23. जबकि श्री दुष्यंत गौतम जी, प्रतिनिधि भारत सरकार, उनके रिश्तेदार है, पारिवारिक प्रोग्राम में वह एक दूसरे से मिलते हैं🙏वह चाहे तो सीधे उनसे बात करके 96 गुरु भाईयो सहित 105 मंदिरों के प्रतिनिधियों को सरकारी कमेटी की आमसभा में जोड़ सकते हैं, अन्य इच्छुक गुरु भक्तों को तुगलकाबाद रविदास मंदिर आम सभा में जोड़ सकते हैं🙏 परंतु उनको तो मंदिर पर राजनीति करनी है👏
24. क्योंकि वह काली के पुजारी है 🙏 उनके कॉमन हाल में काली की प्रतिभा विराजमान है, जब वह अपने परिवार के व्यक्तियों से संबोधन करते हैं तो जय माता की कहते हैं, जय गुरु रविदास कभी नहीं कहते है 🙏
25. 105 मंदिरों का तो वह जिक्र तक नहीं करते है, उनको तुगलकाबाद रविदास मंदिर से जोड़ने की कोई बात नहीं करते, उनके एजेंटो से पता लगा है, वह संत श्री निरंजन दास जी वाली कुर्सी चाहते हैं 🙏 वह भी बिना किसी चुनावी प्रक्रिया के 😂
26. भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त प्रक्रिया का अनुपालन करते हुए कोई व्यक्ति अगर सीट पर आता है तो मैं उसका स्वागत करूंगा, परंतु चोर दरवाजे से अगर कोई आना चाहता है, निर्योग्यता के साथ आना चाहता है🙏 तो मैं समाज को सजग करूंगा, मैं कोई अंतिम विचारक नहीं हूं, कृपया अन्य विचारों को भी सुने 🙏
27. कल 10 सितंबर 2024 है मासिक पूजा का दिन है, आम सभा के गठन के साथ कार्यकारिणी के चुनाव की घोषणा हो जाती है तो मैं समझ लूंगा मेरा कार्य खत्म हो गया है 🙏
प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏9335122064
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