Friday, 22 November 2024

आध्यात्मिक चर्चा

 🌹आध्यात्मिक चर्चा सूचना दिनांक 22 नवंबर 2024


सुबह के 5:30 बजने वाले हैं, आज के विशुद्ध ध्यान में मन स्थिर नहीं हो सका है 🙏


भटकता ही रहा है 


ध्यान कई प्रकार का होता है, मैं विशुद्ध ध्यान की बात कर रहा हूं🙏


1. विशुद्ध ध्यान में ना तो किसी नाम का सहारा लिया जाता है और ना ही किसी चित्र का, विशुद्ध सांसों के आगा-गमन पर नथुनों के पास मन को टिकाया रखना पड़ता है, और लंबे समय तक सांसों के आने-जाने की प्रक्रिया को देखते रहना पड़ता है, इसी को पिछली चर्चा में मैंने कहा था कि कम से कम उम्र के अनुपात में अर्थात 30 साल उम्र है तो कम से कम 30 मिनट, 40 साल उम्र है तो कम से कम 40 मिनट का ध्यान करना लाभदायक होता है ( प्रतिदिन सुबह-शाम)🙏


2. जो लोग विशुद्ध सांस के सहारे ध्यान नहीं लगा सकते, वह नाम का सहारा लेते हैं, चित्र का सहारा लेते हैं, चित्र स्मृति का सहारा लेते हैं🙏


3. नाम कोई भी हो सकता है और किसी के गुरु के द्वारा लिया जा सकता है या स्वयं से भी कर सकते हैं, परंतु सभी धोखे हैं 🙏 जिनका इतना करने पर भी नहीं टिकता, वह माला का सहारा भी ले लेते हैं 🙏अब वे एक साथ तीन जगह पर मन टिकाने की कोशिश करते हैं🙏 मन को तीन स्थानों तक ही सीमित रखते हैं -> सांसों के साथ, शब्द के साथ, और माला की गुरिया के साथ🙏


4. जिनका इतने पर भी ध्यान नहीं टिकता, वह रूप ध्यान करते हैं, किसी आराध्य के रूप को आंख बंद करके याद करते हैं परंतु यह सब भी धोखे है 😂


5. आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद में जड़ी बूटियां का अध्ययन कराते समय एक बात कही थी, जब भी हम जड़ी बूटियां को टैबलेट या कैप्सूल के फॉर्म में बनाते हैं, उस बूटी की 40% शक्ति समाप्त हो जाती है😂 परंतु फिर भी उनका दिव्या फार्मेसी ट्रस्ट दवाइयां का निर्माण करता है 🙏 क्योंकि लोगों को रेडीमेड चाहिए😂


6. विशुद्ध सांसों पर मन को टिकाना अत्यंत कठिन काम है, पिछली बार चर्चा में मैंने कहा था, जो विपश्यना के साधक हैं वह भी इस चूक को करते हैं 🙏 उनका मन विशुद्ध सांसों पर टिका नहीं रहता, वह आर्त ध्यान अथवा रौद्र ध्यान करने लगते हैं🙏


7. इसके परिणाम स्वरुप विकार बढ़ जाते हैं, कई बार तो विकार इतने बढ़ जाते हैं, कि उनके लिए अपने शत्रु पर हावी रहना अत्यंत सहज हो जाता है अथवा मानसिक विक्षिप्त हो जाते हैं 🙏 अथवा जीवन में इतनी निरस्ता आ जाती है कि वह गृहस्त जीवन का परित्याग कर देते हैं 😂 यह दोनों ही अतियां बुरी है 🙏


8. इसीलिए संत कबीर संत रविदास, दादू, नानक आदि ने साहज ध्यान की परंपरा को अपनाया है, ताकि घर गृहस्ती से विमुक्ति ना हों, और शत्रुओं पर आक्रमण पशुता के स्तर तक ना बढ़ जाए 🙏


9. क्योंकि ध्यान का असर चित्त पर होता है, जिससे भय संस्कार निकल जाता है, और मनुष्य बंदर के समान व्यवहार करता है, अथवा शेर के समान🙏अन्य विकारों पर भी असर करता है, उसके परिणाम अलग-अलग होते हैं🙏


10. ध्यान का लाभ सबसे अधिक एकाग्रता में मिलता है, व्यक्ति विक्षिप्तता पूर्ण व्यवहार नहीं करता हैं, एक समय में एक ही काम पर मन एकाग्र रहता है इसलिए अधिकारी, कर्मचारी, नेता विद्यार्थी आदि उस एक विषय को अधिक गहराई से समझ पाता है🙏


11. जितने भी वैज्ञानिक और शोधक होते हैं, उनके मन की एकाग्रता उच्च कोटि की होती है, यह एकाग्रता उनको पारिवारिक संस्कारों से प्राप्त हो जाती है, अथवा किसी गुरु के सानिध्य से, इसलिए उच्च जातियों की स्मृति अच्छी होती है, उनका मन किसी विषय पर आसानी से एकाग्र हो जाता है, क्योंकि वह प्रत्यक्ष या परोक्ष धन पद्धति से जुड़े हुए होते हैं🙏 

12. यह दूसरा विषय है कि उच्च जातियां समाज की अन्य जातियों का शोषण करने के लिए अपनी योग्यता का अधिक प्रयोग करती है क्योंकि वह विशुद्ध ध्यान नहीं करते हैं 🙏


13. वैज्ञानिक शोध में अग्रणी देशो का राज धर्म बौद्ध है, बौद्ध धर्म विशुद्ध ध्यान पर जोर देता है, जैसे चीन ताइवान जापान आदि 🙏 अन्य ध्यान की पद्धतियां व्यापारिक संस्कृति को बढ़ावा देती है 🙏


14. रूप ध्यान, मंत्र ध्यान, यज्ञ, पूजा भजन आदि 🙏-> चाहे ईसाई धर्म के यीशु को ले ले देवी रूप ध्यान है, इस्लाम के मोहम्मद साहब को लेने, वह स्मृति ध्यान है 🙏


15. परंतु विशुद्ध ध्यान, सांस से शरीर तक जाता है, चित्त और शरीर को स्वस्थ करता है मनुष्य को मनुष्य बनता है🌹


16. जब कोई मनुष्य मनुष्य हो जाता है, तो उसमें भय संस्कार निकल जाते है, वह कबीर हो जाता है और बेबाक बोलता है, रविदास हो जाता है सीधे चुनौती देता है दादू, सहजो जो तमाम नाम जुड़े हुए हैं, जो मानवता के संदेश के प्रचारक रहे, जिनकी अपनी बोधी थी, बुद्धि तो पंडित के पास भी होती है 🙏


कांकर पाथर जोड़ी के मस्जिद लई बनाए.......

दुनिया इतनी बाबरी पत्थर पूजन जाए........


सीधे चुनौती देना इस बात को दर्शाता है कि भय का संस्कार नहीं है....... उसको कोई भयभीत नहीं कर सकता है......


ऐसा व्यक्ति मनुष्य के लिए कल्याणकारी राज्य की स्थापना का मार्गदर्शन दे सकता है, ऐसा चाहूं राज मैं.....


नानक की परंपरा थोड़ी सी अलग है रूप ध्यान जैसी ही है...

 एक तू ही निरंकार......


17. बांकी ग्रंथो की मोटी-मोटी किताबें बकवास हैं, उनके लिए जिन्होंने जान लिया है 🌹


जिसने चाय पीकर देख ली उसको कोई चाय का ज्ञान क्या देगा कि चाय मीठी होती है😂


जिसने चाय नहीं पी, उसको चाय का ज्ञान देते रहिए कि चाय मीठी होती है उसमें इलायची का स्वाद होता है, उसको पी-कर ताजगी आती है आदि बाते.....


जिसकी बोधि जागृति हो गई उसके लिए अमृतवाणी हो, श्री गुरु ग्रंथ साहिब हो, आदि प्रगाश ग्रंथ हो, तिपिटक हो, उपनिषद हों या वेद हों आदि आध्यात्मिक ग्रंथ सब कबाड़ स्टोर की पुस्तके हैं 🌹


18. चलते चलते बनारसी दास जी का उल्लेख करना चाहूंगा......


अभी जल्दी ही उनसे मुलाकात हुई थी, उन्होंने संत शिरोमणि गुरु रविदास की ध्यान पद्धति के बारे में मुझसे चर्चा की थी, 


सो-हम 🙏


एक मंत्र ध्यान है, बैसाखी(ढकेला ) है, आरंभ में अच्छी है, 


इसीलिए संत शिरोमणि ने गुरु रविदास ने, अपनी ध्यान पद्धति में बैसाखी को बदलते रहे हैं ताकि किसी को बैसाखी से मोह ना हो जाए 🙏 इसलिए कहीं पर उन्होंने हरि हरि कहा है, कहीं सो-हम सो-हम कहा है, कही राम-राम कहा है, और कही मुकंद मुकंद कह दिया है 😂


ताकि उनके भक्त लोग बैसाखी से चिपके नहीं, किसी भी नाम का सहारा लेकर सांसों पर टिका रहा जा सकता है🙏


परंतु अंतिम लक्ष्य विशुद्ध सांस पर टिकना है 🙏 जो भी विशुद्ध सांस पर मन टिका लेगा बोधि को प्राप्त हो जाएगा😂


19. परंतु मूर्ख रविदासिया संतो ने, 


हरि-हरि नाम से गुट बना लिया है.....

सो-हम नाम से गुट बना लिया है.....

राम-राम नाम से गुट बना लिया है.....

जल्दी ही कोई सिर फिरा मुकंद-मुकंद नाम से भी गुट बना लेगा 😂


20. कबीर-पंथी सहजयोग के सहारे काम करते हैं, फिर भी उन्हें 1 घंटे ध्यान में बैठना बड़ा कष्ट कारक लगता है......


वह बाणी विलास में ज्यादा आनंद लेते हैं.... 

कबीर ने जब जाना तब मूर्खो को गरियाया.....

परंतु कबीर भक्त निंदा रस में बहुत आनंद लेते हैं.....

निंदा रस का आनंद लेते-लेते जेल चले जाते हैं 


श्री रामपाल जी, के भक्त उनको कबीर का पुनर्जन्म कहते हैं😂


संत रामपाल जी अच्छे पंडित है, कबीर वाणी पर उनकी गहरी पकड़ है, परंतु बोधि से उन्होंने एक भी नए छंद की उत्पत्ति नहीं की है 🙏


21. इसी प्रकार इलाहाबाद में कबीर के भक्त श्री धर्मेंद्र जी है, उनके सामने आप कुर्सी पर नहीं बैठ सकते😂 क्योंकि वह ज्ञानवान है 🙏मूर्खता की पराकाष्ठा है, मानवता का संदेश देने वाले, गुरु के भक्तों ने, अमानवीता का संसार रच दिया 😂


कोई संत निकालकर नहीं आता जो मेरा हाथ बटाए, क्योंकि 1 घंटे विशुद्ध सांस के साथ बैठना बड़ा कठिन है 😂


आज तो मेरा मन ही नहीं टीका........


और निंदा रस का लेख लिख डाला.......


साधक कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

आध्यात्मिक चेतावनी

 🌹आध्यात्मिक चेतावनी सूचना दिनांक 23 नवंबर 2024 


कल विशुद्ध ध्यान पद्धति की विधि, और अन्य धर्म में ध्यान की पद्धतियों के प्रकार का संक्षिप्त वर्णन किया था🙏


मेरा जोर विशुद्ध ध्यान पर था, और जो चीज जितनी विशुद्ध होती है उतनी तेज और खतरनाक भी होती है, अगर उसका पालन ईमानदारी से कर दिया जाए, यदि बेईमानी से किया जाए तो और भी खतरनाक हो जाती है 😂


1. बात उन दिनों की है जब मैं भोगल के रविदास मंदिर में रहता था, और एक मिलने वाले ने आकर मुझसे पूछ लिया था कि मैं किस प्रकार ध्यान करता हूं, तो मैंने उन्हें बता दिया🙏 जैसे मैं करता हूं

2. वे भी दूसरी पद्धति से ध्यान किया करते थे🙏 बिना सील का अनुपालन किये उन्होंने मेरे द्वारा बताई गई पद्धति से अपने नथुनों के पास ध्यान की प्रक्रिया आरंभ कर दी🙏लगभग 15-20 दिन बाद वे मुझे पुनः मिलने आए तो उनका मुंह बंदरो की तरह फूल गया था 😭

3. उन्होंने मुझसे कहा कि आपकी ध्यान की पद्धति गलत है, मेरा मुंह फूल गया है 🙏 मेरी उनसे दूसरी या तीसरी मुलाकात थी , मैंने उनका व्यक्तिगत परिचय लिया, और पाया कि वह सील का पालन नहीं कर रहे थे, उसका परिणाम उनके चेहरे पर दिखाई दिया🙏

4. विशुद्ध ध्यान की पद्धति में सील का अनुपालन किया जाना अति आवश्यक है 🙏 वह भी त्रिविधि सील विशुद्धी होना आवश्यक है🙏 अन्यथा विशुद्ध ध्यान पद्धति के साथ अनजाने ही व्यक्ति आर्तध्यान करने लगता है, अथवा रौद्रध्यान करने लगता है, तो उसके दुष-परिणाम सामने आने लगते हैं🙏


5. सील क्या है?


अ. हिंसा ना करने का व्रत लेना🙏( इसके अंतर्गत बौद्धिक कर्म और शारीरिक कर्म दोनों सम्मिलित है )

ब. चोरी न करने का व्रत लेना🙏

( इसके अंतर्गत काया कर्म और बौद्धिक कर्म दोनों सम्मिलित है) 

स. झूठ ना बोलने का व्रत लेना 🙏( इसके अंतर्गत प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों बौद्धिक कार्य सम्मिलित है, अर्थात सच को छिपा लेना भी झूठ के अंतर्गत आता है )

द. नशे का सेवन न करने का व्रत लेना🙏( इसके अंतर्गत शारीरिक कर्म सम्मिलित है तथा अन्य मानसिक विकार भी सम्मिलित है)

ड़. असमयक जीविका का अनुपालन ना करने का व्रत लेना 🙏( इसके अंतर्गत रहन-सहन उठना बैठना, जीविका के संसाधन, प्राकृतिक नियमों के अनुसार सम्यक होना चाहिए)


6. उपरोक्त पंचशीलों का अनुपालन करने पर ही कोई साधक सुबह शाम की विशुद्ध ध्यान साधना कर सकता है🙏 अन्यथा वह ध्यान साधना के लिए समय ही नहीं निकाल सकेगा, और अगर उसने निकाल भी लिया तो ध्यान में बैठना संभव नहीं होगा🙏 उपरोक्त सील को भंग कर देने के कारण उसका मन अत्यंत व्याकुल हो जाएगा, और साधक आर्तध्यान अथवा रौद्रध्यान करने लगेगा 😭 अथवा ध्यान से उठ, भाग खड़ा होगा😂


7. आर्त ध्यान करने से मानसिक विकार बढ़ जाएंगे, रौद्र ध्यान करने से शारीरिक विकार बढ़ जाएंगे, उसका अंतिम परिणाम दु:ख ही होगा😭


8. इसीलिए हमारे संत शिरोमणियों ने, भगवान बुद्ध की पद्धति से अलग, सहज ध्यान योग की परंपरा बनाई, जिसमें किसी शब्द का सहारा लिया जाता है, ताकि व्यक्ति आर्तध्यान अथवा रौद्रध्यान से जाने से बच जाए🙏


9. परंतु जाना विशुद्ध ध्यान तक ही है, इसलिए संत शिरोमणियों के शब्दों समान नहीं है, एक ही संत शिरोमणि ने कई शब्दों को पकड़ा है, बदलते रहे, कभी सोहम सोहम कभी हरि हरि कभी मुकुंद मुकुंद कभी राम राम....... परंतु जो शब्द को पकड़ कर बैठ जाता है वह कहीं नहीं पहुंचता, केवल फसादी हो जाता है 😂 कहा जाता है, गोरखनाथ की परंपरा में हजारों पद्धतियां हैं 🙏 परंतु वह विशुद्ध ध्यान पद्धति नहीं है🙏


10. बुद्धिस्म की महायान शाखा ने भी एक शब्द पड़ा है जिसे अनिच्चा कहते हैं, कुछ लोग वहां पर भी माला का सहारा लेते हैं और अनिच्चा अनिच्चा का जप करते रहते हैं 😂 परंतु वह बुद्ध की विशुद्ध ध्यान पद्धति नहीं है 🙏 और जो अनिच्चा शब्द को पकड़ कर बैठे रहते हैं वह भी भटक जाते हैं


11. इसीलिए बुद्ध की विशुद्ध ध्यान पद्धति में संघ का विशेष महत्व, अर्थात 10-15 दिन अथवा एक दो माह तक किसी संघ में रहकर ध्यान को सीखना चाहिए🙏 एक बार विशुद्ध ध्यान पद्धति पर मन टिक गया तो फिर आगे तकलीफ नहीं होती, और छोटी सी भी गलती हो रही हो तो तुरंत पता लग जाता है कि हम गलत तरह से ध्यान कर रहे हैं, जैन धर्म में इसी को प्रेक्षा ध्यान कहा जाता है 😂 अर्थात अपनी गलती को भी देखते रहना😭 बुद्धिस्म में इसको बोधी का जाग्रत रहना कहते हैं 👏


12. हम आपसे जो बातें कर रहे हैं इसी को बुद्धमं शरणमं गच्छामि कहा जाता है, अर्थात विशुद्ध ध्यान पद्धति की बातो को जानना कि ध्यान कैसे किया जाए, अर्थात बुद्धिमता की बातें 😂 परंतु मूर्खों ने इसे भगवान बुद्ध की शरण में जाना कह दिया है, जैसे वह कोई जमीदार हो, और कोई उनकी शरण में जा रहा हो🙏 किसी धर्म विशेष की शरण में जाना कह दिया, पूरी तरह मूर्खतापूर्ण बातें हैं, यह ना कोई भिक्षु आपको बतायागा ना कोई समण-संघ वाला बतायागा, ना नव बुद्धिस्ट अंबेडकरवादी आपको बताएंगे, क्योंकि अधिकांश को तो पता ही नहीं है 🙏 महायान शाखा वाले तो सांप्रदायिक है वह कभी नहीं बताएंगे 🌹🙏

13. किसी को धार्मिक संगठन बना कर नेतागिरी करनी है, और किसी को राजनीतिक संगठन बनाकर नेतागिरी करनी है, दिल्ली की कुर्सी पर काबिज होना है 🙏 इसलिए कोई नहीं बताया यही अंतिम लेख है, ना भूतों ना भविष्यति 🌹 इसी लेख को आधुनिक युग का आध्यात्मिक सत्य मानना सर्वोचित होगा 🙏


14. समता समानता बंधुत्व उनका उद्देश्य नहीं है, जो धार्मिक अथवा राजनीतिक सत्ता के लोलुपता से ग्रस्त है अति निंदा से बचते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं 🙏 सबका मंगल हो, कल्याण हो 🙏🌹


साधक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


नोट : यदि किसी के प्रश्न हो तो वह व्यक्तिगत रूप से मुझसे पूछ सकता है 🙏

श्री गुरु ग्रंथ साहब के समरी

 श्री गुरु ग्रंथ साहब में नानक परंपरा के किस गुरु के कितने शब्द हैं, 


 किसी भगत के कितने शब्द हैं 

 किस भट्ट के कितने शब्द हैं 

 किस गुरु शिख के कितने शब्द हैं


 इन दो पेज में अंकित है,

 जहां तक भगत की बात है

 

सबसे ज्यादा शब्द कबीर जी के हैं जिनकी संख्या 541 है,

 उसके बाद भगत नामदेव का नाम आता है, उनके द्वारा कहे गए शबद की संख्या 62 है,

 तीसरे नंबर पर संत शिरोमणि गुरु रविदास आते हैं, इनके द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहब में 41 शबद का योगदान है 🙏


 श्री गुरु ग्रंथ साहिब में, नानक परंपरा की बोधि को सही सिद्ध करने के लिए, भगत और भत्तों की वाणी को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है🙏


मुसलमानों से लड़ने के लिए समाज की एकता बनी रहे इसीलिए श्री गुरु ग्रंथ साहब में गुरु गोविंद सिंह ने इन पदों को जोड़ा है! इनका भगतो के मूल दर्शन से कोई लेना-देना नहीं है 🙏


 गुरु अर्जन देव द्वारा संकलित, आदि ग्रंथ में भक्तों और भट्ट की वाणी नहीं है 🙏😂


विशुद्ध ध्यान लगाओ और जानो धर्म क्या है, घंटा बजाने और पोथी का पाठ करने से मिलने वाला लाभ आंशिक है🙏


 श्री गुरु ग्रंथ साहब के संदर्भ में मेरी खोज 2019 की है 🙏

16 से 22 नवंबर 2024 तक की पोस्ट

 [16/11, 3:05 pm] kamleshmittra: 🌹अति आवश्यक सूचना :- सूचना दिनांक 16 नवंबर 2024


आप सभी को जानकर खुशी होगी कि अब आपके द्वारा लिखे गए पत्र का माननीय सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेगा, सभी पत्रों का संज्ञान लेगा 🙏 ऐसा सिर्फ इसलिए हो सका है कि सन 2022 के दिसंबर माह में केंद्र सरकार और माननीय सर्वोच्च न्यायालय को मैंने लिखा था, परंतु सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने उसको खारिज कर दिया 🙏 6 महीने के संघर्ष के बाद जब आरटीआई के माध्यम से मुझे पता लगा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री ने हमारे पत्र को खारिज किया है जो कि उसका अधिकार क्षेत्र नहीं था, इसकी अपील मैंने माननीय राष्ट्रीय सूचना आयोग में की थी 🙏


 उपरोक्त संदर्भ में राष्ट्रीय सूचना आयोग ने दिनांक 5 नवंबर 2024 को निर्देशित किया कि चैंबर कोर्ट के मैटरस को चैंबर कोर्ट को ही करना चाहिए था परंतु माननीय राष्ट्रीय सूचना आयोग की अपनी सीमाएं, इसलिए यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विवेकाधिकार पर छोड़ दिया गया, माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उसकी रजिस्ट्री विभाग की त्रुटि उजागर हो चुकी थी🙏


जस्टिस खन्ना ने इसका संज्ञान लेते हुए, नई अधिसूचना जारी कर एक पैनल का गठन कर दिया है, जो मा. सर्वोच्च न्यायालय को भेजे गए पत्रों का संज्ञान लेगा परंतु विषय उठता है कि पत्र कैसे लिखें 🙏 कौन से विषयों का माननीय सर्वोच्च न्यायालय संज्ञान लेगा 🙏


1. आपकी जिस विषय से संबंधित शिकायत है, क्या आपने उसके निकटवर्ती अधिकारी को प्रतिवेदन दिया है 🙏

2. यदि निकट अधिकारी ने प्रत्यावेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की है तो क्या आपने उसके उच्च अधिकारी को सूचित किया है, इसकी शिकायत की है 🙏

3. क्या आपने उस विभाग के प्रमुख, प्रमुख सचिव अथवा मंत्री को शिकायत की है 🙏

4. उपरोक्त तीनों प्रक्रियाओं में 45 दिन (30 + 15, 30 दिन कार्रवाई के लिए और 15 दिन पोस्ट डिलीवरी के लिए ) का अंतर रखते हुए कुल सीमा 135 दिन की यदि हो जाती है🙏 और आपकी शिकायत का समाधान नहीं होता है 🙏

5. तब आप माननीय सर्वोच्च न्यायालय को सीधे पत्र लिख सकते हैं🙏 उसमें आपको पहले अपनाई गई पूरी प्रक्रिया का दिन बार व्योरा देना होगा 🙏

6. राज्य स्तरीय कार्यालय के लिए पहले आप राज्य के हाई कोर्ट को पत्र लिखें 🙏 यदि हाई कोर्ट भी इसका संज्ञान नहीं लेता है🙏

7. तब आप अपने पत्र में उपरोक्त चारों की शिकायत करते हुए, माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध कर सकते हैं कि आपके पत्र का संज्ञान लिया जाए 🙏

8. नई व्यवस्था के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय इसका संज्ञान लेगा🙏

9. फिर भी आपको कोई दिक्कत है तो मैं आपकी सेवा में हाजिर हूं 🙏

10. माननीय सर्वोच्च न्यायालय उन विषयों का भी सीधे संज्ञान लेगा जो सीधे संविधान से ताल्लुक रखते हैं, और किसी विधि के अंतर्गत नहीं आते हैं 🙏 मेरा पत्र इसी प्रकार का पत्र था, इसलिए माननीय राष्ट्रीय सूचना आयोग और माननीय सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने इसका संज्ञान लिया है 


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


नोट :- 

1. उपरोक्त मामले में आप संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी मांग कर सकते हैं🙏


2. इसके साथ-साथ अपने हुए मानसिक उत्पीड़न की भरपाई की ( कंपनसेशन) भी मांग कर सकते हैं


3. आपकी जो मूल समस्या थी उसका निस्तारण तो, उपलब्ध विधि के अनुसार होगा ही होगा🙏 साथ ही आप ऐसी विधि की भी मांग कर सकते हैं जिसका भारतीय संविधान समर्थन करता हो 🙏

4. मैं न्यायपालिका के रास्ते पर कालीन बिछाने आया हूं, और इस कार्य में मैं ईमानदारी से लगा हूं, आप भी इमानदारी से मेरा सहयोग करें, यदि सूचना को अपने पढ़ लिया है 😂

[17/11, 11:07 pm] kamleshmittra: 🙏सूचना दिनांक का 17 नवंबर 2024


1. अब इस ग्रुप में शासन-प्रशासन को मेरे द्वारा लिखे जाने वाले सभी पत्रों की कॉपी डाली जाएगी, जो जन कल्याण से संबंधित है, शासन प्रशासन और अन्य निकाय की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए हैं 🙏 रविदास राज स्थापित करने से संबंधित है 🙏


2. किसी महानुभव के व्यक्तिगत केस की कॉपी इसमें नहीं डाली जाएगी 🙏 जब तक कि वह सार्वजनिक कल्याण से संबंधित ना हो, संसूचित कर डाली जाएगी🙏


3. अब तक सार्वजनिक संघर्ष का कार्य मैं अपने व्यक्तिगत धन से करता रहा हूं, लगातार यह खर्च बढ़ रहा है🙏, पत्र लेखन, और मीटिंग का यात्रा भत्ता लगातार बढ़ रहा है 🙏


4. कुछ प्रिय मित्रों का सहयोग इसमें लगातार आता रहा है इसलिए मैं इस कार्य को 2019 से करता रहा हूं🙏


5. जनवरी 2024 तक मुझे जानने वाले बहुत कम लोग थे, इसलिए मेरा उत्तरदायित्व भी कम था परंतु श्री के.सी. रवि जी के संपर्क में आ जाने के बाद, बहुत से लोग तेजी से मुझे जानने लगे हैं, इस कारण समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियां भी बढ़ गई है 🙏


6. हम अपने उन मित्रों को धन्यवाद देते हैं, अपने उन मित्रों की आर्थिक शक्ति को भी पहचानते हैं जो मेरा आर्थिक सहयोग करते रहे हैं इसलिए हम उन पर अधिक भार नहीं डाल सकते हैं 🙏


7. रविदास राज की स्थापना में जो अन्य लोग अपना सहयोग करना चाहते हैं, वह चाहे तो मेरी आर्थिक मदद कर सकते हैं🙏 जैसा कि मैं अपने पूर्व मित्रों को समय-समय पर कार्य की प्रगति रिपोर्ट देता रहा हूं वह भी मुझसे कार्य की प्रगति रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे, जो इसमें सहयोग करेंगे🙏


8. रविदास राज को केवल घंटा बजाकर स्थापित नहीं किया जा सकता, जमीन पर संघर्ष करना होगा, और चित्त में कल्याण भाव को भी संजोए रखना होगा, उस ध्यान पद्धति से जो संत शिरोमणि गुरु रविदास ने दी है, अथवा एंड होरिजेंटल विचारधारा के संत ने दी है, सभी होरिजेंटल विचारधारा के संत रविदास राज के समर्थक हैं, भले ही इसे दूसरे नाम से जाना जाता हो 🙏


9. किसी संत का बड़ा प्रिया वचन है कि किस्मत से रोटी सामने आ सकती है, परंतु मुंह चला कर खानी ही पड़ेगी, इतना श्रम करना ही पड़ेगा 😂


10. रविदास राज स्थापना का समय आ गया है, सभी अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, अपनी समर्थ के अनुसार आर्थिक सहयोग करें🙏


 संघर्षकर्ता अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[18/11, 11:54 am] kamleshmittra: 🙏तुगलकाबाद रविदास मंदिर प्रांगण से संबंधित महत्वपूर्ण सूचना दिनांक 18 नवंबर 2024 


जिनके पास सरकारी कमेटी होने की पावर थी, वह पावर उनके हाथ से निकल रही है🙏


जो कल करोड़ रूपये की भूमि के मालिक बनने जा रहे थे, उनके हाथ से करोड़ों रुपए की भूमि निकल रही है🙏


वह लोग अत्यंत परेशान है, और उठा पटक करने में जुटे हुए हैं🙏


सभी 96 गुरु भाइयों से, दिल्ली के 105 मंदिर कमेटियों के प्रमुखों से एवं अन्य गुरु भक्तों और देश के अन्य रविदास मंदिरों के प्रतिनिधियों से निवेदन है, आप सक्रिय रहे, सूचनाओं को एकत्र करते रहें 🙏 संरक्षण तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय करेगा 🙏


संत शिरोमणि गुरु रविदास सभी के हैं 🙏 सभी गुरु भक्त कमेटी के सदस्य हो सकते हैं, पदाधिकारी चुने जा सकते हैं, मंदिर के उत्तरोत्तर विकास में अपना योगदान कर सकते हैं, वहां पर कोई चौधरी बनकर नहीं बैठ सकता है 🙏


संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के डंडे में आवाज नहीं होती है 🙏


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[19/11, 10:13 pm] kamleshmittra: जब दलितों को अधिकार देने की बात हो, लॉ मिनिस्ट्री से पत्र ही गायब हो जाते हैं,


पत्रों के गायब होने के विषय को गंभीरता से लेना दलित राजनीति का विषय होना चाहिए, उन अधिकारियों के टर्मिनेशन की कार्रवाई होनी चाहिए🙏 क्योंकि पत्र साशय गायब किए जाते हैं🙏


 मैं मूल विषय पर संघर्ष करूं या अथवा जातिगत उत्पीड़न पर 🙏 किसी नए व्यक्ति अथवा राजनीतिक व्यक्ति की तरफ से कोई आर्थिक सहयोग नहीं आ रहा है 🙏cic में 25 नवंबर तारीख है 🙏


 उत्तर-पश्चिम दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती कनिका जैन के खिलाफ अनुसूचित जाति आयोग के आदेश होने के बावजूद डीसीपी रोहिणी उनके खिलाफ एफआईआर लिखने को तैयार नहीं है 🙏


राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग बिना दांत का हाथी है, पूर्व अधिकारी श्री मंगतराम वाली ने अपने पूरे जीवन काल में NCSC को काटने वाला हाथी बनाने का कोई काम नहीं किया है 🙏


 मैं मूल विषय पर संघर्ष करूं या या गैर अनुसूचित जाति के भ्रष्ट अधिकारियों को जेल भिजवाने के विषय पर काम करू 🙏


 कल रात 10:00 बजे तक मैं रोहिणी जिला के डीएसपी के पास था, वह अंत तक अड़े हुए हैं कि वह सचिव कनिका जैन के खिलाफ FIR नहीं करेंगे😭

[19/11, 10:44 pm] kamleshmittra: दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण उत्तर पश्चिम दिल्ली श्रीमती कनिका जैन के खिलाफ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश डीएम अलीपुर को दिया गया, यह पत्र डीएम अलीपुर के ऑफिस से गायब हो गया, ऑफिस ने अपनी लिखित रिपोर्ट में कहा है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग से उनको कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ 😂


 यह है गैर-दलितों की लाइजिंग, और दलित आपस में ही तलवार भांजने में मस्त हैं 😂 संत शिरोमणि गुरु रविदास मंदिर तुगलकाबाद को ही क्रिकेट का मैदान बनाकर 4- छक्का लगा रहे हैं 🌹


 संत हो या सांसद थोड़ी सी शर्म करो, समाज जोड़ने का काम करो, समाज ने पहले ही स्वीकार कर लिया है आप शक्तिमान हो 🙏


 अपने पद की गरिमा का सम्मान करो, आपके बाद भी इस पद को तमाम संत और सांसद शोभित करेंगे 🙏 तुम्हारे कारण धोखे में वह लोग ना गलियां खा जाए 👏


 नए दलों को राजनीति के लिए विषय ही नहीं मिल रहा हैं 🙏 वह केजरीवाल हटाओ, अंबेडकर प्रतिमा लगाओ, मंदिर बनाओ जैसे विषय में उलझे हैं, घंटा बजाने में लगे हैं🙏 आदमी को सामर्थ बान बनने का कोई विषय उनके एजेंडे में नहीं है, शोषण मुक्त करने का कोई विषय उनके आंदोलन का अंग नहीं है 🙏🌹

[20/11, 12:32 pm] kamleshmittra: मैंने आर्थिक समानता की बात क्या कर दी, हमारे समाज के भोले भाले दलित नेता गणों ने हमारी चाय तक जला दी 😂


 मैं पुनः निवेदन करना चाहता हूं आर्थिक समानता की बात मैं नहीं कर रहा हूँ, आर्थिक समानता की बात भारत का संविधान कर रहा है, अधिवक्ता संविधान और कानून का मुख है और जज कार्यपालक अधिकारी है, अधिकांश समय जज अंधा और बहरा होता है, अधिवक्ता उसको पढ़कर सुनाता है😂


किसी अधिवक्ता की चाय ना जल जाए इसलिए आज तक समाज के अधिवक्ता ने समाज को यह नहीं सुनाया कि संविधान क्या कहता है, मैं सुना रहा हूं संविधान क्या कहता है तो हमारे समाज के ही नेता गण हमारी चाय जला देते हैं😂


 नेताजी भगोने की कीमत भिजवा दीजिए, क्योंकि आप संविधान को उतना ही जानते हैं जितना आरएसएस वालों ने पढ़कर बताया है, इसलिए यह मत कहिए कि शोषण जाति के आधार पर होता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर होता है शोषण उसका होता है, जिसके पास पैसा है वह चार लठ्ठऐत भी रख सकता है उसे दूसरे के मंदिर में जाने की जरूरत नहीं है, खुद के मंदिर में पंडितों को रख सकता है 😂


सतीश मिश्रा को ही देख लो मायावती के चरणों में पड़े हैं, इसलिए यह मत कहो कोविद को मंदिर उद्घाटन पर नहीं बुलाया गया😂

[20/11, 3:00 pm] kamleshmittra: 🌹सूचना दिनांक 20 नवंबर 2024

 

आर्थिक समानता बनाम आर्थिक आरक्षण🙏


1. कुछ लोगों को भ्रम हो सकता है कि मैं आर्थिक आधार पर आरक्षण की बात कर रहा हूं 🙏


2. जबकि मैं आरक्षण की बात ही नहीं कर रहा हूँ, मैं तो केवल आर्थिक समानता की बात कर रहा हूं 😂


3. इसलिए राजनीति करने वाले सावधान रहें, तुम आर्थिक आधार पर, जाति के आधार पर आरक्षण के लिए दंगल सजाए रहो, परंतु इससे समाज का कोई भला नहीं होगा🙏🌹


3. मैं तो आर्थिक समानता की बात कर रहा हूं, निजी क्षेत्र हो या सरकारी क्षेत्र, क्षेत्रीयता के आधार पर मूलभूत आवश्यकताओं में आर्थिक समानता आवश्यक है, चल संपत्ति अचल संपत्ति का वितरण समानता के आधार पर होगा, शेष संपत्ति सरकार के पास जमा रहेगी, अगली पीढ़ी को दी जाएगी, बची हुई चल और अचल संपत्ति, दुनिया छोड़ चुके लोगों से वापस ले ली जाएगी 😂 और पुनः वितरण होगा🙏


4. जनजातीय संपत्ति और सभ्यता संस्कृति अपना अलग स्थान रखती है इसलिए आदिवासी(बनवासी), शाहरी और ग्रामीण सभी की क्षेत्रीय आधारित मूलभूत आवश्यकताओं से संबंधित चल और सब अचल संपत्ति बराबर की होगी, उसको प्राप्त करने वाला मूल वेतन समान होगा 🙏


5. बौद्धिक संपदा, का उपयोग जन कल्याण के लिए होगा, जो अपनी बौद्धिक संपदा का उपयोग जन कल्याण के लिए करेगा, बदले में जन कल्याण करने के लिए अतिरिक्त सुविधाएं पाने का अधिकारी होगा😂


6. यह भारतीय संविधान के अनुसार नई अर्थव्यवस्था होगी, इससे आप रविदास राज भी कह सकते हैं क्योंकि संत शिरोमणि गुरु रविदास ने कहा है ऐसा चाहूं राज मैं......


7. आज जिन नेता का फोन आ गया, पिछली बार भी उनका फोन आया था उन्होंने मुझे पिछली बार बहुत डराया था, उत्तर प्रदेश भाग जाने के लिए धमकाया था, मैं तो फोन देखते ही डर गया, फिर किसको होश रहा कि चाय चढ़ी है🙏


8. सब धुआ धुआ हो गया 😂तब याद आया इस बार उधर से धुआं नहीं हुआ तो इधर से धुआं हो गया 😂


9. एक लंबे समय तक मनुवादी दर्शन का विरोध चलता रहा, मनुवादी दर्शन का विरोध अंबेडकरवादी राजनीति नही है 🙏

10. अंबेडकरवादी राजनीति तो कल्याण की राजनीति है, 22 प्रतिज्ञाओं का दर्शन मुझे समझ में नहीं आता है, मुझे संदेह है यह किसी और के द्वारा लिखी गई है, अथवा किसी और समय लिखी गई बातो को कट पेस्ट कर दिया गया है 🙏


12. क्योंकि भारतीय संविधान लिखने वाला दूर दृष्टा, इतनी मूर्खतापूर्ण बातें एक साथ नहीं लिख सकता है 🙏


13. जैसे अंबेडकर ने कहा था कि "हिंदू जाति में पैदा होना ना होना मेरे बस की बात नहीं थी परंतु मैं हिंदू रह कर नहीं मारूंगा बौद्ध होकर मारूंगा" इसलिए डॉक्टर अंबेडकर ने बौद्ध धर्म ग्रहण किया था, बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी 😂


14. आजकल आरएसएस का दर्शन चल रहा है, वह भारतीय संविधान नहीं है 😂


15. अब तक मैंने जितने चमार(दलित) अधिकारियों से बात की है, जितने दलित राजनेताओं से बात की है यह जानकर बहुत अफसोस होता है, कोई भी भारतीय संविधान प्रदत्त अवधारणा आर्थिक समानता के पक्षधर नहीं है, जबकि वह खुद को अंबेडकरवादी कहने से नहीं चूकते हैं 🙏 मीठा मीठा गप-गप कड़वा कड़वा थू थू 😂


16. आरएसएस की व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से निकलने वाली भारतीय संविधान की व्याख्या, भारतीय संविधान की व्याख्या नहीं है 🙏😂


17. इसलिए कोई भी दलित अधिकारी, कोई दलित राजनेता, जैसा उसका माइंडसेट है, मेरे पर थोपने का प्रयास न करें 🙏🌹


18. मैंने इंजीनियरिंग छोड़कर LLB इसीलिए की क्योंकि इलाहाबाद के एडिशनल कमिश्नर श्री रामचंद्र (चमार ) संविधान पर बहस करते हुए मेरी बात का जवाब नहीं दे सके🙏तब उन्होंने एक ही बात की और मुझसे पूछा क्या मैंने एलएलबी की है, मैंने कहा मैंने नहीं की, उन्होंने कहा मैंने एलएलबी की है, इसलिए वह मेरी बात नहीं मानेंगे🙏

19. उस संघर्ष की भी एक लंबी कहानी है, डॉक्टर एस के पांडे को बचा लिया रामचंद्र ने, अन्यथा डॉक्टर एस के पांडे- एडिशनल कमिश्नर कब का जेल चला गया होता, संघर्ष अभी जारी है 🙏 गैर दलित अधिकारियों को बचाने में लगे चमारों से ही मुझे सबसे ज्यादा जूझना पड़ता है, इसी को क्रीमी लेयर कहते हैं वर्गवाद कहते हैं 🙏 

20. मेरे आर्थिक समानता के संघर्ष पर नेता जी को तकलीफ नहीं होनी चाहिए थी, परंतु नेताजी (जाटव) को तकलीफ है, क्योंकि अपने समाज के भूखे लोगों को देखकर उनका खुशी मिलती है😂 चार पैसे जोड़ लिए हैं इसीलिए वह नेता है, वह अपने गुण के आधार पर नेता नहीं है


21. उस मूर्ख एडिशनल कमिश्नर रामचंद्र ने मुझे सुप्रीम तक पहुंच कोर्ट तक पहुंचा दिया, आज तक मैं अपनी उस बहस पर कायम हूं बात सन 2004 की है 🙏


अफसोस की बात है क्रीमी लेयर को भारतीय संविधान समझ में नहीं आता है 🙏


आरक्षण से मिली हुई नौकरी की समय सीमा 10 वर्ष होनी चाहिए, तब दलित अधिकारी ईमानदारी से काम करेंगे, जनहित का काम करेंगे😂


 एक अन्य प्रबुद्ध जी का फोन आ गया सारा पोस्ट भुला दिए🌹 बाकी फिर कभी🙏


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[21/11, 6:32 pm] kamleshmittra: 🌹अति आवश्यक सूचना 21 नवंबर 2024


दलित राजनीतिग्यो को राजनीति के लिए विषय नहीं मिल रहे वह एक मांगे तो सौ दूँl 


कई घंटे से यह पत्र सोशल मीडिया पर पड़ा है परंतु किसी भी राजनीति विशेषज्ञ का फोन नहीं आया है क्योंकि दलित राजनेता केवल घंटा बजना जानते हैं 😂


इस पत्र की डायरी 21 नवंबर को हो रही है, जबकि इस पत्र पर डिप्टी पुलिस कमिश्नर का आदेश 18 नवंबर को ही अंकित है,आदेश हस्तलिखित है 🙏😂


FIR तो दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (उत्तर-पश्चिम जिला) सचिव श्रीमती कनिका जैन के खिलाफ होनी थी, परंतु उनका बचाव करते-करते डिप्टी पुलिस कमिश्नर श्री अमित गोयल ने अपनी कलम फसा बैठे हैं 😂


इसके बाद वर्ग बाद शुरू हो जाएगा इसे हम जातिवाद नहीं कह सकते है, यह वर्गवाद क्रीमी लेयर वाद (नौकरशाहीवाद) है 🙏


डिप्टी पुलिस कमिश्नर रोहिणी का जनसंपर्क अधिकारी (PRO) जो अनुसूचित जाति अथवा पिछड़ी जाति का सदस्य है, अपने वरिष्ठ पदाधिकारी डिप्टी पुलिस कमिश्नर रोहिणी को बचाने के लिए जुट गया है 🙏


1. 18 नवंबर 2024 को हमने डिप्टी पुलिस कमिश्नर से लगभग शाम 7:30 बजे मुलाकात की थी, जबकि सुबह 11:00 से मुझे इसी विषय पर PRO द्वारा लटकाये रखा गया था 🙏 पहले सहायक पुलिस कमिश्नर बेगमपुर की रिपोर्ट खुजवाने का काम चलता रहा, उस रिपोर्ट को दिखाने को भी राजी नहीं हुए, मुझे बताया कि आयोग को भेज दी है 🙏 मैंने प्रतिवाद किया कि जब सहायक पुलिस कमिश्नर बेगमपुर का अधिकार क्षेत्र ही नहीं बनता तो वह इस विषय पर रिपोर्ट कैसे बना सकते हैं😂 मैंने कहा मुझे डिप्टी पुलिस कमिश्नर से मिलना है, 7:30 बजे हमारी उनसे मुलाकात करायी गयी 🙏

2. डिप्टी पुलिस कमिश्नर को मैंने वह बताया जो पत्र में लिखा है परंतु वह FIR करने को राजी नहीं हुए मैंने उनको पत्र सौंपते हुए कहा जो कुछ भी आपको कहना है इस पत्र पर कह दीजिए 

2. उन्होंने फारसी में इस हिंदी पत्र पर लिख दिया, उसको उनका जनसंपर्क अधिकारी भी, आज नही पढ़ पाया, ना समझा पाया🙏 इसके साथ ही हम दोनो DCP ऑफिस से बाहर निकाल आये 🙏

3. जनसंपर्क अधिकारी ने मुझसे कहा ऑफिस में बैठो मैं अभी आता हूं 🙏

4. उसके बाद 10:00 बजे तक जनसंपर्क अधिकारी अपने ऑफिस में नहीं लौटा, और मैं उसका इंतजार करता रहा,

5. रात 10:00 बजे जब उससे मुलाकात हुई तब वह कहता है कि सारे लोग चले गए हैं फोटो स्टेट नहीं हो सकता है, अन्यथा इसी की फोटो स्टेट मैं आपको दे देता😂

6. मैंने उससे कहा मुझे कॉफी दिखा दीजिए तो वह बोला हम नहीं दिखा सकते कल आपको फोटो कॉपी करके दे देंगे🙏 रात लगभग 12 बजे तीन गुना पैसा खर्च करके हम अपना रूम पर लौटे 😭

7. आज 2 दिन बाद मैं डिप्टी पुलिस कमिश्नर के ऑफिस पहुंचा हूं, तो मुझे उसकी कॉपी दी गई, PRO के सहायक से मैंने कहा इस पर आप अपने ऑफिस की स्टंप लगा दे, परंतु वह स्टंप लगाने को राजी नहीं हुआ और PRO साहब के आने का इंतजार करने के लिए बोला, PRO साहब लगभग 12:00 बजे दोपहर को आये 🙏

8. इसी दौरान मैंने मोबाइल से पत्र की फोटो कॉपी ले ली थी 🙏 PRO साहब भी पत्र पर ऑफिस की स्टांप लगाने को राजी नहीं हुए🙏 मैंने उनसे कहा कि हस्ताक्षर पठनीय नहीं है इसलिए आपको ऑफिस की स्टांप लगानी होगी, -> तब वह कहने लगे इस तरह से पत्र देना गलत है इसलिए वह स्टंप नहीं लगाएगे जब तक डिप्टी कमिश्नर साहब उनसे नहीं कहते है 😂 मैंने उनसे कहा आप भी मानते हैं यह तरीका गलत है वह बोले हां 🙏

9. तब मैंने उनसे कहा अब दूसरे विषय पर आ जाइए इस आदेश में जो लिखा है पढ़ कर सुना दीजिए, परंतु वह आदेश को भी नहीं पढ़ सके 😂

10. तब मैंने उनसे कहा इस पत्र की डायरी कर दीजिए, क्योंकि इस पत्र को मैंने 18 तारीख को दिया था🙏 वह चाहते तो अपने ऑफिस में इसकी डायरी कर सकते थे, जैसे DCP साहब से मिलने वाले लोगों की डायरी करते थे, वहीं पर इस पत्र को चढ़ा सकते थे😂


11. परंतु अधिक होशियारी दिखाते हुए, उन्होंने अपने सहायक के माध्यम से रिसिप्ट विभाग में मेरे पत्र की डायरी कराई इसलिए पत्र पर डायरी की तारीख 21 हो गई है 😂 और मुझसे कहा कि जब डिप्टी साहब आएंगे तब उनसे पूछ लेंगे, तब स्टंप लगाएंगे और मुझे जाने के लिए कह दिया, कि शाम को पूछ कर वह फोन कर देंगे🙏


मैं चला आया, परंतु अभी तक PRO साहब का फोन नहीं आया 😂


आम आदमी तो इतनी बहस भी नहीं कर सकता है, यहां पर दलित राजनीति करने की आवश्यकता है, मेरे दो दिन के ख़राब हुए समय और खर्च की भरपाई कौन करेगा यह एक राजनीतिक विषय है


क्योंकि न्यायपालिका उपलब्ध विधि के अनुसार ही न्याय करता है, जिन विषय पर कोई विधि उपलब्ध नहीं है, न्यायपालिका उस विषय पर न्याय नहीं कर सकता है इसलिए यह राजनीति का विषय है 😂


जब राजनीति कनिका जैन के खिलाफ FIR का दबाव बढ़ायेगी (जोकि जिला जज के समान शक्ति रखती हैं, सचिव जिला जज रैंक का होता है ), तो डिप्टी पुलिस कमिश्नर अमित गोयल के खिलाफ भी FIR लिखी जाएगी क्योंकि वह माननीय अनुसूचित जाति आयोग के कार्य में बाधा डालना और विलंब करने के दोषी हैं😂 दलित राजनीति को अपना संरक्षण करने वाली संस्थाओं के साथ खड़ा होना चाहिए🙏🌹


इस दलित अथवा ओबीसी PRO का क्या किया जाए?


जब ऊपर वालों पर टूटेगी तो इस पर भी टूटेगी, दलित राजनीति यहीं पर मौन हो जाएगी 🙏 इस प्रकार सवण(ऊंची जाति) राजनीति के हौसले बुलंद होंगे और दलित पिस्ता रहेगा 😂 


सीमा पर आदेश देने वाले ऊंची जाति के लोग होते हैं और गोली खाने वाला अनुसूचित जाति का अथवा ओबीसी होता है, धोखे से कोई ऊंची जाति का मर जाए, तो पदक विजेता हो जाता है 🙏


अपने समाज की रक्षा के लिए, PRO साहब तैयार नहीं है 🙏 वह वर्गवाद के अंतर्गत अमित गोयल को बचाने पर लगे हैं 😂


वकील केवल उपलब्ध विधि में ही न्याय दिलवा सकता है, बाकी सब जज साहब की कृपा पर है🙏


राजनीति सभी जन उपाय करने में सक्षम है, क्योंकि बाबा साहब ने दलितों को इतनी शक्ति दे रखी है वह जब चाहे हर सरकार को गिरा सकते हैं🙏


परंतु दिल्ली के दो माननीय श्री दुष्यंत गौतम और श्री राजेंद्र गौतम घंटा बजाकर दिल्ली की जनता को दो टुकड़ों में बांटे हुए है,


एक रविदास के नाम पर घंटा बजा रहा है दूसरा अंबेडकर के नाम पर घंटा बजा रहा है 😂


मेरे पास वोट एक है, मैं किसी घंटे को वोट दूं, दोनों ही समाज के विष हैं 🙏


कटु आलोचक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064


नोट :-

मेरी कलम से जीतना होगा मैं करूंगा, परंतु मुझे किसी माननीय से कोई उम्मीद नहीं है, जबकि यह राजनीति का विषय हो चुका है 🙏कि माननीय अनुसूचित जाति आयोग के आदेश के बाद भी एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई?


सब मोदी के चेले हैं कमलेश मित्रा को कपड़ों से पहचान रहे हैं, वह अनुसूचित जाति आयोग में बैठा हुआ डिप्टी डायरेक्टर पहाड़िया हो अथवा डिप्टी पुलिस कमिश्नर अमित गोयल हो, या सचिन कनिका जैन😂


अधिवक्ता कोड के अनुसार किसी भी सरकारी कार्यालय में किसी भी अधिकारी के समक्ष अधिवक्ता अपनी यूनिफॉर्म पहनकर नही जायेगा जब तक कि वह न्यायिक अधिकारी ना हो इसलिए मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं मैं अधिवक्ता हूं 😂

[22/11, 7:11 am] kamleshmittra: 🌹आध्यात्मिक चर्चा सूचना दिनांक 22 नवंबर 2024


सुबह के 5:30 बजने वाले हैं, आज के विशुद्ध ध्यान में मन स्थिर नहीं हो सका है 🙏


भटकता ही रहा है 


ध्यान कई प्रकार का होता है, मैं विशुद्ध ध्यान की बात कर रहा हूं🙏


1. विशुद्ध ध्यान में ना तो किसी नाम का सहारा लिया जाता है और ना ही किसी चित्र का, विशुद्ध सांसों के आगा-गमन पर नथुनों के पास मन को टिकाया रखना पड़ता है, और लंबे समय तक सांसों के आने-जाने की प्रक्रिया को देखते रहना पड़ता है, इसी को पिछली चर्चा में मैंने कहा था कि कम से कम उम्र के अनुपात में अर्थात 30 साल उम्र है तो कम से कम 30 मिनट, 40 साल उम्र है तो कम से कम 40 मिनट का ध्यान करना लाभदायक होता है ( प्रतिदिन सुबह-शाम)🙏


2. जो लोग विशुद्ध सांस के सहारे ध्यान नहीं लगा सकते, वह नाम का सहारा लेते हैं, चित्र का सहारा लेते हैं, चित्र स्मृति का सहारा लेते हैं🙏


3. नाम कोई भी हो सकता है और किसी के गुरु के द्वारा लिया जा सकता है या स्वयं से भी कर सकते हैं, परंतु सभी धोखे हैं 🙏 जिनका इतना करने पर भी नहीं टिकता, वह माला का सहारा भी ले लेते हैं 🙏अब वे एक साथ तीन जगह पर मन टिकाने की कोशिश करते हैं🙏 मन को तीन स्थानों तक ही सीमित रखते हैं -> सांसों के साथ, शब्द के साथ, और माला की गुरिया के साथ🙏


4. जिनका इतने पर भी ध्यान नहीं टिकता, वह रूप ध्यान करते हैं, किसी आराध्य के रूप को आंख बंद करके याद करते हैं परंतु यह सब भी धोखे है 😂


5. आचार्य बालकृष्ण ने आयुर्वेद में जड़ी बूटियां का अध्ययन कराते समय एक बात कही थी, जब भी हम जड़ी बूटियां को टैबलेट या कैप्सूल के फॉर्म में बनाते हैं, उस बूटी की 40% शक्ति समाप्त हो जाती है😂 परंतु फिर भी उनका दिव्या फार्मेसी ट्रस्ट दवाइयां का निर्माण करता है 🙏 क्योंकि लोगों को रेडीमेड चाहिए😂


6. विशुद्ध सांसों पर मन को टिकाना अत्यंत कठिन काम है, पिछली बार चर्चा में मैंने कहा था, जो विपश्यना के साधक हैं वह भी इस चूक को करते हैं 🙏 उनका मन विशुद्ध सांसों पर टिका नहीं रहता, वह आर्त ध्यान अथवा रौद्र ध्यान करने लगते हैं🙏


7. इसके परिणाम स्वरुप विकार बढ़ जाते हैं, कई बार तो विकार इतने बढ़ जाते हैं, कि उनके लिए अपने शत्रु पर हावी रहना अत्यंत सहज हो जाता है अथवा मानसिक विक्षिप्त हो जाते हैं 🙏 अथवा जीवन में इतनी निरस्ता आ जाती है कि वह गृहस्त जीवन का परित्याग कर देते हैं 😂 यह दोनों ही अतियां बुरी है 🙏


8. इसीलिए संत कबीर संत रविदास, दादू, नानक आदि ने साहज ध्यान की परंपरा को अपनाया है, ताकि घर गृहस्ती से विमुक्ति ना हों, और शत्रुओं पर आक्रमण पशुता के स्तर तक ना बढ़ जाए 🙏


9. क्योंकि ध्यान का असर चित्त पर होता है, जिससे भय संस्कार निकल जाता है, और मनुष्य बंदर के समान व्यवहार करता है, अथवा शेर के समान🙏अन्य विकारों पर भी असर करता है, उसके परिणाम अलग-अलग होते हैं🙏


10. ध्यान का लाभ सबसे अधिक एकाग्रता में मिलता है, व्यक्ति विक्षिप्तता पूर्ण व्यवहार नहीं करता हैं, एक समय में एक ही काम पर मन एकाग्र रहता है इसलिए अधिकारी, कर्मचारी, नेता विद्यार्थी आदि उस एक विषय को अधिक गहराई से समझ पाता है🙏


11. जितने भी वैज्ञानिक और शोधक होते हैं, उनके मन की एकाग्रता उच्च कोटि की होती है, यह एकाग्रता उनको पारिवारिक संस्कारों से प्राप्त हो जाती है, अथवा किसी गुरु के सानिध्य से, इसलिए उच्च जातियों की स्मृति अच्छी होती है, उनका मन किसी विषय पर आसानी से एकाग्र हो जाता है, क्योंकि वह प्रत्यक्ष या परोक्ष धन पद्धति से जुड़े हुए होते हैं🙏 

12. यह दूसरा विषय है कि उच्च जातियां समाज की अन्य जातियों का शोषण करने के लिए अपनी योग्यता का अधिक प्रयोग करती है क्योंकि वह विशुद्ध ध्यान नहीं करते हैं 🙏


13. वैज्ञानिक शोध में अग्रणी देशो का राज धर्म बौद्ध है, बौद्ध धर्म विशुद्ध ध्यान पर जोर देता है, जैसे चीन ताइवान जापान आदि 🙏 अन्य ध्यान की पद्धतियां व्यापारिक संस्कृति को बढ़ावा देती है 🙏


14. रूप ध्यान, मंत्र ध्यान, यज्ञ, पूजा भजन आदि 🙏-> चाहे ईसाई धर्म के यीशु को ले ले देवी रूप ध्यान है, इस्लाम के मोहम्मद साहब को लेने, वह स्मृति ध्यान है 🙏


15. परंतु विशुद्ध ध्यान, सांस से शरीर तक जाता है, चित्त और शरीर को स्वस्थ करता है मनुष्य को मनुष्य बनता है🌹


16. जब कोई मनुष्य मनुष्य हो जाता है, तो उसमें भय संस्कार निकल जाते है, वह कबीर हो जाता है और बेबाक बोलता है, रविदास हो जाता है सीधे चुनौती देता है दादू, सहजो जो तमाम नाम जुड़े हुए हैं, जो मानवता के संदेश के प्रचारक रहे, जिनकी अपनी बोधी थी, बुद्धि तो पंडित के पास भी होती है 🙏


कांकर पाथर जोड़ी के मस्जिद लई बनाए.......

दुनिया इतनी बाबरी पत्थर पूजन जाए........


सीधे चुनौती देना इस बात को दर्शाता है कि भय का संस्कार नहीं है....... उसको कोई भयभीत नहीं कर सकता है......


ऐसा व्यक्ति मनुष्य के लिए कल्याणकारी राज्य की स्थापना का मार्गदर्शन दे सकता है, ऐसा चाहूं राज मैं.....


नानक की परंपरा थोड़ी सी अलग है रूप ध्यान जैसी ही है...

 एक तू ही निरंकार......


17. बांकी ग्रंथो की मोटी-मोटी किताबें बकवास हैं, उनके लिए जिन्होंने जान लिया है 🌹


जिसने चाय पीकर देख ली उसको कोई चाय का ज्ञान क्या देगा कि चाय मीठी होती है😂


जिसने चाय नहीं पी, उसको चाय का ज्ञान देते रहिए कि चाय मीठी होती है उसमें इलायची का स्वाद होता है, उसको पी-कर ताजगी आती है आदि बाते.....


जिसकी बोधि जागृति हो गई उसके लिए अमृतवाणी हो, श्री गुरु ग्रंथ साहिब हो, आदि प्रगाश ग्रंथ हो, तिपिटक हो, उपनिषद हों या वेद हों आदि आध्यात्मिक ग्रंथ सब कबाड़ स्टोर की पुस्तके हैं 🌹


18. चलते चलते बनारसी दास जी का उल्लेख करना चाहूंगा......


अभी जल्दी ही उनसे मुलाकात हुई थी, उन्होंने संत शिरोमणि गुरु रविदास की ध्यान पद्धति के बारे में मुझसे चर्चा की थी, 


सो-हम 🙏


एक मंत्र ध्यान है, बैसाखी(ढकेला ) है, आरंभ में अच्छी है, 


इसीलिए संत शिरोमणि ने गुरु रविदास ने, अपनी ध्यान पद्धति में बैसाखी को बदलते रहे हैं ताकि किसी को बैसाखी से मोह ना हो जाए 🙏 इसलिए कहीं पर उन्होंने हरि हरि कहा है, कहीं सो-हम सो-हम कहा है, कही राम-राम कहा है, और कही मुकंद मुकंद कह दिया है 😂


ताकि उनके भक्त लोग बैसाखी से चिपके नहीं, किसी भी नाम का सहारा लेकर सांसों पर टिका रहा जा सकता है🙏


परंतु अंतिम लक्ष्य विशुद्ध सांस पर टिकना है 🙏 जो भी विशुद्ध सांस पर मन टिका लेगा बोधि को प्राप्त हो जाएगा😂


19. परंतु मूर्ख रविदासिया संतो ने, 


हरि-हरि नाम से गुट बना लिया है.....

सो-हम नाम से गुट बना लिया है.....

राम-राम नाम से गुट बना लिया है.....

जल्दी ही कोई सिर फिरा मुकंद-मुकंद नाम से भी गुट बना लेगा 😂


20. कबीर-पंथी सहजयोग के सहारे काम करते हैं, फिर भी उन्हें 1 घंटे ध्यान में बैठना बड़ा कष्ट कारक लगता है......


वह बाणी विलास में ज्यादा आनंद लेते हैं.... 

कबीर ने जब जाना तब मूर्खो को गरियाया.....

परंतु कबीर भक्त निंदा रस में बहुत आनंद लेते हैं.....

निंदा रस का आनंद लेते-लेते जेल चले जाते हैं 


श्री रामपाल जी, के भक्त उनको कबीर का पुनर्जन्म कहते हैं😂


संत रामपाल जी अच्छे पंडित है, कबीर वाणी पर उनकी गहरी पकड़ है, परंतु बोधि से उन्होंने एक भी नए छंद की उत्पत्ति नहीं की है 🙏


21. इसी प्रकार इलाहाबाद में कबीर के भक्त श्री धर्मेंद्र जी है, उनके सामने आप कुर्सी पर नहीं बैठ सकते😂 क्योंकि वह ज्ञानवान है 🙏मूर्खता की पराकाष्ठा है, मानवता का संदेश देने वाले, गुरु के भक्तों ने, अमानवीता का संसार रच दिया 😂


कोई संत निकालकर नहीं आता जो मेरा हाथ बटाए, क्योंकि 1 घंटे विशुद्ध सांस के साथ बैठना बड़ा कठिन है 😂


आज तो मेरा मन ही नहीं टीका........


और निंदा रस का लेख लिख डाला.......


साधक कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

Saturday, 16 November 2024

30 अक्टूबर से 16 नवंबर तक की व्हाट्सएप पोस्ट

 [30/10, 12:51 pm] kamleshmittra: 🌹शुभ प्रभात सूचना दिनांक 30 अक्टूबर 2024🙏


यह प्रचार ग्रुप नहीं है 🙏सूचना ग्रुप है🌹


1. अभी एक संस्था के प्रधान का फोन आया🙏उन्होंने आपत्ति की कि मैंने संत निरंजन दास को बैल बुद्धि कहा है 🙏


2. वह विधि की भाषा समझने को राजी नहीं है, कोई भी संत या बाबा व्यक्ति नहीं होता, पूरी एक संस्था होती है, और संस्था का स्टाफ गलती करता है, तो संस्था प्रमुख का नाम आता है🙏


3. उन्हें इस बात पर आपत्ति नहीं है कि संत निरंजन दास और उनकी टीम ने कानून का अपमान किया है 🙏


4. वह कानून व्यवस्था जो पूरे भारत पर लागू होती है🙏


5. वह कानून व्यवस्था जिसके सूत्रधार बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर हैं 🙏 संत निरंजन दास और उनकी टीम को उसका अनुपालन करना चाहिए🙏


6. लीगल नोटिस का जवाब प्रधानमंत्री कार्यालय ने दिया, हाउसिंग मिनिस्ट्री ने भी दिया 🙏 परंतु संत निरंजन दास और उनकी टीम, लीगल टीम मामले को कोर्ट में उलझान चाहती हैं, क्योंकि दिल्ली के अंदर कोई भी इतना समर्पित और आर्थिक संपन्न संत शिरोमणि का भक्त नहीं दिखाई देता है जो कानूनी लड़ाई लड़ सके🙏 


7. पैसे वाले सामान्य केटेगरी के व्यक्ति हो या क्रीमी लेयर अनुसूचित जाति, दोनों ही तो आर्थिक विपन्न अनुसूचित जाति समाज को लूट रहे हैं, उनका शोषण कर रहे हैं🙏


कोई भी संत और बाबा भारतीय न्याय प्रणाली से ऊपर नहीं है, बड़े बड़ों के दिन फिर गए 🙏


8. पंजाब के संतों की जमीन की भूख किसी से छुपी नहीं है, ऐतिहासिक तथ्य है कि मड़वाड़ीह संत शिरोमणि गुरु रविदास की जन्मस्थली है, परंतु वहां संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के पारिवारिक-दलितों ने संत निरंजन दास को अपनी जमीन बेचने से मना कर दिया इसलिए सीर गोवर्धन में यादव की जमीन को खरीद कर संत शिरोमणि रविदास जी की जन्मस्थली बता दिया गया 🙏 जो संगठन संत शिरोमणि गुरु रविदास का नहीं हुआ वह आम समाज का क्या होगा?🙏


9. संत पीपल दास की परंपरा में उत्पन्न संत निरंजन दास की कार्यशैली से मैं संतुष्ट नहीं हूं 🙏 30-31 अगस्त 2024 को मैं डेरा बल्ला गया था, लिखित पत्र दिया था आज तक उसका कोई जवाब नहीं आया🙏 अब तो डेरा बल्ला वाले फोन भी नहीं उठाते है 🙏


10. क्या वह कानून व्यवस्था और मानवता दोनों से ऊपर हो गए हैं? जिनको उन्हें संत कहना है वह कहें! मेरी कलम उनको संत के रूप में अस्वीकार करती है 🙏


11. सन 1954 में बाबू जगजीवन राम ने तुगलकाबाद रविदास मंदिर की नींव रखी तब वहां पर हरि और सोहम का कोई विवाद नहीं था🙏

12. संत शिरोमणि गुरु रविदास का प्रवचन था "राम राम"🙏 उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका राम-राम अयोध्या का राजा रामचंद्र नहीं है! कबीर दास जी का भी प्रिया वचन था "राम राम" उन्होंने भी रामचंद्र की सत्ता को अस्वीकार किया था 🙏 दोनों ही संत, संत रामानंद के शिष्य थे " श्री रामानंद विद्वान कर्मकांडी ब्राह्मण थे, परंतु अपने कुछ शिष्यों को पाकर उनका जीवन सफल हो गया, और वह इतिहास में अमर हो गाये🙏 

13. संत रामानंद के शिष्य ने उनके साहित्य ज्ञान को आध्यात्मिक ज्ञान में बदल दिया, ब्रह्म की अनुभूति किताबी ज्ञान नहीं रहा, बल्कि वह अनुभूति के स्तर पर उतर गया, आज के संत किताबी बागड़-बिल्ले बने हुए हैं 🙏


14. कौन दिल्ली में मुर्गा लड़ा रहा है?

अ. संत हीरा महाराज के निर्देशन में उनकी टीम, केंद्रीय कमेटी दिल्ली 🙏


तथा संत निरंजन दास की टीम अखिल भारतीय रविदासिया संगठन 🙏


दिल्ली में मुर्गा लड़ा रहे हैं 🙏


15. संत शिरोमणि गुरु रविदास के दिल्ली के आम भक्तों को विचार करना होगा कि हम ऐसे संतों का सम्मान क्यों करें? 


जो ना संत शिरोमणि गुरु रविदास का हुआ🙏

जिसको ना समाज से प्रेम है, 

जो ना 96 गुरु भक्तों का हुआ और ना ही दिल्ली के 105 मंदिरों के प्रतिनिधियों को सरकारी समिति की टीम में ले रहा है, जिसकी जमीन पाने की भूख शांत नहीं हुई, जो तुगलकाबाद गुरु रविदास मंदिर प्रांगण का मालिक हो जाना चाहता है, उसके वादों पर कितना विश्वास किया जाए🙏


16. सभी को न्याय प्रणाली का अनुपालन करना ही होगा🙏 अपनी आर्थिक ताकत का उपयोग करके यदि कोई समाज को गुमराह करने की कोशिश करेगा, मामले को कोर्ट में उलझने की कोशिश करेगा, तो कमलेश मित्रा की कलम उसको सम्मान देने का कोई वादा नहीं करती है 🙏 मैं और ज्यादा इंतजार नहीं करूंगा 🙏


अच्छा है कि मैं पुलिस या सेना में नहीं हूं अन्यथा समाजद्रोहियों का एनकाउंटर कर देता 🙏🌹


प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[30/10, 7:01 pm] kamleshmittra: 🙏शुभ संध्या सूचना दिनांक 30 अक्टूबर 2024 


हमारे ग्रुप में सभी विचारों का स्वागत है, मैंने आपसे कहा था यदि आपका कोई विचार, विचार करने योग्य होगा तो हमारे ग्रुप में भी रिफ्लेक्ट होगा🙏


1. विचार तो और भी आ रहे हैं🙏 कुछ विचार तो ऐसे आ रहे हैं कि उनको ग्रुप का एडमिन बनाया जाए 🌹🙏


2. कुछ विचार राजनीतिक प्रतिद्वंदिता वाले हैं, वह चाहते हैं इस ग्रुप में प्रसारित किया जाए 🙏 आर्थिक समानता ग्रुप खुल ग्रुप है आप अपने विचार वहाँ दे सकते हैं, यहां पर मर्यादाएं रहेगी 🙏


3. मैं इस महत्वपूर्ण पोस्ट के बारे में कुछ कहना चाहता हूं 🙏इस अनुक्रम में इस स्क्रीनशॉट को डाला है 🙏


4. रोहिणी सेक्टर 16 निवासी को मैंने फोन किया और चर्चा आरंभ की 25-30 मिनट की चर्चा के बाद उन्होंने फोन काट दिया🌹


 5. मेरा अंतिम प्रश्न था?


एक टेबल पर बैठकर आप भी चाय पी रहे हैं, उसी टेबल पर बैठकर मैं भी चाय पी रहा हूं 😂


आप कहते हैं चाय मीठी है, मैं भी कहता हूं चाय मीठी है 🙏

कृपया बताएं कौन किसकी नकल कर रहा है😂 इतना सुनते ही उन्होंने फोन काट दिया😂🌹🙏


6. जिनको अध्यात्म जगत की एबीसीडी पता ना हो, उनको धैर्य से सुनना चाहिए 🙏


वैसे उन्होंने परिचय देते हुए मुझसे कहा कि उन्होंने विपासना साधना के तीन शिविर किये है 🙏 मैंने अपना परिचय देते हुए उन्हें बताएं कि मैं विपासना का लॉन्ग मेडिटेटर हूं 🙏


7. परंतु आजकल मैं मेडिटेशन नहीं कर रहा हूं इसलिए निंदा रस में खूब डूबा हुआ हूं, अहंकार चरम पर है 😂 निंदा करना आनंददायक लगता है, फिर भी मैं सजग रहता हूं अति निंदा और अति अहंकार से बचा रहूँ 🙏


8. विपासना का ध्यान तराजू के कांटे के समान है, यदि व्यक्ति जरा भी चूकेगा, तो व्यक्ति आत्र ध्यान और रौद्र ध्यान में उतर जाएगा 🙏 ऐसे लोगों को धन की कमी नहीं होती, परंतु फिर भी दरिद्रता बनी रहती है🙏 दु:ख पीछा नहीं छोड़ता है 😭 बेज्जती होती रहती है 🙏


9. विपासना का ध्यान करने वालों से अक्सर यह चूक होती है, और वह विपासना का ध्यान ना करके आत्र ध्यान और रौद्र ध्यान करने लगते हैं जोकि भगवान बुद्ध का दर्शन नहीं है! ऐसे लोगों को ही दिखाई देता है, बौद्ध धर्म भविष्य का धर्म है🙏 जबकि भगवान बुद्ध ने कभी नहीं कहा कि धम्मा, धर्म है 🙏 भगवान बुद्ध ने कोई भी पारिवारिक सामाजिक अथवा राजनीतिक दर्शन नहीं दिया है 🙏


10. पारिवारिक, सामाजिक और राजनीतिक बातों पर केवल उतनी ही बातें कहीं जो ध्यान करने के मार्ग में बाधा थी उनसे कैसे निपटा जाए 🙏


11. बाकी चीजे बाद में माह-थेर द्वारा जोड़ी गई है 🙏 यह सब तीसरी संगीति में सम्राट अशोक के समय हुआ🙏 क्योंकि इसमें मौर्य वंश के आदि गुरु चाणक्य का दर्शन भी जोड़ दिया गया🙏 मैं इस पर अभी बहुत चर्चा नहीं करूंगा🙏


12. पुनः लेख के मूल बिंदु की तरफ लौटता हूँ - 


बुद्ध का दर्शन चित्त के विकारों को जानने की कला है, बीमारी को जान लिया तो बीमारी खत्म🙏 यदि दूध में पड़ी मक्खी दिख जाए, तो कोई मूर्ख ही मक्खी के साथ उस दूध को पिएगा, मक्खी निकाल कर पिएगा अथवा दूसरा दूध पिएगा 😂 इसी प्रकार चित्त के विकारों को जान लेने की कला विपश्यना है जोकि तराजू के कांटे के समान है, जरा सा चूके तो रौद्र ध्यान अथवा आत्र ध्यान करने लगोगे, विपासना छूट जाइएगी, अधिकांश को तो पता ही नहीं चलता कब वह विपासना से फिसल गाये 🙏


13. इसीलिए कुछ जागृत गुरुओ ने नाम दान की परंपरा शुरू की, जैसे कुम्हार की मिट्टी की घुलाई पैरों से होती थी, साथ ही एक डंडा पकड़े रहते थे ताकि गिर ना जाएं 🙏"नाम दान" इसी प्रकार का काम करता था 🙏


14. थेरवादियों से अलग महायानियों ने भी, नाम दान जैसा ही सूत्र निकाला, जिसे "अनिच्चा" कहते हैं🙏 


15. "अनिच्चा", "ॐ ", "सोहम", "राधेराधे", "हरे रामा हरे राम" " राम राम" की तरह मंत्र है 🙏 


जिससे मन सांसों पर रुका रहता है, भटकता नहीं है, परंतु यह सब बच्चे के ढकेले की तरह है 🙏 ढकेले को बच्चा जितनी जल्दी छोड़ दे, उतनी जल्दी दौड़ने लगता है🙏 जो ना छोड़ पाए यह जान लेना, वह पोलियो का शिकार हो गया 😂


16. मुझे सन 2018 की बात याद आती है, मैं लॉन्ग शिबिर समाप्त करके अपनी आध्यात्मिकता यात्रा का कोर्स पूरा कर चुका था🙏 अध्यात्म जगत में भी शिक्षा अनंत है 🙏 परंतु मैं परास्नातक हो चुका था 🙏 डॉक्टर के लिए किसी मास्टर की जरूरत नहीं होती है 🙏 स्वयं के प्रयास से कोई डॉक्टर होता है🙏


17. विपश्यना संस्थानों में एक कृतज्ञता शिविर होता है, जो गुरु सत्यनारायण गोयनका के जन्म दिन के अवसर पर होता है, कम से कम 14 दिन का होता है🙏 बाहरी वातावरण से बिल्कुल दूर, पूर्ण मौन, इस में कम से कम पांच 10 दिवसीय शिविर कर चुके साधक को ही बैठने का अवसर मिलता है🙏


18. मैं इस शिविर में बैठा था फरवरी 2019 का समय था 🙏शिविर संचालक शिक्षक ने मुझे बुलाया और अपना ज्ञान देने लगा, "शरीर में संवेदनाएं अनंत जब तक जीवन है संवेदना रहेंगे, इसलिए अनिच्चा (शाब्दिक अर्थ अनित्य है) करते रहिए" 🙏 मुझे उस शिक्षक की क्लास लगानी पड़ी, मैंने कहा "जो संवेदन प्रत्यक्ष रूप में मुझे दिखाई पड़ रही है, उसको मैं अनित्य मान लूं क्या यह एक नई संज्ञा (संस्कार : चैत्सिक दुख का मूल कारण) नहीं होगी" हमारे शिक्षक महोदय की जमीन हिल गई 🙏


19. क्योंकि भगवान बुद्ध का दर्शन है "यथा भूत दर्शन" जो जैसा है उसको वैसा देख लेना, "प्रत्यक्ष दर्शन " तब कोई भी आंखों का धोखा नही रह जाता है 🙏


20. विज्ञान विद्या से जुड़े हुए लोग जानते हैं, जब 26 फ्रेम से अधिक फ्रेम एक साथ गुजारने लगते हैं तो आँख उसमें अंतर नहीं कर पाती है. इसी प्रकार चलते हुए पंखे के ब्लेड दिखाई नहीं पड़ते हैं 🙏 जबकि तीनों ब्लेड अलग-अलग होते हैं 🙏


21. चलते हुए पंखे में तीनों ब्लेड को ना देख पाना, एक रिंग को देखना, इसी को भासमान सत्य कहा जाता है 🙏 चलते हुए पंखों में तीनों ब्लेड़ों को अलग-अलग देख लेना " यथा भूत दर्शन" कह लाता है🙏


22. पांच इंद्रियां संपूर्ण जगत का केवल भासमान सत्य देखती है, ध्यान इंद्री सक्रिय हो जाने पर, प्रत्यक्ष सत्य दिखाई देने लगता है 🙏


23. बुद्ध का संपूर्ण दर्शन, मनुष्य को भासमान सत्य से प्रत्यक्ष सत्य का दर्शन करना है 🙏 जिस रोग के कारण मनुष्य देख नहीं पता वह विकार हैं 🙏


24. यदि कोई व्यक्ति कहता है कि भविष्य का धर्म बौद्ध धर्म है, भले ही यह सत्य हो, परंतु उस व्यक्ति का अपना यह विकार, यथा भूत दर्शन करने नहीं देगा🙏 उसे बाकी संत वजनदार नहीं दिखेंगे 😂


25. ऐसा व्यक्ति फसादी व्यक्ति होगा, वर्टिकल विचारधारा का व्यक्ति होगा, बुद्ध को मानने वाला व्यक्ति नहीं होगा 🙏 भले ही वह बुद्ध की प्रतिमा को सिर पर उठाया चल रहा हो 😂


26. मूर्खता अनंत है, संत ही नहीं साधकों में भी मिल सकती है 🙏जो आत्र ध्यान और रौद्र ध्यान करते है 🙏 विपासना के शिविर में 90% साधक आत्र ध्यान और रौद्र ध्यान करने लगते हैं जोकि विपासना नहीं है, भगवान बुद्ध की ध्यान पद्धति नहीं है 🙏😂🌹


27. इसलिए जिन मूर्खों को टेबल पर बैठे अन्य लोगों की बातें नकल लगती है, उन्हें भी साथ में बैठकर चाय पी लेना चाहिए🙏


28. तब जाकर पता लगेगा, कौन से संत ऋषि पंडित पुरोहित भिक्षु वर्टिकल विचारधारा के हैं 🙏

29. और कौन से पुरोहित पंडित ऋषि मुनि पुरोहित होरिजेंटल विचारधारा के हैं🙏🌹


30. बुद्ध ने कब कहा कि मैं अंतिम पैगंबर हूं,🙏अरहनतो ने तो कहा है कि अभी बहुत से बुद्ध, पचेक बुद्ध आना बाकी है 🙏🌹 तुमको नानक, संत रविदास, कबीर, ओशो आदि समक्ष बुद्ध दिखाई नहीं देते तो यह तुम्हारी आंख का दोष है 🙏👏


क्रमशः.........


साधक : कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[30/10, 11:39 pm] kamleshmittra: जैन धर्म के अनुसार चार ध्यान है। १- आर्तध्यान २-रौद्र ध्यान ३- धर्मध्यान ४- शुक्ल ध्यान।


कोई विपत्ति आने पर चिंतित हो कर विलाप करना या अत्यधिक दुःखी होना आर्त ध्यान कहलाता है।


दुष्ट भाव या विचार होने पर आनंदित होने को रौद्र ध्यान कहते है।


परोपकार जैसी सद्भावना लिया हुए जो विचार होता है उसे धर्म ध्यान कहते है।


शुक्ल यानि शुचि अर्थात बिलकुल साफ यानि किसी भी प्रकार के विकार से रहित ध्यान को शुक्ल ध्यान कहते है। यह शुक्ल ध्यान ही उच्चतम ध्यान होता है।


चूँकि इस ध्यान से आत्मा बिलकुल साफ यानि निर्मल हो जाता है तथा जिसके परिणाम स्वरुप आत्मा का फिर से जन्म मरण होना हमेशा हमेश के लिए रुक जाता है।


इसलिए इस ध्यान को उच्चतम ध्यान कहा जाता है जो की मोक्ष का कारण है।

[31/10, 12:50 pm] kamleshmittra: 🙏शोध सूचना दिनांक 31 अक्टूबर 2024 


1. जब कथित संत, पुरोहित, पंडित, और शंकराचार्य राजसत्ता या राज सत्ता में बैठे व्यक्तियों की चरण वंदना करने लगे 🙏


2. लाला और व्यापारियों के पैरों से चलने लगे तब धर्म का नाश हो जाता है🙏


3. जनता त्राहिमाम त्राहिमाम करती हैं परंतु उसकी रक्षा करने वाला कोई नहीं होता है 🙏 भारत देश में आज ऐसा ही हो रहा है👏


4. सत्ता और लाला को चुनौती देने का काम आजकल कुछ राष्ट्रीय कवि जरूर कर रहे हैं, परंतु वह सब कोरी बातें हैं जमीन पर कोई संघर्ष नहीं कर रहा है, परंतु कथित संत पंडित, पुरोहित, और शंकराचार्य राजसत्ता के चरणों में पड़े हुए हैं 🙏 


5. लाला और व्यापारी ऐसे संतो पुरोहितों पंडितों और शंकराचार्य का लालन-पालन कर रहे हैं, आम जनता का हक संत, पुरोहित, पंडित और शंकराचार्य हजम कर जा रहे हैं🙏 


6. सन 2011 में मैं पतंजलि योगपीठ गया था, तो यह सोच कर गया था कि कोई संत है जो राज सत्ता को चुनौती दे रहा है, व्यवस्था परिवर्तन करेगा परंतु वह भी दोगला निकला, पूँछ उठा कर देखा तो बाबा रामदेव लाला रामदेव निकला 😭 सब कपड़ों का धोखा है, वे लोग राष्ट्रद्रोही होंगे जो कपड़ो से पहचान लेते हैं😂


7. कुकुरमुत्ता की तरह हमारे समाज में संगठन है, परंतु ऐसा कोई संगठन नहीं दिखता है, 


(1). जो राज्य की शोषण व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करने के लिए उठ खड़ा हो, 

(2). न्याय व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए उठ खड़ा हो, 

(3). बाजारवाद के शोषण से बचा सके🙏( बाजारवाद क्या है? उदाहरण: 1. अंग्रेजी कैलेंडर में 4 साल में एक महीना 28 दिन का होता है, परंतु टेलीकाम कंपनियों का हर महीना 28 दिन का होता है, ट्राई की नई व्यवस्था के अनुसार इसकी शिकायत आप वहां नहीं कर सकते है, दो दिन की कटौती और अरबो का मुनाफा, क्या सरकार का IT विभाग टेलीकॉम कंपनी से 13 महीने का हिसाब मांगता है, लुटते रहो वह लूटते रहेंगे यही बाजारवाद है, 2. इलेक्टोरल बांड के चंदे का भार किस पर पड़ा? राजनीतिक पार्टियों के जबड़े में हाथ डालकर इस रकम को कौन वसूल करेगा, राजनीतिक पार्टी उसी कंपनी के लिए काम करेगी जहां से चंदा पाती हैं आदि प्रश्न हमारे दिमाग में है परंतु साथी कोई नहीं है 😭 सबको संसद में जाने की जल्दी है)

(4). धोखेबाजों ने कुछ ज्यादा लूटा, वह फेंकते जा रहे थे, मैंने पकड़ लिया तो वह बुरा मान गए 😂5 को 20 कर दिया और मुझे ही बेंच दिया 🙏


8. मेरी तलाश ऐसे संगठन की है, जो देश के निर्माण के लिए कार्य करें, रामदेव ने जो गद्दारी की उसको भुलाया नहीं जा सकता है, अन्यथा हम भी इंजीनियरिंग कॉलेज के टीचर थे 👏 मैं जहां भी पूँछ उठा कर देखता हूं तो मादा ही निकलते हैं, कोई मर्दों वाला संगठन नहीं दिखता है 😭


9. जब संत, पुरोहित, पंडित और शंकराचार्य पड़े हैं चरणों में तो अधर्म ही जनता को झेलना पड़ेगा 🙏


 दु:खी आत्मा अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[31/10, 11:34 pm] kamleshmittra: मौलिक अधिकारों के अंतर्गत आने वाले सभी विनियमन भारत के लोगों और कमजोर समुदाय के लिए संविधान की गारंटी हैं। भारत का सर्वोच्च न्यायालय भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकारों की रक्षा करने के लिए बाध्य है।


यदि सर्वोच्च न्यायालय का कोई न्यायाधीश या न्यायाधीश संविधान की गारंटी का उल्लंघन करता है, तो सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं को उस राय या निर्णय का विरोध करना चाहिए। यह तभी संभव है जब अधिकांश अधिवक्ता आरक्षित श्रेणी से हों। यदि अधिकांश अधिवक्ताओं की मांग है कि न्यायाधीश या न्यायाधीश संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं, तो भारत की संसद को ऐसे न्यायाधीशों को न्यायपालिका से हटाने का अधिकार है।

[01/11, 1:44 pm] kamleshmittra: 🌹सूचना दिनांक 1 नवंबर 2024 


1. बागी होने के सबूत मैंने कल तक दे दिये हैं 🙏 जो संगठन संत शिरोमणि गुरु रविदास का नहीं हुआ, जिसकी जमीन को अपने नाम पर लिखा लेने की भूख शांत नहीं हुई, जिसने संत शिरोमणि गुरु रविदास के जन्म स्थान को ही बदल दिया, वह समाज को संगठित नहीं करेगा🙏 बल्कि समाज में अपने संगठन की धौंश दिखाने के उपक्रम करेगा 🙏 समाज को तोड़ने का काम करेगा, यही काम तो मनुवादी संगठन भी कर रहे हैं🙏 सचखंड डेरा बल्ला हो या सचखंड श्री खुरलगढ़ साहिब, वह एक दूसरे के प्रतिद्वन्दी बने हुए हैं, और विगत 5 साल से संत शिरोमणि गुरु रविदास के प्रांगण तुगलकाबाद को क्रिकेट का मैदान बनाए हुए हैं🙏


2. पिछले 5 साल से हर महीने की 10 तारीख को तुकालकाबाद श्री रविदास मंदिर प्रांगण में तीन-चार घंटे कोच वीर सिंह हितकारी जी के मार्गदर्शन में क्रिकेट का खेल चलता है🙏 खिलाड़ी भी उनके रेफरी भी उनका, वह जिसको चाहे विकेट दें, जिसको चाहे बैट पकड़ा देवें🙏


3. पाप का घड़ा फूटता है तो बहुत तेजी से फूटता है. राजा ऐसे ही किसी के सामने नहीं झुकते, ऐतिहासिक सत्य है कि संत शिरोमणि गुरु रविदास ने राजाओं का सिर झुका दिया 🙏🌹


4. अभी वक्त है सुधर जाओ, मैं तो मात्र निमित्त हूं, आज हूं कल नहीं रहूंगा, वह अपना बदला खुद लेने में सक्षम है 🙏🌹 

5. दिल्ली के सभी रविदास मंदिरों को उसका हक मिलना चाहिए क्योंकि वह संत शिरोमणि गुरु रविदास के भक्त हैं, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भक्तों को अधिकार दिया है 🙏 96 गुरु भाईयों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भक्तों माना है 🙏 कोई भी संत उस प्रांगण का मालिक नहीं हो सकता है🙏


6. वह संस्थान जिनकी फंडिंग डेरा बल्ला से हो रही है, अथवा आदि धर्म मंडल से हो रही है 🙏


7. इसके विपरीत जो आदि धर्म मंडल को अथवा डेरा बल्ला को फंडिंग करते रहे हैं 🙏


8. उनके लिए इस तत्थ को स्वीकार कर पाना मुश्किल होगा कि वह गलत लोगों की संगत में थे 🙏


9. ऐसे लोग सबसे बाद में मेरे से जुड़ेंगे🙏🌹 चित्त के विकारों से घिरे हुए लोगो को सत्य को स्वीकार करने में समय लगता है 🙏


प्रतिनिधि: अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064


 नोट : जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं है, उनको देवनागरी पढ़ने में कठिनाई होती है. मैं गुरमुखी पर काम कर रहा हूं, गूगल से ट्रांसलेट कर देने पर त्रुटि की संभावना रहती है, यदि मुझे गुरमुखी का ज्ञान नहीं होगा तो लेख में त्रुटि बनी रहेगी, कौन जाने अर्थ का अनर्थ हो जाए🙏

 इसलिए थोड़ा सा इंतजार करें🙏

[01/11, 7:22 pm] kamleshmittra-SCI: अंजोर दास जी,


हस्तक्षेप के लिए माफी चाहता हूं🌹 आप लोग ऐसे विषय पर चर्चा कर रहे हैं कि मुझे बोलना ही पड़ रहा है 🙏


"अध्यात्म" शब्द एक सज्ञा है, जो चित्त के लिए उपयोग की जाती है🙏


चित्त वह ऊर्जा है जो इस पंचभूत( पृथ्वी जल अग्नि वायु और आकाश के तत्वों से निर्मित) शरीर में विद्यमान रहती है🙏 जिसके होने मात्र से प्राणी को जीवित कहा जाता है🙏 जिसके न होने से प्राणी को मृत मान लिया जाता है 🙏 इस चलाएं मान ऊर्जा का अध्ययन किया जाता है, उस अध्ययन को अध्यात्म कहते हैं 🙏


इस चलाएं मान ऊर्जा पर कतिपये आवेश/आवेग होते हैं, उन आवेशों की तीव्रता, अथवा आनियंत्रित तीव्रता को विकार कहा जाता है 🙏


अध्यात्म के अंतर्गत, इन आवेगा की तीव्रता को नियंत्रित करने के उपाय भी किये जाते हैं, उसे विकार विमुक्ति कहते हैं 🙏 निर्वाण भी कहा जाता है 🙏 परंतु जब चित्त शरीर को छोड़ देता है तो उसे महापरिनिर्वाण(मृत) कहा जाता है 🙏


कैवल्य, निर्वाण के समान है🙏 मोक्ष, महापरिनिर्वाण के समान है 🙏


साधक : अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335222064

[02/11, 10:12 pm] kamleshmittra: मान्यवर,(8981771684)


1. बुद्धिस्म ऐसा मानता है कि चार तत्व हैं, बुद्धिस्म चार तत्वों की संवेदना पर काम करता है 🙏 चार तत्वों की संवेदना के कारण विकार उत्पन्न होते हैं 👏 परंतु भगवान बुद्ध की बात अव्यक्त हैं 🙏 परोक्ष दर्शन वादी है 🙏🌹


2. पांचवा तत्व आकाश भी है 🙏 परंतु उसके कारण कोई विकार उत्पन्न नहीं होता, इसलिए बुद्धिस्म की साधना, "सांस का यथाभूत दर्शन" में उसका कोई उपयोग नहीं है 🙏


3. परंतु ब्रह्मांड में आकाश तत्व का विशेष महत्व है 🙏 कई बार यह तत्व शरीर में भी उत्पन्न हो जाता है🙏 ऐसा व्यक्ति अवनॉर्मल हो जाता है 🙏


4. जिस भी व्यक्ति को आप अवनॉर्मल अवस्था में देखें, यह जान लो उसके ब्रेन में, आकाश तत्व की अधिकता हो गई है 🙏


5. भगवान बुद्ध ने केवल उतने ही विषयों की चर्चा की, जितने से मनुष्य को विकार विमुक्त किया जा सकता था 🙏 शेष सभी विषयों को उन्होंने छोड़ दिया है 🙏


6. इसीलिए उनको कहना पड़ा "अप्प दीपो भवो"🙏 क्योंकि सब कुछ बताया और समझाया नहीं जा सकता है, वह जानते थे उन्होंने बहुत कुछ नही कहा है 🙏 उन्होंने कभी नहीं कहा हमारी पुस्तक अंतिम पुस्तक है😂

7. आप अपने घर की समस्त वस्तुओं का वर्णन नहीं कर सकते, उसकी उपयोगिता का वर्णन नहीं कर सकते, उसकी उत्पत्ति का वर्णन नहीं कर सकते, उसको प्राप्त करने में लगे श्रम का वर्णन नहीं कर सकते है 🙏 तो भगवान बुद्ध संपूर्ण ब्रह्मांड की बातों को कैसे कह सकते थे, यदि वह कह भी देते तो संकलित कौन करता?

8. भगवान बुद्ध की वाणी को एकत्र करने के लिए नई भाषा पाली की रचना करनी पड़ी, 84 हजार सूत्रों को ही संकलित किया जा सका, अन्य विलुप्त हो गए 🙏


9. भगवान बुद्ध ने साधना के संबंध में जरूर कहा है कि यह सुख्यात मार्ग है, अर्थात अच्छी प्रकार से कहा गया मार्ग है, उन्होंने कभी यह भी नहीं कहा कि अन्य मार्ग नहीं है 🙏 वह अपनी बात को तीन बार में कहा करते थे, 1. सूत्र वचन, 2. व्याख्या, 3. उदाहरण🌹🙏 उनके द्वारा बनाई गई शिक्षा की यह पद्धति आज तक प्रचलित है🙏🌹


10. विपश्यना साधकों में भी यह भ्रम बना हुआ है कि सांस के अलावा अन्य कोई मार्ग नहीं है 🙏 क्योंकि वह गुरु सत्यनारायण गोयनका की बातों को अच्छे से नहीं सुनते, सांसों का मार्ग राजपथ है 🙏 अन्य मार्ग से भी मंजिल पर पहुंचा जा सकता है🙏


11. यदि आपकी इस विषय में इतनी रुचि है, तो मैंने साधना का सरल सूत्र दिया है, आप उसका प्रयोग करते रहे, मैंने दो पंपलेट दिए हैं 🙏


12. साधना की उच्च अवस्था में आपको आकाश तत्व का भी बोध हो जाएगा 🙏🌹


 साधक : कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[03/11, 1:04 am] kamleshmittra: 🙏गैर विधिक सूचना - समाज को सुसंगठित करने लिए दिनांक 2 नवंबर 2024🙏🌹


🙏जब से रैगर दिवस से लौटा हूं इस फोटो पर बात करने का मन हो रहा है 🙏🌹


1. कुछ लोगों को इस फोटो में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही होगी🙏 कुछ लोगों को इस फोटो में कमी दिखाई दे रही होगी लेकिन बोलने का साहस नहीं होगा🙏🌹


2. समाज को डाटने के लिए कोई तो होना चाहिए🙏 यह काम संतों का है 🙏 परंतु संत तो माया के नीचे पड़े हैं, कुछ बोल देंगे तो लाला जी चंदा नहीं देंगे 🙏 तो अगले दिन की रोटी कैसे चलेगी, गाड़ी कैसे चलेगी, गाड़ी बिना तेल के नहीं चलती, गाड़ी के लिए चंदा तो चाहिए है 😂


3. जब श्री केसी रवि ने गठबंधन तोड़ा था, शायद वह 25 जून 2024 सुबह 4:00 बजे की बात है, हम लोग पंजाब से लौट रहे थे🙏 जनवरी से मई 2024 तक ही उन्होंने आर्थिक सहयोग किया था 🙏मेरी जेब में मात्र ₹140 थे, अकाउंट भी लगभग खाली ही था 🙏 आज भी हमारी जेब में मात्र ₹20 है और अकाउंट में ₹52 है 😂 

4. सेंट्रल इन्फॉर्मेशन कमीशन में 5 नवंबर 2024 की तारीख को केस लगा हुआ है, उस केस को जून-जुलाई 2023 में डाला गया था🙏 उसमें प्रतिवादी सुप्रीम कोर्ट है 🙏 अगला केस में 25 नवम्वर की तारीख है उस में प्रतिवादी पीएम कार्यालय है 🙏 दोनों ही केस मेरे व्यक्तिगत केस नहीं है सामाजिक केस है, सामाजिक विषय न्याय पर हैं🙏 क्या सामाजिक मुद्दों पर पैसा खर्च करने की जिम्मेदारी केवल कमलेश मित्र की है 🙏

5. क्या अक्षय भारद्वाज और राम सिंह शुक्ला की कोई जिम्मेदारी नहीं है 🙏 यदि उन्हें समाज से कोई मतलब नहीं है तो पीछे से याचना पत्र क्यों भेजते हैं, क्यों वकालतनामे पर हस्ताक्षर करते हैं🙏


6. बड़े लोगों के बड़े नखरे, कोई सरकारी संविदा नहीं है जो पहले 3 महीने का नोटिस देना पड़े 😂


7. 96 गुरु भाईयों के पास भेजे गए पत्रों में मेरे साथ श्री के. सी. रवि जी का नाम है🙏 क्या वह एक-तरफा संविदा भंग कर सकते हैं?😂 परंतु चमार कानून कहां मानते हैं, चमारो पर कोई एससी/एसटी एक्ट नहीं लगता है, और चमारों के केस सुनने के लिए न्यायालय के पास समय कहां है?😂


8. रवि जी के ऑफिस में जो पत्र आ जाता थे, उसके लिए मुझे खोजबीन करनी पड़ती थी, तब पता लगता था कि किसी केस में क्या हुआ?


9. इसलिए 96 गुरु भाईयों को भेजे गए पत्र में मैंने पता अपना दिया था, रवि जी मुकर सकते हैं मैं कैसे मुकर जाऊँ 🙏 लीगल नोटिस की कॉपी सबसे पहले मैंने उनके पास वेरिफिकेशन के लिए भेजी थी, ताकि वह मुझे बता सके कि उन्हें कोई आपत्ति तो नहीं है 🙏 परंतु उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो 9 जुलाई 2024 को लीगल नोटिस रजिस्ट्री कर दिया गया 🙏🌹


10. श्री राम सिंह शुक्ला जी प्रथम वादी थे/हैं उनको भी कॉपी भेजी गई 🙏 केंद्रीय कमेटी के अध्यक्ष श्री अक्षय भारद्वाज जी के रिश्तेदार श्री राम सिंह शुक्ला ने उनको भी बता दिया कि सरकार और संत निरंजन दास जी को लीगल नोटिस भेजा जा रहा है, तब उनका भी फोन आ गया कि उनको भी कुछ कहना है लीगल नोटिस में अपना नाम जुड़वाना है 🙏जब तक उन्होंने याचना पत्र भेजा मैं लीगल नोटिस रजिस्ट्री कर चुका था 🙏


11. उनसे एक वादा मैंने जरूर कर दिया था कि अगस्त में जब संपूर्ण जमीन लेने की कार्रवाई हम आरंभ करेंगे, तब आप पिटीशन डालने और पिटीशन का खर्चा देने के लिए तैयार रहे 🙏 उन्होंने इसके लिए हमी भी भर दी 🙏🌹


12. 10 अगस्त 2024 को श्री राम सिंह शुक्ला जी 96 गुरु भाइयों का प्रतिनिधित्व करने के लिए, अध्यक्ष सरकारी कमेटी से बात करने के लिए आए थे, परंतु उन्होंने मुझे ही बेंच दिया 😂जब श्री हितकारी महाराज जी ने मुझे बताया कि मुझे बेंच दिया गया है, तो मैंने आपत्ति की कि मैं बिकने को तैयार नहीं हूं 😂 

13. 96 गुरु भाइयों को और 105 मंदिरों को, सरकारी कमेटी में अधिकार देना ही होगा🙏🌹


14. पूरा अगस्त गुजर गया श्री अक्षय भारद्वाज जी ने कुछ नहीं किया, केवल टालमटोल करते रहे, पूरा सितंबर गुजर गया, टालमटोल जारी रही, स्पष्ट रूप से मना भी नहीं किया, और मुझे नकेल डाल कर रखा, ताकि सहयोग की मैं कहीं और याचना भी ना कर सकूं, और उनको सारी सूचना मिलती रहे 😂


15. आखिरकार मुझे कठोर व्यवहार करना पड़ा! उसकी प्रतिक्रिया 10 अक्टूबर 2024 तुगलकाबाद रविदास मंदिर प्रांगण में को हुई, दोनों रिश्तेदारों ने मुझ पर उल-जल्लू आरोप लगाकर धमकाया 😂 श्री मंगतराम वाली के चेहरे पर खुशी स्पष्ट रूप से नजर आ रही थी, जबकि दोनों ही कोर्ट में हरि और सोहम के चिन्ह को लेकर केस लड़ते रहे 🙏 मैं प्रसन्न था, यह सोचकर, दुश्मन का दुश्मन हमारा दोस्त सुना था, इससे उलट कुछ हो रहा था, दो दुश्मन दोस्त हो रहे थे 😂


16. मैं स्पष्ट करना चाहता था, परंतु मुझे पता था मुझे बोलने का मौका नहीं दिया जाएगा, क्योंकि श्री मंगतराम वाली ने जुलाई में इसलिए सभा का समापन कर दिया था, क्योंकि मुझे बुलाने की घोषणा कर दी गई थी🙏


17. तब तक लंगर भी नहीं आ पाया था, आप लोग जुलाई का वीडियो देख सकते हैं😂 मैंने बैठे-बैठे एक ही सूत्र वचन में अपनी बात समाप्त कर दी, श्री वीर सिंह हितकारी जी के लंबे भाषण के बाद मैंने कहा कि "कथनी करनी का मेल करा दो" उस पर भी व्याख्यान हो जाना चाहिए🙏 श्री मंगतराम वाली सहित सभी विरोधियों के चेहरे से हवाइयां उड़ने लगी क्योंकि संगत की तरफ से उसकी मांग होने लगी 🙏


18. श्री वीर सिंह हितकारी ने मौके की नजाकत को देखते हुए मामले को अगले महीने की 10 तारीख के लिए टाल दिया 🙏 देखते हैं इस बार कथनी और करनी का मेल कैसे कराया जाता है🙏 

19. प्रोग्राम संचालक की जिम्मेदारी है, कि वह सबको बोलने का मौका दे, संत शिरोमणि गुरु रविदास के प्रांगण को रणभूमि बनाने से रोके 🙏 अन्यथा पुलिस प्रशासन से प्रांगण की सुरक्षा की मांग की जा सकती है 🙏 हो सकता है सरकार इस पर परमानेंट ताला लगा दे 😭 इन्हीं सब बातों पर विचार करते हुए इस बार मैंने FIR नहीं की है 🙏 क्योंकि विरोधी सरकार को तो मौका चाहिए😂 हमारे लोग इस बात के लिए कितना सजग है 🙏


20. देखते हैं इस बार क्रिकेट के मैदान में क्या होता है😂 "कृपया ध्यान रहे यह शब्द मेरे नहीं है प्रसिद्ध संत से इंपोर्टेंट शब्द है, मैंने उनसे ग्रहण किया है " उन्होंने संत शिरोमणि गुरु रविदास के तुगलकाबाद स्थित प्रांगण को और उसमें होने वाली गतिविधियों की तुलना, क्रिकेट के खेल और मैदान से की है 🙏

21. अब ऊपर के चित्र पर बात कर लेते हैं, रैगर दिवस क्या रैगर समाज का दिवस है? या यह रवि दिवस है 😂 चित्र पर केवल एक परिवार के फोटो हैं, समाज के अन्य लोगों के फोटो नहीं हैं, क्या करोल बाग में रैगर समाज का कोई अन्य गणमान्य व्यक्ति या परिवार नहीं है? थोड़ा कहां है अधिक समझना😂


 संतो की संगत में बिगड़ा : अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


नोट :- मुझसे बात करने के लिए आपको किसी मध्यस्त की जरूरत नहीं है, मेरा आपसे कोई व्यक्तिगत बैर नहीं है, आप समाज के लिए काम करना चाहते हैं, हम भी चाहते हैं आप समाज के लिए कम करें, आपके काम करने में जहां बाधा आएगी मैं आपका सहयोग करूंगा, इसी प्रकार समाज के लिए जो मैं काम कर रहा हूं जो मेरा मिशन है, मैं उसमें आर्थिक सहयोग की अपेक्षा करता हूं, क्योंकि अधिवक्ता की कोई गाय नहीं लगती है 🙏


 इलाहाबाद हाई कोर्ट की रजिस्ट्री को मैंने दौड़ा के रखा है, सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को भी मैं दौड़ा रहा हूं, क्योंकि केवल दलितों के केस नहीं सुने जाते हैं 🙏 जब तक कि उसमे पैरवी करने वाला अधिवक्ता कोई पंडित/ अथवा उच्च जाति का ना हो, रजिस्ट्री को पता है कि कौन सा केस कितने नंबर पर लगाना है 🙏 इसीलिए मायावती.... के चरणों में पड़ी हुई है 😂

[03/11, 6:31 pm] kamleshmittra: 🌹संगठन प्रमुख के लिए संदेश- सूचना दिनांक 3 नवंबर 2024


सुविवेक और स्वविवेक में बहुत अंतर होता है🙏


किसी प्रमुख के पद पर रहते हुए सुविवेक का बहुत उपयोग होता है🙏 परंतु सुविवेक का परीक्षण स्वविवेक से होता है 🙏


कई बार सुविवेक स्वार्थ विवेक भी होता है, और कई बार प्रतिवादी-विवेक भी होता है 🙏


किसी संगठन के प्रमुख के पद पर रहते हुए, इस बात का ध्यान रखना चाहिए, जो देखने में सुविवेक लग रहा है, वह स्वार्थविवेक तो नहीं है, प्रतिवादी विवेक तो नहीं है🙏


कई बार पदाधिकारियों के बीच प्रतिद्वन्दता इस लेवल की होती है कि वह कार्य को अपने शासनकाल में होता देखना चाहते हैं, तब तक उसका विरोध करते रहते हैं जब तक उनका शासन काल ना आ जाए 🙏 अथवा व्यक्तिगत रंजिश के कारण सामाजिक सुविचार का भी विरोध करता है🙏 प्रमुख को सदैव इन बातों से सावधान रहना चाहिए🙏


गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी ने जिन चीजों का विरोध किया, प्रधानमंत्री बनते ही उन सभी चीजों को लागू कर दिया जैसे आधार कार्ड की अनिवार्यता, आदि 🙏 गैस सिलेंडर को अपने सर पर रखकर घूमने वाली bjp की औरत, आजकल मैं गैस की महंगाई पर रोना नहीं रोती आदि 


हमारे दलित संगठनों के प्रमुखों को भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कोई व्यक्ति किसी बात का विरोध क्यों कर रहा है 🙏 उसके पीछे कोई सामाजिक कारण है या उसकी व्यक्तिगत रंजिश है 🙏


संगठन के प्रमुख को यदि सच्चाई का नहीं पता है तो वह स्वविवेक का इस्तेमाल नहीं कर पाएगा🙏 और ऐसी दशा में, संगठन प्रमुख कोई भी उत्कृष्ट कार्य नहीं कर पाएगा😂


विचारक : अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[06/11, 8:12 am] kamleshmittra: 🙏6 नवंबर 2024, सुप्रभात 🌹


हमारे समाज के संत यह समझने में अक्षम है कि बुद्धि के आगे भी कुछ है, जिसे बोधी कहते हैं😂


 जब तक किसी संत की बुद्धि आगे नहीं बढ़ती और बोधी तक नहीं पहुंचती है, वह अधूरा संत है 🙏🌹 अधूरा घर, घर नहीं होता, ऐसा घर कल्याणकारी नहीं होता है, तो ऐसा संत कहां से कल्याणकारी हो जाएगा😂


सहनशीलता सहनशीलता सहनशीलता 🙏 सबसे ज्यादा सहनशील गधा होता है परंतु गधा किसी का गुरु नहीं होता😂


संत के लिए तो केवल एक ही सूत्र वचन है - जिसे बुद्धि-बोधी-कल्याण कहते है👏


यदि तुम कंचन हो, छेनी हथौड़ी की मार सहने को तैयार हो तो हम तुम्हें संत बना ही देंगे 😂👏


मेरे गुणो पर मत जाना, एक बार मेरे चाचा ने ज्ञान देते हुए कहा था कि जूना खुद तो गंदा रहता है परंतु बर्तन को साफ कर देता है😂 


 उन्होंने कहा था कि खराब से खराब संत भी समाज के लिए कल्याणकारी होता है 🙏🌹 अच्छे से अच्छा दुसन्त समाज के लिए कल्याणकारी नहीं होता है 🙏


सोने की कीमत कितनी भी गिर जाए, कोयले से अधिक होगी 🙏 परंतु ध्यान रहे कोयला ही सोने को पकता है😂


सभी संतो को सुप्रभात🌹


संतों का गुरु अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 😂9335122064


नोट -

संत शिरोमणि कबीर ने कहा है-

निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छवाये......

[06/11, 9:25 am] kamleshmittra: 🌹🙏जुडिशल अपडेट दिनांक 6 नवंबर 2024 


1. कल केंद्रीय सूचना आयोग में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री विभाग हमारे सामने उपस्थित था 🙏


2. परंतु वे इस बात का जवाब नहीं दे सके कि चैंबर कोर्ट के मैटर को उन्होंने अपने स्तर पर डिस्पोज आफ क्यों किया?


3. उन्होंने मामला किसी जज के सामने प्रस्तुत किया ऐसा भी बताने में वे सक्षम नहीं थे 🙏


4. जिस अधिकारी ने ऐसा दुरसाहस किया है मैं उसके खिलाफ कंप्लेंट केस डालने जा रहा हूं, 


5. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री नही चाहती है कि कमजोर वर्ग को न्याय मिले, सुप्रीम कोर्ट में कोई न्यायिक सुधार हो, क्योंकि सभी प्रमुख रजिस्टर सवर्ण विरादरी से आते हैं🙏जब-जब न्यायिक सुधार होता है भ्रष्टाचार कमजोर होता है🙏


6. ऐसे मामलों में लड़ते हुए मुझे अच्छा लगता है😂


7. मैं बीवी के साथ लड़ कर अपनी उर्जा समाप्त करना नहीं चाहता था इसलिए ग्रह त्यागी हो गया 🙏


8. समाज के लोग मुझसे सलाह लें, परंतु मेरे साथ लड़ाई झगड़ा ना करें🙏 मैं अपने घर में नहीं लड़ सकता हूँ, हमारे एक मित्र श्री अक्षय भारद्वाज जी कहते हैं कि मैं भगोड़ा हूं 😂 शायद वह सही कहते हैं 🌹


9. क्योंकि अपने समाज को धोखा देना, अपने समाज से ही लड़ते रहना, अपने समाज की प्रगति में बाधा डालना, उनकी फितरत है मेरी नहीं🙏


10. श्री बाली जी मुझे ज्यादा परेशान करेंगे तो मैं देश छोड़ दूंगा🙏 फिर उनके साथ और उनके बच्चों के साथ विदेश में लडूंगा 😂🙏🌹 क्योंकि विदेश में भी अभी बहुत काम करना बाकी है 👏


11. मेरे एक प्रिय मित्र ने ₹1000 का सहयोग दिया इसलिए मैं कल केंद्रीय सूचना आयोग के केस को अटेंड कर सका 🙏🌹 


12. इसको पूर्व जन्म का पुण्य प्रताप कहते हैं🙏🌹 अन्यथा तो इस जन्म में कोई (श्री........) मजदूरी भी देना नहीं चाहता है 😂 ध्यान रहे यह पूंजी केवल मेरे पास नहीं है सभी के पास थोड़ी बहुत होती है🙏 जिनके पास नहीं है वह इस जन्म में पुण्य कार्य करके इकट्ठी करें 👏


13. संत होने के लिए पूर्व जन्म की पूंजी होना आवश्यक है, जिस संत के पास पूर्व जन्म की पूंजी नहीं है, या जिन संतो की पूर्व जन्म की पूंजी चुक गई है, उसको इस जन्म में सरवाइव करना (जीवन जीना) मुश्किल होगा🙏


14. इसलिए संतो को इस जन्म में कुशल कर्म करते रहना चाहिए, कौन जाने पूर्व जन्म की कितनी पूंजी है🙏 कुशल कर्म से ही संत संत होता है 🙏 अन्यथा कोई और कर्म कर लो संतत्व को धंधा मत बनाओ 😂 क्योंकि जैसे जनता और सरकार को पता लगेगा कि संत-तत्व की आड़ में आप धंधा कर रहे हैं🙏जेल में डाल दिए जाओगे, भारत की जेले संतों से सुशोभित है😂कौन जाने संत कबीर और संत रविदास की तरह वह भी अपराधियों का कल्याण करने गए हो😂


15. इस धरती पर भेजने से पहले, उस बनाने वाले ने दूध बना दिया था, टट्टी उठाने के लिए दो नौकर भी दे दिए थे😂


16. अहंकारी इस धरती पर भूख से मरता है🙏अहंकारी इस धरती पर भूख से मारता है 🙏 अन्यथा बनाने वाले ने कोई कमी ना की 😂


17. अहंकार एक मानसिक विकार है जो बोधी होने पर ही व्यक्ति को स्वयं से पता लगता है, अन्यथा तो वह प्रतियोगितावादी बना रहता है 😂🙏 वह अपने अहंकार को प्रतियोगिता से ढक लेता है😭


18. संतो को आर्थिक असंतुलन रोकना ही होगा, विश्व व्यापार व्यवस्था WTO को चुनौती देनी होगी, और यह केवल भारत कर सकता है, क्योंकि विदेशों में तो आर्थर डंकल जैसे संत पैदा होते हैं, जो आर्थिक असंतुलन स्थापित करते हैं🙏 आर्थिक संतुलन की स्थापना तो भारत के संत ही करेंगे 🙏🌹 और करना ही होगाा 🙏🌹 आओ हम सब मिलकर कुछ अच्छा करते हैं🙏🌹😂


संतों का गुरु अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064


नोट :-


जागो संतो मैं तुम्हें जगाने आया हूं 😂

[07/11, 10:14 am] kamleshmittra: 🌹जुडिशल सूचना दिनांक 7 नवंबर 2024.


 यह पत्र कोई साधारण पत्र नहीं है🙏 बल्कि की राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग द्वारा दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण( नॉर्थ वेस्ट ) के सचिव श्रीमती कनिका जैन के खिलाफ FIR दर्ज करने का निर्देश है 🙏


1. ध्यान रहे किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ कोई व्यक्ति FIR दर्ज नहीं कर सकता है!

2. किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ केवल चार ही लोग FIR दर्ज करा सकते हैं 1. चुने हुए प्रतिनिधि, अपनी मोहर के साथ 2. वरिष्ठ सरकारी अधिकारी अपने कनिष्ठ के खिलाफ, प्रशासकीय जांच के बाद 3. कमिशन और संबंधित जांच एजेंसीज 4. सीआरपीसी 156/3 के तहत माननीय न्यायालय 🙏

3. इस मामले में मैं विगत सितंबर 2022 से लगा हूं, यह भी एक सामाजिक केस हैं 🙏 गरीब समाज के होने वाले शोषण को रोकने का उपाय है 🙏

4. यह काम मेरा नहीं है, यह काम सेवानिवृत्ति श्री मंगतराम वाली का है, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के पदाधिकारी के रूप में होने वाले शोषण को उन्होंने निकट से देखा है, उन्हें इस बात की पेंशन मिलती है कि वह अपने समाज का संरक्षण करें 🙏

5. परंतु वे तो खेलने और खिलाने में मस्त है, उन्होंने खेल के सामान की दुकान खोल रखी है, और चारों संतो को संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के प्रांगण तुगलकाबाद में क्रिकेट का खेल खिला रहे हैं, विधिक रूप से सबको बरगला रहे, समाज के विश्वास का सत्यानाश कर रहे हैं 😭

6. सन 2022 में ही मैंने उनको मशवरा दिया था, एक विधिक संगठन बनाकर समाज के हो रहे विधिक शोषण का संरक्षण करें🙏 परंतु उनको तो दिमाग वाले काम नहीं करना हैं, समाज का संरक्षण करने वाले काम नहीं करना हैं, पैसा कमाने वाले काम करना हैं🙏 सरकारी पद पर रहते हुए भी वह पैसा कमाते रहे ऐसी मेरे पास रिपोर्ट है, जहां भी वह ओएसडी बनाकर भेजे गए उन्होंने सिर्फ पैसा कमाया है, और अपने समाज का शोषण कराया है🙏यदि वे चाहेंगे तो मैं उन लोगों से मिलवा दूंगा और उनकी फाइलें फिर से खुलवा दूंगा 🙏

7. ऐसा भ्रष्ट अधिकारी अनुसूचित जाति आयोग में अधीनस्थ कर्मचारी के छल फरेब को रोकने के लिए काम नहीं करेगा 🙏समाज के संरक्षण से संबंधित विधिक प्रक्रिया को स्थापित करने के लिए काम नहीं करेगा डर है कि कही उसकी फाइलें फिर से ना खुल जाएँ 🙏

8. विषय उठता है मैं इस बात को इतने दावे से क्यों कह रहा हूँ 🙏 विधिक भाषा में इसको सरकमस्टेंसस एविडेंस( परस्थिति जन्य साक्ष्य कहा जाता है🙏

9. अधीनस्थ सचिव दिल्ली विधिक सेवा प्राधिकरण, जिलाधिकारी के समान शक्ति रखता है 🙏 उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए डीएम का आदेश होना आवश्यक होता है, परंतु पत्र अगर DM के कार्यालय तक ही न पहुंचे तो FIR कौन दर्ज करेगा😂 थाने में लेटर भेज देने से कुछ नहीं होगा🙏 यह पूरा प्रकरण इस तरह से उलझा हुआ है🙏🌹 अध्यक्ष तो केवल आदेश देगा, आगे का काम तो अधिनिष्त बाबू करना है🙏

10. जब अनुसूचित जनजाति आयोग को अनुसूचित जाति आयोग से अलग किया गया, तो इसका कोई विरोध नहीं हुआ, इसलिए अब जातियों का अलग वर्गीकरण हो रहा है🙏 मिस्टर एम आर वाली ने क्या इसका विरोध किया है, अगर कोई पत्र हो तो दिखाएं🙏

11. अनुसूचित जाति आयोग से जितने भी अनुसूचित जाति के पदाधिकारी रिटायर होते हैं उनका श्री वाली जी ने कोई संगठन बनाया हो तो मुझे बताएं🙏

12. अनुसूचित जाति आयोग में, उनके डिस्पैच सैक्शन में अन्य जाति के पदाधिकारी क्यों है? और उनके कार्य की निगरानी कौन करता है, आदि विषय तो मिस्टर बाली और उनकी शोध टीम का विषय होना चाहिए था परंतु ऐसा नहीं हुआ, क्योंकि जिसकी 20-30 साल कमर झुकी रही हो वह सीधे उठकर काम नहीं कर सकता है 🙏

13. वह तो जीवन भर अपने बच्चों को विदेश में सेटल करने में लग रहे, और उनके खर्च उठाने के लिए ऊटपटांग काम करते रहे 🙏 आज भी तुगलकाबाद रविदास मंदिर की जमीन पर अपना हस्ताक्षर करने के लिए डटे हुए हैं जबकि वह समाज के चुने हुए प्रतिनिधि नहीं है 🙏 समिति गठन के 5 साल बाद भी वे संगठन में कोई चुनाव नहीं चाहते, अन्य गुरु भक्तों को समिति से जोड़ना नहीं चाहते है 🙏 इतने उच्च कोटि के छल से भरे हैं, जीवन के अंतिम पड़ाव पर है, तो जवानी में प्रतियोगिता तो और ज्यादा होती है😂

14. अब मूल विषय की चर्चा करते हैं, कल मैं डीएम ऑफिस अलीपुर में था, पत्रावली की जांच कराई तो पाया वहां पर इस तरह का कोई पत्र नहीं आया, जबकि तीन रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं🙏 किसी भी रिमाइंडर की रिसीविंग डीएम ऑफिस में नहीं है 🙏 सारे लेटर कहां जा रहे हैं कोई पता नहीं है 🙏

15. जहां का यह मामला है वह रोहिणी क्षेत्र है, कंझावला के डीएम का मामला बनता है, परंतु अलीपुर के डीएम को भेजा गया है, अपराध रोहिणी कोर्ट क्षेत्र में घटित हुआ, परंतु FIR दर्ज करने का आदेश बेगमपुर के DM को दिया गया है 😂

16. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में बैठकर कौन बाबू यह खेल कर रहा है🙏 राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में अन्य जाति के अधिकारी क्यों? उनकी निगरानी कौन करता है, कि वह अनुसूचित जाति के संरक्षण के पत्रों में उलट फेर नहीं करेंगे 🙏

17. इन विषयों पर खर्च कौन करेगा? श्री राम सिंह शुक्ला और श्री अक्षय भारद्वाज को लगता है कि मैंने तो केवल एक लीगल नोटिस जारी किया है, इन अन्य विषयों को जो मैं पिछले 2 साल से कर रहा हूं किसके खाते से आएंगे इसके लिए कोई अन्य व्यक्ति धन नहीं दे रहा है, मुझे अपने व्यक्तिगत पॉकेट से खर्च करना पड़ा रहा है 🙏

18. एक बार कमरे से बाहर निकलता हूँ तो डेढ़ सौ रुपया टूटता है, जब मैं किफ़ात से खर्च करता हूं तब 🙏 मैं पुनः किसी लॉ फॉर्म का मैनेजर हो सकता हूं, परंतु इस प्रकार के सभी सामाजिक कार्य रुक जाएंगे, क्योंकि ड्यूटी तो मुझे भी 12 घंटे की करनी होगी 🙏🌹कोई और व्यक्ति इस तरह के कार्य करता हुआ मुझे नजर नहीं आता है 🙏 कुछ अधिवक्ताओं का मैं नाम ले दूंगा, तो उनके शुभचिंतकों को मिर्ची लग जाएगी🙏🌹

19. रविदास मंदिर तुगलकाबाद प्रांगण का गेट खुलवाने के लिए भी वह अधिवक्ता साथ चलने को तैयार नहीं थे, और तुकालकाबाद रविदास मंदिर प्रांगण में ऊंची ऊंची फेंकते हैं 🙏

20. आज का यह लेख सिर्फ इस विषय से संबंधित है, तंबू में चार बंबू होते हैं😂 हर अपने मोर्चे पर डाटा रहे तो तंबू तना रहता है, एक दूसरे से जुड़कर रहे तब तंबू तना रहता है 🙏

21. अधिवक्ता समाज के लिए अपना उत्तरदायित्व निर्वहन करें, संत समाज के लिए अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करें, धनपति(रोजगार और नौकरी से जुड़े लोग) समाज के लिए अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन करें, राजनीतिक प्रतिनिधि समाज के लिए अपने उत्तरदायित्व का निर्माण करें🙏 तभी हम समाज को भली भांति स्थापित और प्रतिष्ठित कर पाएंगे 🙏

22. अन्यथा तो नालायकों की कुटाई का मैंने संकल्प लिया है, जब तक जीवित हूँ कूटता रहूंगा, अभी वक्त है सुधर जाओ, जिस दिन, मैं चला जाऊंगा, तुम्हें कूटने वाला कोई नहीं होगा तब रोओगें, माननीय काशीराम की तरह याद करोगे🙏🌹अभी मुझे नफरत की नजर से देखते हो, छल फरेबियों के झांसी में हो 🙏🌹 हरि और सोहम में उलझे हो 🙏

23. संत शिरोमणि गुरु रविदास के साफे में क्या लिखा था यह हमें बता दो🌹🙏 उस प्रांगण में तुम फसादी चिन्ह वाला साफा बांध कर आते हो तुम्हें शर्म नहीं आती है 😭 तुम चुने हुए प्रतिनिधि नहीं हो तो तुम उस प्रपत्र पर साइन करना क्यों करना चाहते हो🙏


संतों का गुरु : अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064


नोट :-


आप तो सत्य की डगर पर नहीं चल सके, झूठ से लड़ने के लिए खड़े नहीं हो सके, इसलिए आप हमें शिष्य स्वीकार नहीं कर सके 🙏 हम आपको शिष्य स्वीकार करते हैं रोज कूटूँगा जब तक तुम सुधर नहीं जाते🙏 जब तक तुम्हारे अंदर का भय नहीं चला जाता, किस बात का डर है तुमको कल की रोटी का 🙏 कौन जाने कल तुम उठोगे या नहीं😂


बहुत कुछ लिखना छूट गया बाकी अगले लेख में🙏👌

[08/11, 6:25 am] kamleshmittra: 🌹सूचना दिनांक 8 नवंबर 2024 


संत शिरोमणि गुरु रविदास मंदिर तुगलकवाद स्थित प्रांगण से संबंधित सभी शेष वादियो और प्रतिवादियों को सूचनार्थ लीगल नोटिस के रिमाइंडर की कॉपी भेज दी गयी है, जिनके वकालतनामा अथवा अनुरोध पत्र प्रेषित या प्राप्त हमारे पास उपलब्ध है 🙏


उम्मीद करता हूं सरकार से अगले 30 दिन में उसका जवाब आ जाएगा, जरूरत हुई तो उसके बाद भी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जायेगा 🌹🙏


प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064


नोट :- डिफॉल्टर्स को छोड़ दिया गया है 🙏

[11/11, 3:44 am] kamleshmittra: सूचना :- विधि के रास्ते से धम्म यात्रा 🌹


जैन धर्म की आंतरिक रिपोर्ट के आधार पर 13 पंथ मैं 700 मुनि (महिला और पुरुष सभी को महाराज कहा जाता है) है 🙏 तेहरापंथ में तेहरा कोई संख्या नहीं है बल्कि यह संज्ञा है जिसके नाम से जाना जाता है परंतु जब यह संगठन आरंभ हुआ था तब उसमें आधार मुनियों की संख्या 13 थी इसलिए इसको 13 पथ कहा गया 🙏


आजकल मैं कुछ विषयों का अध्ययन कर रहा हूं🙏


 पूजा-पाठ 

 भजन-कीर्तन

 ध्यान-साधना 

 प्रार्थना- कर्मकांड 


जहां तक ध्यान साधना का सवाल है, अपनी खोज में धम्मा तरंगों के आधार पर मैंने पाया है कि आचार्य रजनीश के संगठन, जैन धर्म के संगठन, और विपश्यना संगठन, मेँ विशुद्ध ध्यान साधना पद्धति का उपयोग होता है🙏


विपासना के साधक, आचार्य रजनीश के सन्यासी, और जैन मुनि जहां निवास करते हैं, वहां की धम्म तरंगे (प्राकृतिक वातावरण सुगंध और शांति ऊर्जा, सम-व्यवहार ) अलग होती हैं 🙏 एक अलग तरह की ऊर्जा वहां पर विद्यमान रहती है 🌹


कल तुगलकाबाद रविदास मंदिर में हुई घटना मुझे व्याकुल करती है🙏


यदि समाज को जोड़ने का संकल्प ना लिया होता, तो मैं खुलकर उसकी व्याख्या कर देता🙏


चेहरा बोलता है, चित्त भाव को दर्शाता है 🙏 उपस्थिति और अनुपस्थित भी बहुत कुछ कह जाती है🙏सही समय आने पर जरूर कहूंगा🌹


श्री बनारसी दास जी द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर भी बहुत कुछ कहना है 🙏🌹 सुबह के 3:45 हैं आज 11 नवंबर है 🙏🌹


आओ सबके मंगल के लिए कुछ देर ध्यान साधना में बैठते हैं 🙏🌹


साधक कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[11/11, 2:34 pm] kamleshmittra: प्रतिक्रिया लेख सूचना दिनांक 11 नवंबर 2024🌹


श्री हरपाल सिंह जी,


1. तुगलकाबाद परिक्षेत्र से जुड़े हुए रविदास मंदिर, एवं अन्य समाजों के अन्य मंदिर एक लंबे समय से उस जमीन पर कब्जा करने की मुहिमा में थे, जिस पर श्री रिशिपाल जी और उनकी समिति ने एक लंबा संघर्ष किया है, वह 1986 से केस लड़ रहे हैं 🙏 जबकि वह स्थान चमारवाला जोहड़ के नाम से प्रसिद्ध था🙏 जिनको उस जमीन पर अकेले ही काबिज होना है, वह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के विपरीत 105 मंदिरों के संगठन में शामिल नहीं होंगे🙏


2. पहले उस स्थान को अनुसूचित जाति के स्थान में सम्मिलित किया गया और फिर ग्राम सभा में सम्मिलित कर दिया गया, उसके बाद सरकार ने इसका अधिग्रहण कर लिया, यह षड्यंत्र पूर्वक चमारों की सामुदायिक जमीन को हड़काने का सरकारी मामला है🙏 कांग्रेस ने पहले ही चमारों की सभी सामुदायिक जमीनों को ग्राम सभा में सम्मिलित करके हड़प लिया है, जिसको बाबा साहब ने संघर्ष करके दिलाया था😭 बीजेपी मुसलमानों की सामुदायिक जमीन को हड़पने के लिए बफ-बोर्ड में परिवर्तन कर रही है🙏


3. बाबूजी जगजीवन राम ने कांग्रेस में रहते हुए, अंग्रेजों द्वारा चमारों को दी गई सामुदायिक जमीन का संरक्षण करने के लिए ऐसे मंदिरों की स्थापना की थी जो की चमार गुरु के नाम से जाने जाते हो और चमार समाज अपनी सामुदायिक जमीन से जुड़ रहे 🙏🌹


4. परंतु डॉक्टर अंबेडकर के बाद अनुसूचित जाति का कोई अधिवक्ता माननीय सुप्रीम कोर्ट में उपस्थित नहीं रहा इसलिए विधिक स्थिति का कोई पता नहीं लगा, विधिक दृष्टिकोण से समाज अनभिज्ञ हो गया 🙏 अनुसूचित जाति के 131 संसद जो अंगूठा टेक थे सदैव अपने और अपने परिवार के लिए अकूत संपत्ति एकत्र करते रहे, सामाजिक संपत्ति पर उन्होंने ध्यान ही नहीं दिया 🙏🌹


5. लड़ाई बहुत लंबी है मुझे आर्थिक सहयोग की जरूरत है, मैं डोर टू डोर जाकर धन एकत्र करना नहीं चाहता, इस कार्य को किसी और को अपने कंधे पर लेना होगा, तभी मैं अपना पूरा समय विधिक शोध और संघर्ष में लगा सकूंगा 🙏 मुझे केवल जिंदा रखो, और जितना समाज में मेरा उपयोग कर सकते हो उपयोग कर लो🙏 क्योंकि मैं प्रोफेशनल एडवोकेट होना नहीं चाहता, केवल सामाजिक एडवोकेट होना चाहता हूं जो अपने समाज का संरक्षण का काम कर सके🙏 पैसा कमाने के लिए तो और भी रास्ते थे मेरे पास परंतु पैसा कमाना मेरा अंतिम लक्ष्य नहीं था/है🌹


6. कोई भी संत कानून से बड़ा नहीं है, मेरी कलम के नीचे आ जाएगा, तो अपनी इज्जत गवाएंगा🙏 दिल्ली के संतों हो या पंजाब के, दिल्ली के राजनेता हों या पंजाब के, देश की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के प्रमुख हों या राज्य पार्टियों के सबको अपनी स्थिति पर काबिज रहते हुए समाज के उत्थान के लिए काम करना चाहिए, मैं उनके सहयोग के लिए तत्पर हूं 🙏🌹


7. चमारवाला जोहड़ भारत के संविधान 1935 से स्थापित हुआ है, जोकि 1948 के रेवेन्यू रिकॉर्ड में है 🙏 ध्यान रहे कोई भी ऐसा विवाद उत्पन्न होता है, जो पूना पैक्ट के खिलाफ है 🙏 उसका समाधान लंदन की कोर्ट में भारत संविधान 1935 के द्वारा होगा 😂 उसका परिणाम यह भी हो सकता है कि भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को निरस्त करके भारत को कई उपराष्ट्र में बांट दिया जाए🙏🌹


8. भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद यह अच्छी स्थिति तो नहीं होगी, परंतु अंतरराष्ट्रीय माठाधिशों देश के पास अन्य कोई विकल्प नहीं होगा, उनको हथियार बेचने के लिए यह अच्छा बाजार होगा🙏🌹


9. आर्यावर्त समाप्त हो गया 😭 पुष्य संघमित्र की नालायकी कारण, राष्ट्रद्रोह के कारण🙏 आरएसएस द्वारा फैलाये जा रहे उग्र राष्ट्रवाद से भारत भी कई राष्ट्रओं में बट सकता है 🙏


10. पंजाब की उच्च जातियां, और रविदासिया समाज दोनों ही पंजाब को पृथक राष्ट्र बनाने के लिए अग्रसर है इसलिए उनकी धार्मिक नीति में भी पूरा भारत एक दिखाई नहीं देता है उन्होंने राष्ट्रभाषा हिंदी को स्वीकार नहीं किया है, वह भारत के कानून के अनुसार जवाब नहीं देना चाहते हैं, रविदासिया समाज की स्थापना के बाद, पंजाब से ही अनुसूचित जाति में उपजातियां का वर्गीकरण का सिद्धांत आया है🙏🌹 परंतु खुद को राजनीति में जिंदा रखने के लिए धनपति अनुसूचित जाति के लोगो ने क्रीमी लेयर का की सीमा को खत्म कर दिया, करवा दिया है🙏🌹

11. हमारे समाज को मूर्ख संतों की जरूरत नहीं है, संत कीजिए जानि के, पानी पीजे छानि ....

12. पोथी पढ़ने से पंडित होता है संत नहीं............ 😂

13. उस ब्रह्म को जानने के बाद ही कोई भक्त होता है...संत हो जाता है, अन्यथा तो उसे स्वर्ग नरक दिखाई ही नहीं देता है 😂


 जागो भारत जागो, जागो रविदास समाज जागो 🙏🌹


विधिक चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[12/11, 8:29 pm] kamleshmittra: हंसा राम जी 


राजनीतिक विषयों पर काम करेंगे तो आप हम आपके साथ हैँ 🙏


 यह जटिल विषय है 

कि कौन सा विषय राजनीतिक है कौन सा विषय सामाजिक है और कौन सा विषय धार्मिक है🙏


कुछ दिन पहले हमारे पास एक और फोन आया था वह भी काम करना चाह रहे थे 🙏 



उन्होंने बड़ी कठिनाई से कहा कि वह सोशियो पॉलिटिक्स करना चाहते हैं 😂


अर्थात अपने ही लोगों को मूर्ख बनाना चाहते हैं🙏 मैंने उनसे हाथ जोड़ लिया 🙏


यदि आपने पार्टी का पंजीकरण करा लिया है तो राजनीतिक विषय पर कम करें🙏


सामाजिक विषय पर काम करने के लिए पहले पैसा होना चाहिए🙏


 राजनीतिक विषय पर काम करने के लिए पहले मुद्दा होना चाहिए जो सरकार ( शासन और प्रशासन) की मनमानी को रोकता हो 🙏


 हमारा समाज सबसे अधिक धार्मिक अस्थिरता से गुजर रहा क्योंकि हमारे पास हमारे समाज का कोई संत नहीं है, हम मंदिरों के लिए दूसरे समाज के पुजारी बुलाते हैं 🙏


 हमारे समाज के एक दो लोग जो हैं वह रंग मंच के कलाकार है संत नहीं हैं 😭


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा

[13/11, 12:08 pm] kamleshmittra: 🌹अधूरा संत सम्मेलन🙏😂

 सूचना दिनांक 12 नवम्बर 2024


1. यह बात सत्य है कि संत श्री सतविंदर हीरा जी में अभी बचपना नहीं गया है, उनसे मेरी दो ही मुलाकात हुई हैं 🙏 एक मुलाकात 2019 में हुई थी, तब उन्होंने खुद को बिजनेसमैन कहा था, अभी 1 सितंबर 2024 को जब उनसे मुलाकात हुई, तब उन्होंने मुझे बताया कि वह तो टेक्सटाइल इंजीनियर रहे हैं, उनको लोगों ने संत बना दिया, और चरण छू गंगा का प्रमुख बना दिया है 🙏


2. उन में भोलापन बहुत ज्यादा है 🙏 अभी जब उनसे मेरी हॉट टॉक हुई तो उन्होंने बड़ी मासूमियत से कह दिया..... खिलौने के लिए तो मैंने संघर्ष किया था... 😂 उनका कोई हक नहीं है🙏


3. यह बात सच है, परंतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने उनको हक दे दिया है तो सभी को मानना पड़ेगा🙏 एक संत के मुख से लड़कपन की भाषा शोभा नहीं देती कि जमीन पर जो संघर्ष उन्होंने किया उसका क्रेडिट भी वह स्वयं लेंगे🙏 तुगलकाबाद गुरु रविदास मंदिर के संघर्ष में सभी का खून शामिल है 😂


4. मैं अक्सर एक बात मजाक में कहता हूं, शादी में खर्च कोई और करता है परंतु दूल्हा कोई और बनता है 🙏यदि खर्च करने वाला इस जिद पर अड़ जाए कि दूल्हा मैं ही बनूंगा तो अर्थ का अनर्थ हो जाएगा🙏😂


5. संत श्री सतविंदर सिंह हीरा जी को जिन लोगों ने संत की उपाधि दी है, यह उन लोगों का दोष है 🙏 इसकी सजा श्री सतविंदर हीरा जी को नहीं दी सकती है 🙏


6. मैं मायावती का कट्टर विरोधी हो गया हूं, और आजकल बीएसपी के ₹2 वाला टोलर की वजह से उसका भी विरोधी हो गया हूँ परंतु जब उन्होंने आनंद को पार्टी से बाहर निकाला तो उनके ट्विटर पर जाकर मैंने उसकी निंदा की थी 🙏


7. क्योंकि आनंद को पार्टी प्रमुख के पद पर रखने का भी मैंने विरोध किया था, परंतु जिस प्रकार उसको हटाया गया वह भी निंदनीय था 🙏 इसलिए अयोग्य आनंद नहीं अयोग्य मायावती है 🙏


8. इसलिए श्री सतविंदर सिंह हीरा में कोई दोष निकालने से पहले उन संतों की समिति को प्रश्नगत करना पड़ेगा जिन्होंने उन्हें संत की उपाधि दी है 🙏


9. संत की उपाधि देना पंजाब की परंपरा का अंग है 🙏हमारे यूपी और महाराष्ट्र बगैरा में हर घर में एक संत होता है 😂 जबकि वह संत नहीं होता है 🙏


10. हमारे समाज में वास्तविक संतों की बहुत कमी है, ग्रहस्त संत का मतलब है जो अपनी जीविका के लिए किसी से धन नहीं लेगा, बल्कि संगत के लिए खर्च करेगा🙏 परंतु सन्यासी इससे विपरीत है 🙏 सन्यासी किसी धन का संग्रह नहीं करेगा, परंतु अपनी जीविका के लिए समाज से धन प्राप्त करेगा😂


11. परन्तु मैं बहुत ही उलट-पुलट देख रहा हूं, ग्रहस्त संत दान की राशि से अपनी घर गृहस्ती चलाना चाहते हैं 🙏 दान में आया सारा धन खुद उठा कर ले जाते हैं 😂 और खुद को गृहस्त संत कहते हैं 🙏


12. मैं किसी का नाम नहीं लूंगा :- क्योंकि हमारे समाज के सभी लोग जानते हैं 😂 ग्रहस्त संत के लिए आवश्यक है, वह अपने सहयोगियों को सब बांट दे, यदि लेना ही पड़े तो बराबर का धन ले, अन्यथा प्रमुख की हैसियत वह ना ले तो अच्छा है 🙏 अन्यथा वह सन्यासी हो जाये 🙏


13. मेरी जानकारी में ऐसा नहीं है कि संत कबीर ने कभी जुलाहे का काम छोड़ दिया था या संत रविदास ने कभी जूते का काम छोड़ दिया था अथवा नानक जी ने कृषि का काम छोड़ दिया हो 🙏😂 और दान से अपनी घर गृहस्ती चलने लगे थे, मेरी जानकारी में नहीं है 🙏


14. बादशाह औरंगजेब भी राजकोश से वेतन नहीं लेता था, बल्कि अन्य श्रम से अपना अपनी जीविका चलता था🙏


15. संत सतविंदर हीरा जी की समाज को जरूरत है, सभी को इस पर विचार करना चाहिए🙏


16. मुझे अपने सारे संत प्रिय हैं, अगर वह संत हैं, पंजाब के हो या पंजाब के बाहर के मेरा बस चले तो रोज दो-चार संतों से मिलता रहूँ 🙏 कई बार तो काम की व्यस्तता होती है, और कई बार जेब में पैसा नहीं होता है इसलिए संतो से मिलने का हम रेगुलर प्रोग्राम नहीं चला पा रहे हैं 🙏


जब उसकी मर्जी होगी जरूर होगा.....


श्रमण अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[13/11, 1:57 pm] kamleshmittra: 🌹🙏सुखद सूचना दिनांक 13 नवंबर 2024 


1. 5 नवंबर 2024 के राष्ट्रीय सूचना आयोग के आदेश का असर माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दिखाई देने लगा है 🙏इसके लिए मैं सन 2022 से संघर्ष कर रहा हूं 🙏


2. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री खुद जज बन जाती है, और किसी शिकायत को जज तक पहुंचने ही नहीं देती है 🙏


3. 25 तारीख को इसी मुद्दे पर केंद्र सरकार को भी तलब किया गया है 🙏


4. माननीय सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय में बढ़ते हुए केस के समाधान के लिए फंड कौन उपलब्ध कराएगा? 


5. जब हर हर मामले में निजीकरण हो रहा है, तो न्यायपालिका का निजीकरण क्यों नही हो सकता है, वकील मनमानी फीस लेते हैं तो न्याय तुरंत क्यों नहीं? जो लोग फीस नहीं दे सकते उनके केस सरकार लड़ेगी, उनका केस सरकारी न्यायालय में होगा 😂


प्राइवेट न्यायालय क्यों नहीं स्थापित हो सकते हैं 🙏


6. जज और वकील विधि की समान पुस्तक पढ़ते हैं, तब न्याय करने का अधिकार केवल जज तक सीमित क्यों है?🙏


7. आदि विषय मेरे 10 पृष्ठीय पत्र में उठाए गए हैं🙏 मुझे खुशी है कल माननीय सर्वोच्च न्यायालय में कुछ अच्छा हुआ🙏 यह मेरे 2 साल के संघर्ष का परिणाम है, 13 दिसंबर 2022 को मैंने यह पत्र लिखा था🙏❤️


8. परंतु दुखद पहलू यह है कि 2 साल के इस संघर्ष में समाज की तरफ से किसी ने मेरा कोई सहयोग नहीं किया, बल्कि उनको पता तक नहीं है मैं ऐसा कोई संघर्ष भी कर रहा था 😂


9. क्योंकि बातचीत अपने बराबर वाले से की जाती है, विधि का संघर्ष लंबा चलता है, आदमी उम्मीद छोड़ देता है🙏 परंतु वकील उम्मीद के साथ जिंदा रहता है, हर फाइल को जिंदा रखना पड़ता है, फाइल को जिंदा रखने में वकील का खर्च बढ़ता है, उस फाइल के लिए वकील को खुद भी जिंदा रहना पड़ता है 🙏 


10. परंतु सामान्य व्यक्ति को तो लगता है कि वकील साहब ने सिर्फ एक लाइन खींची है कागज पर🙏



11. आज मुझे प.मुंशी प्रेमचंद की याद आ रही है🙏प. मुंशी प्रेमचंद की पुस्तके रॉयल्टी फ्री है, और पुस्तक छापने वाले पब्लिशर आज भी करोड़ कमा रहे हैं 🙏 हिंदी साहित्य में मुंशी प्रेमचंद का विशेष योगदान है🙏 वह एक क्रांतिकारी लेखक थे,, और अंग्रेजों से छुपाकर लिखा करते थे 🙏


12. उनकी पुस्तकों से पब्लिशर आज भी करोड़ों रुपए कमा रहे हैंl परंतु प. मुंशी से प्रेमचंद की मौत आर्थिक विपन्नता के कारण हुई, क्योंकि तब उनके साहित्य को पूछने वाला कोई नहीं था🙏


13. संस्था इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी इलाहाबाद के आवसो में आरक्षण नियम को लागू करने के लिए सन 2002 से 2005 तक मैंने संघर्ष किया था, आज वहां पर आरक्षण का नियम लागू है🙏 परंतु मैं इतिहास के पन्नों में दर्ज हूं 🙏


14. संघर्ष जारी है, कल का दिन बहुत दुखद गया🙏 जो जज नहीं है वह जज बन रहे हैं, और हर जगह मैं अपना परिचय नहीं देता 🙏 वह लोग मोदी के बताये रास्ते पर चले जाते हैं और कपड़ों से पहचानते हैं😂 डिप्टी डायरेक्टर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग धोखा खा गया 🙏


15. अगर उसने अपनी गलती को नहीं सुधरा तो नौकरी से जाएगा, मैं समाज के सभी अपराधियों को जिंदा रखने का बचन नहीं दे सकता, जो नहीं सुधरेंगे सूली पर लटकाए जाएंगे 🙏 हमारे हाथ की कलम ही शुली है 🙏


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[13/11, 3:57 pm] kamleshmittra: लीगल नोटिस के रिमाइंडर और दिल्ली चुनाव-2025 का असर इस बैठक में दिखाई दे रहा है😂


 आपकी जानकारी में डाल दूं🙏 पीएम पोर्टल पर भेजी गई, रिमाइंडर की सूचना वहां से हटा दी गई है 😂 इसके साथ-साथ लीगल नोटिस भी हटा दिया गया है 🙏


जबकि किसान आंदोलन के समय किसानों के पक्ष में लिखे गए मेरे सारे पत्र PM पोर्टल पर अवेलेबल है 😂


भाजपा सरकार उस पत्र का क्या करेंगी जिसका मैंने प्रिंट आउट ले लिया है 😂 क्या माननीय सर्वोच्च न्यायालय में उससे इनकार कर पाएगी 😂


हाउसिंग मिनिस्ट्री को भेजी गयी पंजीकृत डाक जिसकी कंसर्न रिपोर्ट्स मैंने प्रिंट कर ली है, लेटर पांच नवम्बर को भेजा गया और 6 नवम्बर को विभाग में रिसीव हो गया, उससे कैसे इंकार करेगी😂


मैंने 300 लोगों की लिस्ट भेजी है, मुझे केवल उससे मतलब है🙏 तुम राजनीति में कुछ भी करो मुझसे कोई लेना देना नहीं है 🙏


 एक-दो दिन के अंदर अगर पोर्टल फिर से हमारे लेटर को एक्टिव नहीं करता है तो हम विधिक प्रक्रिया की तरफ बढ़ेंगे 🙏


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064


नोट : इस मीटिंग की सबसे अच्छी बात है कि सरकारी कमेटी को बोर्ड लिखा गया है परंतु कौन सा बोर्ड?😂नया बोर्ड या पुराना बोर्ड? बहुत से प्रश्न अभी अनउत्तर है 🙏 कागज दिखाओ वरना दिखाना पड़ेगा😂

[16/11, 3:05 pm] kamleshmittra: 🌹अति आवश्यक सूचना :- सूचना दिनांक 16 नवंबर 2024


आप सभी को जानकर खुशी होगी कि अब आपके द्वारा लिखे गए पत्र का माननीय सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेगा, सभी पत्रों का संज्ञान लेगा 🙏 ऐसा सिर्फ इसलिए हो सका है कि सन 2022 के दिसंबर माह में केंद्र सरकार और माननीय सर्वोच्च न्यायालय को मैंने लिखा था, परंतु सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने उसको खारिज कर दिया 🙏 6 महीने के संघर्ष के बाद जब आरटीआई के माध्यम से मुझे पता लगा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय की रजिस्ट्री ने हमारे पत्र को खारिज किया है जो कि उसका अधिकार क्षेत्र नहीं था, इसकी अपील मैंने माननीय राष्ट्रीय सूचना आयोग में की थी 🙏


 उपरोक्त संदर्भ में राष्ट्रीय सूचना आयोग ने दिनांक 5 नवंबर 2024 को निर्देशित किया कि चैंबर कोर्ट के मैटरस को चैंबर कोर्ट को ही करना चाहिए था परंतु माननीय राष्ट्रीय सूचना आयोग की अपनी सीमाएं, इसलिए यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय के विवेकाधिकार पर छोड़ दिया गया, माननीय सर्वोच्च न्यायालय और उसकी रजिस्ट्री विभाग की त्रुटि उजागर हो चुकी थी🙏


जस्टिस खन्ना ने इसका संज्ञान लेते हुए, नई अधिसूचना जारी कर एक पैनल का गठन कर दिया है, जो मा. सर्वोच्च न्यायालय को भेजे गए पत्रों का संज्ञान लेगा परंतु विषय उठता है कि पत्र कैसे लिखें 🙏 कौन से विषयों का माननीय सर्वोच्च न्यायालय संज्ञान लेगा 🙏


1. आपकी जिस विषय से संबंधित शिकायत है, क्या आपने उसके निकटवर्ती अधिकारी को प्रतिवेदन दिया है 🙏

2. यदि निकट अधिकारी ने प्रत्यावेदन पर कोई कार्रवाई नहीं की है तो क्या आपने उसके उच्च अधिकारी को सूचित किया है, इसकी शिकायत की है 🙏

3. क्या आपने उस विभाग के प्रमुख, प्रमुख सचिव अथवा मंत्री को शिकायत की है 🙏

4. उपरोक्त तीनों प्रक्रियाओं में 45 दिन (30 + 15, 30 दिन कार्रवाई के लिए और 15 दिन पोस्ट डिलीवरी के लिए ) का अंतर रखते हुए कुल सीमा 135 दिन की यदि हो जाती है🙏 और आपकी शिकायत का समाधान नहीं होता है 🙏

5. तब आप माननीय सर्वोच्च न्यायालय को सीधे पत्र लिख सकते हैं🙏 उसमें आपको पहले अपनाई गई पूरी प्रक्रिया का दिन बार व्योरा देना होगा 🙏

6. राज्य स्तरीय कार्यालय के लिए पहले आप राज्य के हाई कोर्ट को पत्र लिखें 🙏 यदि हाई कोर्ट भी इसका संज्ञान नहीं लेता है🙏

7. तब आप अपने पत्र में उपरोक्त चारों की शिकायत करते हुए, माननीय सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध कर सकते हैं कि आपके पत्र का संज्ञान लिया जाए 🙏

8. नई व्यवस्था के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय इसका संज्ञान लेगा🙏

9. फिर भी आपको कोई दिक्कत है तो मैं आपकी सेवा में हाजिर हूं 🙏

10. माननीय सर्वोच्च न्यायालय उन विषयों का भी सीधे संज्ञान लेगा जो सीधे संविधान से ताल्लुक रखते हैं, और किसी विधि के अंतर्गत नहीं आते हैं 🙏 मेरा पत्र इसी प्रकार का पत्र था, इसलिए माननीय राष्ट्रीय सूचना आयोग और माननीय सर्वोच्च न्यायालय दोनों ने इसका संज्ञान लिया है 


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


नोट :- 

1. उपरोक्त मामले में आप संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की भी मांग कर सकते हैं🙏


2. इसके साथ-साथ अपने हुए मानसिक उत्पीड़न की भरपाई की ( कंपनसेशन) भी मांग कर सकते हैं


3. आपकी जो मूल समस्या थी उसका निस्तारण तो, उपलब्ध विधि के अनुसार होगा ही होगा🙏 साथ ही आप ऐसी विधि की भी मांग कर सकते हैं जिसका भारतीय संविधान समर्थन करता हो 🙏

4. मैं न्यायपालिका के रास्ते पर कालीन बिछाने आया हूं, और इस कार्य में मैं ईमानदारी से लगा हूं, आप भी इमानदारी से मेरा सहयोग करें, यदि सूचना को अपने पढ़ लिया है 😂