Wednesday, 26 February 2025

 श्रीमान वीरेंद्र जी,

(+91 98187 22988)


मथुरा की घटना पर प्रतिक्रियात्मक संघर्ष जरूरी है क्योंकि पुलिस कानून की रक्षा करती है व्यक्ति की नहीं, समाज विशेष की नहीं🙏


1. आजाद भारत में पुलिस प्रशासन व्यवस्था बदली नहीं है, कई राज्यों में आज भी अंग्रेजों द्वारा बनाया गया 1860 का पुलिस अधिनियम ही चल रहा है और जिन राज्यों में पुलिस अधिनियम बदला गया है उसमें भी वह भारतीय संविधान के अनुसार लोकतांत्रिक नहीं है अर्थात उसमें पुलिस की जवाब-देयी जनता के प्रति नहीं है🙏

2. पुलिस प्रशासन की जवाब देयी पूर्व व्यवस्था के अनुसार नए अधिनियमों में भी शासन और न्यायपालिका के प्रति ही बनी हुई है इसीलिए थाने में पहुंचते ही पुलिस आपको हड़का सकती है और आप किसी भी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई ना कर सकते हैं ना करा सकते हैं🙏 यहां तक कि अधिवक्ता भी नहीं कर सकते हैं इसलिए बार काउंसिल आफ इंडिया की तरफ से निर्देश है कि अधिवक्ता थाने में न जाए बल्कि पुलिस को न्यायालय में बुलाएं 🙏


3. पुलिस अधिनियम में ऐसी कोई धारा नहीं है कि किसी क्षेत्र विशेष में थाना इंचार्ज की असफलता के कारण आम जनता (अपराधिक रिकॉर्ड रहित) की शिकायत पर उसको टर्मिनेट कर दिया जाएगा अथवा भार-साधक अधिकारी के खिलाफ विशेष जांच बैठा दी जाएगी या उसको टर्मिनेट कर दिया जाएग इसलिए वह ऊपर के अधिकारियों का आदेश का इंतजार करता रहता है🙏 और जन आक्रोश उबलने पर उच्च अधिकारी मंत्री के आदेश का इंतजार करता रहता है😂


4. संविधान में निर्देशित है परंतु अधिनियम और प्रक्रिया विधि में में शून्यता होने के कारण थाना अध्यक्ष अधिकार और कर्तव्य से मुक्त है वह विफलता के दंड से भी मुक्त है 🙏


5. पुलिस विभाग के खिलाफ आम जनता की शिकायत पर कुछ नहीं होता है केवल अधिकारी की इच्छा पर होता है चाहे वह ट्रांसफर करें या ना करें 🙏 इन सभी अधिनियमों और प्रक्रिया विधि में सुधार कराने की आवश्यकता है🙏


6. नेतागिरी इस पर राजनीति करेगी परंतु सुधार करने या कराने का कोई काम नहीं करेगी, सुधार करने की उसमें योग्यता भी नहीं है, जैसी आजादी के समय हमारे प्रतिनिधियों में होती थी, सभी जन प्रतिनिधि (मंत्री) अपने PA पर निर्भर हैं और अधिकांश PA सरकारी अधिकारी होते हैं इसलिए वह कानून अपने पक्ष में ही बनाते हैं, भारतीय संविधान के अनुसार जनता को कोई अधिकार नहीं देते है, बल्कि भारतीय संविधान के खिलाफ जाकर सारे अधिकार अपने पास ही सुरक्षित रखते हैं🙏


7. उदाहरण के तौर पर बात करें तो सूचना का अधिकार अधिनियम भी जनता का अधिकार नहीं है, आयोग के अध्यक्ष का अधिकार है वह चाहे तो दंड लगाए अथवा ना लगाये 🙏 सूचना अधिकार अधिनियम के अनुसार सूचना आयोग का अध्यक्ष आम जनता अथवा अपीलार्थी का एग्जीक्यूटिव नहीं होता है, स्वयंभू होता है🙏भले ही अपीलार्थी विधि विद्यालय का चांसलर हो अथवा कोई अधिवक्ता🙏 क्योंकि सूचना अधिकार अधिनियम में अधिवक्ता के लिए कोई स्थान ही नहीं है, ना हीं माननीय सूचना आयोग में उसको विद्वान अधिवक्ता माना जाता है जैसा कि न्यायपालिका में माना जाता है🙏


7. जहां तक अधिवक्ताओं का सवाल है, तो जाके कबहूँ ना फटी विमाही वह क्या जाने पीर पराई 🙏दलित अधिवक्ताओं को दलित समाज सपोर्ट ही नहीं करता है तो वह दलित समाज विरोधी अधिनियमों में सुधार कैसे कराएं 🙏


8. आपके पास कलम की ताकत है आप अच्छा लिख सकते हैं, अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचा सकते हैं🙏 मेरे पास कुछ अधिक करने की ताकत है परंतु उस पर सरकारी फीस लगती है 🙏 दो पिटीशन माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पेंडिंग है जिन पर 4000 का खर्च आना है 🙏 पिटीशन न्यायालय में पहुंचा दी है परंतु फीस के कारण आगे का प्रोसेस रुका हुआ है 🙏 जब कहीं से फीस आ जाएगी तब सोचेंगे, टाइम वार्ड हो जाएगी, तो अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ेगा🙏


9. आप समाज के हित में जितना लिखते हैं उससे ज्यादा गोदी मीडिया अपना मनुवादी ज्ञान दे देता है और अपने ही ज्ञान को सही सिद्ध कर देता है इसलिए आपके लेख का जनता पर कितना प्रभाव पड़ेगा और वह कब जन आंदोलन में बदलेगा यह दूसरा विषय है 🙏


10. आपके द्वारा भेजे गए लेख, या अखबार की अन्य कटिंग पर हम कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं है🙏 जिस प्रकार अन्य समाज के लोग करते हैं उनके समाज के खिलाफ अगर कोई कार्रवाई होती है किसी भी स्तर पर तो वह तत्काल न्यायालय में पिटीशन डाल देते हैं परंतु हमारे पास आर्थिक सामर्थ नहीं है इसलिए हम क्षमा प्रार्थी हैं 🙏


11. संविधान नागरिकों को सुरक्षा की गारंटी देता है, परंतु नागरिकों की सुरक्षा पुलिस का कर्तव्य है यह किसी भी अधिनियम और प्रक्रिया विधि में अभी तक अंकित नहीं किया गया कि नागरिक सुरक्षा नागरिक का अधिकार है और पुलिस प्रशासन नागरिक को जवाब देय है 🙏


12. कृपया ध्यान दें, नागरिक के प्रति जवाब देय और नागरिक को जवाब देय में भाषा का बहुत बड़ा अंतर है, नागरिक के प्रति जवाब देय में बिचौलिए की आवश्यकता है, वह कोई भी उच्च अधिकारी, आयोग अथवा न्यायालय पालिका हो सकती है 🙏 जबकि नागरिक को जवाब देय में किसी बिचौलिए की आवश्यकता नहीं है अभी तक कोई भी ऐसा कानून नहीं बना है 🙏


13. भारतीय संविधान के अनुसार अभी बहुत काम किया जाना बाकी है, परंतु मोदी सरकार भारतीय संविधान को बदलकर राजतंत्र लाने की जुगाड़ में है ताकि वह 5 किलो राशन देने से भी मुक्त हो जाए🙏


14. अखबार की कटिंग के माध्यम से जिस ओर आपने मेरा ध्यान आकर्षित किया है उस संदर्भ में कह दूं कि मायावती का एक बड़ा काफिला मथुरा जाते हुए दिखाई तो दिया परंतु कोई प्रेस विज्ञप्ति नहीं आई कि इस विफलता के लिए बीएसपी ने किसी अधिकारी को दोषी माना है 🙏 अथवा उस क्षेत्र विशेष में नागरिकों की संविधान विरोधी सोच के लिए समाज में सुधार न हो पाने के लिए किसको जिम्मेदार माना है संबंधित गांव के प्रधान या वार्ड मेंबर को दोषी माना है 🙏या इस संविधान विरोधी कार्य के लिए किसको दंडित किया जाये, बहुजन समाज पार्टी की तरफ से इस प्रकार की कोई भी प्रेस विज्ञप्ति नहीं आई है 🙏


15. जब तक मायावती के काफिले में मनुवादी लोग चलते रहेंगे कोई सही प्रेस विज्ञप्ति नहीं आएगी, बहुजन समाज पार्टी को मनुवादी लोगों से मुक्त करने की आवश्यकता है मनुवादी विचारधारा से मुक्त करने की आवश्यकता है, मायावती के सोशल इंजीनियरिंग का दुष्परिणाम यह है कि आज समाज लगातार गर्त में जा रहा है🙏


16. मैंने भी आपकी तरह एक विचार लेख लिख दिया है, सर्वोच्च न्यायालय में संबंधित को बुलाने के लिए पिटीशन डालने की आवश्यकता है उसका कौन खर्च कौन उठाएगा?🙏 गैर संवैधानिक सोच के लिए उस क्षेत्र में आजाद भारत के संविधान की मूल भावना की शिक्षा का प्रोग्राम चलाया जाने की अति आवश्यकता है उसके लिए किस अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा और उस पर फंड कौन देगा आदि विषयों को न्यायालय में प्रश्न गत किया जा सकता है, क्योंकि पुलिसिया न्याय हर समस्या का समाधान नहीं है


17. मनुवाद की सोच को मनुवादी मानसिकता के व्यक्तियों के दिमाग से बाहर निकालने के लिए आजाद भारत में कोई भी सांस्कृतिक प्रोग्राम नहीं चलाया गया है यहां तक कि पिछड़े वर्ग के लोगों को 40 साल तक शिक्षा का अधिकार ही नहीं दिया गया इसलिए वह मनुवादी मानसिकता से अभी तक मुक्त नहीं हो पाए हैं, कुछ सुशिक्षित पिछड़े वर्ग के लोग इस संविधान विरोधी मानसिकता का विरोध करने लगे हैं, परंतु से राष्ट्रीय नीति बनाए जाने की आवश्यकता है क्योंकि आरएसएस की मानसिकता के लोग विरोधी कार्य कर रहे हैं, उनके निशाने पर मुस्लिम और दलित हैं 🙏अस्तु मैं अपने लेख को विराम देता हूं 🇮🇳


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

व्हाट्सएप पोस्ट 25 फरवरी तक

 [21/02, 10:59 am] kamleshmittra: जनाब पदम सिंह जी(+91 98687 29274


आपने पुनः पैराग्राफ नंबर डाले बिना बात कह दी है 🙏 या तो मैं आपके पैराग्राफ की पुनरावृत्ति करूं फिर आपत्ती करूं 🙏 या इस घाल मेल को स्वीकार कर लूँ 🙏


कृपया ध्यान रहे आप किसी पाठक के साथ चर्चा नहीं कर रहे हैं 🙏 इसलिए कथन और उसकी भूमिका के बारे में जान लें, मुझे भक्तों से बात करना पसंद नहीं है क्योंकि भक्त लोग गलत बात को भी सही सिद्ध करने का प्रयास करते हैं🙏


1. जैसा तुलसीदास ने किया था, महाकाव्य रामायण में वाल्मीकि ने आदर्श राजा के जो गुण बताए थे, वह रामचंद्र में कभी नहीं थे🙏 परन्तु रामचरित्र मानस की रचना करते हुए तुलसीदास ने वह सारे गुण रामचंद्र में दिखा दिए 😂 भक्तों की तो माया ही निराली है 🙏 और जब उनके पास किसी बात का उत्तर नहीं होता है तो भाषा का स्तर भी गिर जाता है, जैसे ढोल गंवार शूद्र पशु नारी......., संत शिरोमणि गुरु रविदास का वचन था, पूजीय चरण चांडाल के...... आदि विषयों पर तुलसी कुतर्क करके मनुवादियों के बीच प्रिय हो गए 🙏

2. ऐसे में अधिक देर तक सार्थक चर्चा नहीं की जा सकती है, कुतर्कों पर क्या चर्चा की जाए 🙏 जहां पैराग्राफ ही ना हो वहां कैसे कहा जाए कि यह बात या यह पैराग्राफ गलत है🙏 असली के साथ ही नकली चलाया जाता है, इसलिए कथन के साथ उप कथन गलत लिखे जाते हैं, आरएसएस के प्रवक्ता (लेखक) इसमें कुशल है🙏

3. लगभग सभी पार्टियों के प्रवक्ता आरएसएस की पाठशाला के नियमित विद्यार्थी हैं, जो भारतीय संविधान की मूल भावना की हत्या करने के लिए पर्याप्त है 😂 क्योंकि भारतीय संविधान भाग और अनुच्छेद के साथ लिखा गया, भागो और अनुच्छेदों के अनुक्रम में बहुत ही वैज्ञानिक तालमेल है🙏 जो इस तरह की शैली का प्रयोग नहीं करता अंबेडकरवादी नहीं हो सकता है 🙏 अब आपके लेख का संक्षिप्त उत्तर देता हूं🙏 क्योंकि पैराग्राफ वाइज उत्तर देना संभव ही नहीं है 🙏


4. यदि मायावती के सारे कार्य अच्छे होते हैं, तो जनता उन्हें इतनी बुरी तरह से नहीं नकारती, कई राज्य में मुख्यमंत्री 20-20 30-30 साल रहे हैं 🙏 उत्तर प्रदेश की जनता ने 50 साल का इतिहास बदल दिया था, बिगत 25-30 साल से त्रिशंकु विधानसभा चल रही थी 🙏

5. दलितों की बहुसंख्यक आबादी वाले उत्तर प्रदेश से मायावती इतनी जल्दी विलुप्त कैसे हो गई यह विषय विचारणीय है 🙏 यह भक्ति करने का विषय नहीं है🙏 आपके साथ चर्चा करना कितना सार्थक होगा मैं नहीं कह सकता? यदि आप बहुजन समाज पार्टी के कुशल कार्यकर्ता है, तो उम्मीद करता हूं कि चर्चा को अग्रसारित किया जाएगा, अन्यथा यह चर्चा वाणी विलास से अधिक कुछ नहीं होगी🙏


6. विषय उठता है माननीय काशीराम को डॉक्टर अंबेडकर के बारे में क्यों नहीं पता था? जबकि पंजाब से आने वाले माननीय काशीराम जो खुद को रविदासिया (रैदास-सिक्ख)कहते थे, क्या वहां पर डॉ आंबेडकर नहीं पहुंचे थे? क्या डॉक्टर अंबेडकर से पंजाब अनभिज्ञ था? 

7. जो सफलता माननीय काशीराम ने उत्तर प्रदेश में प्राप्त की वह पंजाब में क्यों नहीं प्राप्त कर सके?


8. मायावती की कुर्सी तोड़ने की आदत और अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को प्रताड़ित करने तथा दिगभ्रमित करने की आदत ने बहुजन समाज पार्टी को कमजोर कर दिया है, क्या कभी आपको ऐसा नहीं लगता है?

9. मैं पुनः कथन करता हूं माया भक्ति छोड़ कर, दलित समाज के उत्थान के भक्ति करने से ही समाज का कल्याण होगा🙏 मर्जी आपकी🙏

10. बाबा साहब ने तीन ही विषय दिए हैं, एक पर वह स्वयं काम करके चले गए, दो पर अभी काम किया जाना बाकी है🙏 परंतु आप जैसे लोग मायावती के संरक्षण पर काम कर रहे हैं 😂

11. सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक (समानता) समता (न्याय)🙏 न्याय की परिभाषा आरएसएस की पाठशाला में खोज रहे हैं, आप आरक्षण के आगे एक कदम भी नहीं बढ़े है, आरक्षण आपका अधिकार नहीं है समता अधिकार है🙏

12. समता के संबंध में अन्य प्रतिमान अभी तक आपकी(BSP) सोच में आए ही नहीं है, और आने की कोई संभावना भी नहीं है क्योंकि माननीय काशीराम द्वारा बनाया गया थिंक टैंक को समाप्त कर दिया गया, केवल सतीश मिश्रा की सलाह पर प्रतिमाओं की राजनीतिक आरंभ की गई 🙏

13. आपने (BSP) कहीं पर भी वेतन विसंगतियों को दूर नहीं किया, सिर्फ मूर्तियों की राजनीति की है, नाम बदलने की संस्कृति को जन्म दिया 🙏 आर्थिक समानता का विषय मायावती की बहुजन समाज पार्टी की राजनीति का अंग नहीं है🙏 और जब तक ऐसा रहेगा मैं मायावती का विरोध करता रहूंगा🙏 क्योंकि बीएसपी को खड़ा करने में मेरे खानदान का भी खून शामिल है😭


14. ध्यान रहे भाजपा भाग्यवादी पार्टी है, और बीएसपी भक्तिवादी पार्टी 😂 बीएसपी में टिकट उसको मिलता है जो नोटों की माला चढ़ता है 🙏 बीजेपी में किसी की भी लॉटरी निकाल सकती है, जो मनुवाद का वफादार है😝


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[25/02, 10:10 pm] kamleshmittra-SCI: आशीष जी(8982217371)


बिहार और मूर्तियों के संबंध में हमारा दृष्टिकोण अलग है : बिहार वह स्थान है जहां पर लोग बैठकर समाज के लिए चिंतन करते हैं, मूर्ति वह है जिसको आदर्श मानकर समाज को सुसंगठित करते हैं🙏


दलितों के कोई भी बिहार और मंदिर मुझे इस योग्य नहीं दिखाई देते जहां बैठकर समाज के हितों की चर्चा की जा सके और अन्य समाज को ना पता लगे 🙏


 जहां तक मूर्तियों का सवाल है, वह सब धूल खा रही है और चिड़िया कौवे के बैठने का स्थान है 🙏


 मैं दिल्ली में हूं, और आपको दिल्ली की स्थिति बता रहा हूं 🙏 अन्य छोटे शहरों में मंदिरों और विहारो की क्या स्थिति है, यह शोध का विषय है 🙏


इसीलिए मेरा पहला कथन है कि दलित समाज अपने समाज के लिए नहीं कमाता है 🙏 अपने घर परिवार के लिए भी नहीं कमाते हैं, भविष्य की उम्मीद में जीता है 🙏 जिसका लाभ कोई और लेता है 🙏


समाज के लिए कामना और व्यक्ति के लिए कामना दो अलग चीज हैं 🙏


जहां समाज के चार लोग बैठे हो वहां चाय पानी की व्यवस्था होनी चाहिए अगर ऐसा नहीं है तो वह बात करते हुए थोड़ी देर में ही गर्म होने लगेंगे, मैं दलित समाज के अधिकांश बैठकों में ऐसा ही देखना हूँ 🙏


नियमित रूप से किसी भी मंदिर में कहीं कोई बैठता हुआ दिखाई नहीं देता है, जब तक चार लोग आकर नहीं बैठते उसको मंदिर नहीं कहा जा सकता है 🙏 और जब तक चार लोग आकर नहीं बैठेंगे समाज को सुसंगठित दिशा नहीं मिलेगी🙏


 आपका उपरोक्त कथन, अज्ञानता से भरा हुआ है, अथवा धूर्तता से भरा हुआ है 🙏 जो दलित समाज की उन्नति नहीं चाहते है 🙏 वह चाहते हैं हमेशा दलित समाज में बिखराव बना रहे🙏


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[26/02, 12:24 pm] kamleshmittra: 🌹आगामी चेतावनी लेख के संदर्भ में 👏


मैं एक कथित धार्मिक संगठन के गतिविधियों को फिर नंगा करने जा रहा हूं🙏


 दिल थाम कर बैठे 😂 क्योंकि लगभग 6 महीने पहले दी गई चेतावनी की कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया मुझे दिखाई नहीं दे रही है🙏


मेरा किसी धार्मिक संगठन से कोई लेना-देना नहीं है🙏 परंतु मेरा धर्म से लेना देना है 🌹


धर्म के नाम पर अधर्म की अर्थ राजनीति करोगे तो मेरी कलम चुप नहीं बैठेगी 👹


कुछ लोग अपनी सीमाओं में, अपनी क्षमताओं के अनुसार घोषित नियम के अधीन संगठनात्मक धार्मिक कार्य कर रहे हैं🙏 मेरे सीधे संपर्क में है 🙏 मैं समय-समय पर उनकी भी आलोचना करता हूं, क्योंकि धर्म बहुत ही व्यापक है🙏 धार्मिक संगठन तक सीमित हो जाना धर्म की रक्षा नहीं है, मैं उनसे ज्यादा अपेक्षा करता हूं इसलिए उनकी आलोचना करता हूं🇮🇳


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[26/02, 1:05 pm] kamleshmittra: 🌹Arvind Kumar Meena जी,


बहुजन समाज पार्टी एक थकी हुई पार्टी है 😂😂😂


1. बूढ़े हाथी से ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए, बचे हुए उसके दिन अच्छा से कट जाए, हमें इतनी ही आशा करनी चाहिए🙏


2. कोई छोटा प्राणी हो तो उसे कोई भोजन करा भी दे, बड़े प्राणी का शरीर ही उसकी मौत का कारण बनता है😂


3. मुझे ज्यादा उम्मीद नहीं है, हाथरस के बाद मथुरा की घटना पर BSP में थोड़ी सी गतिविधि नजर आ रही है, इसके स्थाई रहने की कोई संभावना नहीं है 🙏


4. बहुजन समाज पार्टी ने ना तो समाज को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया, ना ही बाहुबल प्रदान किया🙏 केवल समाज को भिखारी बनाया, इस बात को केजरीवाल ने अच्छे से पकड़ लिया, और उसकी राजनीति चल पड़ी, जिस राज्य में केजरीवाल सफल हुआ वहां बीएसपी समाप्त हो गई 🙏


5. BSP ने बहुजन समाज को यदि बाहुबली बनाया होता तो अखिलेश का शासन आते ही उसे पर अत्याचार नहीं होता, और भाजपा की सरकार आने पर दलित समाज की शिक्षा पर कोई असर नहीं पड़ता🙏


6. कृपया बताने का कष्ट करें, आज दलित समाज के कितने % लोग डॉक्टर इंजीनियर और आईआईएम के संस्थानों में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं, और कितने % लोग आईएएस, आईपीएस, पीसीएस, आईएफएससी की परीक्षा में सफल हो रहे हैं 😍


7. मायावती ने राजनीतिक उथल-पुथल से दलित समाज को निष्प्रभावी बनाए रखने का कोई उपाय नहीं किया क्योंकि सत्ता में आते ही उनके मुख्य सलाहकार मनुवादी हो गए थे🙏( यह सोशल इंजीनियरिंग का दुष्परिणाम था)


8. इसलिए मैं मायावती की बीएसपी से कोई उम्मीद नहीं करता हूँ 🙏 पुलिस प्रशासन की क्षमताएं सीमित होती हैं, आज भी दलित समाज के पास सब्जी काटने के लिए अच्छा चाकू नहीं है, तो अपनी और अपने समाज की रक्षा कैसे करेगा🙏 विरोधी समाज तो धनबल से लाइसेंसी खरीद लेता है, और उसके बल पर पूरे गांव को डराता है 😂 क्या मायावती को अपने समाज की रक्षा के लिए कुछ नहीं करना चाहिए था, क्या उसके स्थाई उपाय नहीं करनी चाहिए थे, जबकि उस समय तक फूलन देवी की हत्या कर दी गई थी🙏


9. दबंग क्षेत्तो में काशीराम कॉलोनी में आज भी सवर्ण लोग ही रहते हैं, और नाम दलित का चलता है, यही हाल आवंटित पट्टो और भूमिका है 🙏 मायावती ने दलित हितैषी, अधिवक्ताओं और जजों का कोई पैनल तैयार नहीं किया, बल्कि मनुवादियों पर स्वयं निर्भर रही हैं, और समाज का पंगु बना दिया🙏


10. अस्तु समाज 1 जनवरी 1818 की स्थिति में पहुंच गया है, आरएसएस समर्थित मनुवादियों के द्वारा किए जा रहे चीर हरण के खिलाफ रक्त क्रांति जरूरी है🙏


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

Thursday, 20 February 2025

पदम सिंह जी के साथ सवाल जवाब

 [20/02, 8:40 am] Sd12 Padam Singh: मायावती की बीएसपी और उनके दिशाहीन कार्यकर्ताओं ने कौन कौन से शब्द RSS की पाठशाला से लिए है ?

कृपया बताने का कष्ट करें 

मायावती की बीएसपी ने बिना लड़े ही बहुजन समाज के हजारों वर्ष पुराने इतिहास को जीवित कर दिया जिसे RSS को जन्म देने वालों ने दफना दिया था

मायावती के दिशाहीन कार्यकर्ताओं ने बिना लड़े वोट की ताकत से यूपी में एक बार नहीं ,दो बार नहीं,तीन बार नहीं चार बार बीएसपी की सरकार बनकर आंबेडकरवादी सोच को साकार कर दिया 

हां इतना जरूर है कि मायावती के दिशाहीन कार्यकर्ताओं ने मनुवादियों की चमचागिरी नहीं की उन्होंने फटे हाल रहकर विचारधारा को जनजन तक पहुंचाने में ही समय लगाया जो मनुवादी चमचों की नजर में दिशा हीनता कहा जाता होगा?

[20/02, 9:30 am] kamleshmittra: आप माननीय काशीराम जी के कार्यकर्ताओं की बात कर रहे हैं😂

माननीय काशीराम के जाने के बाद बीएसपी का लगातार पतन हो रहा है जिसके लिए सीधे मायावती की गलत नीतियां और उनके कार्यकर्ता जिम्मेदार हैं, 🙏

[20/02, 10:44 am] Sd12 Padam Singh: मान्यवर जी 

आपका कथन मनुवादी दुष्प्रचार से प्रभावित है

बहिनजी ने मान्यवर कांशीराम साहेब के साथ उनके मार्गदर्शन से ही समाज के लिए पूर्णतः समर्पण भाव के तहत सभी प्रकार के सुखों को तिलांजलि देकर नौकरी छोड़ी,घर छोड़ा,और अविवाहित रहकर मान्यवर कांशीराम साहेब के साथ पूरे देश की गलियों में धूल फांकी और मान्यवर कांशीराम साहेब की सर्वोत्कृष्ट शिष्या साबित करते हुए यूपी में राजनीतिक सफलता प्राप्त की और उनके जाने के बाद भी 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनकर इतिहास निर्माण किया 

बहिनजी आज तक उसी दिशा में निरंतर मिशन के साथ खड़ी है तमाम मनुवादियों द्वारा पैदा की गई मुसीबतों में भी मिशन से नहीं डिगी और आज भी उसी नीति के साथ बहुजन आंदोलन का कुशल नेतृत्व कर रही है 

समाजवको गुमराह किए जाने के कारण समाज भटका है और अपनी पार्टी को वोट देने में कंजूसी की है जिसे बहिनजी अपने चट्टानी कार्यकर्ताओं के बल पर पुनः हासिल कर लेंगी

आप जैसे बुद्धिजीवी से इतनी अपेक्षा करते है कि नकारात्मक भाव न पैदा करे और न ही समाज को दिग्भ्रमित करे🙏

[20/02, 12:54 pm] kamleshmittra: मायावती भक्त का कुछ नहीं हो सकता, मायावती का भक्त बहुजन समाज का भक्त नहीं होता, और ना ही माननीय काशीराम का भक्त होता है 😂आचार्य रजनीश ने तर्क को वेश्या कहा है 🙏


 कृपया मेरे यूट्यूब चैनल "Kamlesh Mittra" पर जाएं और अन्य लोगों के विचार भी सुने 🙏 आप अंतिम वक्त नहीं हो, मनुवादी को तो बगल में लेकर घूम रही हैं मायावती🙏 कभी वह त्रिशूल पकड़ा देता है कभी परशुराम जयंती मनवा देता है🙏 कभी परशुराम की भव्य प्रतिमा लगवाने का संकल्प कर देता है😂 ऐसी मूर्ख माया को दलित वोट क्यों करें 👹😝😍

[20/02, 6:26 pm] Sd12 Padam Singh: ये मात्र राजनीति का पार्ट है कार्य केवल विचारधारा पर ही किया जाता है और किया है

मोदी यदि बाबा साहेब डॉ अंबेडकर के सामने हाथ जोड़ता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि वो बाबा साहेब डॉ अंबेडकर की 22 प्रतिज्ञाओं को भी मानता है

[20/02, 8:04 pm] Sd12 Padam Singh: मायावती का भक्त बनने से बहुजन समाज की बेटी का सम्मान होता है और बहुजन समाज हुक्मरान(राजा) बन जाता है

मायावती की आलोचना करने से समाज गुमराह होता है और अपने पैरों में कुल्हानी मार की कहावत को चरित्रार्थ करता है अर्थात अपने राज पाट को हटाकर मनुवादियों की सरकार बनवाता है और शोषण का शिकार बनता है 

हमने जीते जी अपने महापुरुषों की कद्र नहीं की जबकि मरने के बाद पूजा करते हैं 

काश!हमने जीते जी बाबा साहेब डॉ अंबेडकर का सम्मान किया होता तो बहुजन समाज बाबा साहेब डॉ अंबेडकर के नेतृत्व में शासक बनकर अपनी आर्थिक मुक्ति कर चुका होता लेकिन हमने बाबा साहेब डॉ अंबेडकर के विरुद्ध कांग्रेस के दुष्प्रचार का हिस्सा बनकर काजलोलकर को जिताया जिसकी सजा समाज ने भुगती 

हमने जीते जी मान्यवर कांशीराम साहेब का सम्मान नहीं किया हम मनुवादी चमचों पासवान को ऊर्जा देते रहे 

आज पुनः हम वहीं गलती दोहरा रहे है आज बहिनजी हमारे बीच में संघर्षरत है हम उनके संघर्ष की सराहना न करते हुए मनुवादी और उनके द्वारा तैयार चमचों पर विश्वास बनाए हुए है परिणाम स्वरूप बहुजन समाज की राजनीति विफल हो रही है और मनुवादियों की राजनीति परवान चढ़ रही है 

जब बहिनजी नहीं रहेंगी तब हम उनके गुणगान करने शुरू कर देंगे जिससे कुछ भी भला नहीं होने वाला होगा

[20/02, 9:29 pm] kamleshmittra: श्री पदम सिंह जी,(+91 98687 29274)


भक्ति रस में भारी आपकी इस टिप्पणी का खंडन तो नहीं करना चाहिए🙏और 


आपके बौद्धिक लेख का खंडन भी नहीं करना चाहिए, परंतु अंध्र भक्ति बुरी है🙏 हवा में उड़ता हुआ गुब्बारा अपनी कमजोरी के कारण जमीन पर आ जाता है 😂 दलितों का गुब्बारा बार-बार क्यों नीचे आ जाता है इस पर विचार करना होगा🙏


1. भौतिक गुब्बारे के नीचे आने का कारण :- ऊंचाई के साथ वायुमंडल का दबाब कम हो जाता है🙏 अर्थात गुब्बारे की जिंदगी अपनी परिसीमा (आवरण) पर निर्भर करती है🙏 जिस गुब्बारे का अपना आवरण मजबूत नहीं होता, वह फट जाता है 😂 और जमीन पर आ जाता है 🙏


2. डॉक्टर अंबेडकर ने : सविता अंबेडकर से विवाह करके जीवन की वह गलती की, जो उनके अपने समाज के लिए आज तक घातक बनी हुई है, हमारे समाज के सभी आईपीएस आईएएस ब्राह्मणी से शादी करना पसंद करते हैं, चमारिन उनको पसंद नहीं आती है🙏 ब्राह्मणों की विधवा औरतों से हमें क्या लेना देना, वह उनकी संस्कृति थी, उनकी संस्कृत में हमें हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था🙏 सविता अंबेडकर के साथ उनका विवाह एक असफल विवाह था, नर्स-नर्स का काम ही अच्छे से कर सकती है 🙏 बाबा साहब कहानी को जानने वाले इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं🙏 बाबा साहब की हत्या का राज खुल गया होता, अगर सविता अंबेडकर उनकी पत्नी ना होती 🙏 बाबा साहब के संपूर्ण संघर्ष को ध्वस्त करने वाले तो ब्राह्मण ही है, इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह भगवाधारी है, अथवा चीवरधारी है 🙏 जिस प्रकार गुब्बारे का एक छेद उसको धराशाही कर देता है, बाबा साहब की इस चूक ने उन्हें जमीन पर ला दिया🙏 और पूरे बहुजन की हवा निकल गई🙏


3. माननीय काशीराम द्वारा खड़े किए गए सामाजिक संघर्ष की हवा निकालने वाली मायावती की गलती सतीश मिश्रा को पार्टी में शामिल करना है🙏


4. माननीय काशीराम ने समाज के सभी संवर्गों को शासन में समान अधिकार देने की बात की थी ना कि पार्टी में, मायावती ने सतीश मिश्रा को पार्टी में जगह देकर पूरे दलित मूवमेंट का सत्यानाश कर दिया है 🙏


5. मैं आलोचना इसलिए करता हूं ताकि लोग अंधभक्त छोड़ें, मायावती भी अपनी मूर्खता का परित्याग करें 🙏 आर्थिक समानता के मूवमेंट को आगे बढ़ाएं🙏 विश्व व्यापार नीति मनु वादियों के हाथ में दिया हुआ हथियार है, जिसे बिल्ली के भाग्य से छींका टूटने जैसा कह सकते है🙏 इसलिए आरक्षण की जिद छोड़ देनी चाहिए और आर्थिक समानता के मूवमेंट को धरती पर उतारना चाहिए🙏 

6. वेतन आयोग को विवश करना चाहिए कि वह सभी को सामान मूल वेतन देने की सिफारिश करें यही संविधान की आर्थिक समानता की मूल अवधारणा है 🙏


7. यह बात ना तो मूर्ख मायावती को समझ में आ रही है, आप जैसे लोगों को कितनी समझ में आएगी यह तो भविष्य बताएगा, परंतु अन्य दलित पार्टीओं के जितने नेताओं से मेरी बात हुई है, सबको लालाराम बना है 🙏 कोई आर्थिक समानता के मूवमेंट पर काम करना नहीं चाहता है 🙏 सबको मायावती की तरह माया की देवी बनना है🙏


8. सभी को एक वोट का अधिकार देकर बाबा साहब ने यह तो नहीं सोचा था, जो मायावती कर रही है 🙏 केवल गरीबी की रेखा के नीचे के लोगो को ही नहीं बल्कि सभी को 5 किलो राशन मिलना चाहिए🙏 सभी की आर्थिक समानता सुनिश्चित हो🙏 इसको शक्ति से लागू करना होगा इसको जन आंदोलन बनना होगा🇮🇳


9. यदि आपकी जरा भी औकात है, तो माया भक्ति छोड़कर इस मिशन को आगे बढ़ाएं, और दलितों के सम्मान के लिए कार्य करें ना कि केवल मायावती के लिये 🙏


10. पुनः कहूंगा आचार्य रजनीश ने तर्क को वैश्य कहा है 🙏 आप जितना उलझोगे है, मुझे दलितों की असफलता की कहानी का खुलासा करना पड़ेगा🙏 मर्जी आपकी 🙏


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[20/02, 10:58 pm] Sd12 Padam Singh: क्या दलित नेताओं की सवर्णों की पार्टियों में जाने से उनकी राजनीति ध्वस्त हो गई है?

क्या दलितों की फौज सवर्ण पार्टियों को कब्जे ले सकी है?

या दलित एजेंडे को लागू का सके है 

जबकि सभी जानते है कि सवर्ण संचालित राजनीतिक दलों में दलित समाज के नेता दलितों के हितों को चोट पहुंचाने के बिलों पर हस्ताक्षर करने पर मजबूर होते है यहां तक कि अपने आकाओं को हस्ताक्षर से पहले सवाल भी नहीं पूछ सकते है 

इसके विपरीत दलित समाज की एक मात्र पार्टी BSP में कुछ सवर्णों के पिछलग्गू होने मात्र से आपको लगता है कि पार्टी बदल गई है और सत्यानाश हो गया है

 क्या दलित समाज के नेताओं को ही सवर्णों का पिछलग्गू बने रहना चाहिए?

क्या कोई एक भी सवर्ण दलित समाज की पार्टी में पिछलग्गू नहीं रहना चाहिए ?

क्या सवर्णों को गुलामी नहीं करनी चाहिए?

क्या गुलामी केवल दलितों के हिस्से में ही है 

बसपा की पहली सरकार मान्यवर कांशीराम साहेब की निगरानी में 

3 जून 1995 में बनी जिसमें रामबीर उपाध्याय केबिनेट मंत्री बना और लगातार चारों सरकारों में कैबिनेट मंत्री रहा तो आप कैसे कह सकते है कि मायावती ने सवर्ण नेताओं को पार्टी में लिया ?

जबकि मान्यवर कांशीराम साहेब ने नहीं लिया ?

बहिन कुमारी मायावती जी ने उसी पॉलिसी को लागू किया जो पॉलिसी मान्यवर कांशीराम साहेब ने बनाई

बहिनजी बहुजन समाज की आन,बान,शान,है गौरव है धरोहर है। बहुजन समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने समाज की महिला होने के नाते सम्मान देना चाहिए न कि बदतमीजी से पेश आना चाहिए 

बिना तर्क की कसौटी पर कसे किसी को भी गलत मान लेना और आलोचना कर देना बुद्धिमत्ता नहीं है बल्कि समाज को नुकसान पहुंचाने वाला संस्कार है 

बिना राजनीतिक परिवर्तन के सामाजिक परिवर्तन संभव नहीं है 

बिना सामाजिक परिवर्तन के आर्थिक मुक्ति संभव नहीं है


मान्यवर कांशीराम साहेब ने बहुजन समाज की राजनीति का स्थाई घोषणा पत्र यही इसे ही बनाया है

*सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति*

हुक्मरान बनने पर ही इतने बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते है

[21/02, 1:42 am] kamleshmittra: जनाब पदम सिंह जी,(+91 98687 29274)


आपके संपूर्ण लेख में बड़ा घायल मेल है 🙏 बात का कोई पैराग्राफ नहीं है, इस प्रकार की भाषा शैली आरएसएस के प्रवक्ताओं की होती है, ताकि किसी बात का जवाब ही नहीं दिया जा सके🙏 फिर भी मैं प्रयास करता हूं, क्योंकि रक्षात्मक मुद्रा में लिखे गए आपके सभी कथन विचारणीय है, अल्प बुद्धि के लोगों को दिगभ्रमित करने वाले हैं 🙏


1. बात को उदाहरण से आरंभ करते हैं, यदि कोई विद्यार्थी दसवीं की परीक्षा में फेल हो जाए तो उसके मां-बाप और शुभचिंतक दलील दें कि उसके बच्चे को यह आता है वह आता है आदि आदि 🙏 मास्टर ने जबरदस्ती फेल कर दिया, यह सुनकर बच्चा भी एंठ दिखाएं और अगली परीक्षा में फिर फेल हो जाए 😂 उसके शुभचिंतक फिर इसी प्रकार की दलील दें, तो ऐसे विद्यार्थी का सर्वनाश होने से कोई नहीं रोक सकता है 🙏

2. आपका संपूर्ण लेख एक पक्षीय है, विगत तीन लोकसभा चुनाव और अनंत विधानसभा में हार और घटते वोट प्रतिशत के खिलाफ, शुतुरमुर्गिया रक्षा के उपाय करने से आप बीएसपी का सर्वनाश होने से नहीं बचा सकेंगे 😭

3. मेरी रोजी-रोटी बीएसपी से नहीं चलती, मेरी रोजी-रोटी कभी भी बीएसपी से नहीं चली, यह दूसरी बात है कि हमारा डेढ़ सौ लोगों का कुनबा बीएसपी का सपोर्टर रहा है 🙏 मेरी तकलीफ ज्यादा है, मैं तो BSP की हार के करणो पर चर्चा करूंगा🙏 माया भक्ति से मेरा कोई लेना देना नहीं है 🙏

4. अगर उनका दिमाग काम नहीं करता है, अगर वह सरकारी एजेंसियों के दबाव में हैं 🙏 तो बीएसपी का अध्यक्ष पद छोड़ देना चाहिए और उस पर निष्पक्ष चुनाव होने देना चाहिए🙏 चाहे तो वह मार्गदर्शक मंडल में रह सकती हैं 🙏

5. आप मानते हैं कि दलितों की कोई और विश्वसनीय पार्टी नहीं है, परंतु अब यह अवधारणा टूटती जा रही है 🙏 हर राज्य में स्वतंत्र अस्तित्व निकलकर आ रहा है 🙏 बीएसपी ने अपनी नीति में सुधार नहीं किया, तो बीएसपी का भी वही हाल होगा जो जनता दल का हुआ है 🙏 जनता दल ने बहुत से राजनीतिक दलों को जन्म दिया है 🙏 बहुजन समाज पार्टी से बहुत से राजनीतिक दल निकलेंगे🙏

6. महिला सम्मान महिला सम्मान, की बातें उठाते हुए, कभी दलित सम्मान की भी बातें सोचनी चाहिए, दलितों का सम्मान रहेगा तो दलित महिला का भी सम्मान हो जाएगा 🙏

7. एक दलित महिला के भ्रष्टाचार को छुपाए रखने के लिए, अथवा षड़यंत्र पर पर्दा डालकर दलितों के सम्मान को कूचला नहीं जा सकता है 🙏 

8. मेरा अपना शोध है बहुजन समाज पार्टी में वे ही कार्यकर्ता वफादारी से कार्य करते हुए नजर आते हैं जिन्होंने मायावती के शासनकाल के दौरान भ्रष्टाचार किया है और सरकारी एजेंसी के रडार पर हैं 😂 अथवा वर्तमान समय में जिनकी रोजी-रोटी बीएसपी से चल रही है🙏

9. यह दोनों लोग बीएसपी के सपोर्टर को भी काम नहीं करने देते है 🙏 जनहित के मुद्दों पर कोई आंदोलन नहीं करने देते है, दलित उत्पीड़न के मुद्दे पर कोई घेराव नहीं करने देते है 🙏

10. आपकी गलतफहमी है कि सतीश मिश्रा केवल केंद्र में, बीएसपी हवा निकालते होंगे 🙏जबकि सतीश मिश्रा के शुभचिंतक बूथ लेवल तक BSP की हवा निकालने के लिए तैनात हैं 🙏

11. या तो आप इन चीजों से अनजान है, या सब कुछ मेरे मुंह से कहलवाना चाहते हैं 🙏 इसको ही राजनीति कहते हैं, यही कूटनीति है खुद अपने मुंह से ना कहो दूसरे के मुंह से कहला दो 😂😂😂


 मेरी तो बिल्ली के गले में घंटी बांधने की आदत है, जिन्हें बीएसपी में पद लेना हो वह चुप रहे, और कूटनीति करते रहे🙏 मैं 14 साल इंजीनियरिंग कॉलेज का टीचर रहा हूँ, रिजल्ट कार्ड को पढ़ना अच्छा ढंग से जानता हूं, और विद्यार्थी की मटरगश्ती को भी भली भांति पहचानता हूं 🙏


अस्तु चर्चा को समाप्त किया जाए🙏 क्योंकि आप बीएसपी के शुभचिंतक हैं तो सब कुछ जानते हैं🙏 मैले की बदबू को कपड़ा डालकर नहीं ढाका जाता है, मिट्टी डालकर दफना दिया जाता है 😂


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 

@9335122064