Wednesday, 26 February 2025

 श्रीमान वीरेंद्र जी,

(+91 98187 22988)


मथुरा की घटना पर प्रतिक्रियात्मक संघर्ष जरूरी है क्योंकि पुलिस कानून की रक्षा करती है व्यक्ति की नहीं, समाज विशेष की नहीं🙏


1. आजाद भारत में पुलिस प्रशासन व्यवस्था बदली नहीं है, कई राज्यों में आज भी अंग्रेजों द्वारा बनाया गया 1860 का पुलिस अधिनियम ही चल रहा है और जिन राज्यों में पुलिस अधिनियम बदला गया है उसमें भी वह भारतीय संविधान के अनुसार लोकतांत्रिक नहीं है अर्थात उसमें पुलिस की जवाब-देयी जनता के प्रति नहीं है🙏

2. पुलिस प्रशासन की जवाब देयी पूर्व व्यवस्था के अनुसार नए अधिनियमों में भी शासन और न्यायपालिका के प्रति ही बनी हुई है इसीलिए थाने में पहुंचते ही पुलिस आपको हड़का सकती है और आप किसी भी पुलिस अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई ना कर सकते हैं ना करा सकते हैं🙏 यहां तक कि अधिवक्ता भी नहीं कर सकते हैं इसलिए बार काउंसिल आफ इंडिया की तरफ से निर्देश है कि अधिवक्ता थाने में न जाए बल्कि पुलिस को न्यायालय में बुलाएं 🙏


3. पुलिस अधिनियम में ऐसी कोई धारा नहीं है कि किसी क्षेत्र विशेष में थाना इंचार्ज की असफलता के कारण आम जनता (अपराधिक रिकॉर्ड रहित) की शिकायत पर उसको टर्मिनेट कर दिया जाएगा अथवा भार-साधक अधिकारी के खिलाफ विशेष जांच बैठा दी जाएगी या उसको टर्मिनेट कर दिया जाएग इसलिए वह ऊपर के अधिकारियों का आदेश का इंतजार करता रहता है🙏 और जन आक्रोश उबलने पर उच्च अधिकारी मंत्री के आदेश का इंतजार करता रहता है😂


4. संविधान में निर्देशित है परंतु अधिनियम और प्रक्रिया विधि में में शून्यता होने के कारण थाना अध्यक्ष अधिकार और कर्तव्य से मुक्त है वह विफलता के दंड से भी मुक्त है 🙏


5. पुलिस विभाग के खिलाफ आम जनता की शिकायत पर कुछ नहीं होता है केवल अधिकारी की इच्छा पर होता है चाहे वह ट्रांसफर करें या ना करें 🙏 इन सभी अधिनियमों और प्रक्रिया विधि में सुधार कराने की आवश्यकता है🙏


6. नेतागिरी इस पर राजनीति करेगी परंतु सुधार करने या कराने का कोई काम नहीं करेगी, सुधार करने की उसमें योग्यता भी नहीं है, जैसी आजादी के समय हमारे प्रतिनिधियों में होती थी, सभी जन प्रतिनिधि (मंत्री) अपने PA पर निर्भर हैं और अधिकांश PA सरकारी अधिकारी होते हैं इसलिए वह कानून अपने पक्ष में ही बनाते हैं, भारतीय संविधान के अनुसार जनता को कोई अधिकार नहीं देते है, बल्कि भारतीय संविधान के खिलाफ जाकर सारे अधिकार अपने पास ही सुरक्षित रखते हैं🙏


7. उदाहरण के तौर पर बात करें तो सूचना का अधिकार अधिनियम भी जनता का अधिकार नहीं है, आयोग के अध्यक्ष का अधिकार है वह चाहे तो दंड लगाए अथवा ना लगाये 🙏 सूचना अधिकार अधिनियम के अनुसार सूचना आयोग का अध्यक्ष आम जनता अथवा अपीलार्थी का एग्जीक्यूटिव नहीं होता है, स्वयंभू होता है🙏भले ही अपीलार्थी विधि विद्यालय का चांसलर हो अथवा कोई अधिवक्ता🙏 क्योंकि सूचना अधिकार अधिनियम में अधिवक्ता के लिए कोई स्थान ही नहीं है, ना हीं माननीय सूचना आयोग में उसको विद्वान अधिवक्ता माना जाता है जैसा कि न्यायपालिका में माना जाता है🙏


7. जहां तक अधिवक्ताओं का सवाल है, तो जाके कबहूँ ना फटी विमाही वह क्या जाने पीर पराई 🙏दलित अधिवक्ताओं को दलित समाज सपोर्ट ही नहीं करता है तो वह दलित समाज विरोधी अधिनियमों में सुधार कैसे कराएं 🙏


8. आपके पास कलम की ताकत है आप अच्छा लिख सकते हैं, अपने विचारों को जन-जन तक पहुंचा सकते हैं🙏 मेरे पास कुछ अधिक करने की ताकत है परंतु उस पर सरकारी फीस लगती है 🙏 दो पिटीशन माननीय सर्वोच्च न्यायालय में पेंडिंग है जिन पर 4000 का खर्च आना है 🙏 पिटीशन न्यायालय में पहुंचा दी है परंतु फीस के कारण आगे का प्रोसेस रुका हुआ है 🙏 जब कहीं से फीस आ जाएगी तब सोचेंगे, टाइम वार्ड हो जाएगी, तो अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ेगा🙏


9. आप समाज के हित में जितना लिखते हैं उससे ज्यादा गोदी मीडिया अपना मनुवादी ज्ञान दे देता है और अपने ही ज्ञान को सही सिद्ध कर देता है इसलिए आपके लेख का जनता पर कितना प्रभाव पड़ेगा और वह कब जन आंदोलन में बदलेगा यह दूसरा विषय है 🙏


10. आपके द्वारा भेजे गए लेख, या अखबार की अन्य कटिंग पर हम कुछ भी कर पाने में सक्षम नहीं है🙏 जिस प्रकार अन्य समाज के लोग करते हैं उनके समाज के खिलाफ अगर कोई कार्रवाई होती है किसी भी स्तर पर तो वह तत्काल न्यायालय में पिटीशन डाल देते हैं परंतु हमारे पास आर्थिक सामर्थ नहीं है इसलिए हम क्षमा प्रार्थी हैं 🙏


11. संविधान नागरिकों को सुरक्षा की गारंटी देता है, परंतु नागरिकों की सुरक्षा पुलिस का कर्तव्य है यह किसी भी अधिनियम और प्रक्रिया विधि में अभी तक अंकित नहीं किया गया कि नागरिक सुरक्षा नागरिक का अधिकार है और पुलिस प्रशासन नागरिक को जवाब देय है 🙏


12. कृपया ध्यान दें, नागरिक के प्रति जवाब देय और नागरिक को जवाब देय में भाषा का बहुत बड़ा अंतर है, नागरिक के प्रति जवाब देय में बिचौलिए की आवश्यकता है, वह कोई भी उच्च अधिकारी, आयोग अथवा न्यायालय पालिका हो सकती है 🙏 जबकि नागरिक को जवाब देय में किसी बिचौलिए की आवश्यकता नहीं है अभी तक कोई भी ऐसा कानून नहीं बना है 🙏


13. भारतीय संविधान के अनुसार अभी बहुत काम किया जाना बाकी है, परंतु मोदी सरकार भारतीय संविधान को बदलकर राजतंत्र लाने की जुगाड़ में है ताकि वह 5 किलो राशन देने से भी मुक्त हो जाए🙏


14. अखबार की कटिंग के माध्यम से जिस ओर आपने मेरा ध्यान आकर्षित किया है उस संदर्भ में कह दूं कि मायावती का एक बड़ा काफिला मथुरा जाते हुए दिखाई तो दिया परंतु कोई प्रेस विज्ञप्ति नहीं आई कि इस विफलता के लिए बीएसपी ने किसी अधिकारी को दोषी माना है 🙏 अथवा उस क्षेत्र विशेष में नागरिकों की संविधान विरोधी सोच के लिए समाज में सुधार न हो पाने के लिए किसको जिम्मेदार माना है संबंधित गांव के प्रधान या वार्ड मेंबर को दोषी माना है 🙏या इस संविधान विरोधी कार्य के लिए किसको दंडित किया जाये, बहुजन समाज पार्टी की तरफ से इस प्रकार की कोई भी प्रेस विज्ञप्ति नहीं आई है 🙏


15. जब तक मायावती के काफिले में मनुवादी लोग चलते रहेंगे कोई सही प्रेस विज्ञप्ति नहीं आएगी, बहुजन समाज पार्टी को मनुवादी लोगों से मुक्त करने की आवश्यकता है मनुवादी विचारधारा से मुक्त करने की आवश्यकता है, मायावती के सोशल इंजीनियरिंग का दुष्परिणाम यह है कि आज समाज लगातार गर्त में जा रहा है🙏


16. मैंने भी आपकी तरह एक विचार लेख लिख दिया है, सर्वोच्च न्यायालय में संबंधित को बुलाने के लिए पिटीशन डालने की आवश्यकता है उसका कौन खर्च कौन उठाएगा?🙏 गैर संवैधानिक सोच के लिए उस क्षेत्र में आजाद भारत के संविधान की मूल भावना की शिक्षा का प्रोग्राम चलाया जाने की अति आवश्यकता है उसके लिए किस अधिकारी को नियुक्त किया जाएगा और उस पर फंड कौन देगा आदि विषयों को न्यायालय में प्रश्न गत किया जा सकता है, क्योंकि पुलिसिया न्याय हर समस्या का समाधान नहीं है


17. मनुवाद की सोच को मनुवादी मानसिकता के व्यक्तियों के दिमाग से बाहर निकालने के लिए आजाद भारत में कोई भी सांस्कृतिक प्रोग्राम नहीं चलाया गया है यहां तक कि पिछड़े वर्ग के लोगों को 40 साल तक शिक्षा का अधिकार ही नहीं दिया गया इसलिए वह मनुवादी मानसिकता से अभी तक मुक्त नहीं हो पाए हैं, कुछ सुशिक्षित पिछड़े वर्ग के लोग इस संविधान विरोधी मानसिकता का विरोध करने लगे हैं, परंतु से राष्ट्रीय नीति बनाए जाने की आवश्यकता है क्योंकि आरएसएस की मानसिकता के लोग विरोधी कार्य कर रहे हैं, उनके निशाने पर मुस्लिम और दलित हैं 🙏अस्तु मैं अपने लेख को विराम देता हूं 🇮🇳


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

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