[02/03, 11:54 am] kamleshmittra: महोदय,
क्यों घिसी-पिटी बातों पर चर्चा कर रहे हो👏 बंटवारे में चार पैसे का हेर फेर हो जाए तो अपने भाई की हत्या कर देते हो, यहां तो वोट की लूट करके सारी संपत्ति कुछ लोगों को दी जा रही है🙏 और आप सब लोग मिलकर बिल्ली विलाप कर रहे हो 🙏
वोट की लूट 🙏
बैलट बॉक्स में भी होती रही है और EVM में भी हो रही है 🙏
चुनाव आयोग महकमें की निष्पक्षता जरूरी है, और सशक्तता जरूरी है, चुनाव आयुक्त को सशक्त बनाने की आवश्यकता है, चुनाव आयुक्त सहायक चुनाव आयुक्त और उपायुक्त को लगना चाहिए की जनता हमारी रक्षा के लिए खड़ी होगी, तो चुनाव आयोग भी हमारे वोट की रक्षा करेगा🙏
अधिकार की रक्षा के लिए नकारात्मक तत्व 👹
1. सत्ता पर बैठे किसी भी, मंत्री सांसद आदि को विधानसभा में हस्तक्षेप के अधिकार को रोका जाना चाहिए, यह चुनाव को प्रभावित करने वाला तत्व होता है, अधिकारियों को आसानी से प्रभावित करता हैं🙏 जो सांसद या विधायक चुन लिया गया है, वह आम जनता के चुन्नी के अधिकार में क्यों हस्तक्षेप कर रहा है, आम जनता को अपने विवेक से कम क्यों नहीं करने दे रहा है 🙏
2. सभी चुने हुए सांसदो और विधायको दूसरे क्षेत्र के प्रत्याशियों के चुनाव में प्रचार करना वर्जित होना चाहिए, यह आम जनता को प्रभावित करने वाला तत्व है जिससे आम जनता के वोट के अधिकार का हनन होता है🙏
3. इसके ठीक विपरीत लोकसभा के चुनाव में विधानसभाओं के मंत्रियों और विधायकों को हस्तक्षेप की अनुमति ना हो ताकि लोकसभा का चुनाव निष्पक्ष रूप से हो सकेगा 🙏
4. चुनाव की मर्यादाओं का पर काम करना होगा, यह सामाजिक संगठनों के जिम्मेवारी है कि अपने और अपने समाज के वोट की रक्षा करें🙏
5. कोई भी राजनीतिक पार्टी ऐसा नहीं करना चाहेंगे जिसका कोई भी मंत्री या विधायक, सांसद या विधायक चुने हुए हैं, यह काम तो आम जनता और आम जनता के सामाजिक संगठनों को करना होगा🙏
6. व्यापारी जगत से मोटी मलाई लूटने वाले आम जनता के अधिकारों के लिए ना तो कोई नीति बनाएंगे, ना हीं उसको बनने देंगे, ना आम जनता का मूल वेतन समान करेंगे, जो कि उनको मात्रा मनुष्य होने के कारण समानता के आधार पर मिलना चाहिए 🙏
7. आजकल तो इसके आगे की कहानी चल रही है, दूसरे का वोट कटवाओ और अपने समर्थकों का वोट जोड़ो, जो किसी राजनीतिक पार्टी से सीधा नहीं जुड़ा है उसका वोट कब काट दिया जाएगा उसको पता ही नहीं लगता है 🙏
8. वोट को जोड़ना और कटवाना इतना सरल क्यों है 🙏 चुनाव आयोग इस प्रकार की नीति किसके इशारे पर लाया है 🙏 गलत तरह से वोट काटने के बाद, संबंधित जाँच अधिकारी टर्मिनेट क्यों नहीं होता है 🙏 उसका टर्मिनेशन के नियमावली कहां है 👹
9. तीन राज्यों में तो यह स्पष्ट रूप से खुलकर आ गया, दिल्ली हरियाणा और महाराष्ट्र🙏 अब तो चुनाव आयोग की समिति पर एक्शन लेने की आवश्यकता है, चुनाव आयोग आम जनता को वोटर लिस्ट देने से क्या इनकार करेगा, अपने क्षेत्र की लिस्ट कोई भी व्यक्ति मांग सकता है🙏 यह उसका मूल अधिकार है, गोपनीयता अधिनियम 1923 का उल्लंघन नहीं होता है क्योंकि एक वोट बराबर एक वोट, अगर एक गलत वोट पड़ता है तो उसे हमारा वोट प्रभावित होता है 🙏 हमारा वोट शून्य हो जाता है, इसलिए हमें अपनी वोट की रक्षा के लिए अपने क्षेत्र के हर मतदाता का पता होना आवश्यक है 👹
10. किसी राजनीतिक दल ने इसका विरोध नहीं किया, चुनाव आयोग के आगे कोई धरना प्रदर्शन नहीं कर रहा है, क्योंकि कोई भी राजनीतिक तक सीधे आम जनता से नहीं जुड़ा है इसलिए राजनीतिक दलों को अपनी वास्तविक शक्ति का पता भी नहीं है, वह आम जनता से सीधे ना जुड़कर, गठबंधन की राजनीति कर रहे हैं तो उन्हें अपनी शक्ति का पता कहां से होगा🙏
11. चुनाव आयोग पर इस प्रकार की कोई बाध्यता नहीं है कि क्षेत्र विशेष में जोड़े जाने वाले अथवा काटे जाने वाले नाम की लिस्ट उसे क्षेत्र के सक्रिय राजनीतिक दलों को दें 🙏
12. वोट का अधिकार आम जनता को मिला है तो उसकी रक्षा के लिए आम जनता को ही सोचा होगा, यदि आम जनता उस पर नहीं सोचेगी तो वोट आम जनता का मलाई व्यापारी जगत के लोग राजनीतिक पार्टियों खाती रहेंगी 🙏
13. यदि आपके वोट की लूट राजनीतिक दलों द्वारा होती है तो उसके लिए खूनी क्रांति भी करनी पड़े तो करनी चाहिए🙏
14. आज से 500 साल पहले ब्रिटेन की आम जनता ने अपने निरंकुश राजा को राजमहल में घुसकर फांसी पर लटका दिया था, उस जागरूक जनता ने पूरे विश्व पर राज किया🙏
15. यहां तो केवल कुछ चुनाव आयुक्त / उपचुनाव आयुक्त / सहायक चुनाव आयुक्त को फांसी पर लटकाना है, जो शिकायत करने के बाद भी आम जनता के वोट की रक्षा नहीं करते, उनको चुनाव आयुक्त के कार्यालय में घुसकर दंड देने की आवश्यकता है 🙏 जो सत्ता के साथ मिलकर आम जनता के वोट की लूट में शामिल है 🙏
16. जब शासन निरंकुश हो जाए, न्यायपालिका वेश्या हो जाए, चुनाव आयोग गुलाम हो जाए, तो क्रांति जरूरी हो जाती है🙏
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064
[02/03, 7:10 pm] kamleshmittra-SCI: श्रीमान डीके जी,
(+91 95489 04127)
आप काफी लंबे समय से एक ही बात दोहराते हैं, आपकी जानकारी में डाल दूं मैं बीएसपी का पदाधिकारी नहीं हूं 🙏और ना ही बीएसपी पार्टी से मेरा सीधा संबंध है इसलिए आपकी भावना को अग्रसारित भी नहीं सकता हूं 🙏 वैसे भी मायावती अपने समाज की सुनती कहां है 🙏 अगर मायावती अपने समाज की सुनती होती तो काफी समय पहले चंद्रशेखर की मायावती से मुलाकात हो जाती🙏
1. समाज को तो समाज के बीच काम करने वाला व्यक्ति चाहिए, जब से बीएसपी ब्राह्मण समाज पार्टी हुई है समाज के बीच काम करने वाला कोई नहीं है, चंद्रशेखर जी समाज के बीच कम कर रहे हैं, समाज उनको पसंद भी करने लगा है🙏परंतु समान्य मतदाता के लिए दिक्कत है कि वह वोट किसको दे 🙏और दोनों पार्टियों के ₹2 वाले कार्यकर्ता, अनावश्यक रूप से अपने ही समाज के दलित वोटर को गालियां देते हैं🙏 परिणाम स्वरुप दलित समाज ना तो बहुजन समाज पार्टी को वोट दे रहा है और ना ही आजाद समाज पार्टी को दे रहा है 🙏बल्कि वह भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस या समाजवादी पार्टी को अपना वोट दे दे रहा है 🙏
इसी को कहा जाता है बंदरों की लड़ाई में बिल्ली की किस्मत चमकी 🙏
2. हमारे ग्रुप में लगभग हर पोस्ट पर आप एक ही तरह के कमेंट करते हैं, "परिवारवाद बुरा है" हम आपकी समस्या का समाधान करने में सक्षम नहीं है 👏
3. जिनका परिवारवाद चल जाता है उनके लिए अच्छा है, जिनका नहीं चल पता उनके लिए बुरा है🙏 जो परिवारवाद चलाकर सफल है, दूसरों के लिए प्रेरणा स्रोत है 😂 इसलिए दूसरे भी हाथ पैर मार रहे हैं🙏
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064
[02/03, 9:19 pm] kamleshmittra-SCI: श्रीमान डीके जी
(+91 95489 04127)
आपकी बांकी बातें ठीक है, परंतु बीजेपी को वोट देने के विषय पर मेरी पृथक राय है 🙏
1. बीजेपी का गैर-परिवारवाद एक धोखा है 🙏 बीजेपी में सवर्ण सुरक्षित सीटों पर पूरी तरह से परिवारवाद है 🙏 केवल दलित आरक्षित सीटों पर परिवारवाद नहीं है 🙏 स्विंग सीटों पर भी परिवारवाद नहीं है 😂 उदाहरण के तौर पर कहूं तो लखीमपुर सीट का मामला ही ले लीजिए, अथवा अनुराग ठाकुर का मामला ले लीजिए, पूर्वी दिल्ली में दंगा करने के बाद भी उसको मंत्री बनाए रखा गया, क्योंकि उसके परिवार की पकड़ थी, आदि मामले 🙏
2. भले ही भाजपा पर एक परिवार का अधिकार न हो, परंतु एक विचारधारा का अधिकार जरूर है जो कि दलित समाज के विरोध में है 🙏 दलित समाज के वोटर को बरगलाने के लिए दलित समाज के जिन नेताओं का प्रयोग बीजेपी कर रही है, वह केवल अपनी रोटी सेंक रहे हैं, समाज की दलाली करके दलित वोटर को बेच रहे हैं 🙏
3. उससे समाज का कोई भला नहीं होगा 🙏 उदाहरण के तौर पर का कहूँ - आज से 10 साल पहले संगम में मोदी ने सफाई कर्मियों के पैर धूल थे, परंतु देश में सफाई कर्मियों की ना तो सामाजिक स्थिति सुधरी है और ना ही आर्थिक स्थिति सुधरी है 🙏
4. बीजेपी हमारे लिए आदर्श पार्टी नहीं है, हमें उसका अनुसरण नहीं करना चाहिए, जहां तक कांग्रेस का सवाल है पिछले 70 सालों का इतिहास है, वह चम्मच से दलित समाज को पानी पिलाती रही है🙏
5. जहां तक अखिलेश की बात है, वो भी सीधे मुख्यमंत्री बने थे, और परिवारवाद से ग्रस्त थे, धीरे-धीरे उन में मैच्योरिटी आ रही है, मायावती के परिवारवाद के लिए प्रेरक व्यक्ति हैं 🙏
6. परंतु मेरा संघर्ष समाज की ओर है, बाबा साहब ने जब रानियां की नसबंदी कर दी है, तो राजा रानी के पेट से नहीं आना चाहिए 🙏 जो समाज के बीच रहकर संघर्ष करेगा, जनता के हक और हुकुब की बात करेगा, आर्थिक समानता के लिए समता के मार्ग पर चलेगा🙏 मूल वेतन के समान होने की वकालत करेगा🙏मेरे लिए वही आदर्श व्यक्ति है, क्योंकि बाबा साहब ने भारतीय संविधान में समानता की बात की है जिसका मार्ग समतावाद है🙏
दलित समाज को किसी रानी के बच्चे को मुकुट पहनाने के लिए बालिक होने का इंतजार नहीं करना चाहिए🙏 बल्कि जो जमीन पर काम करता नजर आए, उसको बौद्धिक और आर्थिक सहयोग करते हुए आगे बढ़ा देना चाहिए🙏
अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्र @9335122064
No comments:
Post a Comment