Sunday, 29 December 2024

वीरेंद्र जी की पोस्ट का जवाब मनमोहन के संबंध में

 प्रिय मित्र वीरेंद्र जी 


महोदय,


स्वर्गीय मनमोहन सिंह की तारीफ के इतने पुल भी ना बांधे कि मेरा अतीत उन घटनाओं को याद करने लगे जो हमारे समाज के लिए विष बनी हुई है 😂😂😂


जब अपने जख्मों को हरा कर ही दिया है तो सुनते जाइए 🙏 मनमोहन के 10 कामों की चर्चा करते हैं.....


1. (1) नई आर्थिक / औद्योगिक नीति 1991, इस नीति से दलितों का क्या फायदा हुआ? एससी एसटी ओबीसी के कितने उद्योग खुले? कितने लोग उद्योगपति बने ? सरकारी सेक्टर के हो रहे निजीकरण में एससी एसटी ओबीसी का कितना रिजर्वेशन बढ़ा 🙏 श्रमिकों के कितने वेतन की वृद्धि हुई 😭 

1. (2) भारत जैसे सामंतवादी देश में आर्थिक समानता को स्थापित किए बिना नई औद्योगिक नीति का क्या औचित्य था 🙏 भारतीय जनता पार्टी दलितों के शोषण की जो मीनार खड़ी कर रही है उसके जन्मदाता मनमोहन सिंह हैं 🙏 दलितों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद, दलितों का डॉक्टर इंजीनियर बनना बंद, दलित के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे बंद🙏 दलितों के लिए उच्च वेतन के दरवाजे बंद🙏 दलितों के लिए उच्च पदों पर जाना बंद 🙏 दलितों की सेविंग पर डकैती 🙏आदि 

2. (1) सूचना का अधिकार अधिनियम, कल भी सरकारी अधिकारियों की दया पर था आज भी सरकारी अधिकारियों की दया पर है 🙏 

2. (2) सूचना में लगाया गया दंड पीड़ित को नहीं मिलता है 🙏 सूचना में लगाया गया दंड की वसूली नहीं होती है, 30 दिन के बाद सूचना देने पर किसी भी अधिकारी की उसकी सेवा पुस्तिका में एडवर्स एंट्री नहीं होती है 🙏 किसी भी सूचना आयोग की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ लेवें 🙏 सूचना का अधिकार अधिनियम व्यक्ति के आवेदन/ प्रतिवेदन पर नहीं है, बल्कि प्रतिवेदन के संदर्भ में अतिरिक्त आवेदन करके शुल्क जमा करके अपने प्रतिवेदन के संबंध में ही सूचना प्राप्त करनी पड़ती है जोकि संविधान द्वारा प्रदत्त सूचना के मूल अधिकार की हत्या है🙏

2. (3) प्रथम अपीलीय अधिकारी अपने विभाग के अधिकारियों का संरक्षण करता है, ना की सूचना के अधिकार अधिनियम का, ना कि सूचना की मांग करने वाले व्यक्ति का, वरिष्ठ अधिकारी सूचना न देने के नियम को और जटिल बनता है, नई सूचनायें और अधिसूचनाएं नियमवली विभाग में जारी करता है, ताकि सूचना न देना पड़े, और उसके विभाग का विभागीय शोषण और आर्थिक भ्रष्टाचार खुल न जाए 🙏 अपवादों को छोड़ दिया जाए, तो माननीय राज्य/ राष्ट्रीय सूचना आयोग किसी केस का निस्तारण कब, कितने दिनों में, बरसों में करेगा यह कोई निश्चित समय सीमा में नहीं होता है🙏 आदि मूर्खताओं से भरा हुआ है, सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 🙏

3. (1) रोजगार गारंटी 100 दिन के बाद क्या? रोजगार गारंटी के भ्रष्टाचार से निपटने की कोई स्पष्ट रूपरेखा नहीं है, प्रधानों, ग्राम विकास अधिकारी की लूट से निपटने के लिए कोई दंड विधि नहीं है🙏 मानव मनोविज्ञान को समझे बिना बनाई गई यह नीति है 🙏

3. (2) रोजगार गारंटी open for all हो सकती थी, अर्थात काम कहीं भी करो आपके मासिक वेतन का हिसाब किताब सरकार रखें, कोई निजी क्षेत्र का मालिक आपके वेतन का शोषण नहीं करेगा, ठेकेदार सरकार को होना चाहिए था🙏 निजी क्षेत्र के ठेकेदार बनाकर मनमोहन सरकार ने श्रमिकों का आर्थिक शोषण कराया है आदि बातें 😭

4. (1) न्यूक्लियर डील का परिणाम सिर्फ एटम बम बनाने के लिए हुआ, ऐसा भी नहीं कह सकते, क्योंकि अटल तो पहले ही परमाणु बम का विस्फोट कर चुके थे🙏 बिजली बनाने के लिए हुआ ऐसा भी नहीं कह सकते, फिर न्यूक्लियर डील से फायदा किसको हुआ? निश्चय ही फायदा अमेरिका को दिया गया, हमारे रुपए का अवमूल्यन हुआ 🙏

4. (2) जब भारत में सभी माल इंपोर्टेड आ रहे हैं, भारत में जब उतरन ही बिक रहा है, और पहना जा रहा है, यहां का कॉटन उद्योग पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया है, तो इस न्यूक्लियर डील से उत्पन्न हुई ऊर्जा का उपयोग किसके लिए किया जा रहा है, बहुत सी बातें अंदर-खाने की है, न्यूक्लियर डील सिर्फ दरवाजे पर हाथी बांधने जैसा है, यह दिखाने का प्रयास है कि अमेरिका का मेरे ऊपर कोई प्रतिबंध नहीं है, हम रूस से भी दुई पक्षीय समझौते के अंतर्गत प्राप्त कर सकते थे परंतु मनमोहन को अमेरिका का चरण चुंबन करना था 🙏 आज जोर इलेक्ट्रिक व्हीकल पर जोर दिया जा रहा है सोलर पैनल पर जोर दिया जा रहा है यह काम तो उसे समय भी किया जा सकता था 🙏 आदि बातें 

5. आधार कार्ड एक अधूरा कार्ड है 🙏 बेनामी संपत्ति के संबंध में कुछ नहीं कहता, केवल गरीबों का हिसाब किताब रखता है रईसों का कोई हिसाब किताब नहीं रखता है, गरीबों पर नकेल कसने का कार्ड है 😭 इसकी खामियों की अलग से विस्तृत चर्चा करेंगे क्योंकि इस पर दो कोर्ट केस माननीय सर्वोच्च न्यायालय में हो चुके हैं🙏

6. शिक्षा का अधिकार 2005 - मात्र साक्षरता का अधिकार बनकर रह गया है 🙏 अगर शिक्षा का अधिकार है तो इतने कोचिंग सेंटर क्यों खुलते जा रहे हैं, प्राइमरी स्तर पर भी कोचिंग सेंटर खुलते जा रहे हैं, क्रेज़ी स्तर पर भी कोचिंग सेंटर खुलते जा रहे हैं 🙏 अधूरे मन से क्रीमी लेयर द्वारा बनवाया गया यह कानून है 🙏 मैं खुद 14 साल इंजीनियरिंग कॉलेज का टीचर रहा है इस पर पड़ी विस्तृत चर्चा कर सकता हूं, किसी स्वतंत्र लेख में चर्चा करूंगा... 🙏

7. खाद्य सुरक्षा अधिनियम... इस कोठी का धान उस कोठी में करने के अतिरिक्त कुछ नहीं है 🙏 किसान अपना अनाज मंडी में जाकर बेंच देते हैं, और राशन की दुकान से ₹2 में वापस ले लेते हैं😂 सरकार पर ट्रांसपोर्टेशन और स्टोर का खर्चा अलग से बढ़ जाता है 😂 सड़कों को अनावश्यक रूप से चौड़ा करना पड़ता है😭 पूरी तरह मूर्खता से भरपूर यह खाद्य सुरक्षा अधिनियम है 🙏 मैं इसकी आवश्यकता को नहीं नकरता हूं, परंतु आधे अधूरे मन से क्रीमी लेयर के द्वारा बनाया गया यह अधिनियम है इस बात को कहने में मुझे कोई डर नहीं लग रहा है 🙏 यह मौनसिंह की अयोग्यता का परिणाम है 🙏

8. कुछ अन्य घोटालों की चर्चा कर लीजिए, कॉमनवेल्थ गेम घोटाला... जिसकी फाइलों का भी नहीं पता लगा, कोयला घोटाले की फाइलें कहां गई 😂 2G घोटाला और उसे समय तो एक और घोटाला गिना जाता था जिसे जीजा घोटाला कहते थे आदि 

9. माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करना काला धन के जांच के लिए कमेटी का गठन न करना, सब मनमोहन सरकार की बड़ी उपलब्धियां का ही अंग है 😂

10. और सबसे दुखद घटना 12 महीने में 10 घरेलु गैस सिलेंडर की नौटंकी... आदि बातें मन में अत्यंत पीड़ा उत्पन्न करती है 😂


कांग्रेस हटाओ अभियान के पूर्व सक्रिय कार्यकर्ता अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064




 वीरेंद्र जी के प्रश्न 🔹 *शख्सियत*


दुनिया के जाने माने अर्थशास्त्री एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह का निधन एक भारत के लिए एक बड़ा आघात है. भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और एवं राष्ट्रीय नेताओं ने उनके निधन पर श्रद्धांजलि अर्पित की है. पूर्व प्रधानमंत्री ने 10 वर्ष के कार्यकाल में ऐतिहासिक कार्य किए जिनमें में "मनरेगा " योजना लागू करना था जिसके तहत 100 दिन का जॉब की गारंटी थी." भोजन की गारंटी " एक और ऐतिहासिक कार्य था जिसके तहत गरीबों को खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाता है. सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री ने "सूचना के अधिकार " का ऐतिहासिक अधिकार जनता को दिया था. उनके कार्यकाल में भारत ने अमेरिका के साथ असाइनमेंट परमाणु समझौता भारत के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ है. केंद्र सरकार ने डॉ मनमोहन सिंह के निधन पर 7 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया है. उनके कार्यकाल में भारत ने अमेरिका के साथ असाइनमेंट परमाणु समझौता भारत के लिए मिल का पत्थर साबित हुआ है. डॉ मनमोहन सिंह हम सभी भारतीयों के लिए प्रेरणा स्रोत रहेंगे और उनके महान योगदान को कृतज्ञता पूर्वक याद किया जाता रहेगा.

वीरेंद्र कुमार जाटव, *राजनीतिक विश्लेषक एवं राष्ट्रीय सचेतक ,समता सैनिक दल*

शुक्ला जी की पहली और दूसरी पोस्ट का जवाब

 श्रीमन शुक्ला जी,


हर वर्ग और शब्द का विश्लेषण आप अपने चश्मे से कर रहे हैं 😂


देशभक्ति का विश्लेषण भी आप अपने चश्मे से कर रहे हैं 🙏


भूखे व्यक्ति की देशभक्ति

और पेट भरे व्यक्ति की देशभक्ति में कुछ तो अंतर है😂😂😂


आतंकवादी भी देशभक्त होते हैं 🙏और आतंकवाद विरोधी भी देशभक्त होते हैं🙏


एक ही भूभाग पर दोनों के देशभक्त होने की अवधारणा अलग-अलग होती है 🙏


मनमोहन का देशभक्त होना पूंजीवाद के पक्ष में था इसलिए पूंजीवादी लोग की नजर में मनमोहन सिंह देशभक्त हो सकते हैं 😂


अंतर्राष्ट्रीय श्रम नीतियों को भारत में आज तक लागू नहीं किया गया है, भारत में श्रमिकों का शोषण चरम पर है 🙏


भारत की देखा देखी अन्य देश भी अपने श्रमिकों का शोषण करने लगे हैं 🙏


 WTO के अंतर्गत बनाई श्रमिक नीतियां आज तक धरातल पर नहीं आयी 🙏 इसके लिए उत्तरदाई तो मनमोहन सिंह ही हैं 🙏


और सबसे जवालंत उदाहरण दे दूं🙏 भारतीय दूतावास, अमेरिका में अपने श्रमिक का शोषण करते हुए एक भारतीय IFS अधिकारी पकड़ा गया था, अमेरिका के श्रम संगठनों ने इसका जबरदस्त विरोध किया, उसके अमेरिका में जेल जाने की नौबत आ गई परंतु भारत सरकार ने तत्काल उसे भारत बुला लिया, ना तो अमेरिका में उस पर मुकदमा चल पाया ना भारत में चलाया गया😭


 इन सब नीतियों के लिए और श्रमिकों का शोषण करने के लिए मनमोहन सिंह ही जिम्मेदार है 🙏 कुछ और जानकारी चाहिए हो तो बता देना😂 एक-एक परते खोल कर रख दूंगा कि मनमोहन सिंह किसके लिए देशभक्त थे 🙏


आजादी बचाओ आंदोलन के पूर्व सक्रिय कार्यकर्ता अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064




शुक्ला जी, 


कांग्रेस परिवार 2


 ग्रुप के नाम से कुछ स्पष्ट नहीं होता है कि यह (भक्तो)समर्थक, विरोधी या आलोचक का गुरूप 🙏


आपका ग्रुप एडमिन फ्री है मुझे अपने ग्रुप से अलग करने के लिये 🙏परन्तु मैं वह कहूंगा जो सत्य है🙏


1. देश के पास 15 दिन का खर्च बचा था, बड़ी जटिल समस्या थी 😂


2. सभी सांसदों और प्रशासनिक अधिकारियों को दो महीने तक वेतन नहीं लेना चाहिए था 😂 राष्ट्रभक्ति होने का परिचय देना चाहिए था😂 तो ढाई महीने का खर्च हो जाता परंतु किसी ने ऐसा नहीं किया 🙏


3. सरकार का खर्च चलाने के लिए 15 दिन का पैसा बचा था अर्थात शैर-सपाटा🙏 फिलहाल 2 महीने तक का वेतन राष्ट्र को समर्पित किया जा सकता था 🙏


4. यदि ऐसा किया गया होता तो भारतीय मुद्रा का 30% अवमूल्यन ना होता 🙏 भारतीय श्रमिकों के श्रम की वैल्यू 30% ना घटती, भारतीय खनिज संपदा का मूल 30% ना घटता, भारतीय कृषि उत्पादों का मूल्य 30% ना घटता 😂


5. शुक्ला जी मैं कुछ गलत कह रहा हूं😂 भारतीय श्रमिकों के श्रम मूल्य को 30% घटाया गया और आप उनको अच्छा वित्त मंत्री कह रहे हैं 🙏


6. विश्व बैंक की किताबों से जो उन्होंने पढ़ा था उसी को लागू कर दिया🙏 विश्व बैंक, IMF, अमेरिका को लाभ देने के लिए कार्य करने वाली संस्थाएं है उसी के निर्देशों पर उन्होंने काम किया, भारत के कल्याण के लिए कोई नया अविष्कार तो नहीं किया था🙏 जैसा कभी बाबा साहब ने किया था, और लंदन की अर्थव्यवस्था को चुनौती दे दी थी 🙏 मनमोहन के कार्य में मुझे ऐसी कोई झलक दिखाई नहीं देती है 🙏


7. उसके बाद लगातार भारतीय रुपए का अवमूल्यन होता रहा जिसे रोकने के लिए मनमोहन सिंह ने कोई भी ठोस उपाय नहीं किया 🙏


8. देश की अर्थव्यवस्था को पांचवें नंबर पर लाना, क्या बहुत बड़ी उपलब्धि है जिसकी आबादी विश्व में द्वितीय स्थान पर हो 🙏 सभी देश भारत में बाजार की तलाश में है, अर्थात भारत से रुपया कमाना चाहते हो🙏


9. और आप भारत की गरीबी का रोना रो रहे है क्योंकि मनमोहन सिंह ने उन्ही आर्थिक नीतियों को भारत में लागू किया जो अमेरिका सहित यूरोपीय देशों के लिए कल्याणकारी थी 🙏



10. मुझे लगता है आपने भी भारतीय अर्थव्यवस्था को अंग्रेजी किताबों से पढ़ा 😂 इसीलिए मनमोहन की अर्थव्यवस्था आपको हरी हरी दिखाई देती है 🙏


11. यदि गरीब की झोपड़ी से निकलने वाली पुस्तकों से, चूल्हे से निकलते हुए धुएं को आपने पढ़ा होता तो, चार बच्चों की मम्मी के अर्थशास्त्र को आपने पढ़ा होता तो नया आविष्कार हो जाता 🙏


12. किसी संप्रभु राष्ट्र की अर्थव्यवस्था उसके देश की जरूरत के अनुसार होनी चाहिए ना कि किसी पराश्रित देश की अर्थव्यवस्था द्वारा थोपी गई अर्थव्यवस्था पर🙏


13. आज भारत रूस से तेल खरीद रहा है, क्या जरूरत थी कि उस समय भारत डॉलर में तेल अरब देश से खरीदता 🙏 मनमोहन सरकार का झुकाव अमेरिका के प्रति ज्यादा रहा है 🙏


14. मैं यह नहीं कहता कि चंद्रशेखर की सरकार बहुत अच्छी थी😭 संपूर्ण विश्लेषण करने के बाद मैं इतना ही कह सकता हूं मूर्ख में से हमने कम मूर्ख को चुना था परंतु उन्हें अकलमंद अर्थशास्त्री अथवा प्रधानमंत्री मैं कदापि नहीं कहूंगा 🙏


15. 10 साल में मनमोहन सिंह का ध्यान भारतीय संविधान की उद्देशिका में स्थापित आर्थिक समानता की नीति की तरफ कभी नहीं गया है 🙏 इसलिए मैं मनमोहन सिंह को राष्ट्रभक्ति प्रधानमंत्री तो कभी नहीं कह सकता हूँ 🙏


16. वह अमेरिका भक्त और लंदन भक्त प्रधानमंत्री जरूर हो सकता है जैसा कि वहां की संसद में उन्हेंने तारीफ की कसीदे पढ़ी थी, और देश की अर्थव्यवस्था को लूटाकर डॉक्टर की उपाधि हासिल की थी 😂


17. और कुछ सुना हो तो भी बता दीजिएगा,🙏 फिर मैं 1994 का प्रोफेसर बनवारी लाल शर्मा का लिटरेचर निकलता हूं, और 2014 तक मनमोहन सिंह के किए गए कार्यों की लिस्ट आपको सौंप दूंगा😂 जिसको भारत में अच्छा प्रधानमंत्री कहां जाता था उसे उसी समय फ्रांस में अमेरिका का पोपट कहा जाता था 😂


18. यदि अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ पर आपकी पकड़ रहती है तो आपको पता होगा 1994-95 में WTO पर हस्ताक्षर करने के बाद यह निश्चित हो गया था कि भारत का अगला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह होगा क्योंकि वह अमेरिकी नीतियों के अनुकूल था🙏


आजादी बचाओ आंदोलन के पूर्व सक्रिय कार्यकर्ता अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

21-29 दिसंबर 2024 की पोस्ट

 [21/12, 4:05 pm] kamleshmittra: 🙏सूचना दिनांक 21 दिसंबर 2024🌹


कई दिनों से एक सूचना देने पर विचार कर रहा हूं, दूं अथवा ना दूँ 🙏


इस बार 10 दिसंबर 2024 की फीडबैक सूचना भी मैंने नहीं दी थी 🙏


1. परंतु सूचनाओं को दबाए रखना भी पंचसील के अंतर्गत सील भंग माना जाता है, और गंभीर साधकों के शरीर में पीड़ा होने लगती है 🙏 गंभीर साधक मानसिक उथल-पुथल से गुजरता है🙏अब मैं इससे मुक्ति चाहता हूं, इसलिए सूचना देकर मुक्त हो जाना चाहता हूँ 🙏


2. जनवरी 2024 से मेरा तुगलकाबाद रविदास मंदिर प्रांगण में निमित्त रूप से आना जाना रहा है इस प्रकार 1 साल पूरा हो चुका है, और तथाकथित सरकारी समिति के महासचिव से एक ही प्रकार की बात सुनता रहा हूं, कि सरकार ने उनसे साढ़े चार करोड मांगे हैं वे गुरु रविदास जी से प्रार्थना करते हैं कि शीघ्र ही उनका मंदिर यहां बन जाए🙏


3. वह (श्री मंगतराम वाली और उनके सलाहकार) ना तो अपनी नियमावली दिखाना चाहते हैं, और ना ही किए गए पत्राचार को बताना/ दिखाना चाहते हैं🙏 ऐसी दशा में समाज के साथ लगातार धोखा कर रहे हैं 🙏 समाज के साथ ही नहीं वह संत शिरोमणि गुरु रविदास के साथ भी पिछले 5 साल से धोखा कर रहे हैं, इसमें अध्यक्ष श्री वीर सिंह हितकारी जी की समान भूमिका है🙏


4. सर्व विदित है कि विवादित परिस्थितियों में 9 जुलाई 2024 को मैंने संत श्री निरंजन दास जी को कुछ वादियों की सहमति से लीगल नोटिस भेजा था ताकि वह विधिक स्थिति को स्पष्ट करें कि वह सरकारी कमेटी के चेयरमेन है अथवा नहीं है🙏

5. साथ ही 105 मंदिर सहित 96 गुरु भाइयों और अन्य भक्तों को सरकारी कमेटी में सम्मिलित करने के संबंध में अपना रूख स्पष्ट करें परंतु 90 दिनों बाद भी उन्होंने विधिक स्थिति को स्पष्ट नहीं किया तो 4 नवंबर 2024 को भारत सरकार की हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री को द्वितीय समाधानकर्ता की भूमिका में पत्र लिखा गया कि वह मामले का निस्तारण करें 🙏 यह पत्र अभी तक पीएम पोर्टल के माध्यम से हाउसिंग मिनिस्ट्री में लंबित है 🙏 30 दिन से अधिक हो चुका है🙏


6. संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के प्रांगण का मुख्य गेट नियमित रूप से खुले इसके लिए एक पत्र DDA के वाइस चेयरमैन को लिखा गया था लंबी प्रक्रिया के बाद डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर ने बिना अथॉरिटी का उल्लेख किये कह दिया कि अथॉरिटी ने गेट खोलने से मना किया है 🙏


7. इसकी अपील पीएम पोर्टल के माध्यम से DDA के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट गवर्नर दिल्ली को 17 नवंबर 2024 को कर दी गई थी वह पत्र भी अभी तक लंबित है🙏


8. लीगल नोटिस जिन लोगों की प्रत्यक्ष सहमति से भेजा गया था और जिन्होंने वकालतनामा पर साइन किए थे, अपने परिचय दस्तावेज सबमिट किए थे 🙏 रिट पिटीशन का खर्च देने के संबंध में अभी तक अपना मानस नहीं बना सके हैं इसलिए रिट पिटीशन डालना संभव नहीं है🙏

9. अन्य किसी रिशोर्स से मुझे किसी प्रकार के धन की प्राप्ति नहीं हो पा रही है🙏 दलितों की आर्थिक दुर्दशा के संबंध में सन 2022 के दिसंबर में मैंने भारत सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था की आर्थिक अभाव में हमारे समाज की रिट पिटीशन नहीं पड़ पाती हैं, इसलिए न्याय की समुचित व्यवस्था की जाए 🙏

10. उस पत्र को सर्वोच्च न्यायालय के रजिस्ट्री ने हल्के में लिया परिणाम स्वरुप राष्ट्रीय सूचना आयोग के समक्ष 5 दिसंबर 2024 को उन्हें मुँह खानी पड़ी 🙏 

11. इस संदर्भ में मैंने आगे की लिखा पढ़ी कर दी है, भारत सरकार को भी 25 दिसंबर 2025 को तलब किया गया था 🙏 मेरे पास अपनी आय(जीविका) के बहुत ही लिमिटेड सोर्स है कहीं से कोई आर्थिक सहयोग प्राप्त नहीं हो रहा है 🙏 ऐसी दशा में समाज सेवा के विधिक कार्य को जारी रखना कठिन है🙏


12. दूसरी तरफ जून 2025 में मेरी AOR की परीक्षा है, मैं अपना पूरा ध्यान अपनी परीक्षा पर केंद्रित करने जा रहा हूं🙏 धन जुटाना के लिए किसी लॉ फॉर्म को ज्वाइन करने में असमर्थ हूं इसलिए तुगलकाबाद रविदास मंदिर प्रकरण से संबंधित गतिविधियों में हमारी सक्रिय भागीदारी ना के बराबर रहेगी 😭


13. अगर भारत सरकार से कोई नई सूचना प्राप्त होगी तो उसकी सूचना आपको दे दी जाएगी🙏

14. मेरे द्वारा शीघ्र ही अपलोड किए गए सात वीडियो को ध्यान से सुने 🙏 क्योंकि आपके समाज की रक्षा करने के लिए कोई और नहीं आएगा, यह सब हम और आपको मिलकर ही करना है 🙏


प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064



(यूट्यूब पर जाकर Kamlesh Mittra लिख देवें, मेरा चैनल मिल जाएगा, यह चैनल 2010 से चल रहा है जब मैं इंजीनियरिंग कॉलेज का टीचर हुआ करता था)


 🌹अब डॉक्टर अंबेडकर फिर से ना आएंगे 😂😂😂😂

[21/12, 11:32 pm] kamleshmittra: खंड -2


निर्गत सूचना के संदर्भ में एक बात और स्पष्ट कर दूं कि 


15. दिल्ली विकास प्राधिकरण ने तथाकथित सरकारी कमेटी को साढ़े चार करोड़ का नोटिस दिया है 🙏


16. ना कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुक्रम में दिल्ली विकास प्राधिकरण ने सरकारी कमेटी को पैसे की डिमांड का कोई नोटिस दिया है 🙏


17. विषय उठता है कि क्या तथाकथित सरकारी कमेटी ही सरकारी कमेटी है🙏


18. दिल्ली विकास प्राधिकरण और हाउसिंग मिनिस्ट्री ने इस बात का जवाब नहीं दिया है 🙏 उनके प्रथम अपीली अधिकारी भी इसका जवाब देने में सक्षम नहीं रहे हैं🙏


19. मामला माननीय राष्ट्रीय सूचना आयोग को ट्रांसफर कर दिया गया है इसलिए इन दो आरटीआई का निस्तारण होने में लगभग साल भर लगेगा, क्योंकि राष्ट्रीय सूचना आयोग में मामले बड़े शिथिलता से आगे बढ़ते हैं🙏


20. तथाकथित सरकारी कमेटी जब तक अपने दस्तावेज हमको नहीं दिखाती और हमको कार्य करने के लिए अधिकृत नहीं करती तब तक हम इस विषय में कुछ भी करने में सक्षम नहीं है 🙏


21. संपूर्ण रविदास समाज से मैं इतना ही कह सकता हूं कि 11 सदस्य समिति रविदास समाज के साथ ही धोखाधड़ी नहीं कर रही बल्कि वह संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के साथ भी धोखाधड़ी कर रही है 🙏


22. क्योंकि संसार का नियम है जो कार्य व्यक्ति से स्वयं नहीं होता है उस कार्य को करने में वह दूसरों की मदद लेता है 🙏 जो बीमारी खुद से ठीक नहीं कर सकता उसका इलाज दूसरे से कराता है 🙏


23. परंतु जो लोग मदद नहीं ले रहे हैं उनका अपना कोई व्यक्तिगत लाभ रहा होगा, समाज के कार्यों में ऐसे धांधली अनादि काल से होती चली आई है🙏 प्रमुख लोग अपने निहित लाभ के लिए समाज के लोगो को धोखा देते रहे हैं 😭 


24. सच क्या है, 11 सदस्यों के निहित स्वार्थ क्या हैं यह तो वही जाने अथवा उनके निकटवर्ती लोग जानते होंगे🙏 परंतु 11 सदस्यीय समिति की कार्यशैली से मैं अत्यंत दुखी हूं 🙏 हमारे सामाजिक एकता मिशन के कार्यक्रम के लिए बहुत बड़ा धक्का है 🙏 रविदास राज की अवधारणा को बहुत बड़ा धक्का लगा है 😭


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[22/12, 11:26 pm] kamleshmittra: [22/12, 6:52 pm] +91 98960 59939: *धम्मभूमि श्रेष्ठ जीवन के लिए एक आंदोलन.......* 


🙏🙏🙏


https://meet.google.com/etm-sgoa-vnc


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*विषय:“बाबा साहब के 15 अक्तूबर के नागपुर भाषण” की बौद्ध समाज निर्माण में भूमिका।* भाग_5


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*लाइव देसणा🎤: श्रद्धेय भंते धम्मशील*


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*संचालन:श्रद्धेय डॉ योगेश धम्मिक धम्मभूमि प्रतिनिधि (टोहाना) हरियाणा*


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उपरोक्त विषय पर आज दिनांक 22-12-2024 को रात्रि 8.00 से 9.00 बजे तक गूगल मीट के माध्यम से देसणा देंगे। 


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उपरोक्त गूगल लिंक रोजाना रात 8.00 से 9.00 बजे तक सक्रिय रहता है, आप और आपके सभी मित्र सपरिवार सादर आमंत्रित हैं।

 

🙏🙏🙏

*प्रेषक:*

BRC (Buddhist Research Center) Aligarh, UP 9813155324, 9675104731, 9896059939

[22/12, 10:31 pm] kamleshmittra-SCI: अत्यंत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है कि....


 यह ग्रुप ( बुद्धिस्ट रिसर्च सेंटर -BRC)


बुद्धिस्म के संबंध में बहुत ही उथले ज्ञान का प्रचार प्रसार कर रहा है🙏


1. इस ग्रुप के भिक्षुओं को आध्यात्मिक की कोई समझ नहीं है🙏


2. उनके लिए बुद्ध का धर्म मात्र एक नैतिक शास्त्र से अधिक कुछ नहीं है 😂 और उनकी जीविका के संसाधन का मात्र एक षड़यंत्र है जैसे ब्राह्मणों/ पंडितो की जीविका के संसाधन के लिए होता है 


3. वह ना तो अप्प दीपा भावों पर विश्वास करते हैं और ना ही कलम सूत्र पर 😂


4. उनके पास अपने द्वारा प्रसारित ज्ञान को तौलने की कोई कसौटी नहीं है 🙏


5. जबकि भगवान बुद्ध ने कोई भी बात अतार्किक नहीं कही है, भगवान बुद्ध की कोई भी बात ऐसी नहीं है जिसे सत्य की कसौटी पर ना कसा जा सके जबकि इस ग्रुप के भिक्षुओ के लिए अध्यात्म की गहराइयों में उतरना ही असंभव जान पड़ता है 🙏


6. इस ग्रुप के भिक्षु अंबेडकर के नाम पर समाज को भटका रहे हैं, जबकि अंबेडकर ने अपने अंतिम छड़ों में बुद्ध धर्म को इसलिए स्वीकार किया था ताकि बुद्ध संघ हमारे समाज को आगे ले जाए🙏 परंतु खंडित सील के भिक्षु समाज को बरगना रहे हैं, और ऐसा भी पिछले 70 साल से कर रहे हैं 🙏 कृपया सावधान रहें 👹


7. केवल पांच पंचसील का पालन करने वाला भिक्षु अध्यात्म की गहराइयों में उतरने में सक्षम नहीं होता है 😂


8. जो भिक्षु अष्टसील का पालन ना कर रहा हो, बंदामी का अभिवादन पाने का अधिकारी नहीं होता है 🙏


 आपका शुभचिंतक 

साधक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


 नोट : अभी मैं इस ग्रुप की मीटिंग करके आया हूं और अपनी संतुष्टि को आप सभी को अवगत करा रहा हूं 🙏


 भिक्षुओं का प्रबंध एक व्यापारी के प्रबंधन की तरह है, वह आपको अध्यात्म धर्म और नैतिकता के विषय के प्रश्न ही नहीं उठाने देंगे, सार्वजनिक मंच पर😂


 कृपया ऑडियो टॉक को भी सुने

[25/12, 8:08 pm] kamleshmittra: This day marks the historic moment on December 25, 1927, when Dr. Ambedkar led a mass burning of the Manusmriti, a symbolic act of defiance against its oppressive doctrines. But what led to this audacious act, and why does it hold such significance in our quest for a more equitable India and world?

[25/12, 8:09 pm] kamleshmittra: डॉ. भीमराव आंबेडकर ने 25 दिसंबर, 1927 को मनुस्मृति को जलाया था. इस दिन को मनुस्मृति दहन दिवस के रूप में मनाया जाता है. 

मनुस्मृति को जलाने के पीछे की वजहें:

मनुस्मृति में जाति और वर्ण व्यवस्था को सही ठहराया गया है. 

यह किताब दलितों और महिलाओं को इंसान का दर्जा नहीं देती थी. 

इसमें जानवरों जैसी सज़ाओं का प्रावधान था. 

यह दुनिया की एकमात्र ऐसी धार्मिक किताब है जो जन्मजात गैर-बराबरी को जायज़ ठहराती है. 

मनुस्मृति को जलाने के बारे में कुछ और खास बातें:

मनुस्मृति को जलाने के लिए डॉ. आंबेडकर ने महाड़ नाम के महाराष्ट्र के तटीय इलाके को चुना था. 

उन्होंने दासगाओं बंदरगाह से एक बोट से वहां पहुंचा था. 

मनुस्मृति को जलाने के दौरान डॉ. आंबेडकर के साथ महाराष्ट्र के एक सामाजिक कार्यकर्ता गंगाधर नीलकंठ सहस्रबुद्धे भी थे. 

महात्मा गांधी ने मनुस्मृति को जलाने का विरोध किया था.

[25/12, 9:39 pm] kamleshmittra: अतीत के झरोखे से🌹


10 साल पुरानी पोशाक पहन ली मैंने, कभी यह मेरी पतंजलि की पहचान थी🙏


मुझे कपड़ों का कभी शौक नहीं रहा है, मेरे मित्रो को मेरा हर जगह वकालत के कपड़े पहन कर जाना अच्छा नहीं लगता है🙏 इसलिए आज मैंने यह पोशाक बदल ली 🙏🇮🇳


बाबा साहब के संकल्प दिवस मनुस्मृति दहन दिवस के अवसर पर हमने भी पोशाक बदल ली 🙏 क्योंकि सन 2011 में इंजीनियरिंग कॉलेज छोड़कर हम पतंजलि योगपीठ में गए थे🙏 व्यवस्था परिवर्तन के लिए परंतु हमारे साथी बाबा रामदेव बहुत कमजोर निकले, कांग्रेस की लाठियां ने उनकी चाल बदल दी परंतु हम नहीं बदले😂😂😂


ठीक इसी प्रकार तुगलकाबाद रविदास मंदिर में भी हमारे साथ ऐसा ही हुआ, जिनको मैं संत कहता था, संत श्री के. सी. रवि जी, उनके ही एक पुराने मित्र ने बताया पहले वह गुरु जी हुआ करते थे🙏 और बहुत कुछ उनके बचपन की यादों को शेयर किया 🌹


बाबा रामदेव की चाल बदल गई कांग्रेस की लाठियां से यह तो मुझे पता है, क्योंकि यह 24 दिसंबर 2012 की बात है, जब जंतर मंतर पर कांग्रेस की लाठियां ने उनके संकल्प को बदल दिया, और वह मोदी के शरणागत हो गए😭


परंतु संत श्री के.सी. रवि जी की चाल किसकी लाठी से बदली अभी तक मुझे स्पष्ट रूप से पता नहीं है 🙏 परंतु हुजूर बदले बदले से नजर आते हैं😂🌹


मेरा संघर्ष जारी है🙏 आर्थिक कठिनाइयों को शीघ्र दूर कर लिया जाएगा🙏


ना हीं, इलाहाबाद से पतंजलि में जाते हुए मैंने अपने संकल्प को छोड़ा है, और ना ही तुगलकाबाद रविदास मंदिर में अपने लिए गए संकल्प को मैंने छोड़ा है 🙏


मैं अपना संकल्प पूरा करूंगा, अपनी सांस छोड़ने से पहले🙏 आर्थिक विपन्नता के कारण कुछ दिक्कतें जरूर आ रही हैं, जिन्हें शीघ्र ही निपटा लिया जाएगा🙏


व्यवस्था परिवर्तन का संकल्प पूरा होकर रहेगा 🙏 आर्थिक समानता का संकल्प पूरा होकर रहेगा, रविदास राज का सपना पूरा होकर रहेगा 🙏


 तुम साथ दो या ना दो🙏

 जो साथ देगा वही साथ चलेगा🙏

 लंबी दूरी की मंजिल में साथी बदलते जाते हैं उनका अफसोस क्यों😂❤️


संघर्ष के पथ पर अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[25/12, 11:39 pm] kamleshmittra: 🌹तकनीकी सूचना दिनांक 25 दिसंबर 2024🙏


आज कल साइबर क्राइम चरम पर है इसलिए सॉफ्टवेयर इंजीनियर होने के नाते कुछ प्रमुख, साइबर फ्रॉड की सूची आपको दे देता हूं🙏


1. यूपीआई यूज़ करते समय सदैव सावधान रहें 🙏 अन्य प्रलोभन देकर, यूपीआई यूज़ करने वाला एप्लीकेशन आपके खाते से पैसे निकाल लेता है🙏


इस चोरी में एयरटेल भी आगे है, ना तो एयरटेल के माध्यम से यूपीआई का इस्तेमाल करें, और ना ही उसके थैंक्स एप को 🙏 इसके अलावा और भी हो सकते हैं, किसी प्रोलोभन में आकर अपना पैसा ना फसायें, गूगल पे ज्यादा सुरक्षित कोई नहीं, अथवा उस बैंक का इस्तेमाल करें जो बैंक खुद देती है🙏


2. वर्क इंडिया जॉब पोर्टल, इस पोर्टल पर जॉब के लिए अप्लाई करते समय बहुत सावधान रहे 🙏 वर्क इंडिया जॉब पोर्टल आपकी जरूरत को बेंच देता है 🙏 और फिर जॉब के लिए आपके पास फर्जी कॉल्स आते हैं जो आपसे लूट करते हैं 🙏 और जब के लालच में आप पैसा देते रहते हैं 😭

3. प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के एप्प्स भी इसी प्रकार हैं, वह प्रधानमंत्री मुद्रा लोन तो आपको नहीं दिलाते परंतु क्रेडिट कार्ड में फंसा देते हैं 🙏


 क्रेडिट कार्ड पर ब्याज की दर 36% से अधिक है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने हाथ खड़े कर लिए हैं इसलिए आपकी रक्षा करने वाला कोई नहीं होगा और आपके घर पर बैंक के गुंडो द्वारा गुंडागर्दी होगी🙏


 मोदी है तो मुमकिन है 😂😂😂


 साइबर क्राइम रिपोर्टर अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


नोट :- मैं कोई उपन्यासकार नहीं हूँ बल्कि घटनाओं का विश्लेषक हूं 🙏 समाज के हित में इस सूचना को जारी कर रहा हूं 🙏


 कुछ सूचना गृह मंत्रालय द्वारा भी आपको दी जा रही हैं, जिसमें जज, पुलिस, साइबर क्राइम आदि से आने वाली फोन कॉल्स पर घबराने की जरूरत नहीं है🙏


क्योंकि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 30000 भारतीयों के माध्यम से भारत के बाहर बैठकर साइबर अपराध किया जा रहा है🙏


 जो भारत की पुलिस की पहुंच से बाहर है 🙏 सजाकता में सुरक्षा है 🙏

[27/12, 1:00 pm] kamleshmittra: श्री डीसी कपिल जी इस बैनर में विरोध की राजनीति तो दिखाई देती है🙏 परंतु विकास की राजनीति दिखाई नहीं देती है 🙏

उनसे मैं दो बार व्यक्तिगत रूप से बात कर चुका हूं परंतु उनके बैनर पर आर्थिक समानता का मॉडल नजर नहीं आ रहा है 😂

इससे एक बात साफ हो जाती है पहले केजरीवाल ने दलितों के हक अधिकार को लूटकर पूरी दिल्ली में बांट दिया अब डीसी कपिल जी को लूटने का अवसर चाहिए 🙏


पिछली बार उन्होंने कहा था उनको आर्थिक समानता का मॉडल समझ में ही नहीं आ रहा है किस प्रकार प्रस्तुत करें, मैंने उनसे संक्षिप्त चर्चा की थी🙏 उन्होंने आगे बात करने का वादा किया परंतु वह आज तक समय नहीं निकल सके 🙏


सच यह है कि जो दलितों में क्रीमी लेयर हो गए है वह आर्थिक समानता चाहते ही नहीं है 🙏 वह आप्रत्यक्ष मनुवादी हैं, और खुद के श्रेष्ठ बनाए रखना चाहते हैं 😂


मेरी कलम बड़ी बेवफा....... माया माने ना लाला को 😂


कटू आलोचक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[28/12, 12:12 pm] kamleshmittra: मान्यवर,


भले ही आपकी कोई दुखती हुई नस ना हो परन्तु मेरी तो हर उस विषय पर दुखती हुई नस है जो हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है 🙏


1. मैं अधिवक्ता हूं इसलिए समाज के पूर्व अधिवक्ताओं का उत्तराधिकारी हूं 🙏 अगर हमारे समाज के अधिवक्ताओं से कोई चूक होती रही और हमारा समाज सुव्यवस्थित नहीं हो पाया, हमारे समाज को राष्ट्र में वह सम्मान नहीं मिल पाया जिसका वह हकदार था तो इसके लिए मुझे भला बुरा कहा ही जाएगा/ कहा जाना चाहिए, क्योंकि मैं समाज के पूर्व अधिवक्ताओं का उत्तराधिकारी हूँ 🙏


2. मैंने जो कुछ कहा अपने उत्तरदायित्व के अधिकार के तहत कहा है - 


3. आपने जो कहा वह क्षणिक आवेश में कहा, इस क्षणिक आवेश से हमारे समाज के पूर्व अधिवक्ता डरते रहे इसीलिए उन्होंने किसी को कुछ नहीं कहा और समाज सुव्यवस्थित होने के बजाय अव्यवस्थित हो गया🙏


4. न्यायिक अर्थव्यवस्था ना होने के कारण एक मां-बाप अपने बच्चों का सही समय पर विवाह नहीं कर पता है 🙏


5. न्यायिक अर्थव्यवस्था ना होने के कारण एक युवा विवाह के बंधन में बांधने से बचता है 🙏


6. विवाह के बाद एक युवती के पास 20 साल का प्रोजेक्ट होता है, उसे कोई अन्य कार्य करने की आवश्यकता नहीं होती है🙏 जिन देशो ने न्यायिक अर्थव्यवस्था को नहीं अपनाया है वह परिवारवाद से दूर है 🙏


7. जो देश परिवारवाद से दूर है उन्होंने शारीरिक सुख के भौतिक उपकरणों का प्रयोग करना शुरू कर दिया है, शारीरिक सुख के भौतिक उपकरणों (यौन सुख के भौतिक उपकरण, यौनाचार) का बाजार बाद भारत में भी फैलाना चाहते हैं इस कारण वे भारत में भी न्यायिक अर्थव्यवस्था नहीं चाहते हैं 🙏


8. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय नेता और राज्यपाल रहे श्री एन.डी. तिवारी जैसे काम पिपाशा से जुड़े हुए लोग, जब सत्ताधीश होंगे तो वह ऐसी ही अर्थव्यवस्था का निर्माण करेंगे ताकि दूसरे के घरों की औरतों का शोषण कर सके (वह सब वात्सयान कामसूत्र के समर्थक लोग हैं )🙏 इसके लिए आवश्यक है दूसरों के घरों की औरतें, उनकी इच्छा के अनुसार घर से बाहर निकले, उनके संग-संग टहले 🙏इसे वह नया समाजवाद कह देंगे, बीवी किसी की परंतु बिस्तर उनका👹


9. हमारे समाज के तीसरी अवस्था के लोगों को यह सोचना पड़ेगा वह कि वह किस तरह की समाज व्यवस्था चाहते हैं🙏


10. न्यायिक समाज व्यवस्था के लिए आवश्यक है कि न्यायिक अर्थव्यवस्था भी हो 🙏


11. एक युवा को इतना वेतन दिया जाना चाहिए जिससे वह अपने जीवनसाथी का भार भी उठा सके🙏 प्रथम अवस्था के अपने बच्चों की परवरिश पर धन खर्च कर सके🙏 जब तक समाज के तीसरी अवस्था के लोग इसके लिए कोई आंदोलन नहीं चलाएंगे 🙏


12. लोग सरकारी नौकरी के पीछे भागते रहेंगे, पहले भी सरकारी नौकरियां मात्र 2% थी, अब घटकर 1% रह गई है 🙏


13. निजी क्षेत्र में न्यायिक अर्थव्यवस्था का कोई मॉडल नहीं है, ऐसी दशा में मां-बाप के लिए संभव नहीं है कि वह अपने युवाओं को विवाह करने के लिए तैयार कर पाए 🙏

13. (1) निजी क्षेत्र की अकूत संपत्ति के मालिक अपने धन को खर्च करने के लिए यौनाचार करते हैं, कसीनो में जाते हैं या शेयर मार्केट में, इंट्राडे, पुट इन और पुट आउट करते हैं, 

13. (2) अब कोई भी कंपनी अपने श्रमिकों को बोनस नहीं देती, उनके वेतन पर तीन चार स्तर पर बिचौलिए पैदा कर दिए गए हैं 🙏 श्रमिकों के दिन भर में कमाई गई पूंजी की क्रीम निकाल कर शेयर मार्केट वाले ले जाते हैं, इस लूट में सरकार भी सम्मिलित है🙏 देश की अर्थव्यवस्था और विदेशियों की अर्थव्यवस्था के मॉडल को समझना ही होगा, तब आप अपने समाज के लिए न्यायिक अर्थव्यवस्था का निर्माण कर सकेंगे🙏 और युवाओं को सही समय पर विवाह के लिए प्रोत्साहित कर सकेंगे 🙏


14. आज युवा उत्तरदायित्व विहीन शारीरिक सुख चाहते हैं, इसलिए पति-पत्नी के संबंध खत्म हो रहे हैं, बॉयफ्रेंड और गर्लफ्रेंड का प्रचलन बढ़ रहा है🙏 या तो इस संस्कृति को स्वीकार कर लीजिए, और हाय तौबा मचाना बंद कीजिए 🙏


15. मां-बाप की नाक कटती है तो कट जाये, संस्कृति नष्ट होती है तो हो जाए 🙏 पूर्व के तीसरी अवस्था के लोगों ने निजी क्षेत्र में न्यायिक अर्थव्यवस्था की व्यवस्था की अवधारणा का संपादन नहीं किया है 🙏


16. सरकारी क्षेत्र से जुड़े हुए लोग अपने बच्चों का विवाह किसी सरकारी आदमी से ही करना चाहते हैं, सरकारी आदमी के साथ भी यह देखने का प्रयास करते हैं कि उसकी ऊपरी आमदनी क्या है?😂 वह एक अलग विज्ञान है इसकी अलग से चर्चा हो सकती है 🙏


17. मैं बात को समाप्त करता हूं, यदि आप तीसरी अवस्था के व्यक्ति हैं तो आईये न्यायिक अर्थव्यवस्था का निर्माण करते हैं🙏 दूसरी अवस्था के युवाओं के कल्याण के लिए का कुछ काम करते हैं ताकि वह बुढ़ापे में हमारा सम्मान करें🙏 यदि दूसरी अवस्था के युवाओं को उनके युवा काल में सुख दोगे जीवन के सपनों को फलित फूलित होने दोगे, तभी तीसरी और चौथी अवस्था के लोग सम्मान के हकदार होंगे🙏


18. सरकारों की तो नीति रही है युवाओं को युद्ध में धकेल दो या उद्योगों में, जीवन का सुख मत लेने दो, सेवा में लगा दो, कोई शोध कार्य मत करने दो👹


19. आओ बाबा साहब के सपनों को पूरा करते हैं सरकारी और निजी क्षेत्र में आर्थिक समानता को लागू करते हैं 🙏जिसके लिए बाबा साहब ने भारतीय संविधान में संशोधन का अनुच्छेद बनाया है 🌹


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[28/12, 11:40 pm] kamleshmittra: प्रिय मित्र वीरेंद्र जी 


महोदय,


स्वर्गीय मनमोहन सिंह की तारीफ के इतने पुल भी ना बांधे कि मेरा अतीत उन घटनाओं को याद करने लगे जो हमारे समाज के लिए विष बनी हुई है 😂😂😂


जब अपने जख्मों को हरा कर ही दिया है तो सुनते जाइए 🙏 मनमोहन के 10 कामों की चर्चा करते हैं.....


1. (1) नई आर्थिक / औद्योगिक नीति 1991, इस नीति से दलितों का क्या फायदा हुआ? एससी एसटी ओबीसी के कितने उद्योग खुले? कितने लोग उद्योगपति बने ? सरकारी सेक्टर के हो रहे निजीकरण में एससी एसटी ओबीसी का कितना रिजर्वेशन बढ़ा 🙏 श्रमिकों के कितने वेतन की वृद्धि हुई 😭 

1. (2) भारत जैसे सामंतवादी देश में आर्थिक समानता को स्थापित किए बिना नई औद्योगिक नीति का क्या औचित्य था 🙏 भारतीय जनता पार्टी दलितों के शोषण की जो मीनार खड़ी कर रही है उसके जन्मदाता मनमोहन सिंह हैं 🙏 दलितों के लिए शिक्षा के दरवाजे बंद, दलितों का डॉक्टर इंजीनियर बनना बंद, दलित के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे बंद🙏 दलितों के लिए उच्च वेतन के दरवाजे बंद🙏 दलितों के लिए उच्च पदों पर जाना बंद 🙏 दलितों की सेविंग पर डकैती 🙏आदि 

2. (1) सूचना का अधिकार अधिनियम, कल भी सरकारी अधिकारियों की दया पर था आज भी सरकारी अधिकारियों की दया पर है 🙏 

2. (2) सूचना में लगाया गया दंड पीड़ित को नहीं मिलता है 🙏 सूचना में लगाया गया दंड की वसूली नहीं होती है, 30 दिन के बाद सूचना देने पर किसी भी अधिकारी की उसकी सेवा पुस्तिका में एडवर्स एंट्री नहीं होती है 🙏 किसी भी सूचना आयोग की वार्षिक रिपोर्ट पढ़ लेवें 🙏 सूचना का अधिकार अधिनियम व्यक्ति के आवेदन/ प्रतिवेदन पर नहीं है, बल्कि प्रतिवेदन के संदर्भ में अतिरिक्त आवेदन करके शुल्क जमा करके अपने प्रतिवेदन के संबंध में ही सूचना प्राप्त करनी पड़ती है जोकि संविधान द्वारा प्रदत्त सूचना के मूल अधिकार की हत्या है🙏

2. (3) प्रथम अपीलीय अधिकारी अपने विभाग के अधिकारियों का संरक्षण करता है, ना की सूचना के अधिकार अधिनियम का, ना कि सूचना की मांग करने वाले व्यक्ति का, वरिष्ठ अधिकारी सूचना न देने के नियम को और जटिल बनता है, नई सूचनायें और अधिसूचनाएं नियमवली विभाग में जारी करता है, ताकि सूचना न देना पड़े, और उसके विभाग का विभागीय शोषण और आर्थिक भ्रष्टाचार खुल न जाए 🙏 अपवादों को छोड़ दिया जाए, तो माननीय राज्य/ राष्ट्री

Sunday, 22 December 2024

21 दिसंबर 2024 की मुख्य सूचना

 [21/12, 4:05 pm] kamleshmittra: 🙏सूचना दिनांक 21 दिसंबर 2024🌹


कई दिनों से एक सूचना देने पर विचार कर रहा हूं, दूं अथवा ना दूँ 🙏


इस बार 10 दिसंबर 2024 की फीडबैक सूचना भी मैंने नहीं दी थी 🙏


1. परंतु सूचनाओं को दबाए रखना भी पंचसील के अंतर्गत सील भंग माना जाता है, और गंभीर साधकों के शरीर में पीड़ा होने लगती है 🙏 गंभीर साधक मानसिक उथल-पुथल से गुजरता है🙏अब मैं इससे मुक्ति चाहता हूं, इसलिए सूचना देकर मुक्त हो जाना चाहता हूँ 🙏


2. जनवरी 2024 से मेरा तुगलकाबाद रविदास मंदिर प्रांगण में निमित्त रूप से आना जाना रहा है इस प्रकार 1 साल पूरा हो चुका है, और तथाकथित सरकारी समिति के महासचिव से एक ही प्रकार की बात सुनता रहा हूं, कि सरकार ने उनसे साढ़े चार करोड मांगे हैं वे गुरु रविदास जी से प्रार्थना करते हैं कि शीघ्र ही उनका मंदिर यहां बन जाए🙏


3. वह (श्री मंगतराम वाली और उनके सलाहकार) ना तो अपनी नियमावली दिखाना चाहते हैं, और ना ही किए गए पत्राचार को बताना/ दिखाना चाहते हैं🙏 ऐसी दशा में समाज के साथ लगातार धोखा कर रहे हैं 🙏 समाज के साथ ही नहीं वह संत शिरोमणि गुरु रविदास के साथ भी पिछले 5 साल से धोखा कर रहे हैं, इसमें अध्यक्ष श्री वीर सिंह हितकारी जी की समान भूमिका है🙏


4. सर्व विदित है कि विवादित परिस्थितियों में 9 जुलाई 2024 को मैंने संत श्री निरंजन दास जी को कुछ वादियों की सहमति से लीगल नोटिस भेजा था ताकि वह विधिक स्थिति को स्पष्ट करें कि वह सरकारी कमेटी के चेयरमेन है अथवा नहीं है🙏

5. साथ ही 105 मंदिर सहित 96 गुरु भाइयों और अन्य भक्तों को सरकारी कमेटी में सम्मिलित करने के संबंध में अपना रूख स्पष्ट करें परंतु 90 दिनों बाद भी उन्होंने विधिक स्थिति को स्पष्ट नहीं किया तो 4 नवंबर 2024 को भारत सरकार की हाउसिंग एंड अर्बन मिनिस्ट्री को द्वितीय समाधानकर्ता की भूमिका में पत्र लिखा गया कि वह मामले का निस्तारण करें 🙏 यह पत्र अभी तक पीएम पोर्टल के माध्यम से हाउसिंग मिनिस्ट्री में लंबित है 🙏 30 दिन से अधिक हो चुका है🙏


6. संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के प्रांगण का मुख्य गेट नियमित रूप से खुले इसके लिए एक पत्र DDA के वाइस चेयरमैन को लिखा गया था लंबी प्रक्रिया के बाद डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर ने बिना अथॉरिटी का उल्लेख किये कह दिया कि अथॉरिटी ने गेट खोलने से मना किया है 🙏


7. इसकी अपील पीएम पोर्टल के माध्यम से DDA के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट गवर्नर दिल्ली को 17 नवंबर 2024 को कर दी गई थी वह पत्र भी अभी तक लंबित है🙏


8. लीगल नोटिस जिन लोगों की प्रत्यक्ष सहमति से भेजा गया था और जिन्होंने वकालतनामा पर साइन किए थे, अपने परिचय दस्तावेज सबमिट किए थे 🙏 रिट पिटीशन का खर्च देने के संबंध में अभी तक अपना मानस नहीं बना सके हैं इसलिए रिट पिटीशन डालना संभव नहीं है🙏

9. अन्य किसी रिशोर्स से मुझे किसी प्रकार के धन की प्राप्ति नहीं हो पा रही है🙏 दलितों की आर्थिक दुर्दशा के संबंध में सन 2022 के दिसंबर में मैंने भारत सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखा था की आर्थिक अभाव में हमारे समाज की रिट पिटीशन नहीं पड़ पाती हैं, इसलिए न्याय की समुचित व्यवस्था की जाए 🙏

10. उस पत्र को सर्वोच्च न्यायालय के रजिस्ट्री ने हल्के में लिया परिणाम स्वरुप राष्ट्रीय सूचना आयोग के समक्ष 5 नवंबर 2024 को उन्हें मुँह खानी पड़ी 🙏 

11. इस संदर्भ में मैंने आगे की लिखा पढ़ी कर दी है, भारत सरकार को भी 25 नवंबर 2025 को तलब किया गया था 🙏 मेरे पास अपनी आय(जीविका) के बहुत ही लिमिटेड सोर्स है कहीं से कोई आर्थिक सहयोग प्राप्त नहीं हो रहा है 🙏 ऐसी दशा में समाज सेवा के विधिक कार्य को जारी रखना कठिन है🙏


12. दूसरी तरफ जून 2025 में मेरी AOR की परीक्षा है, मैं अपना पूरा ध्यान अपनी परीक्षा पर केंद्रित करने जा रहा हूं🙏 धन जुटाना के लिए किसी लॉ फॉर्म को ज्वाइन करने में असमर्थ हूं इसलिए तुगलकाबाद रविदास मंदिर प्रकरण से संबंधित गतिविधियों में हमारी सक्रिय भागीदारी ना के बराबर रहेगी 😭


13. अगर भारत सरकार से कोई नई सूचना प्राप्त होगी तो उसकी सूचना आपको दे दी जाएगी🙏

14. मेरे द्वारा शीघ्र ही अपलोड किए गए सात वीडियो को ध्यान से सुने 🙏 क्योंकि आपके समाज की रक्षा करने के लिए कोई और नहीं आएगा, यह सब हम और आपको मिलकर ही करना है 🙏


प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064



(यूट्यूब पर जाकर Kamlesh Mittra लिख देवें, मेरा चैनल मिल जाएगा, यह चैनल 2010 से चल रहा है जब मैं इंजीनियरिंग कॉलेज का टीचर हुआ करता था)


 🌹अब डॉक्टर अंबेडकर फिर से ना आएंगे 😂😂😂😂

[21/12, 11:32 pm] kamleshmittra: खंड -2


निर्गत सूचना के संदर्भ में एक बात और स्पष्ट कर दूं कि 


15. दिल्ली विकास प्राधिकरण ने तथाकथित सरकारी कमेटी को साढ़े चार करोड़ का नोटिस दिया है 🙏


16. ना कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों के अनुक्रम में दिल्ली विकास प्राधिकरण ने सरकारी कमेटी को पैसे की डिमांड का कोई नोटिस दिया है 🙏


17. विषय उठता है कि क्या तथाकथित सरकारी कमेटी ही सरकारी कमेटी है🙏


18. दिल्ली विकास प्राधिकरण और हाउसिंग मिनिस्ट्री ने इस बात का जवाब नहीं दिया है 🙏 उनके प्रथम अपीली अधिकारी भी इसका जवाब देने में सक्षम नहीं रहे हैं🙏


19. मामला माननीय राष्ट्रीय सूचना आयोग को ट्रांसफर कर दिया गया है इसलिए इन दो आरटीआई का निस्तारण होने में लगभग साल भर लगेगा, क्योंकि राष्ट्रीय सूचना आयोग में मामले बड़े शिथिलता से आगे बढ़ते हैं🙏


20. तथाकथित सरकारी कमेटी जब तक अपने दस्तावेज हमको नहीं दिखाती और हमको कार्य करने के लिए अधिकृत नहीं करती तब तक हम इस विषय में कुछ भी करने में सक्षम नहीं है 🙏


21. संपूर्ण रविदास समाज से मैं इतना ही कह सकता हूं कि 11 सदस्य समिति रविदास समाज के साथ ही धोखाधड़ी नहीं कर रही बल्कि वह संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के साथ भी धोखाधड़ी कर रही है 🙏


22. क्योंकि संसार का नियम है जो कार्य व्यक्ति से स्वयं नहीं होता है उस कार्य को करने में वह दूसरों की मदद लेता है 🙏 जो बीमारी खुद से ठीक नहीं कर सकता उसका इलाज दूसरे से कराता है 🙏


23. परंतु जो लोग मदद नहीं ले रहे हैं उनका अपना कोई व्यक्तिगत लाभ रहा होगा, समाज के कार्यों में ऐसे धांधली अनादि काल से होती चली आई है🙏 प्रमुख लोग अपने निहित लाभ के लिए समाज के लोगो को धोखा देते रहे हैं 😭 


24. सच क्या है, 11 सदस्यों के निहित स्वार्थ क्या हैं यह तो वही जाने अथवा उनके निकटवर्ती लोग जानते होंगे🙏 परंतु 11 सदस्यीय समिति की कार्यशैली से मैं अत्यंत दुखी हूं 🙏 हमारे सामाजिक एकता मिशन के कार्यक्रम के लिए बहुत बड़ा धक्का है 🙏 रविदास राज की अवधारणा को बहुत बड़ा धक्का लगा है 😭


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

Wednesday, 11 December 2024

8 से 11 दिसंबर तक की सूचनाओं

 [08/12, 5:36 pm] kamleshmittra: भाई वीरपाल जी,

मैं अपने घर की सफाई कर रहा हूं🙏


आप भी जल्दी से लौट आओ तिलक तराजू और तलवार..... पर 


बुलडोजर राजनीति से जितने मुसलमान के घर गिराए गए हैं उससे ज्यादा दलितों के मकान गिराए गए...... है 


मुसलमान के पास तो अपने जमीन के कागज थे परंतु दलितों के पास तो अपने मकान के कागज भी नहीं थे..... 


वह तो ऐसे ही भटकते चले गए, जैसे यह देश उनका ना हो .......


बुलडोजर राजनीति केवल उत्तर प्रदेश तक ही नहीं है.......


सेना के क्षेत्र में जहां पर दलित निवास कर रहे थे उसको खाली कराकर उद्योगपतियों को बेंच दिया गया रेलवे के निकट की जमीन जिस पर दलित निवास कर रहे थे छीन कर उद्योगपतियों को बेंच दिया गया .....


रोजगार का अधिकार.... मूल अधिकार है, किसी क्षेत्र में बस जाने का अधिकार मूल अधिकार है ..... 


निजी क्षेत्र में घुसकर श्रमिकों का शोषण देखो, उनके वेतन की अनिश्चित को देखो ......आदि 


मैं अधिवक्ता हूं दुखियारे हमारे पास आते हैं...... 


इसलिए हमारी कलम चीखती है.....


अधिवक्ता की मजबूरी है वह लिखित विधि पर ही न्याय दिला सकता है.....


परंतु जिस पर कोई विधि ही ना हो अधिवक्ता क्या करें?


हमारी अपनी पार्टी बीएसपी की माया सतीश के चरण बंदगी कर रही है..... उसने बुलडोजर राजनीति पर आज तक कोई चिंतन बैठक नहीं की है..... दलितों पर बढ़ रहे अत्याचार पर उसने कोई चिंतन बैठक नहीं की..... है 🙏 राज्यसभा से इस्तीफा देने के बाद उसने जमीन पर क्या किया है?


वह तो न्यूज़ मीडिया की तरह काम कर रही है रोज एक समाचार पत्र निकाल रही है..... 


उसका कार्यकर्ता जमीन पर दलितों का संरक्षण करता हुआ दिखाई नहीं देता है क्योंकि उसकी पार्टी में घुन की तरह मनुवादी घुस गए है 🌹


जब हम सत्ता में नहीं थे तब भी हमारा एक वोट परसेंटेज हुआ करता था जिससे सभी राजनीतिक दल डरा करते थे....


माया के सतीश प्रेम ने हमारा वह आधारभूत वोट भी खिसका दिया है....... 


क्योंकि दलित और दलित-मुस्लिमों पर अत्याचार होते रहे और माया, सतीश के प्रेम में मौन रही....


माया ने जब लालजी टंडन को लात मारी थी तब मुझे खुशी हुई थी.......


क्योंकि तब पार्टी हित से कोई समझौता नहीं किया गया था....


सतीश ने माया की कौन सी नस पकड़ रखी है यह भी देखना होगा......


खून का बदला खून से लेना होगा....


हमें सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय नहीं चाहिए...


हम बहुजन हिताय बहुजन सुखाय पर वापस लौटेंगे.....


इस समय बीएसपी को केवल हिजड़े और सतीश मिश्रा के भक्त चल रहे हैं......


जिंदा लोग सभी दूसरी पार्टियों में शिफ्ट हो गए हैं वह बीएसपी के पुरानी विचारधारा पर लौटने का इंतजार कर रहे हैं.....


मैं कलम का सिपाही हूं अपना उत्तरदायित्व पूरा करता हूं.....


माया से ज्यादा महत्वपूर्ण बीएसपी......


क्योंकि मैं एक-एक वोटर की जन भावना को जानता हूं मैंने बूथ लेवल की कन्विंसिंग की है 


राजनीतिक चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[10/12, 3:08 am] kamleshmittra: 🌹 अति आवश्यक फाइल सूचना दिनांक 10 दिसंबर 2024 


1. 25 सितंबर 2024 को राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने, दिल्ली विधिक सेवा अथारिटी (नॉर्थ-वेस्ट जिला) की सचिव श्रीमती कनिका जैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए थे, परंतु डीसीपी रोहिणी श्री अमित गोयल ने, गलत रिपोर्ट बनाकर आयोग को गुमराह किया🙏 उसका रिजॉइंडर प्राप्त होने के पश्चात,


2. माननीय आयोग ने डीसीपी अमित गोयल को FIR दर्ज करने का पुनः आदेश दिया है, इस संदर्भ में 18 नवंबर को मैंने डीसीपी से मुलाकात की थी परंतु सारे सवर्ण एक है, जबतक डीसीपी के ऊपर खुद तलवार नहीं लटकेगी वह सचिव कनिका जैन के खिलाफ FIR नहीं लिखेगा 😂( जबकि दलित समाज के लोग आपस में एक दूसरे का गला काटने को तैयार है )


3. 5 दिसंबर 2024 को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को मैंने डीसीपी को हटाने के लिए अनुरोध पत्र लिख दिया है 🙏 इसके अलावा मिनिस्ट्री आफ सोशल जस्टिस में भी शिकायत कर दी है 🙏 वहां से भी जाँच आरम्भ हो गई है 


4. डीसीपी विजिलेंस (पुलिस हैडक्वाटर दिल्ली) से भी मैंने मुलाकात की थी, उनको सारा केस समझा दिया परन्तु यहां भी सवर्णवाद देखने में आया है, डीसीपी विजिलेंस को अनुसूचित जाति जनजाति अधिनियम की धारा 4 के बारे में पता नही है😂 जोकि उन लोक सेवकों पर लागू होती है जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन नही करते हैं और गैर अनुसूचित जाति समाज से आते हैं 🙏

5. यही हाल PRO पुलिस ऑफिस रोहिणी दिल्ली का था, उन्हें भी अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 की धारा 4 के बारे में नहीं पता था, दोनों को ही मैंने धारा-4 के बारे में समझा दिया है 🙏 देखते हैं आगे क्या होता है 🙏

6. अनुसूचित जाति को विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मिलने वाली विधिक सहायता में सचिव कनिका जैन बाधा उत्पन्न करती हैं, जिसके कारण विधिक सेवा प्राधिकरण की तरफ से भेजे गए अधिवक्ता भी अनुसूचित जाति समाज के पीड़ितों से खूब धन लूटते हैं🙏 दूसरी तरफ विधिक सेवा प्राधिकरण अधिवक्ताओं का भी शोषण करता है, कई महीना तक उनके बिल पास नहीं करता है, इसलिए वह केस में टालमटोल करते रहते हैं, उसका नुकसान दलित जाति के लोगों को महिलाओं को विकलांगों को, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की अन्य जातियों के लोगों को, तथा थर्ड जेंडर को होता है 🙏

7. हर विषय में लड़ना और उस पर धन खर्च करना क्या केवल अधिवक्ता मित्रा जिम्मेदारी है, चमारों के अन्य सामाजिक संगठन क्या कोई सहयोग नहीं करेंगे?

8. चमारों के अन्य सामाजिक संगठन और धार्मिक संगठन ना तो तन का सहयोग दे रहे हैं ना वे धन का सहयोग दे रहे हैं 🙏 केवल मलाई खाने के लिए आगे दौड़ आते हैं और वकालत नामा पर साइन भी कर देते हैं😂


9. हाउसिंग मिनिस्ट्री सहित DDA कान में तेल डाले हुए बैठा है, 30 दिन पूरे हो चुके हैं परंतु उसने अभी तक कुछ भी जवाब नहीं दिया, तुगलकाबाद रविदास मंदिर में धरना-प्रदर्शन की आगे की रणनीति बनानी पड़ेगी 🙏 

10. क्योंकि जिन्होंने वकालत नामा पर साइन किए थे, उनमें से कोई भी रिट फाइल करने के लिए पैसा देने को तैयार नहीं है 🙏 नाम तो ना हुआ पर वे बदनाम जरूर होने जा रहे हैं 😂 क्योंकि लीगल नोटिस पर उनका नाम पड़ा हुआ है जोकि सरकार भी जानती है इसलिए हम किसी तथ्य को छुपा नहीं सकते हैं 😂


और बहुत से समाचार बाकी है.....समय-समय पर देता रहूंगा....


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[11/12, 4:39 pm] kamleshmittra: बहुजन समाज का सर्वजन समाज हो गया तो कोई फर्क पड़ा क्या😂



इसी तरह से सनातनी का सतनामी हो जाए तो कोई फर्क पड़ेगा क्या 😂


अगर बहुजन समाज का सर्वजन समाज हो जाने के कारण बहुजन समाज पार्टी समाप्त हो सकती है तो


 सनातनी समाज का सतनामी समाज हो जाने से आजाद समाज पार्टी समाप्त हो जाएगी 🙏


राजनीति की भाषा स्पष्ट होनी चाहिए, राजनीति की भाषा बनियों की भाषा की तरह छल कपट वाली नहीं होनी चाहिए🙏


 आरएसएस छल-कपट की भाषा का प्रयोग करवाने में कुशल है 🙏


 दलितों का उच्च शिक्षा में और भाषा विज्ञान में गणितज्ञ होना अति आवश्यक है 🙏


 मनुवाद का मायाजाल ने बहुजन समाज पार्टी को समाप्त कर दिया, अब आजाद समाज पार्टी की बारी है🙏


 मेरा काम तो सावधान करना है मैं कर रहा हूं, बच्चों को पैदा होने में भी 9 महीना लगता है😂 जो जल्दी बाजी करते हैं उनका पेट फाड़ना पड़ता है और जिंदा बचने की कोई जिम्मेदारी नहीं 😭


 केजरीवाल जेल गया परंतु उसका घर परिवार नहीं टूटा, 


 मायावती जेल चली जाएगी उसी दिन घर परिवार समाप्त 🙏


 जागो दलितों जागो ❤️

[11/12, 8:45 pm] kamleshmittra: 👹दुखी करने वाली सूचना दिनांक 11 दिसंबर 2024 


1. चाहे तुगलकाबाद रविदास मंदिर के हमारे लोग हो, अथवा बहुजन समाज पार्टी के किसी को मेरी बात का बुरा नहीं मानना चाहिए😂 बल्कि गंभीरता से विचार करना चाहिए


2. क्योंकि जब मैं केंद्र सरकार और माननीय सुप्रीम कोर्ट को नहीं छोड़ रहा हूं 🙏तो आप तो हमारे अपने लोग हैं😂 मैं अपने लोगों को कैसे छोड़ सकता हूं 🌹


3. हमारा अंतिम उद्देश्य है व्यवस्थाएं थोड़ा अच्छे रूप में चले 😂रविदास राज स्थापित हो 🙏भारत के संविधान के अनुरूप आर्थिक समानता आ जाए🙏सबको न्याय मिले 🙏


4. जब मुझे लगने लगा कि केंद्र सरकार और सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी बेड़िया बना रखी है कि दलित इसमें घुसने ना पाए🙏 चाहे सुप्रीम कोर्ट हो अथवा प्रशासन, न्याय पाने के सारे रास्ते बंद हैं 🙏

5. क्योंकि न्याय देने का काम सिर्फ दो ही संस्थाएं कर सकती हैं करने में सक्षम है 1. न्यायपालिका और उसके अनुसांगिक अंग 2. सरकार और उसके अधीनस्थ आयोग, और ट्रिब्यूनल🌹 परंतु दोनों ही जगह दलितों के लिए दरवाजे बंद है, इनके लिए कहीं भी कोई खुली प्रतियोगी परीक्षा नहीं होती है 🙏 अत्यंत दुखी होकर उन बेड़ियों को मैंने तोड़ देने का निर्णय लिया है 🙏 

6. इसके लिए समाज के सभी कुटिल बुद्धि के लोगों की जरूरत है, अस्तु कुटिल बुद्धि के लोग हमारे ऊपर कुटिल बुद्धि का प्रयोग ना करें बल्कि अपनी कुटिल बुद्धि मुझे दे दे ताकि मैं उसका सदुपयोग कर सकूं 🙏


7. यदि आपकी जानकारी में कोई बुद्धिजीवी हो, तो उनसे यह पूछ कर बताएं कि..


A. अंग्रेजों के शासनकाल से संविधान बनने तक बाबा साहब जितना काम कर गए थे, उसके बाद दलितों के उद्धार के लिए कोई नया अविष्कार हुआ है क्या?😂


B. यह दलित समाज के सभी एमपी एमएलए और आईएएस पीसीएस को हमारी चुनौती है😂😍


8. बाबा साहब द्वारा किये कार्य के बाद दलित के उद्धार का कोई नया आविष्कार बताएं🙏


9. कांग्रेस द्वारा बनाए गए आर्थिक विषमता के मॉडल को अनुसूचित जाति जनजाति के सभी आरक्षित वर्ग के एमपी, एमएलए और आईएएस पीसीएस ने बनाए रखा🙏यही क्रीमी लेयर का आधार हुआ🙏

10. इसका फायदा ऊंची जातियों को ज्यादा हुआ, क्योंकि दलित जातियां तो मात्र 15-16 परसेंट शासन-प्रशासन के सरकारी पदों पर थे 85% तो सवर्ण बिरादरी के लोग ही आर्थिक विषमता की मलाई चाटते रहे😂 परंतु उनमें से कोई भी व्यक्ति क्रीमी लेयर में नहीं गिना जाता है😭


11. लेकिन हमारे समाज के भूखे एमपी एमएलए आईएएस पीसीएस ने कभी इस दृष्टिकोण से सोचा ही नहीं कि भारतीय संविधान के अनुसार आर्थिक समानता के मॉडल पर जोर दिया जाए 😂


12. मायावती उत्तर प्रदेश में आर्थिक समानता का मॉडल लागू कर सकती थी, परंतु वह तो जाकर मनु वादियों की गोद में बैठ गई, और अपनी बुद्धि को भ्रष्ट कर लिया🙏

13. मायावती माया की देवी हो गई,.... जबकि ब्राह्मणों की परंपरा में कहा जाता है माया की देवी लक्ष्मी और ज्ञान की देवी सरस्वती साथ-साथ नहीं बैठा करती😂 एक का वाहन उल्लू है तो दूसरे का हंस 😂 मायावती उल्लू पर सवार है तो दलित समाज का कैसे भला होगा😭


आज के लिए इतना आलोचना काफी है... लंका में आग लगाने के लिए😂


 दलित विरोधी सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक मॉडल के चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064

[11/12, 10:07 pm] kamleshmittra: 🌹 सूचना अतीत के पन्नों से दिनांक 11 दिसंबर 2024


आज से ठीक 2 साल पहले जो पत्र दिनांक 13 दिसंबर 2022 को भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट को लिखा था🙏उनके सिर की खुजली बन गया है😂


1. इस संदर्भ में 5 नवंबर 2024 को मा. सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को तलब किया गया था और 25 नवंबर 2024 को भारत सरकार की लॉ मिनिस्ट्री को CIC ने तलब किया था🙏फिर भी गला नहीं छूटा है 😂


2. अब या तो वह मुझे इंडिया गेट पर लका दें वरना मैं उन्हें इंडिया गेट पर लटका दूंगा😂


3. क्योंकि भारतीय दंड व्यवस्था के अंतर्गत आत्महत्या दंडनीय अपराध है 😂 हत्या के कारणो पर तो फिर भी विचार किया जाता है, परंतु आत्महत्या के साथ फाइल बंद कर दी जाती है😭 अथवा जेल में डाल दिया जाता है🙏


4. आत्महत्या के कारणो पर कोई विचार नहीं किया जाता और उत्प्रेरक को कोई दंड नहीं मिलता है

5. निकट भविष्य में भी इस पर कोई विचार किया जाएगा ऐसी कोई सूचना नहीं है इसलिए किसान, लघु उद्योगपति और व्यापारी, विद्यार्थी, निजी क्षेत्र के श्रमिक, अथवा पारिवारिक कलह से प्रतिवर्ष हजारों लोग आत्महत्या करते रहते हैं परंतु ना तो सरकार पर और ना ही न्यायपालिका पर इसका कोई फर्क पड़ता है 🙏


6. आओ हम सब मिलकर न्यायपालिका और भारत सरकार को इंडिया गेट पर उल्टा लटकाए 🙏


7. वह गोली चलाएंगे तो हम शाहिद कहलाएंगे, आत्महत्या से बच जाएंगे, और ना ही आत्महत्या करने वाले कायर कहलायेंगे 🙏 

8. यदि हमने उनको इंडिया गेट पर उलट लटका दिया तो हम क्रांतिकारी कहलाएंगे 😂 और देश का इतिहास स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा 😂

9. ब्रिटेन में आम जनता ने अपने राजा को 15 ईस्वी में फांसी पर लटका दिया था इसलिए ब्रिटेन की जागरूक जनता की शौर्य पताका पूरे विश्व पर फैली 😍


10. गीता में कृष्ण ने ऐसे ही कुछ उपदेश अर्जुन को दिए हैं, अब तो गीता पाठ्यक्रम का अंग है 🙏 इसलिए हमारा यह वचन उग्रवाद को बढ़ावा देने की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है 😂 अधर्म पर विजय के लिए धर्म युद्ध जरूरी है😍


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064


नोट :- किसी ने मेरा मोबाइल रिचार्ज करा दिया था इसलिए बकवास कर रहा हूं 😂 


अन्यथा तो आज मेरे पास रोटी खरीदने का पैसा नहीं है, किसी को फांसी पर लटकाने वाली रस्सी कहां से लाऊंगा😂


 इसलिए विरोधी खुश हो जाए 😂

[12/12, 12:57 am] kamleshmittra: शिकायत करने के बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय का तो आरटीई पोर्टल काम करने लगा है 🙏


 परंतु भारत सरकार कहते हैं संबंधित विभाग से संपर्क करो


जबकि संबंधित विभाग का ना तो टेलीफोन नंबर काम कर रहा है ना ईमेल आईडी काम कर रहा है🙏

मोदी है तो मुमकिन है 😂


 मायावती के शासनकाल में भी अधिकारी इतने ही निरंकुश थे😂


 एक बार जनता कुर्सी से उतार पाए तो दोबारा चढ़ाने नहीं देगी😂


 इसीलिए सारे अधिकारी मोदी के लिए चुनाव में धांधली करने पर जुट जाते हैं, क्योंकि मोदी है तो मुमकिन है 😂


अब तो किसी लेटर पर किसी अधिकारी का नाम भी नहीं आता है, 


 पैर से जूता निकाल कर हाथ में ले भी को तो यही नहीं पता लगेगा किसके सिर पर मारना है,, मोदी है तो मुमकिन है 😂

[12/12, 1:30 am] kamleshmittra: पिछले दो दिन से बहन जी की कोई पोस्ट नहीं आ रही है 🙏X पर सूना-सूना लग रहा है,मिश्रा ने लिखने से मना कर दिया क्या? या बहन जी ने सोच लिया मित्रा लिख रहा है तो मिश्रा के लिखने की जरूरत नहीं😂

[12/12, 12:21 pm] kamleshmittra: श्रीमान के.एल. रैदास जी,


एक तो मिशनरी शब्द का प्रयोग BSP की गतिविधियों के लिए बंद कर दो 🙏


1. क्योंकि हर शब्द का एक विषय होता है विषय के साथ शब्दों का संबंध होता है, मिशनरी शब्द का प्रयोग क्रिश्चियन की धार्मिक गतिविधियों के लिए किया गया था 🙏 बहुजन समाज पार्टी कोई भी धार्मिक कार्यक्रम नहीं कर रही है 🙏 इसलिए उसके साथ मिशनरी शब्द का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए🙏


2. बहुजन समाज पार्टी ने खुद को बौद्ध धर्म की गतिविधियों से भी दूर कर लिया है क्योंकि वह मनुवादियों की गोद में है, उसको अंबेडकर द्वारा स्थापित किए गए बौद्ध धर्म से भी कोई लेना देना नहीं है 🙏


3. वह सतीश मिश्रा द्वारा दिए गए त्रिशूल का प्रचार कर रही है🙏 अच्छा हुआ वह सत्ता में नहीं आई, नहीं तो पूरे भारत में परशुराम की प्रतिमाएं दिखाई देती 😂


4. मैं पहले भी कह चुका हूं आस्था की प्रतिमाएं बहुत ऊंची नहीं होती है, राजनीति की प्रतिमाएं बहुत ऊंची होती हैं 🙏


5. मायावती ने कहीं पर भी आस्था के प्रतिमाएं नहीं लगयीं है 🙏 केवल राजनीति की प्रतिमाएं लगाई हैं क्योंकि आस्था की प्रतिमाओं का जाड़ा गर्मी बरसात से भी संरक्षण करना होता है 🙏 और नियमित रूप से उसकी देखरेख के लिए एक व्यक्ति को नियुक्त करना पड़ता है जिसको मनुवाद की भाषा में पंडित कहते हैं, मुनी कहता है भिक्षु कहते हैं आदि 



इसलिए मेरा विशेष निवेदन है बीएसपी की गतिविधियों को मिशनरी मत कहिए 🙏


6. अब तो उसको राजनीति भी कहना व्यर्थ है, क्योंकि राजनीति भी सार्वभौमिक होती है, स्वार्थ नीति और परिवार नीति कहना ज्यादा ठीक है🙏


7. जहां तक जीतने और हारने का सवाल है, यह सब इच्छा शक्ति के खेल है 🙏 इस संदर्भ में मैं कल पोस्ट डाल चुका हूं🙏


8. बीएसपी को यदि पुनः खड़ा होना है तो अपने पुराने एजेंडे 15-85 पर काम करना होगा 🙏 15% से दूरी बनाकर रखना होगा🙏 15% से दूरी बनाना इसलिए आवश्यक है क्योंकि वह बुद्धि को भ्रष्ट कर देते हैं🙏 वह वर्टिकल विचारधारा के पोषक हैं, उनके जींस में वर्टिकल विचारधारा है🙏 जबकि आर्थिक समानता का मॉडल होरिजेंटल विचारधारा का मॉडल है 🙏


9. इसके साथ-साथ BSP आर्थिक समानता के मॉडल की उद्घोषणा करनी होगी🙏 क्योंकि मैं कह चुका हूं कि तीन राष्ट्रीय पार्टियां(INC, BJP और AAP) कितनी भी फ्री रेवड़ीयां बांट दें परंतु वह इस देश में आर्थिक समानता का मॉडल कभी भी लागू नहीं करेंगी यह बहुजन समाज पार्टी के लिए अवसर है 🙏


10. इसके बाद मैं गारंटी देता हूं, बीएसपी भारत की ही नहीं विश्व की सबसे प्रमुख राजनीतिक पार्टी होगी, जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति को हिला कर रख देगी 🙏WTO की पूंजीवादी व्यापार नीति जनकल्याणी व्यापार नीति में बदल जाएगी नीति 🙏


11. बाबा रामदेव का एक कथन बहुत अच्छा है-> "करने से होता है", उनके हाथ में कोई भाग्य रेखा नहीं है, परंतु उन्होंने कर्म को प्रधानता दी है 🙏


12. सभी विवादों को दरकिनार कर दिया जाए तो इस सत्य को स्वीकार करना ही होगा कि उन्होंने 30 साल के ही अंदर शून्य से आरंभ करके पतंजलि योगपीठ को मल्टीनेशनल कंपनी बना दिया है🙏 जोकि पूरे विश्व में अद्वितीय है 😍मैंने उसके साथ काम किया है, मैं भी इस बात से सहमत हूं "करने से होता है "🙏


13. प्रतिशोध में उसने सत्ता आसीन कांग्रेस पार्टी को 44 पर लाकर छोड़ा, संसद में विपक्षी का पद तक नहीं मिलने दिया🙏 इसलिए मैं सहमत हूं "करने से होता है भाई".

14. भाई भतीजा बाद फैलाने से नहीं होता है 🙏 योग्य व्यक्ति को करने का अवसर देने से होता है🙏 भाई भतीजा अथवा उत्तराधिकार का पद आकस्मिक दुर्घटनाओं के समय संगठन को भटकने से बचा लेता है 🙏 इसलिए बीएसपी में कर्मठ लोगों को कार्य करने का अवसर दिया जाना चाहिए🙏 आकाश आनंद का केवल उत्तराधिकारी होना ही प्राप्त है🙏

15. जैसे राजीव गांधी के साथ हुआ, राजीव गांधी राजनीतिक रूप से अपरिपज्ञता थे उसी प्रकार आकाश आनंद हैं, उन्होंने अभी भारत की जमीन का दर्शन नहीं किया है, राहुल गांधी भारत की जमीन का दर्शन कर रहे हैं इसलिए उनकी परिपक्वता बढ़ रही है 🙏

16. दुर्घटना के समय राजीव गांधी के सत्ताधीश हो जाने से कांग्रेस पार्टी बच गई, भारत देश बच गया अन्यथा, पड़ोसी पाकिस्तान, चीन खालिस्तानियों की आंतरिक अराजकता का लाभ उठाकर दिल्ली पर भी कब्जा कर सकते थे🙏 जैसा आजकल बहुत से राष्टों में हो रहा है😍

17. बहुजन समाज पार्टी करेगी तो होगा, खुद को मात्र मिशनरी कह देने से कोई परिवर्तन नहीं होगा, आप भी कहना बंद कर दो😂


दलित राजनीतिक और धार्मिक चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

Monday, 9 December 2024

जज पर क्रिया प्रतिक्रिया लेख

 [09/12, 10:51 pm] +91 85439 99786: December 9, 2024


Press Release


Smt. Brinda Karat, former Member of Parliament and Polit Bureau member of the Communist Party of India (Marxist), has written a letter to the Hon’ble Chief Justice of India, expressing grave concerns about a public speech made by Justice Shekhar Kumar Yadav of the Allahabad High Court. The letter highlights the implications of Justice Yadav’s remarks, delivered at a Vishwa Hindu Parishad (VHP) event, which undermines the principles of judicial impartiality and constitutional values.


We are herewith releasing the text of the letter.


 

(Muralidharan)

For CPI(M) Central Committee Office

 


 


December 9, 2024


Respected Hon’ble Chief Justice of India,


I am taking the liberty to write to you as I consider it my duty to draw your attention to the public speech made by a senior member of the judiciary, a justice of the Allahabad High Court, Justice Shekhar Kumar Yadav. This speech is in the public domain available on YouTube and has also been widely reported in the media today. Since it has been viewed/read by innumerable people and also commented upon on the social media platform X, its impact is undoubtedly much wider than the few hundred who may have been present when he spoke. It is therefore necessary and urgent that the Honourable Chief Justice of India should be apprised of the facts so that action may follow, thus this letter.


On Sunday December 8th, Justice Yadav attended a meeting organised by the Vishwa Hindu Parishad ( VHP) . The official website of the VHP ( vhp.org) states “ विहिप का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना, हिंदू धर्म की रक्षा करना, और समाज की सेवा करना है।” ( (The aim of the VHP is to organise the Hindu samaj, to protect the Hindu samaj and to serve it.)” Whether a senior judicial functionary should at all attend a function of a sectarian organisation is a serious issue. This is the first matter to which I draw the attention of the Hon’ble Chief Justice— the code of conduct for the judiciary.


The VHP meeting was to discuss several issues including the Uniform Civil Code and the Waqf Board Amendment Bill, on conversions. It is well known that these are issues on which communal campaigns are being run including by the VHP. This is the second issue— should members of the judiciary comment publicly on matters that are sub- judice or are being discussed in the legislatures?


Thirdly and most importantly is the actual speech made by Justice Yadav. I give below some parts of the speech which I have taken from the portal Bar and Bench. I have also heard many portions of the speech on various platforms. He said:


“I have no hesitation in stating that this is Hindustan, and this country will function according to the wishes of the majority living here. This is the law. It is not about speaking as a High Court Judge; rather, the law operates in accordance with the bahusankyak (majority). Consider this in the context of a family or society - only what ensures the welfare and happiness of the majority will be accepted," Justice Yadav said.


Further “ Lekin yeh jo kathmullah hai jo…yeh sahi shabd nahi hai…lekin kehne mein parhez nahi hai kyunki woh desh ke liye bura hai…desh ke liye ghatak hai, khilaaf hai, janta ko bhadhkane wale log hai…desh aage na badhe is prakar ke log hai…unse saavdhaan rehne ki zaroorat hai (But these kathmullah... this may not be the right word... but I won't hesitate to say it because they are harmful to the country...they are detrimental, against the nation, and people who incite the public. They are the kind of people who do not want the country to progress, and we need to be cautious of them),"


He said:


“In our country, we are taught from a young age to respect all living beings, even the smallest animals, and to avoid harming them. This lesson becomes a part of who we are, which is perhaps why we are more tolerant and compassionate, feeling pain when others suffer. But this isn't the case for everyone. In our culture, children are raised with guidance towards God, taught Vedic mantras, and instilled with the values of non-violence. However, in some other cultures, children grow up witnessing the slaughter of animals, which makes it difficult to expect them to develop tolerance and compassion.”


And again:


"Where the cow, the Gita and the Ganga define the culture, where every home has an idol of Harbala Devi, and every child is Ram - such is my country."


“Whether you are an advocate, a businessman, or a student, your identity as a Hindu comes first. Anyone who considers this land their mother and themselves as its child is a Hindu. Vivekananda also believed that only a Hindu has the potential to make this country a global leader, and no one else can do so. Never let this aspiration fade."


“He ended his lecture by saying that while Hindus are known for their non-violence and kindness, it should not be mistaken for cowardice. “(Bar and Bench).


These are some of the statements in his speech.


Honourable Chief Justice, Judges take their oath on the Constitution of India. This speech is a violation of that oath. This speech is a hate speech. This speech is an assault on the Constitution. This speech is an affront to the collective conscience of a secular and democratic country. That it should have been made by a justice of the Allahabad High Court is also an assault on the processes of justice. No litigant can hope for justice in a court in which a member holds such a biased, prejudiced, publicly expressed opinion against the minority community and in favour of a majoritarian approach.


Such a member brings disgrace to the bench, to the court, to the judicial system as a whole. There can and should be no place for such persons in a court of justice.


The country would no doubt be grateful for action from the highest court on this issue.


Yours sincerely,


Sd/-


(Brinda Karat)


Hon’ble Chief Justice

Supreme Court of India

New Delhi

[10/12, 3:39 am] kamleshmittra-SCI: जहां तक मुझे पता है उनका बयान हिंदी में है, इसलिए उसको हिंदी स्क्रिप्ट में लिखा जाना चाहिए साथ ही अंग्रेजी ट्रांसलेटेड वर्जन भी होना चाहिए🙏

इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का स्पष्ट उल्लेख करें, और उसके उस वीडियो को साक्ष्य के रूप में डाउनलोड भी कर ले 🙏


इस जस्टिस के खिलाफ सड़कों पर प्रोटेस्ट शुरू किया जा सकता है, परंतु पोस्टर में उसके नाम के आगे जस्टिस ना लिखा हो 🙏इस बात का विशेष ख्याल रखना है 🙏

उसके चेहरे का फोटो डाल सकते हो, इलाहाबाद हाई कोर्ट के नाम पर धब्बा कह सकते हो, लिख सकते हो🙏


आदि ऐसी बातें हो, जो उसको जज समाज से अलग करती हो, न्यायपालिका का सीधे अपमान ना करती हों 🙏 प्रोटेस्ट किया जा सकता है🙏😂


किसी भी सरकारी कर्मचारियों का सांप्रदायिक गतिविधियों में, देश की जनता को विभाजित करने वाली गतिविधियों में पार्टिसिपेट करना प्रतिबंधित है, मोदी सरकार ने जो छूट दी है, वह छूट जजों पर लागू नहीं होती है 🙏परंतु राष्ट्रीय विरोधी गतिविधियों के लिए तो बिल्कुल ही बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है 🙏

कहीं पर हमारे सहयोग की जरूरत है हम आपके साथ खड़े हैं 🙏


साक्ष्यों को अपने कस्टडी में जरूर ले लें क्योंकि ताकतवर लोग हमेशा साक्ष्य मिटाते हैं 🙏

Saturday, 7 December 2024

5 दिसंबर से 7 दिसंबर तक की पोस्ट

 [05/12, 9:55 am] kamleshmittra-SCI: सद्भाव एवं कृतज्ञता सूचना दिनांक 5 दिसंबर 2024


"payback to society " यह कथन सुनने में बहुत अच्छा लगता है, परंतु बहुत ही कम लोग इस बात को समझते हैं 🙏


अर्थात समाज से कुछ मिलेगा तो समाज को वापस करना भी होगा😂


मैं उन चंद लोगों में से हूं जिसे समाज से कुछ प्राप्त हो रहा है 🙏


अन्यथा तो लोग अपने श्रम से अथवा छल-कपट से प्राप्त कर रहे हैं, जो लोग अपने श्रम से या छल-कपट से प्राप्त कर रहे हैं उन पर "पे बैक टू सोसाइटी" का सिद्धांत लागू नहीं होता है 🙏


"पे बैक टू सोसाइटी" का सिद्धांत उन व्यापारी, दुकानदार, उद्योगपति, डॉक्टर वकील और मास्टर पर भी लागू होता है जो समाज से कुछ प्राप्त कर रहे हैं 🙏 लगभग हर धर्म में अपनी कुल आय का कुछ प्रतिशत समाज को वापस करने का निर्देश है 🙏


परंतु ऐसी दशा में वहीं लोग समाज को वापस करेंगे जिनको प्रत्यक्ष रूप से पता है कि समाज उनको देता है 🙏


जैसे परचून की चार दुकानो में से कुछ लोग अपने समाज के व्यक्ति द्वारा खोली गई परचून की दुकान से सामान खरीदता है तो "पे बैक टू सोसाइटी" का सिद्धांत लागू होता है🙏 अर्थात ऐसी दशा में यदि उसके सामाज का कोई कार्यक्रम होता है, तो मूलभूत आवश्यकताओं के लिए आवश्यक धन को छोड़कर इस परचूनी के दुकानदार को अधिक से अधिक धन दान के रूप में सामाजिक प्रोग्राम में देना चाहिए, क्योंकि उसकी अर्जित योग्यता धन कमाना है "इसी को "पे बैक टू सोसाइटी" कहते हैं🙏


परंतु उन चार दुकानों में समाज का कोई व्यक्ति अपनी किसी अन्य व्यक्ति से मित्रता निभाता है🙏 या अन्य किसी लोभ-लालच में दूसरी परचून की दुकान से सामान खरीदना है, अथवा समाज के अधिकतम लोग ऐसा करते हैं, तो उस परचूनी के दुकान वाले पर समाज को "पे बैक टू सोसाइटी" का सिद्धांत लागू नहीं होता है🙏


किसी सामाजिक संगठन को उससे दान मांगने नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी है कि वह समाज को प्रेरित करें कि वह उस विशिष्ट दुकानदार से ही सामान खरीदें, अगर कोई सामाजिक संगठन साल भर ऐसा कार्य नहीं करता है तो उस परचूनी की दुकान पर जाकर दान मांगने का कोई अधिकार नहीं है 🙏 क्योंकि उस परचूनी की दुकान पर "पेबैक 2 सोसाइटी" का सिद्धांत लागू नहीं होता है ऐसे दुकानदार को उस सामाजिक संगठन को कोई दान देना भी नहीं चाहिए, जो उससे दान मांगने चला आया है 😂


जिस प्रकार "पे बैक टू सोसाइटी" का सिद्धांत परचूनी की दुकान पर लागू होता है🙏 इस प्रकार अन्य व्यवसाय पर भी लागू होता है जैसे डॉक्टर वकील मास्टर 🙏 डॉक्टर वकील मास्टर आदि को भी अपनी अर्जित योग्यता को निशुल्क दान करना चाहिए🙏


2019 तक मैं अपने श्रम से कमाता था, अपनी मेहनत योग्यता का खाता था🙏 परंतु भोगल के रविदास मंदिर से यह सिलसिला शुरू हुआ कि मैं समाज के दान पर पल रहा हूं, इसलिए संत शिरोमणि गुरु रविदास के सभी प्रेमियों से मेरा विशेष लगाव है और मैं चाहता हूं एक अच्छे समाज का गठन हो, सभी सद्भाव से रहें और सबको उनका अधिकार प्राप्त हो 🙏


मैं अभी शासन स्तर पर संघर्ष कर रहा हूं, 30 दिन हो जाने के पश्चात भी शासन ने अभी तक लीगल नोटिस के रिमाइंडर ( सेकंड रिजाल्वर ) का जवाब नहीं दिया है कल मैंने उसको रिमाइंडर भेज दिया है 🙏


 रिमाइंडर के बाद अगली प्रक्रिया न्यायालय की तरफ ही जाती है, अभी मेरे पास AOR की डिग्री नही है, जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अधिकृत अधिवक्ता होते हैं, जिनको किसी पत्रावली को फाइल करने का अधिकार होता है, पत्रावली पर हस्ताक्षर करने का अधिकार होता है🙏 बहस तो अन्य अधिवक्ता भी कर सकते हैं, मैं भी कर सकता हूं🙏


जून 25 में हमारा तीसरा प्रयास है, जब तक हमारे हाथ में हस्ताक्षर करने की शक्ति नहीं आ जाती, हम केस फाइल करने के लिए दूसरे AOR पर निर्भर है 🙏


 इसलिए 2019 के बाद से मैं लगातार इसमें विलंबित करता रहा हूं, क्योंकि कोरोना कल में मेरी पढ़ाई डिस्टर्ब हो गई, मेरा लैपटॉप चोरी हो गया सारी अध्ययन सामग्री उसी पर थी 🙏

 2023 की परीक्षा शीघ्रता से कर दी गई उस परीक्षा में बैठने के लिए मैं लगातार लिखा पढ़ी करता रहा हूँ🙏 परिणाम अपेक्षा के अनुसार नहीं मिला, क्योंकि हर जगह कुछ धांधली चलती है, जहां मोनोपोली हो पेपर लीक आसानी से होते हैं 🙏 किसको पास करना है किसको फेल यह निश्चित होता है🙏


इसलिए जनवरी 2024 में मैंने सामाजिक संघर्ष में उतारने का फैसला किया, और जनवरी 2024 से मैं तुगलकाबाद रविदास मंदिर के मामले में सक्रिय हुआ हूँ 🙏


अब सन 2025 की परीक्षा के लिए मात्र 6 माह बचा है, मैं अपना अधिकतम ध्यान पढ़ाई की ओर दूंगा, और समाज से अपेक्षा करूंगा वह मेरा आर्थिक सहयोग अगले 6 महीने तक करते रहें 🙏 क्योंकि मैं पिछली बार की तरह किसी लॉ फॉर्म को ज्वाइन करता हूं तो 12-14 घंटे की ड्यूटी करने के पश्चात मेरे पास पढ़ने के लिए समय नहीं होगा🙏


कल रात मेरे मोबाइल का रिचार्ज खत्म हो गया, मेरे पास इतने पैसे नहीं थे कि मैं रिचार्ज कर सकूं🙏 परंतु समाज के एक सज्जन व्यक्ति ने हमारा मोबाइल रिचार्ज किया है🙏 इसलिए आज की यह पोस्ट आपके साथ शेयर कर पा रहा हूं🙏


मेरे ऊपर "पे बैक टू सोसाइटी" का सिद्धांत लागू होता है🙏 मैं अधिक से अधिक समाज को वापस करने का प्रयास करूंगा यह वचन देता हूं🙏


यदि मैं किसी से कुछ कठोर बोल दूं तो यह उसके प्रति मेरी नफरत या घ्रड़ा नहीं होती है बल्कि यह अपेक्षा होती है कि उसमें सुधार हो, क्योंकि मैं अध्यात्म की गहराइयों में उतरकर यह जान चूका है कि अगले स्टेशन पर उतर जाना है, प्रतिक्षण यह याद रहता है, जो लोग आध्यात्म की गहराइयों से नहीं गुजरते उन्हें याद नहीं रहता 🙏


इसलिए जब तक इस समाज रूपी ट्रेन के डब्बे में हो प्रेम से बतियाते चलो😂


 संदेश वाहक : आध्यात्मिक गुरु अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

[05/12, 10:32 pm] kamleshmittra: आज अपनी ही इस पोस्ट पर कुछ लिखने का मन कर रहा है😂


जीने के बहाने लाखों थे,

जीना तुझको आया ही नहीं,

कोई भी तेरा हो सकता था, कभी तूने अपनाया ही नहीं 🙏


उपरोक्त चार लाइन मेरे जीवन के अत्यंत ही निकट हैं 🙏


जब भी मैंने अपने जीवन में बड़े फैसले लिए, मन में सदैव एक दुविधा रही आगे की योजना फेल हो गई तो क्या होगा 🙏


एक लंबी श्रृंखला है, हम जुआरियो की 🙏


तब तब संत कबीर हमारे मार्गदर्शक बने 🙏


जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ, मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ 😂 


संत शिरोमणि कबीर ने भी समाज को बार-बार ललकार है कि अपने भय के संस्कार निकाल दो, क्योंकि समाज में संतुलन तराजू की नोक पर ही आ सकता है जब दोनों ही पड़लो में वजन बराबर होगा 😂


 संत शिरोमणि रविदास ने कहा है, 


रैदास मदुरा का पीजिए, जो चढ़ै उतराय।

नांव महारस पीजियै, जौ चढ़ै उतराय॥

 🙏


दोनों ही मान्य संत भय के संस्कारों को नष्ट करने के लिए, नाना उपाय बता रहे हैं😂


 करने से होता है😂

 कृपा करें ना कोई 😂


आचार्य रजनीश के जीवन की एक घटनाएं है 🙏


जब धर्म का प्रचार प्रसार कर रहे थे, तो उनके एक मित्र उनको भारत के श्रेष्ठ उद्योगपति बिरला जी के पास लेकर गए, ऐसा माना जाता है कि बिरला जी धर्म के कार्य में बहुत दान पुण्य किया करते थे 🙏


दान देने के लिए तो बिरला जी तैयार हो गए परंतु यह शर्त डाल दी कि धर्म प्रवचन करना क्या है? 😂


आचार्य रजनीश ने भारत के महान उद्योगपति बिरला जी के दान को लात मार दी, और कहा यह ना बताओ कि उस दान की रकम से मुझे क्या करना है 🙏


आचार्य रजनीश का कथन था " यदि मैं आपके दिए गए दान को आग भी लगा दूं तो आप मुझसे पलट कर नहीं पूछेंगे तब तो मुझे दान दें "🙏


वास्तव में उद्योगपति और व्यापारियों द्वारा किसी धर्मात्मा को दिए गए दान से श्रमिक वर्ग को मानसिक गुलाम बनाया जाता है😂 समानता के लिए कोई धर्म प्रवचन नहीं किया जाता, मलिक को भगवान के तुल्य रखा जाता है, मलिक को परमात्मा का पैगंबर बताया जाता है, इस प्रकार गुलामी कठोर होती जाती है 🙏


धर्म प्रवचन इस प्रकार किए जाते हैं ताकि लोग मानसिक गुलाम बने, ध्यान की पद्धतियों में विकार उत्पन्न कर दिया जाता है ताकि लोग निर्भय ना हो पाएं 🙏


 उद्योगपति बिरला से दान ना लेने के बाद भी, आचार्य रजनीश को मिले दान से अमेरिका सरकार हिल गई, क्योंकि प्यासे को ही पानी की कीमत का पता होता है 🙏


 मैं जो बेंचता हूं उसका खरीदार कोई नहीं है 🙏😂 दलित समाज का क्रीमी लेयर आर्थिक समानता नहीं चाहता है......


इसके साथ मैं ऑडियो मैसेज संलग्न कर रहा हूं- क्योंकि पंजाब और हरियाणा से आने वाले बहुत से लोग हमारे इस टेक्स्ट मैसेज को नहीं पढ़ पाते हैं 🙏


 उनकी सुविधा के लिए मैं अब अधिकांश मैसेज ऑडियो ही डालूंगा🙏


 नाम लिखने की जरूरत है क्या? 😂

[06/12, 6:59 pm] kamleshmittra: साधना के पथ पर आध्यात्म की गहराइयों तक यदि आप पहुंच चुके हैं तो बिना शब्दों को ध्यान दिए हुए, राग के कारण शरीर में उत्पन्न होने वाली ऊर्जा को महसूस करने का प्रयास करें🙏

बहुत ही अद्भुत ऊर्जा है, शब्द तो इस राग को उत्पन्न करने की मात्रा बैसाखी है 🙏


इसी प्रकार संपूर्ण श्री गुरु ग्रंथ साहिब रागों से भरा हुआ है, यदि रागो का सही से गायन कर दिया जाए तो वहां पर बैठा हुआ व्यक्ति ऊर्जा से भर जाता है 🙏


इसलिए जिनको पंजाबी नहीं आती है वह भी गुरुद्वारे में बैठकर राग को सुनते हैं तो उनको आनंद प्राप्त होता है 🙏🌹

[07/12, 7:21 am] kamleshmittra: 🌹डॉ बी आर अंबेडकर की पुण्यतिथि के अवसर पर सूचना : दिनांक 7 दिसंबर 2024


🌹इस ग्रुप के सभी सदस्यों को सूचित किया जाता है कि कृपया इस ग्रुप में अपनी बात कहें, अपने विचार प्रस्तुत करें


1. आर्थिक समानता पर आपका क्या दृष्टिकोण है यह बताएं🙏


2. किसी राजनीतिक पार्टी द्वारा बनाए गए कचरे(वीडियो और वीडियो लिंक) को इस ग्रुप में डालने का प्रयास न करें, अगर पूछने की हिम्मत है तो अपनी राजनीतिक पार्टी से पूछें वह आर्थिक समानता के विषय पर क्या कर रही है और उसका क्या दृष्टिकोण है🙏 उसको इस ग्रुप में डाल सकते हो, बता सकते हो आर्थिक समानता के विषय पर आपकी राजनीतिक पार्टी का यह दृष्टिकोण है🙏 क्योंकि राजनीतिक पार्टियों द्वारा बनाए गए कचरे से हमारे आर्थिक समानता के मिशन को कुछ भी प्राप्त नहीं हो रहा है 🙏


3. क्या आपको नहीं लगता इस देश में आर्थिक समानता होनी चाहिए?


4. सरकारी क्षेत्र हो या निजी क्षेत्र उसमें जितने भी पद हैं सभी का मूल वेतन समान होना चाहिए, सभी को महंगाई भत्ता सामान मिलना चाहिए, सभी को रहने के लिए अकोमोडेशन समान होना चाहिए यह तो मानव होने के कारण मिलना चाहिए🙏


5. यह ग्रुप भारतीय संविधान और संत शिरोमणि गुरु रविदास के विचारों को अग्रसारित करने के लिए है🙏


6. आप मात्र ₹2 की नौकरी के लिए किसी राजनीतिक पार्टी की पोस्टों को इस ग्रुप में शेयर कर रहे हैं इससे आपकी आर्थिक समानता की चित्त चेतन की हानि होगी, आपकी आने वाली पीढियां को आर्थिक समानता का कोई लाभ नहीं मिलेगा🙏


7. अपने और अपने समाज के भविष्य के लिए आर्थिक समानता के मिशन को आगे बढ़ाएं🙏


8. निजी क्षेत्र हो या सरकारी क्षेत्र सभी का मूल वेतन समान होना चाहिए साथ ही उनके रहने के लिए मिलने वाला अकोमोडेशन समान होना चाहिए क्योंकि सब को दो बच्चों की अनुमति हैं सबकी एक बीवी होती है और सबके एक ही सास-ससुर होते हैं, इसलिए मनुष्य-मनुष्य के बीच का भेद समाप्त होना चाहिए🙏😂


9. निजी क्षेत्र के अंतर्गत या सरकारी क्षेत्र के अंतर्गत मिलने वाले अकोमोडेशन बराबर का होना चाहिए मूल वेतन और रहने का स्थान बराबरी का होना चाहिए यह मनुष्य होने के कारण होना चाहिए, महंगाई भत्ता भी समान रूप से बढ़ना चाहिए🙏


10. योग्यता भत्ता, रिस्क भत्ता, यात्रा भत्ता, वार्षिक वेतन वृद्धि भी अमानवीता के स्तर तक ना हो, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन भी समान होनी चाहिए 😂


11. आर्थिक समानता के आंदोलन की बात करें, निजी क्षेत्र में हो रहे शोषण के खिलाफ आवाज उठाएं 🙏 भारत की संसद में कल ही एक माननीय सांसद ने बात रखी है कि निजी क्षेत्र में शोषण अत्यधिक है लोग आत्महत्या कर रहे हैं, इस शोषण के खिलाफ एकजुट हो जाओ, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाओ 🙏मात्र ₹2 की पोस्टों के लिए संघर्ष करने से काम नहीं चलेगा🙏



12. भाजपा हटाओ कांग्रेस लाओ से भी काम नहीं चलेगा 😂 क्योंकि चोर चोर मौसेरे भाई हैं सब खाए आघाये लोग हैं, कोई दोस्त को ठेके दिला रहा है कोई जीजा को ठेके दिलाएगा 😂

13. गरीब जनता के हाथ में कुछ नहीं आएगा🙏 इसलिए जोर-जोर से आर्थिक समानता की बात उठाओ, सड़कों पर निकाल कर आओ, छोटे-मोटे आंदोलन बंद करो, हर बेरोजगार युवा के आंदोलन के साथ खड़े हो जाओ, बिहार हो या उत्तर प्रदेश, सी-सेट हो या नॉर्मलाइजेशन, सब युवाओं को ठगने के सूत्र हैं 😂


14. अपने कल्याण की बात करो, रविदास राज में कल्याण समाया है 😂 भारतीय संविधान के प्राम्बल को लागू करने से ही कल्याण होगा🙏


अर्थव्यवस्था की चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @ 9335122064

अधिवक्ता दिनेश का प्रश्न और उत्तर

 [06/12, 10:19 pm] C91 Adv.Dinesh Singh LL.M. साकेत कोर्ट: भारत के संविधान की उद्देशिका का सटीक विश्लेषण ~


उद्देशिका बनने का इतिहास~


 जब संविधान सभा का गठन कर लिया गया और संविधान सभा के लिए स्थाई अध्यक्ष का चुनाव कर लिया गया उसके बाद देश का संविधान संविधान सभा कैसा बनाएगी इसके संबंध में नेहरू जी ने 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में जोरदार भाषण दिया। 

और उसके बाद नेहरू जी ने संविधान सभा में उद्देश्य प्रस्ताव प्रस्तुत किए। यह उद्देश्य प्रस्ताव सारतः वही उद्देश्य प्रस्ताव थे जिन्हें कांग्रेस पार्टी ने अपने मेरठ के खुले अधिवेशन में 20 नवंबर 1946 को पास किया था।


प्रस्ताव में कहा गया था~


"(1) यह संविधान-सभा अपने इस दृढ़ और गम्भीर संकल्प की घोषणा करती है कि वह भारत को एक स्वतन्त्र प्रभुसत्ता सम्पन्न गणराज्य घोषित करेगी और उसके भावी शासन के लिए एक ऐसे संविधान की रचना करेगी,


(2) जिसके अन्तर्गत वे राज्य क्षेत्र जो ब्रिटिश भारत के अन्तर्गत आते हैं, वे राज्य-क्षेत्र जो अब देशी राज्यों के अन्तर्गत प्राते हैं और भारत के ऐसे अन्य भाग जो ब्रिटिश भारत के बाहर हैं और ऐसे राज्य तथा राज्य क्षेत्र जो स्वतन्त्र प्रभुत्व सम्पन्न भारत के भीतर सम्मिलित होने के लिए प्रस्तुत हैं, घापस में मिलकर एक संघ के रूप में गठित होंगे,


(3) जिसके अन्तर्गत उपर्युक्त राज्य क्षेत्र जिनमें चाहें तो उनकी वर्तमान सीमाएं सम्मिलित हों या अन्य ऐसी सीमाएँ सम्मिलित हों जिनका संविधान सभा भविष्य में संविधान की विधि के अनुसार निर्णय करे, स्वायत्तंशासी एककों की सत्ता से सम्पन्न होंगे और उसे बनाये रखेंगे। उनके पास अवशिष्ट शक्तियाँ होंगी और वे सरकार तथा प्रशासन की सारी शक्तियों का प्रयोग करेंगे तथा उनके सारे कार्य करेंगे। इसके अपवाद केवल वे शक्तियां और कार्य होंगें जो संघ में विहित हों या संघ को सौंपे गये हों ।


(4) जिसके अन्तर्गत प्रभुत्व-सम्पन्न और स्वतन्त्र भारत की, उसके अंगभूत भागों और शासन के अंगों की समूची शक्ति और सत्ता जनता से प्राप्त हुई हों,

(5) जिसके अन्तर्गत विधि तथा सार्वजनिक नैतिकता के अधीन रहते हुए भारत के सभी लोगों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय की स्थिति और अवसर की तथा विधि के सम्मुख समानता की, विचार, अभिव्यक्ति पर कु विश्वास, धर्म, उपासना, व्यवसाय और कार्य की गारण्टी दी जायेगी और उन्हें प्राप्त किया जायेगा,


(6) जिसके अन्तर्गत अल्पसंख्यकों, पिछड़े हुए और कबाइली क्षेत्रों तथा दलित और अन्य पिछड़े हुए वर्गों के लिए उपयुक्त परिवारणों की व्यवस्था को प्रस्त की जायेगी, और


(7) जिसके अन्तर्गत न्याय तथा सभ्य राष्ट्रों की विधि के अनुसार गणराज्य के राज्य-क्षेत्रों की अखण्डता की और जल, समुद्र तथा आकाश पर उसके प्रभुता-अधिकारों की रक्षा की जायेगी, श्रीर


(8) यह प्राचीन देश संसार में अपना न्यायपूर्ण और सम्मान्य स्थान प्राप्त करेगा और विश्वशान्ति तथा मानव जाति के कल्याण के उन्नयन के लिए अपना पूर्ण तथा सहर्ष योग देगा ।"


संविधान सभा में नेहरू जी के द्वारा प्रस्तुत किए गए उद्देश्य प्रस्ताव पर 17 दिसंबर 1946 को बोलने के लिए डॉक्टर अंबेडकर को कहा गया,

बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने अपने विचार व्यक्त करने से पहले कहा था कि इस प्रस्ताव पर बोलने के लिए आपने मुझे आमंत्रित किया है मैं अवश्य ही है स्वीकार करूंगा कि मैं आपका आमंत्रण पाकर मैं आश्चर्यचकित हो गया हूं सूची में 20-22 सदस्यों का नाम मुझ से ऊपर है और इसलिए मैं समझता था कि अगर बोलने का मौका भी मिलेगा तो कल मिलेगा मैं पसंद भी यही करता कि कल बोलने का मौका मिलता क्योंकि आज मैं बिना किसी तैयारी के आया हूं मैं चाहता था कि इस अवसर पर एक विस्तृत वक्तव्य दो और उसके लिए मैं तैयारी कर लेना चाहता था इसके अलावा आपने वक्ताओं के लिए 10 मिनट का समय निर्धारित कर दिया है इन सब और सुविधाओं के बीच में मैं नहीं समझ पाता कि प्रस्तुत प्रस्ताव पर समुचित रूप से किस तरह बोल पाऊंगा।

अपने विचार प्रस्तुत करते हुए उन्होंने कहा कि प्रस्ताव के पैराग्राफ 5, 6, 7 सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय में कोई विरोधाभास नहीं है, परंतु पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इनकी विशेष व्याख्या नहीं की कि यह न्याय कैसे मिलेगा ? इसलिए यह कहना निराशाजनक है। हमारे देश में बहुत ही दकियानूसी पुरातन पंथी विचारधारा के लोग रहते हैं जो जाति और धर्म को देश से ऊपर मानते हैं संपत्ति और स्वतंत्रता को बिना कानून के हासिल नहीं किया जा सकता है जब तक लोग देश को जाति और धर्म से ऊपर नहीं मानेंगे कृषि और उद्योग धंधों का और भूमिका राष्ट्रीयकरण नहीं होगा तब तक आने वाली सरकारी किस प्रकार सामाजिक न्याय कर सकेंगे यह है कल्पना विहीन है निराशाजनक है उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने केवल चुनिंदा सुंदर और विद्वतापूर्ण शब्दजाल को संविधान के उद्देश्य प्रस्ताव में डाला है। यह बहुत ही निराशाजनक है।

             उद्देशिका के पैराग्राफ 4 इसे गणतांत्रिक भी कैसे कहा जा सकता है जबकि आज सभी की भागीदारी नहीं है।( संविधान सभा के सदस्यों के चुनाव के लिए सीमित लोगों को ही मतदान का अधिकार था जिसमें संपत्ति शिक्षा व करदाता होना मुख्य शर्तें थी) जैसा डॉक्टर ने भी कहा था कि मुस्लिम लीग संविधान सभा में उपस्थित नहीं है इसलिए इस सभा को स्थगित कर दिया जाय। (पैराग्राफ 3 लोकतांत्रिक)

लोकतंत्र भी गणतंत्र की तरह विरोधाभासी है लोकतंत्र राज्य का नाम ही नहीं होता बल्कि जब तक लोगों की जीवन पद्धति नहीं बन जाते तब तक कोई राज्य लोकतांत्रिक कैसे हो सकता है लोकतंत्र के तीन अंग होते हैं समता स्वतंत्रता और बंधुता इनमें से एक के भी ना होने पर लोकतांत्रिक व्यवस्था संभव ही नहीं है।

लोकतंत्र की पहली शर्त है समानता जब तक राष्ट्र की अर्थव्यवस्था समाजवाद पर आधारित नहीं होगी तब तक राष्ट्र लोकतांत्रिक होना संभव नहीं है । 

हमारा देश सामाजिक आर्थिक सांस्कृतिक स्तर पर विभाजित है तब यह संविधान लोकतांत्रिक गणराज्य कैसे बनेगा क्या प्रावधान होगा ऐसा पंडित जवाहरलाल नेहरू ने कुछ नहीं बताया इसलिए पैराग्राफ 3,4 (लोकतांत्रिक गणराज्य) विरोधाभासी है।

कुल मिलाकर बाबासाहेब डॉक्टर अंबेडकर ने इन उद्देश्य प्रस्तावों की भरपूर आलोचना की थी वे इससे पूर्ण रूप से असंतुष्ट थे,

वे इन्हें निराशाजनक बता रहे थे,

 और बाबा साहब ने यह भी कहा था कि इसमें विद्वतापूर्ण चुने हुए शब्दों की भरमार है परंतु ऐसा करने का कोई प्रावधान नहीं बताया कि यह कैसे होगा ? इसे संविधान में लागू कैसे करेंगे ???

 इसलिए नेहरू जी के द्वारा प्रस्तुत उद्देश्य प्रस्ताव निराशाजनक है।


उद्देशिका किसी भी किताब का पूर्ण परिचय करवाती है किताब में क्या-क्या लिखा है यह बात हम उस किताब की उद्देशिका पढ़कर आसानी से जान जाते हैं लेकिन यह बात भारत के संविधान की उद्देशिका के बारे में कतई सत्य नहीं है, इस बात को मैं संविधान की उद्देशिका के एक-एक शब्द का विश्लेषण करके यह समझाने का प्रयास करूंगा कि जो संविधान की उद्देशिका में लिखा है वह भारत के संविधान में किसी भी अनुच्छेद में प्रावधान नहीं किया गया है।

भारत के संविधान की उद्देशिका बर्मा के संविधान की उद्देशिका की नकल है ~


बर्मा का संविधान सर बीएन राव ने बनाया था सर बीएन राव ने ही भारत के संविधान का असली ड्राफ्ट बनाकर तैयार किया था, जिस पर संविधान सभा में बहस हुई थी, इसी संविधान में संशोधन संविधान सभा ने किए थे।


बर्मा के संविधान की उद्देशिका पढ़िए ~ 


THE CONSTITUTION

THE UNION OF BURMA.


OF


PREAMBLE.


WE, THE PEOPLE OF BURMA including the Frontier

Arcas and the Karenni States, Determined to establish

in strength and unity a SOVEREIGN INDEPENDENT

STATE, To maintain social order on the basis of the eternal

principles of JUSTICE, LIBERTY AND EQUALITY and

To guarantee and secure to all citizens JUSTICE social,

economic and political; LIBERTY of thought, expression,

belief, faith, worship, vocation, association and action;

EQUALITY of status, of opportunity and before the law,

IN OUR CONSTITUENT ASSEMBLY this Tenth day of

Thadingyut waxing, 1309 B.E. (Twenty-fourth day of

September, 1947 A.D.), DO HEREBY ADOPT, ENACT

AND GIVE TO OURSELVES THIS CONSTITUTION.


अब भारत के संविधान की उद्देशिका पढ़िए~


THE CONSTITUTION OF INDIA

WE, THE PEOPLE OF INDIA, having solemnly

resolved to constitute India into a 1[SOVEREIGN

SOCIALIST SECULAR DEMOCRATIC REPUBLIC] and

to secure to all its citizens:

JUSTICE, social, economic and political;

LIBERTY of thought, expression, belief, faith and

worship;

EQUALITY of status and of opportunity;

and to promote among them all

FRATERNITY assuring the dignity of the individual

and the 2[unity and integrity of the Nation];

IN OUR CONSTITUENT ASSEMBLY this twenty-

sixth day of November, 1949, do HEREBY ADOPT,

ENACT AND GIVE TO OURSELVES THIS

CONSTITUTION.


क्या संविधान की उद्देशिका बाबा साहब डॉ अंबेडकर ने लिखी है ??? 


भारत के संविधान की उद्देशिका बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने नहीं लिखी है, अब आपको बता दें जब बाबा साहब डॉ अंबेडकर को लग गया था कि अब वे संविधान सभा में नहीं जा पाएंगे। तब उन्होंने अपने लोगों के अधिकारों के रक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए 15 मार्च1947 को संविधान सभा को दिया था जो संविधान के रूप में था। जिसमें संविधान की प्रस्तावना, मूल अधिकार, राजकीय समाजवाद आदि महत्वपूर्ण चीजें प्रस्तावित थी। हम यहां केवल बाबा साहब डॉ अंबेडकर के द्वारा प्रस्तावित प्रतावना पर चर्चा करेंगे।

प्रस्तुत है बाबा साहब डॉ अंबेडकर के विचारों के असली संविधान राज्य और अल्पसंख्यक की प्रस्तावना~

संयुक्त राज्य भारत का संविधन


प्रस्तावित उद्देश्यका


प्रांत और केन्द्र प्रशासित क्षेत्र नामक प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित ब्रिटिश भारत राज्य क्षेत्रों के और देशी राज्यों के राज्य क्षेत्रों के हम लोग, इन राज्य क्षेत्रों का एक परिपूर्ण संघ बनाने की दृष्टि से यह आदेश करते हैं कि प्रांत और केन्द्र प्रशासित क्षेत्र (जिन्हें बाद में राज्य कहा जाएगा) तथा देशी राज्य एक साथ मिलकर संयुक्त राज्य भारत नाम से विधायी कार्यकारी और प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए एक राज-निकाय का गठन करेंगे और इस प्रकार निर्मित संघ अविघटनीय होगा तथा इसका उद्देश्य इस प्रकार होगा :


(i) अपने लिए और अपनी भावी पीढ़ियों के लिए संपूर्ण संयुक्त राज्य भारत में स्वशासन तथा सुशासन, दोनों का वरदान प्राप्त करना,


(ii) प्रत्येक देशवासी के जीवन स्वतंत्रता तथा सुख प्राप्त करने और


वाक् - स्वातंत्र्य एवं धर्म-स्वातंत्र्य संबंधी अधिकार का अनुरक्षण करना,


(iii) सुविधा-वंचित वर्गों को बेहतर अवसर सुलभ कराते हुए सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक विषमता को दूर करना,


(iv) प्रत्येक देशवासी के लिए अभाव और भय से मुक्ति दिलाने को संभव बनाना, और


(v) आंतरिक अव्यवस्था और बाह्य आक्रमण को रोकने की व्यवस्था करना ।


उपर्युक्त से हम संयुक्त राज्य भारत के लिए इस संविधान की स्थापना करते हैं।


बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर के विचारों का असली संविधान भारत सरकार ने बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर के जो वॉल्यूम छपवाए हैं उनमें वॉल्यूम नंबर दो पेज नंबर 157 ( नया संस्करण ) और पुराने संस्करण में वॉल्यूम नंबर 2 में पेज नंबर 167 पर बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर के विचारों का असली संविधान दिया हुआ है, जिसके बारे में ज्यादातर अंबेडकरवादी वाकिफ नहीं हैं।

आप सच्चाई जानने के लिए बाबा साहब डॉ अंबेडकर के विचारों के असली संविधान को पढ़िए…..


भारत के संविधान की उद्देशिका को समझने के लिए आइए सबसे पहले हम भारत के संविधान की उद्देशिका पढ़ते हैं…..


हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :

सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय,

विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता,

प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए 

तथा,

उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखण्डता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढाने के लिए,

दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0 को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"


संविधान के उद्देशिका की शुरुआत हम भारत के लोग शब्द से होती है हम भारत के लोग कौन हैं इसे समझने के लिए हम संविधान के उद्देशिका का प्रथम पैरा पढ़ते हैं …


हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को :

उद्देशिका का प्रथम पैरा कहता है कि हम भारत के लोग भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को….

बस यहीं से संदेह की शुरुआत होती है हम भारत के लोग यदि संविधान की उद्देशिका बना रहे हैं संविधान बना रहे हैं तो उसके समस्त नागरिकों को शब्दावली का प्रयोग क्यों करेंगे ??? 

फिर पूरा पैरा इस प्रकार होगा….

"हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए और अपने आप को…….."

क्योंकि हम भारत के लोग जो भी चीजें दे रहे हैं वह अपने आप को दे रहे हैं इसलिए यहां व्याकरण के रूप से अपने आपको शब्द प्रयोग होगा न कि समस्त नागरिकों को यदि हम भारत के संविधान की उद्देशिका का इंग्लिश वर्जन पढ़ते हैं तो उसमें शब्दावली का प्रयोग है "We the people….. इंग्लिश के व्याकरण के नियमानुसार यदि noun we the people है तो pronoun 'us' का प्रयोग होगा न कि 'aal its citizen'

हम भारत के लोग शब्द को अंतिम पैरा के साथ मिलाकर पढ़ा गया तो वह इस प्रकार से है ~

हम भारतके लोग……...दृढ संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई0 को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं।"

जब हम भारत के लोग शब्द को अंतिम पैरा के साथ मिलाकर पढ़ा जाए तो स्पष्ट होता है कि हम भारत के लोग दृढ़ संकल्पित होकर अपनी इस संविधान सभा में आज 26 नवंबर 1949 को एतद द्वारा इस संविधान को अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं,

और भारत के संविधान को संविधान सभा में अंगीकृत अधिनियमित और आत्मार्पित किया है संविधान सभा के लोगों ने…… ना कि हम भारत के लोगों ने क्योंकि संविधान सभा में संविधान सभा के लोग थे….

"हम भारत के लोग नहीं।

अब हम -

(1)"हम भारत के लोग" शब्दावली को समझते हैं~

24 मार्च 1946 को तीन सदस्यों का मंत्री मिशन (कैबिनेट मिशन) नई दिल्ली आया मिशन ने 16 मई 1946 को अपनी योजना प्रकाशित की तो उसने भारत के संविधान को बनाने के लिए संविधान सभा के गठन के लिए बहुत से नियम और शर्तें तय की थी, उन नियम और शर्तों में एक शर्त यह भी थी कि संविधान सभा का चुनाव वयस्क मताधिकार के आधार पर होगा….

मंत्री मिशन के द्वारा संविधान सभा के संगठन के संबंध में कांग्रेस पार्टी को जब उसकी रिपोर्ट प्राप्त हुई तो कांग्रेस पार्टी ने यह कहकर आपत्ति खड़ी कर दी वयस्क मताधिकार के आधार पर हम संविधान सभा का चुनाव कराएंगे तो उसके लिए हमें नए सिरे से वोटर लिस्ट बनानी पड़ेगी उसमें हमारा बहुत समय खराब हो जाएगा और इस प्रकार हम हम संविधान सभा के गठन में ही बहुत समय लगा देंगे, तो संविधान बनने में देरी हो जाएगी और इस प्रकार भारत को आजादी मिलने में बहुत देर हो जाएगी, इसलिए निर्वाचन की जो प्रक्रिया है वह 1935 के भारत सरकार अधिनियम के अनुसार दिए गए मताधिकार के आधार पर ही होगी।

अंग्रेजों ने 1935 में भारत सरकार अधिनियम बनाकर वोट डालने का अधिकार केवल उन्हीं लोगों को दिया ~

1. जिनके पास अचल संपत्ति हो।

2. जो सरकार को टैक्स देते हों।

3. जो कम से कम अपर वर्णाकुलम(हाई स्कूल) तक पढ़े लिखे हों।


इन तीन शर्तों के आधार पर लगभग 90 फ़ीसदी आबादी वोट डालने के अधिकार से वंचित थी क्योंकि ज्यादातर भारतीय इन तीन शर्तों को पूरा ही नहीं कर पाते थे।

इन तीन शर्तों के आधार पर साढ़े 11%लोगों को ही वोट डालने का अधिकार था।

1931 की जनगणना के अनुसार उस समय भारत की आबादी 25 करोड़ 60 लाख थी जिसमें से महज तीन करोड़ लोगों को वोट डालने का अधिकार था।

1935 के अधिनियम की शर्तों के अनुसार वोट डालने का अधिकार उन्हीं लोगों को था जो उन तीन शर्तों को पूरा करते हो इस हिसाब से जमींदार,रियासतदार,राजा, रजवाड़े, पूंजीवादी और सावंतवादी लोगों को ही वोट डालने का अधिकार था, और वंचित वर्ग के पढ़े लिखे लोगों भी को वोट डालने का अधिकार था,परंतु वंचित वर्ग में पढ़े-लिखे लोग न के बराबर थे।

जब इस आधार पर संविधान सभा का गठन हुआ तो तो भारत का लगभग 90 फ़ीसदी तबका जिसमें ज्यादातर वंचित वर्ग ही था, वोट डालने के अधिकार से वंचित था।

इस प्रकार संविधान सभा में भारत के लगभग 90 फ़ीसदी लोगों का कोई प्रतिनिधि चुनकर नहीं पहुंच पाया।

हम भारत के 90 फ़ीसदी लोग वोट डालने के अधिकार बंद से वंचित थे,

तो वे संविधान सभा में कैसे कह सकते हैं कि "हम भारत के लोग…….."

संविधान सभा के पूंजीवादी और सावंतवादी लोगों ने "हम भारत के लोग" शब्दावली को हमें भ्रमित करने के लिए रखा है,

यदि वे हम संविधान सभा के लोग शब्दावली का प्रयोग करते तो उनकी पोल खुल जाती और भारत की 90 फ़ीसदी आबादी इस बात को आसानी से समझ पाती कि हमारे लोगों को तो वोट डालने का अधिकार ही नहीं था, इस प्रकार संविधान सभा में हमारा कोई प्रतिनिधित्व नहीं था,

जब हमारा प्रतिनिधित्व नहीं था इसीलिए हमें हमारे हक अधिकारों से वंचित रखा गया है, तब फिर भारत की भोली-भाली जनता 90 फ़ीसदी वंचित वर्ग यह समझने का प्रयास करता यह संविधान किसने बनाया है ??? और किसके फायदे के लिए बनाया है ???

संविधान निर्माण कैसे हुआ ??? इसे समझने का प्रयास वंचित वर्ग अवश्य करता ???


(2) भारत को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न गणराज्य बनाने के लिए~ 


संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न का मतलब होता है कोई भी देश किसी विदेशी शक्ति के अधीन नहीं होगा अर्थात विदेशी शक्ति के नियंत्रण से मुक्त होगा । संविधान सभा के अंदर संविधान सभा के लोग इस बात का संकल्प ले रहे हैं कि हम भारत को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न गणराज्य बनाएंगे। अब प्रश्न उठता है क्या संविधान सभा संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न थी ???

इसका जवाब है संविधान सभा संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न नहीं थी, क्योंकि संविधान सभा का गठन अंग्रेजी हुकूमत के आदेशानुसार हुआ था। जब संविधान सभा ही प्रभुत्व संपन्न नहीं थी तो वह भारत को संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न बनाने वाला संविधान कैसे बना सकती है ???

 संविधान के अनुच्छेद 147 के अनुसार भारत आज भी कानूनी तौर पर अंग्रेजों के नियंत्रण के अधीन है। हमें 1947 में जो आजादी मिली है वह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के प्रावधानों के अनुसार मिली है यह कानून अंग्रेजो ने बनाया है और यह कानून भारत पर लागू है और इतना ही नहीं भारत शासन अधिनियम 1935 के प्रावधान भारत पर आज भी कानूनी रूप से लागू है तो यह कह देना कि भारत विदेशी सत्ता के हस्तक्षेप से मुक्त है यह एक बेईमानी है, अंग्रेज अपने द्वारा बनाए हुए भारत स्वतंत्रता अधिनियम 1947 को कभी भी वापस ले सकते हैं जैसे ही वे इस अधिनियम को वापस लेंगे तो भारत कानूनी रूप से फिर से उनका गुलाम बन जाएगा। वास्तविक सच्चाई यह है कि भारत संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न गणराज्य नहीं है। 

भारत आज भी कानूनी रूप से अंग्रेजों के नियंत्रण में है। अंग्रेज आज भी भारत पर अपने एजेंटों के द्वारा संविधान संविधान के माध्यम से शासन कर रहे हैं।


(3) भारत को एक समाजवादी गणराज्य बनाने के लिए~ संविधान की उद्देशिका 26 नवंबर 1949 को बनाई गई यह तारीख संविधान की उद्देशिका में ही दी गई है,

और समाजवादी शब्द 42 वें संविधान संशोधन के द्वारा सन् 1976 में जोड़ा गया था यह शब्द संविधान की मूल उद्देशिका में नहीं था जब यह शब्द संविधान की मूल उद्देशिका में नहीं था तो इसके अनुसार संविधान कैसे बन जाएगा संविधान बनकर तैयार 26 नवंबर 1949 को हो गया था और लागू हुआ 26 जनवरी 1950 को और समाजवादी शब्द जोड़ा गया सन 1976 में तब आप बताएं संविधान सभा के लोग संविधान में समाजवादी व्यवस्था कैसे किए होंगे ???

और दूसरी बात यह है कि जब यह शब्द सन 1976 में जोड़ा गया तब इसके अनुरूप संविधान कैसे बन गया होगा ??? यह बहुत ही हास्यास्पद बात है, कांग्रेस पार्टी की सरकार ने समाजवादी शब्द को संविधान की उद्देशिका में भारत के 90 फ़ीसदी वंचित वर्ग के लोगों को गुमराह करने के लिए जुड़ा हुआ है यह समझने की जरूरत है ना कि भारत की अर्थव्यवस्था समाजवादी है।

समाजवाद का मतलब होता है कि देश के उत्पादन के संसाधन सरकार के नियंत्रण के अधीन होंगे।

लेकिन समाजवाद के संबंध में भारत के संविधान में कोई भी प्रावधान नहीं है इसी वजह से वर्तमान की मोदी सरकार सरकार की ज्यादातर संस्थाओं का निजीकरण कर चुकी है…


(4) भारत को एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य बनाने के लिए ~ धर्मनिरपेक्ष शब्द को भी 42 वें संविधान संशोधन के द्वारा सन् 1976 में जोड़ा गया। धर्मनिरपेक्ष का मतलब होता है कि सरकार सभी धर्मों को समान दृष्टि से देखेगी और किसी धर्म को आगे बढ़ाने के लिए किसी प्रकार का सहयोग नहीं देगी अर्थात सरकार धर्म के मामलों में तटस्थ रहेगी।

लेकिन भारत के संविधान में ऐसा कुछ भी नहीं है क्योंकि यह शब्द बाद में जोड़ा गया और संविधान सभा ने संविधान बनाने की प्रक्रिया 9 दिसंबर 1946 से शुरू की और यह 26 नवंबर 1949 को बनकर तैयार हो गया था, इस दौरान भारत का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ मुस्लिमों को पाकिस्तान दिया गया और हिंदुओं के लिए भारत जब देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ तो संविधान सभा के लोगों ने उस समय धर्मनिरपेक्ष संविधान बनाने की सूची भी नहीं थी भारत का संविधान एक हिंदूवादी संविधान है इसके संबंध में संविधान के अनुच्छेद 290(क) वह भी आप पढ़ सकते हैं~


290(क) कुछ देवस्वम निधियों को वार्षिक संदाय ~ प्रत्येक वर्ष 46 लाख ₹50000 की राशि केरल राज्य की संचित निधि पर भारत की जाएगी और उस निधि में से तिवांकुर देवस्वम निधि को संदत्त की जाएगी और प्रत्येक वर्ष 13 लाख ₹50000 की राशि तमिलनाडु राज्य की संचित निधि पर भारत की जाएगी और उस निधि में से 1 नवंबर 1956 को उस राज्य को तिवांकुर-कोचीन राज्य से अंतरित राज्य क्षेत्रों के हिंदू मंदिरों और पवित्र स्थानों के अनुरक्षण के लिए उस राज्य में स्थापित देवस्वम निधि को संदत्त की जाएगी।

अनुच्छेद 290 का को पढ़ने से स्पष्ट होता है कि भारत एक हिंदू राष्ट्र है जो हिंदू धर्म को आगे बढ़ाने के लिए सरकार से सरकार की संचित निधि से हिंदू मंदिरों और हिंदुओं के पवित्र स्थानों के अनुरक्षण के लिए निम्नलिखित निधि देता है।

उपरोक्त के आधार पर हम कह सकते हैं कि संविधान की उद्देशिका में संशोधन करके धर्मनिरपेक्ष शब्द हमें गुमराह करने के लिए मूर्ख बनाने के लिए जोड़ा गया है जबकि भारत का संविधान वास्तव में हिंदुओं के हित में लिखा गया संविधान है न कि धर्मनिरपेक्ष संविधान ???


(5) भारत को एक लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए~ संविधान की उद्देशिका में दिया गया लोकतंत्रात्मक शब्द भी अपने आप में बहुत ही भ्रामक है भारत में मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव लोकतंत्रात्मक पद्धति से नहीं होता है लोकतंत्रात्मक पद्धति से होता तो जनता अपनी पसंद का मुख्यमंत्री चुनती और अपनी पसंद का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति चुनती…

भारत की जनता को अपनी पसंद का मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति चुनने का कोई भी अधिकार नहीं है भारत की जनता सीधे तौर पर विधायक और सांसदों का चुनाव कर सकती है इससे ज्यादा कुछ नहीं….

जनता की शक्ति चुनाव के बाद खत्म हो जाती है अब यह शक्ति आ जाती है विधायक और सांसदों के पास मूल रूप से पार्टी के पास! पार्टी मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री चुन देती है उसी को विधायक या सांसद मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री चुनने के लिए बाध्य होते हैं!

जैसे ही विधायक और सांसद मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को चुनते हैं फिर उनकी शक्ति खत्म हो जाती है ।

कुल मिलाकर भारत में मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री राष्ट्रपति का चुनाव डायरेक्टली नहीं होता इस तरह से यहां सीधा लोकतंत्र नहीं! बल्कि छद्म लोकतंत्र है।

और भारत के 90 फ़ीसदी वंचित वर्ग के लोग इस बात का गुणगान करते नहीं थकते हैं कि भारत में लोकतंत्र है क्योंकि वह इस सच्चाई से अनजान हैं।


(6) हम भारत के लोग उसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय प्राप्त कराने के लिए~ सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय यह शब्दावली बहुत ही भयानक है! गुमराह करने वाली है!! लोगों को मूर्ख बनाने वाली है !!!

सामाजिक न्याय क्या होता है ???

आर्थिक न्याय क्या होता है ???

राजनीतिक न्याय क्या होता है ???

यहां न्याय शब्द हमें भ्रमित करने के लिए रखा गया है जबकि यहां शब्द होना चाहिए था "समानता" अर्थात सामाजिक,आर्थिक और राजनीतिक समानता ?

25 नवंबर 1949 को संविधान सभा में बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने बोलते हुए कहा था कि~ "हम 26 जनवरी 1950 को विरोधाभास के जीवन में प्रवेश करेंगे जहां राजनीतिक और तौर पर तो समानता होगी एक आदमी का एक वोट और एक वोट की एक कीमत होगी लेकिन हम सामाजिक और आर्थिक तौर पर विषमता का जीवन जीना स्वीकार करेंगे यदि इस विषमता को अतिशीघ्र दूर नहीं किया गया तो वे लोग जो सामाजिक और आर्थिक विषमता के शिकार होंगे आने वाले समय में लोकतंत्र की इस रचना का जो संविधान सभा ने बनाई है उसका विध्वंस कर देंगे"

बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर तो कह रहे हैं कि इस संविधान से हमें केवल राजनीतिक समानता मिली है इस संविधान के द्वारा सामाजिक और आर्थिक गैर बराबरी को दूर नहीं किया गया है ?

लेकिन 90 फ़ीसदी वंचित लोग सामाजिक,आर्थिक, राजनीतिक शब्दों के साथ जुड़े हुए न्याय शब्द को पढ़कर गुमराह होते हैं!

उनको लगता है कि संविधान के द्वारा सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक न्याय दिया गया है वे यह नहीं सोच पाते कि इस संविधान से सामाजिक आर्थिक और राजनीतिक बराबरी प्रदान नहीं की गई है हम सामाजिक और आर्थिक तौर पर आज भी विषमता के शिकार हैं।

तभी तो बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने 18 मार्च 1956 को आगरा में जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा था~

जनसमूह से ~ तुम्हें एकजुट होकर निरंतर संघर्ष करना होगा और तुम्हें सामाजिक,आर्थिक और शैक्षणिक गैरबराबरी मिटाने के लिए हर प्रकार की कुर्बानी देने के लिए यहां तक कि खून बहाने के लिए भी तैयार रहना होगा।

यदि संविधान के द्वारा सामाजिक आर्थिक और शैक्षणिक गैर बराबरी को मिटा दिया जाता अर्थात हमें सामाजिक,आर्थिक और शैक्षणिक समानता प्रदान कर दी जाती तो बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर यह बात आगरा में कभी नहीं कहते ???

लेकिन

 मूर्ख तो हम ही है जो संविधान की उद्देशिका को पढ़कर अपने आप को संविधान विशेषज्ञ समझने लगते हैं।

 गलती हमारी ही है कि हमने संविधान को कभी ढंग से समझने का प्रयास नहीं किया हमने यह तक जानने का प्रयास नहीं किया कि हमारा संविधान आखिर बना कैसे है ???


(7) विचार,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त कराने के लिए ~ यह शब्दावली भी हमें गुमराह करने वाली है स्वतंत्रता आबाध होती है। उस पर किसी भी तरीके का प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता

 है ??? कोई शर्त नहीं लगाई जा सकती है ???

स्वतंत्रता पर जैसी प्रतिबंध या शर्त लगाई जाती है तो वह स्वतंत्रता नहीं कही जा सकती है भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) में विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दी गई है, जो शर्तों के अधीन है अर्थात एक हाथ से स्वतंत्रता दी गई है दूसरे हाथ से छीन ली गई है अनुच्छेद 19 (2) के द्वारा अनुच्छेद 19 (1) में दी गई स्वतंत्रताओं पर प्रतिबंध लगाया गया है। इस प्रकार से विचार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सरकार के रहमों करम पर टिकी हुई है।


(8) विश्वास,धर्म और उपासना की स्वतंत्रता प्राप्त कराने के लिए ~ यह तीनों एक ही शब्द है हमें गुमराह करने के लिए और मूर्ख बनाने के लिए इसे अनावश्यक रूप से तीन बार लिखा है, विश्वास ही धर्म होता है धर्म ही उपासना होती है उपासना ही धर्म और विश्वास होता है। अंग्रेजी के 3 शब्द faith,belief and worship, synonyms हैं, 3 शब्दों को बेवजह रखा गया है जबकि एक शब्द से काम चल सकता था। 


(9) प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिए ~ प्रतिष्ठा और अवसर की समानता कैसे प्राप्त करवा सकते हैं एक चपरासी की प्रतिष्ठा और एक प्रोफेसर की प्रतिष्ठा कभी समान नहीं हो सकती है एक हाईस्कूल पास व्यक्ति को और एक पोस्ट ग्रेजुएट को किस तरह से अवसर की समानता दी जा सकती है ???

प्रतिष्ठा की समानता तो कतई प्रदान की ही नहीं जा सकती !!!

 फिर संविधान निर्माताओं ने संविधान की उद्देशिका में प्रतिष्ठा और अवसर की समता देने की बात क्यों कही है ???

निश्चित रूप से हमें बेवकूफ बनाने के लिए ???


(10) तथा उन सब में राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए ~ राष्ट्र की एकता के लिए भारत के संविधान में एक भी अनुच्छेद नहीं है और ना ही अखंडता को सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए एक भी शब्द है।

अखंडता शब्द श्रीमती इंदिरा गांधी ने 1976 में 42 वें संविधान संशोधन के द्वारा जोड़ा था और इंदिरा गांधी का आपातकाल का दौर जब लोग याद करते हैं तो उनकी रूह कांप जाती है। 

अखंडता शब्द बहुत ही भयानक और तानाशाही से भरा हुआ शब्द है इस शब्द से ही भारत एक पुलिस स्टेट या आर्मी स्टेट बन जाता है,

अखंडता का मतलब है कि हमें देश को टूटने से बचाना है यहां यह नहीं बताया गया देश को कोई बाहरी शक्ति तोड़ने का प्रयास करें तब बचाना है या आंतरिक अशांति फैले उससे बचाना है। सरकारी अखंडता के नाम पर आंदोलनकारियों को गोलियों से भुनवा देती है…लोगों को मरवा देती है सरकार अखंडता का सहारा लेकर किन्ही भी लोगों को देशद्रोही और आतंकी करार देकर मरवा सकती है,

श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश की अखंडता का वास्ता देकर देश के जितने भी विपक्षी नेता थे उनको जेलों में ठूंस दिया था कई नेता तो अपने आप को बचाने के लिए भूमिगत रहे थे।

अब यहां प्रश्न यह उठता है कि हम भारत के लोग ऐसा संविधान क्यों बनाएंगे ? 

और उसके साथ द्वारा ऐसी सरकार क्यों बनाएंगे ?? 

जो हमें ही गोली मार दे हमारी मांग को ही स्वीकार नहीं करें हमारे खिलाफ कानून बनाकर हमारे हक अधिकारों को लूटे हमारे हक अधिकारों पर डकैती डाले हमें बेबस और लाचार बना दे…

जब हम अपने हक की आवाज़ बुलंद करें तो हमें जेलों में ढूंढ ले और हमें गोलियों से मरवा दे….

निश्चित रूप से हम भारत के लोग संविधान बनाते तो इस तरह की तानाशाही व्यवस्था को कतई नहीं बनाते हम भारत के लोग शब्द हमें गुमराह करने के लिए रखा गया है जबकि भारत का संविधान मुख्य रूप से पूंजीवादी और ब्राह्मणवादी ताकतों के द्वारा बनाया गया है यह संविधान विशुद्ध रूप से पूंजीवादी और ब्राह्मणवादी संविधान है जिसके द्वारा पूंजीवादी और ब्राह्मणवादी लोगों ने अपनी व्यवस्था को बचाए रखने के भरपूर इंतजाम किए हैं।

90 फ़ीसदी वंचित वर्ग के लोग जनक कानून की समझ भी नहीं है वह संविधान की उद्देशिका को पढ़ कर के यह समझते हैं कि जैसे वह कानून के अंतरराष्ट्रीय स्तर के विद्वान हैं और उन भोले भाले लोगों को लगता है किस संविधान की उद्देशिका में से चुने हुए शब्द रखे हैं तो यह सब संविधान में अंदर भी होंगे।

(11) उद्देशिका में तारीख लिखी गई है 26 नवंबर 1949 को इस संविधान को एतद् द्वारा अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित करते हैं, इसका मतलब यह है संविधान की उद्देशिका 26 नवंबर 1949 को लिखी गई है, जबकि उद्देशिका पहले लिखी जानी चाहिए थी। प्रिएंबल का मतलब ही होता है पहले की। लेकिन यह तो सबसे अंत में लिखी गई है इसलिए इसे लास्ट एंबल होना चाहिए।

(12) उद्देशिका निश्चित रूप से उद्देश्य प्रस्ताव में से ही बनी है उद्देश्य प्रस्ताव संविधान सभा में 13 दिसंबर 1946 को प्रस्तुत किए गए थे जिन्हें 22जनवरी 1947 को स्वीकार कर लिया गया था,

जो इस बात का संदर्भ था वह भी प्रस्ताव में लिखा है हम उसी के अनुरूप संविधान बनाएंगे। लेकिन विडंबना इस बात की है जब संविधान बनकर तैयार हो गया है, उसके बाद उद्देशिका में संशोधन किया जा रहा है केवल मूर्ख बनाने के लिए।

उद्देशिका में जो शब्द जोड़े जा रहे हैं वह संविधान के अंदर किसी भी अनुच्छेद में नहीं लिखे गए हैं। इसका मतलब हमें संविधान बनने के बाद भी गुमराह किया गया है।

उद्देशिका में अंतर्निहित शब्दों की व्याख्या करने की मैंने भरपूर कोशिश की है आशा है कि आपको संविधान की उद्देशिका समझ में आई होगी।

आपके मन का यह वहम कि संविधान बाबा साहब डॉक्टर अंबेडकर ने लिखा है संविधान सभा में उनके द्वारा दिए गए 17 दिसंबर 1946 के भाषण के महत्वपूर्ण अंशों को पढ़कर निश्चित रूप से दूर हुआ होगा।

अब हमारी जिम्मेदारी है कि हम भारत के संविधान को ढंग से समझें !

संविधान का निर्माण किसने किया है ??? 

और संविधान से हमें क्या मिला है ???

यह सब समझने के लिए हम संविधान सभा की डिबेट को पढ़ें !

खुद जागरूक हो और अपने भाइयों को भी जागरूक करें !


 दिनेश सिंघ एलएल.एम.

      9977300997

           नई दिल्ली

[08/12, 9:05 am] kamleshmittra: 🌹अधिवक्ता दिनेश जी मैंने आपके लंबे लेख को पढ़ लिया है🙏


1. लगता है इस लेख को एक वादी अथवा प्रतिवादी वकील की मानसिकता से लिखा गया है, वकील वादी का होता है या प्रतिवादी का, उसे जो सिद्ध करना होता है सबूत के आधार पर वही सिद्ध करने का प्रयास करता है ऐसा ही लोअर कोर्ट में होता है, अर्थात उसका जो माइंडसेट सेट होता है, वह पूरी ऊर्जा उसी को स्थापित करने में लगा देता है 🙏


2. परंतु माननीय सर्वोच्च न्यायालय में ऐसा नहीं होता है, माननीय सर्वोच्च न्यायालय प्राकृतिक न्याय के आधार पर विधिक न्याय को स्थापित करने की कोशिश करता है, भारतीय संविधान वह दस्तावेज है जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय को ऐसा करने की शक्ति प्रदान करता है, संविधान के आर्टिकल 141 और 142 की शक्ति असीमित है, जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय को विधिक न्याय से लेकर प्राकृतिक न्याय तक अपनी बात कहने का अधिकार देता है, 

3. यह दूसरी बात है कि उसकी बात, आदेश, निर्देश को एग्जीक्यूट करने का काम कार्यपालिका के अनुपलकों के पास ही है🙏 कुछ पूर्व माननीय जजों की मूर्खता के कारण न्यायपालिका की डिपेंडेंसी कार्यपालिका के पदेन एग्जीक्यूटिव्स पर अधिक बढ़ गई है, जबकि संविधान के अनुसार राष्ट्रपति और न्यायपालिका का चोली दामन का साथ है, संसद राष्ट्रपति का पुत्र है, और मंत्री परिषद सहित एग्जीक्यूटिव सौतेला भाई 🙏 यह मेरे देखने का दृष्टिकोण है आपका कुछ अलग हो सकता है😂 जनता पार्टी की सरकार ने जिस प्रकार से राष्ट्रपति की शक्ति को कमजोर किया था उसके कारण न्यायपालिका की शक्ति भी घट गई, यह एक लंबी चर्चा है उसको फिर कभी देखेंगे 🙏


4. माननीय सर्वोच्च न्यायालय में निर्णय का आधार या तो प्राकृतिक न्याय होता है या विधिक न्याय होता है🙏 और कोई भी अधिवक्ता ना तो वादी का होता है ना ही प्रतिवादी का, AOR को कोर्ट का ऑफिसर कहा जाता है, केवल उनको ही कोर्ट में केस फाइल करने का अधिकार होता है, उनका कर्तव्य सुप्रीम कोर्ट नियमावली 2013 से नियंत्रित होता है🙏


5. रिजुडिशिकेटा का सिद्धांत आपने पढ़ा होगा, प्रिंसिपल ऑफ बिल के सिद्धांत को भी आपने पढ़ा होगा 🙏 किसी भी अधिवक्ता को इन मूल अवधारणाओं को नहीं भूलना चाहिए 🙏


6. मैंने पिछली चर्चा में भी कहा था संविधान एक कलेक्टिव डॉक्यूमेंट है, जो कि तत्कालीन भारत के प्रतिनिधियों द्वारा शर्तो के अधीन भारत में विलय को दर्शाता है🙏वह भारत के लोग ही थे जिन्होंने भारत में विलय होना सशर्त स्वीकार कर लिया था🙏 राजाओं रजवाडों का विलय पत्र भी संविधान का अंग है, केवल संविधान सभा की डिबेट को ही ना देखें, पीवी पर्स को भी देखें😂 


7. जिन्होंने भारत में विलय स्वीकार नही किया वह पाकिस्तान चले गए🙏 हरि सिंह, हैदराबाद के निजाम, जूनागढ़ के राजा हम भारत के लोग में सम्मिलित नहीं थे, पटेल जी ने उनको प्यार से सम्मिलित किया 😂


8. आप एक वकील है आपके कंधों पर एक महत्वपूर्ण जिम्मेवारी है देश के विद्वानों में गिनती होती है🙏हर आदेश को लिखने से पहले जज को भी आपको विद्वान अधिवक्ता लिखना पड़ता है🙏वह अधिवक्ता की उपस्थिति विद्वान अधिवक्ता लिखकर ही करता है 🙏


9. क्योंकि वह यह मान कर चलता है कि कोई भी अधिवक्ता उसको गुमराह नहीं करेगा, साक्ष्यो की सही व्याख्या करेगा और सही निर्णय पर पहुंचने में सहयोग करेगा🙏 

10. इसी प्रकार समाज भी अधिवक्ता से बहुत सी अपेक्षाएं करता है यह दूसरी बात है कि समाज अधिवक्ता के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन नहीं करता है, अधिवक्ता की वृत्ति जीवन निर्वहन की वृति नहीं है 🙏 बल्कि समाज को न्याय दिलाने का जुनून है 🙏


11. जिस प्रकार आपने पिछली बार मुझ पर आरोप लगाया कि मैं अंबेडकरवादी हूं, और आप मेरी सोच बदल देंगे, यह आपका अंतिम लक्ष्य था🙏 अंबेडकरवाद के संबंध में जो चिर परिचित अवधारणा चल रही है, उससे मेरा कोई लेना देना नहीं है 🙏


12. आपका डॉक्यूमेंट पढ़कर मुझे अच्छा लगा, क्योंकि इस पर बहुत काम किया गया है, परंतु मेरी सोच यथावत है, क्योंकि डॉक्यूमेंट के इंटरप्रिटेशन में आपसे त्रुटि हुई है🙏अपने उन बिंदुओं को छोड़ दिया, जिसके कारण मैं इसको कलेक्टिव डॉक्यूमेंट कहता हूं🙏 

13. भारत जैसे विशाल देश के निर्माण में इससे अच्छा कोई दस्तावेज नहीं हो सकता है, सोवियत संघ भी टूट गया 😂 जबकि भारत का संविधान नित्य नूतन है, हर संविधान संशोधन के साथ परिष्कृत होता जाता है🙏 चीन थाईलैंड पाकिस्तान बर्मा आदि विभिन्न देशों के संविधान से उत्तम है, इसको तमाम विधिवेताओं ने स्वीकार किया है, अगर आप इसको एक जज की हैसियत से देखोगे तो आपको भी सुंदर लगेगा, क्योंकि उस समय इससे सुंदर कोई संविधान बनाया ही नहीं जा सकता था🙏


14. लोकतंत्र की यही खूबसूरती है, बहुमत की बात चले और अल्पमत का संरक्षण भी हो 🙏,आर्टिकल 25 से 30 तक को भी आपको पढ़ना चाहिए😂

15. संविधान सभा ने अति विश्वास के साथ यदि बाबा साहब के कंधों पर भार डाला, तो बाबा साहब ने भी अपने निहित स्वार्थ से दूर रहकर संविधान की रचना की उनका व्यक्तिगत विरोध संविधान में दिखाई नहीं देता है 🙏


16. इसीलिए भारत का हर विद्वान और विश्व का हर बुद्धिजीवी डॉ अंबेडकर को नमन करता है, व्यक्ति की आशंकाएं उचित है अथवा अनुचित है यह भविष्य का प्रश्न होता है🙏


17. मैं इससे पहले भी आपका एक लेख पढ़ चुका हूं जो आदिधर्म की पत्रिका में छपा था🙏 उसमें भी इंटरप्रिटेशन की बहुत सी त्रुटियां हैं, उसमें अपने ₹100000 देने का वादा किया है 🙏


18. अब आप ₹100000 मुझे दे ही दो ताकि हम आगे की चर्चा करें, कंसल्टेशन फीस तो बनती है ना 😂 मुझे अपने आर्थिक समानता के मिशन के लिए पैसे की जरूरत है, मैं सामाजिक समानता और राजनीतिक समानता के विषय पर काम नहीं कर रहा हूँ 🙏 वहा काम हमारे अन्य बुद्धिजीवी लोग कर रहे हैं 🙏


19. मैं केवल आर्थिक समानता पर काम कर रहा हूं, आर्थिक न्याय थोड़ा सा तकनीकी शब्द है! सामंतवाद को खत्म करने के लिए स्वीट प्वाइजन है, सामानता शब्द हार्ड प्वाइजन हो जाता इसलिए संसद में उसे स्वीकार नहीं किया गया था🙏


20. परंतु विगत 70 सालों में दलित समाज की प्रगति उस प्रकार दिखाई नहीं देती इस पर कार्य करने की अति आवश्यकता है! ऐसा इस वजह से हुआ क्योंकि आजादी के बाद हमारे समाज के लोगो ने सुप्रीम कोर्ट की वकालत आरंभ नहीं की है, हमारे समाज में संविधान को समझने और समझने वाले लोग ही नहीं रहे, मनुवादियों ने संविधान को जैसा समझाया हमारे समाज के लोग भी संविधान को वैसा ही समझते रहे 🙏इसलिए मैं आर्थिक समानता के आंदोलन को संचालित कर रहा हूं ताकि आर्थिक न्याय के रास्ते से आर्थिक समानता तक पहुंचा जा सके🙏


21. परसों आपसे बात करके अच्छा लगा, कोई तो युवा है जो बेगमपुर शहर की कल्पना करता है🙏 समाज के चिर परचित वृद्धजीवी श्री के.सी. रवि जी भी केवल दो ही जातियां मानते हैं एक अमीरी दूसरी गरीबी, मैंने उनका साथ किया था परंतु वह राजनीतिक व्यक्ति निकले, जबकि मुझे भ्रम हो गया था कि वह संत हो गाये हैं 😂 

22. मुझे अभी तक सामाजिक संघर्षशील सम्पन्न व्यक्ति नहीं मिला है इसलिए आर्थिक समानता का मूवमेंट मंद गति से चल रहा है 🙏 भगवान बुद्ध ने कहा है, मार्ग में अपने जैसा साथी ना पाए तो अकेले ही चले, मैं अपने मार्ग पर अकेला चल रहा हूं🙏


अगर आप साथ देना चाहे तो अच्छा होगा🙏


जिसे आप बेगमपुर शहर कहते हैं 🙏


 मैं उसे रविदास राज कहता हूं 🙏


23. रविदास राज की बात हो या बेगमपुर शहर उसके लिए राजपथ भारत का संविधान ही है, ऐसा सुंदर राजपथ तो संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के समय में भी नहीं था🙏 संविधान का प्रमबिल और डायरेक्टिव प्रिंसिपल ऑफ़ स्टेट तो स्टेट के गले में बंधी घंटी के समान हैं 😂 दलित (विद्वान) अधिवक्ताओं को समय-समय पर इसे बजाते रहना चाहिए 🙏


चलते-चलते मेरा सुझाव है कि आपको मिनर्वा मिल केस 1980 और 1973 का केशव नंद भारती केस भी पढ़ना चाहिए, इससे आपको संविधान को समझने में काफी मदद मिलेगी❤️


अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा @9335122064