Friday, 23 August 2024

22 और 23 अगस्त रात्रि की सूचना

 [22/08, 11:09 pm] kamleshmittra: रात्रि समाचार: रात्रि के 11:45 बज चुके हैं🙏


अभी तक लीगल नोटिस का कोई जवाब नहीं आया है आज 40 व दिन है 🙏


संत श्री निरंजन दास जी को अपनी स्थिति स्पष्ट करना चाहिए, क्योंकि लीगल नोटिस में वह हमारे प्रथम प्रतिवादी हैं 🙏


 विगत 10 दिनों से हम जिस तथाकथित कार्यकारिणी को भंग कर, नई कार्यकारिणी के गठन की बात कर रहे हैं🙏


 विधि के अनुसार वह कोई कार्यकारणी नहीं है क्योंकि किसी भी सरकारी आदेश में इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि तथाकथित सरकारी कमेटी ही सरकारी कमेटी है 🙏


क्योंकि आरटीआई से मांगी गई सूचना का जवाब अभी तक नहीं आ सका है, जबकि उसकी प्रथम अपील की गई थी, अपीलीय अधिकारी अभी तक किसी सूचना से अवगत नहीं करा सके हैं 🙏


संत श्री निरंजन दास जी को अब तक जवाब भेज देना चाहिए था कि क्या वह चेयरमेन हैं 🙏और एक जिम्मेदार संत की भूमिका निभाना चाहिए 🙏


धार्मिक संस्था के शीर्ष पर बैठकर ऐसे अधार्मिक कार्य नहीं करनी चाहिए 🙏


 वाराणसी के संत से प्राप्त सूचना के अनुसार, जोकि 30 सालों से संन्यास में थे, जब तुगलकाबाद रविदास मंदिर आए तब बहुत दुखी हुए 🙏 पुराने संतों से उनका मिलना जुलना हुआ, परंतु उस समय का प्रबंधन मंदिर की उचित देखभाल नहीं कर रहा था 🙏


 संत शिरोमणि गुरु रविदास प्रभु का प्रकोप किसी मंदिर पर भी पड़ सकता है, और किसी भी संत/ प्रबंधक की प्रतिष्ठा को जमीदोष कर सकता है🙏 संत शिरोमणि गुरु रविदास की प्रतिष्ठा से खिलवाड़ करने की कोशिश ना करें 🙏


तुगलकाबाद रविदास मंदिर के साथ जिस तरह का खिलवाड़ हुआ, उसी का परिणाम है कि मंदिर के प्रबंधक अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं 🙏


संत श्री निरंजन दास जी को ऐसी कोई चूक नहीं करनी चाहिए🙏


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏9335122064

[23/08, 11:18 pm] kamleshmittra: रात्रि समाचार : 


रात्रि का दूसरा प्रहार शुरू हो गया है, इस समय 10:15 बजे हैं 🙏 आज 23 अगस्त 2024 🙏


 लीगल नोटिस के मुख्य प्रतिवादी संत श्री निरंजन दास जी की तरफ से किसी प्रकार की विधिक सूचना से अवगत नहीं कराया गया है,


 ना हीं उनके किसी अधीनस्थ द्वारा लिखित रूप में कोई सूचना दी गया है 🙏


लीगल नोटिस में दी गई समय सीमा के अतिरिक्त 11 दिन व्यतीत हो चुके हैं🙏 अभी तक कुल 41 दिन हो चुके हैं 🙏


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏9335122064


नोट :-


हमारे समाज के दो वरिष्ठ सम्मानित सदस्य और एमसीडी दिल्ली के काउंसलर रहे श्री कृष्ण मुरारी जाटव जी और श्री के सी रवि जी ने मुझे पहले ही सावधान किया था कि सरकारी झटपट कमेटी और तथाकथित सरकारी कमेटी वह दृष्टिकोण नहीं रखती है, जिस रूप में मैं व्यवस्थित करना चाहता हूं🙏


इसलिए श्री के.सी. रवि जी जिनको भी 10 तारीख की पूजा का आमंत्रण देने जाते हैं, उनमें किसी भी गुरु भाई को यह आश्वासन नहीं देते कि उनको सरकारी समिति में सम्मिलित किया जाएगा 🙏


 जहां तक श्री कृष्ण मुरारी जाटव जी का सवाल है 🙏 वह बहुत सूझबूझ वाले व्यक्ति हैं 🌹


 परंतु मेरा प्रश्न यह है, आप सभी तो दिल्ली निवासी हैं, दिल्ली से पूरे देश के दलित समाज की अपेक्षाएं हैं 🙏दलित समाज के लिए, विगत 70 सालों में आपकी सूझबूझ से कुछ नहीं हो सका है 🙏


यदि इलाहाबाद में मुझे व अन्य दलित शिक्षकों और समाज को न्याय मिल गया होता, तो ना ही मुझे बाबा रामदेव के आंदोलन में कूदने की आवश्यकता पड़ती, और ना ही इंजीनियरिंग लाइन छोड़कर माननीय सुप्रीम कोर्ट आने की मुझे आवश्यकता पड़ती 🙏


2015 में जस्टिस DY चंद्रचूड़ जी इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस हुआ करते थे, तब उनको मैंने तीन जज की कंप्लेंट दी थी, जो जातिवाद से ग्रस्त थे, आरक्षण का नाम सुनते ही अगली तारीख दे देते थे, और अगली तारीख कभी आती नहीं थी, जब तक फिर से लिस्टिंग एप्लीकेशन ना दी जाए, और लिस्टिंग एप्लीकेशन में फिर वैसा ही होता, अगली तारीख दे दी जाती🙏


जब मेरा केस पड़ता तो जज छुट्टी ले लेता, क्योंकि भरे कोर्ट में मैंने जज को झाड़ दिया था 🙏परंतु जस्टिस DY चंद्रचूड़ इलाहाबाद हाईकोर्ट की न्याय प्रशासनिक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं कर सके 🙏


 इलाहाबाद हाई कोर्ट की न्याय व्यवस्था आज भी जर्जर है, रजिस्ट्री में पैसा खर्च करो और अपना केस लगवा लो, लोअर कोर्ट की तरह हाई कोर्ट में भी, रीडर पैसा लेकर तारीख लगता है 🙏 अन्यथा दलितों के केस नहीं सुने जाते हैं 🙏


माननीय सुप्रीम कोर्ट में भी स्थिति अच्छी नहीं है, मेरा संघर्ष इस दिशा में है, परंतु समाज के लोग जिस तरह से आपस में टांग खींचाई कर रहे हैं, मुझे तो लगता है कि मुझे सामाजिक रूप से संन्यास ले लेना चाहिए, मैं किस समाज के लिए संघर्ष करूं, और क्यों उस समाज के लिए संघर्ष करूं, जो छोटे-छोटे प्रलोभन में बिक जाता है🙏


संत वही है जो चट्टान की तरह खड़ा रहे, न्याय का साथ दे, मानवता की रक्षा करें 🙏 संत शिरोमणि गुरु रविदास जी ने ऐसा मानक स्थापित किया है, उस मार्ग पर चलने वाले संत विचलित कैसे हो जाते हैं मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं 👏


पंजाब का ऐसा कोई प्रमुख संत नहीं है, जिसके डेरे से मुझे आमंत्रण ना आया हो, मैं किसी भी डेरे में जाकर अपना आगे का जीवन निर्वाह कर सकता हूं 🙏


 सहारनपुर में एक बुध विहार हमारे मित्र ने हमारे लिए बनवाया था 🙏 वह इस बात के लिए आग्रह करते थे कि मैं वकालत छोड़ दूं 🙏 परंतु मैं देख पा रहा हूं, बाबा साहब के बाद वकालत की फील्ड में हमारे समाज की रक्षा करने वाला कोई अधिवक्ता नहीं है 🙏 इसलिए मैं इस प्रोफेशन में हूँ 🙏 मैं घरेलू झगड़ा में नहीं उलझता, इसलिए मैंने गृहस्थ जीवन का परित्याग आज से 20 साल पहले कर दिया था 🙏 मेरे पर थोड़ी सी दया करो, मेरे पास करने के लिए बहुत काम हैं, मुझे तुगलकाबाद रविदास मंदिर में उलझा कर मत रखो, क्योंकि मंदिर संघर्ष हमारे लिए, एक घरेलू समस्या है👏 परंतु जिनको अपने ही भाई में लड़ने की आदत हो वह मेरी बात थोड़ी देर से समझेंगे 🙏


 संत रविदास इंटरनेशनल मिशन द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष जिन विषयों को उठाया गया है🙏 वह भारतीय न्याय व्यवस्था में दलितों के संरक्षण से संबंधित है 🙏


मुझे ऐसे विषयों पर काम करने दो, रविदास राज लाने दो🙏 मेरा साथ दो 👏


सरकारी झटपट कमेटी के अपने रिश्तेदारों को समझाना आपका काम है, सरकारी झटपट कमेटी में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो रोटी के लिए मोहताज हो, विगत 5 साल में भी वह कुछ नहीं कर सके हैं, अपने समाज के युवाओं को करने का मौका दो, संत शिरोमणि गुरु रविदास जी और संत शिरोमणि गुरु रविदास जी के मंदिर पर किसी की बपौती नहीं है 🙏 केवल अपने पुत्रों के लिए महल बनाना छोड़ो🙏 कुछ काम समाज के लिए भी करो🙏 तभी समाज आपके अमर रहने के नारे लगाएगा, बाबा साहब ने अपने चार बच्चे समाज के लिए कुर्बान किये, चाहते तो वह भी अपने परिवार के लिए महल बना सकते थे🙏


 निरंतर जारी......

Wednesday, 21 August 2024

भारत बंद कारण और उपाय

 🌹संवेदना लेख 🙏 दिनांक 22 अगस्त 2024


क्या भारत बंद के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग दोषी है🇮🇳


यह पर वह संक्षिप्त कारण है जिसकी वजह से कल भारत बंद था🙏


कल माननीय सुप्रीम कोर्ट के लाइब्रेरी में था, और वहां से उन साक्ष्यों को निकाला है 🙏 अध्ययन किया है, जो भारत बंद के लिए उत्तरदाई थे 🙏


पूरा आदेश तो 565 पान्ने का है,


आदेश के मुख्य बिंदु मैंने निकाल कर आपको दे दिया हैं आप उसको पढ़ सकते हैं🙏


पूरे आदेश को प्रिंट कराता तो ₹1100 लगते इसलिए केवल 6 पेज ही प्रिंट कराया है जबकि पूरा आदेश हमारे समाज के पास होना चाहिए, हर बार आप के लिए ऑनलाइन पढ़ाना सरल नही होता, न जाने कब उसको ऑनलाइन से हटा दिया जाए, इसलिए प्रिंट अपने पास होना चाहिए🙏 मुझे अपने आय-व्यय संतुलन रखना पड़ता है, क्योंकि सामाजिक कार्य के लिए समाज से संगठनात्मक रूप से अभी मुझे कोई धन प्राप्त नहीं होता है 🙏


हमें अपने समाज की सुरक्षा के लिए, ऐतिहासिक साक्ष्यों की लाइब्रेरी बनानी चाहिए, इस संदर्भ में एक घटना याद आता है आज उसको आपके साथ शेयर कर दूं 🙏


जब मैं इलाहाबाद में था, तब इंजीनियरिंग कॉलेज का टीचर होता था🙏 और जब सामाजिक विषय में उलझा, तो इंजीनियरिंग कॉलेज की पुस्तकों के अतिरिक्त सामाजिक विषयों पर भी पुस्तके खरीदी🙏 मुझे पुस्तकों से अत्यधिक मोह हो गया था 🙏


मेरा पांच लोगों का परिवार हुआ करता था, जो मेरे साथ रहा करता था, समय के साथ सब बिखरता चला गया, समाज को जानने और समझने की मेरी भूख शांत नहीं हुई 🙏इसी अनुक्रम में अगस्त 2011 में मैं पतंजलि योगपीठ की तरफ आ गया 🙏


पांच लोगों की गृहस्ती का सामान मैंने वहां पर वैसे ही छोड़ दिया, केवल 4 कुंतल पुस्तके लेकर पतंजलि योगपीठ आ गया🙏


इसमें हमारा PC और प्रिंटर भी सम्मिलित था, जब पतंजलि योगपीठ पहुंचा, तो पतंजलि संगठन की दर्जनों पुस्तक पढ़ने का मौका मिला🙏और जब विधिक कार्यों के लिए दिल्ली आया, तो अन्य पुस्तकों को भी पढ़ने का मौका मिला क्योंकि दिल्ली के पुस्तक मेले में आने अवसर मिला 🙏


पुस्तके खरीदने के मामले में मुझे पतंजलि योगपीठ में कभी कोई दिक्कत नहीं हुई, जो पुस्तक खरीदता उसका बिल लगा देता, और सेवावृत्ति विभाग द्वारा उसका पेमेंट कर दिया जाता, इस प्रकार दिन प्रतिदिन पुस्तकों की संख्या और बढ़ती गई 🙏 परंतु पढ़ने की मेरी प्यास शांत नहीं हुई 🙏 जितना भी पढ़ता जाता था अधूरा ही लगता था 🙏 क्योंकि जूठन खाकर किसका पेट भरा है😂 दुनिया की समस्त पुस्तके एक मात्र जूठन है 👏


सितंबर 2013 में कुछ ऐसा संयोग बना कि मैं विपासना मेडिटेशन सेंटर में चला गया🙏 और 10 दिन की विपस्सना करने के बाद लौट 🙏 तो अध्यात्म जगत की समस्त पुस्तके बौनी साबित हूंई 🙏


समाजशास्त्र पर लिखी गई समस्त पुस्तके, कचरे के डब्बे में फेंकने योग्य लगी 🙏


क्योंकि पुस्तकों के माध्यम से संसार जिस तरह का दिखता है वास्तव में संसार वैसा नहीं है🙏 


इस आध्यात्मिक क्रांति के बाद मुझे इसकी गहराइयों में जाने की और आवश्यकता महसूस हुई 🙏 क्रमिक प्रक्रिया पर चलते हुए 5 वर्ष मैंने गहन साधना में बिताये, और पुस्तकों से दूर होता चला गया🙏


 सन 2018 में जब वापस दिल्ली आया, और एक लॉ फॉर्म का मैनेजर हुआ, तब विधि का पूरा ज्ञान मेरे दिमाग से निकल चुका था, पूरी तरह से एक ख्याली दुनिया थी, परंतु न्यायपालिका ख्याली दुनिया पर नहीं चलती है, उसको साक्ष्य की आवश्यकता होती है 🙏


इस प्रकार एक बार फिर से मुझे पुस्तकों को पढ़ने के लिए खुद को तैयार करना पड़ा 🙏 मेरी लगभग सभी पुस्तक पतंजलि योगपीठ में खो गई थी 🙏 विधि की पुस्तक भी मेरे पास नहीं थी 🙏


माननीय सर्वोच्च न्यायालय की AOR की परीक्षा के लिए मुझे नए सिरे से पुस्तकों को एकत्र करना पड़ा 🙏


 सन 2022 में, मैं जब श्री मंगतराम वाली जी से उनके घर / दुकान पर मिला तो काफी निराश हुआ, क्योंकि 2019 में जब आर.के. पुरम के श्री रविदास मंदिर में उनसे मुलाकात हुई तब उन्होंने खुद को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का एक बड़ा अधिकारी होने के बारे में बताया था🙏 मुझे भी लगा कि वह समाज के लिए कुछ अच्छा काम कर रहे होंगे🙏


परंतु उनके घर पर पहुंच कर लगा यह तो भटके हुए आदमी है, इन्हें विधि के क्षेत्र में अपने समाज को आगे बढ़ना चाहिए था, परन्तु यह खेलकूद के सामान की दुकान खोल कर बैठे हैं🙏


इससे एक बात तो साफ हो गई थी कि उनके लिए पैसा प्रमुख है, समाज को सुसंगठित करना और ज्ञान बाँटना उनका उद्देश्य नहीं है 🙏


मैंने उनसे निवेदन भी किया था एक ऐसी लाइब्रेरी स्थापित कीजिए जिसमें समाज के लोगो का कल्याण हो 🙏 समाज के लिए विधि का कार्य कीजिए क्योंकि आप बड़े अधिकारी रहे हैं 🙏


परंतु ऐसा कुछ होता हुआ मुझे दिखाई नहीं दिया, मैं मंगोलपुरी के उस मंदिर में भी गया, जहां के वह पदाधिकारी है, वहां लाइब्रेरी तो है परंतु खुलती नहीं है 🙏 मुझे खुली हुई नहीं मिली 🌹 इस प्रकार मैं नहीं देख सका वहां की लाइब्रेरी में क्या है🙏


हमारे समाज के पढ़े लिखे लोग समाज को सुशिक्षित और संगठित नहीं करेंगे तो, चोरी होने से पहले हमें कोई सूचना नहीं मिलेगी, जब समाज का सब कुछ लुट-पिट जायेगा, तब भारत बंद करते रहिए, संपन्न जातियां भारत बंद करते हुए क्यों नहीं दिखाई देती?


क्योंकि समय पूर्व उनके पास सूचना पहुंच जाती है, और हर मामले में न्यायपालिका में उस पर रोक लगवा लेते हैं 🙏


परंतु हमारे समाज के लोग आपस में ही मुंह बजाने में तेज होते हैं, अधिकारी के सामने जाने से डरते हैं, न्यायाधीश के सामने जाने से डरते हैं🙏 वकील को फीस देना भी नहीं चाहते, अपने समाज का सामाजिक वकील बनना भी नहीं चाहते, क्योंकि वह बिना डिग्री के ही खुद को बहुत बड़ा वकील मानते हैं 🙏 


इस प्रकार हम कह सकते हैं वह बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाई गई व्यवस्था को नहीं मानते हैं और अपने ढंग से व्यवस्था चलाते हैं🙏 सभी दलित पार्टियों और संगठनों की अपनी-अपनी ढपली और अपना-अपना राग है 🙏


इसलिए भारत का संविधान विगत 74 सालों में केवल अनुसूचित जाति के लोगों को हक और अधिकार दिलाने के लिए 105 बार घायल किया गया है 🙏 किसी संपन्न जातियों के लिए तो मात्र एक दो बार हुआ होगा🙏 


यदि माननीय सर्वोच्च न्यायालय में हमारे समाज के अधिवक्ता होते तो संविधान इतनी बार घायल न किया गया होता 🙏 समाज के अधिवक्ता माननीय सर्वोच्च न्यायालय में होंगे तब न्याय मिलेगा, कोई भी जज बिना पिटीशन बिना एविडेंस के कुछ नहीं कर सकता है, पिटीशन और एविडेंस लाना अधिवक्ता का काम है जज का काम नहीं है 🙏


परंतु संविधान विरोधी लोग जुडिशल कमिशन पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खत्म कर देना चाहते हैं 🙏 न्यायपालिका जब स्वतंत्र होगा तब आम जनता और भारत के नागरिकों की रक्षा न्यायपालिका में कर पाएगी 🙏


मेरी जानकारी में ऐसा आया है कि जुडिशल कमिशन बनाने की सलाह राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भारत सरकार को दी, उस वार्षिक रिपोर्ट की ड्राफ्टिंग श्री मंगतराम वाली जी ने की थी, कांग्रेस ने उनकी सलाह को नहीं माना, परंतु शातिर बुद्धि की मोदी सरकार को यह समझ में आ गया, कि अंतिम बची स्वतंत्र संस्थान न्यायपालिका को कैसे गुलाम बनाया जा सकता है 🙏


भारतीय संविधान के विरोधी तो सबसे ज्यादा अनुसूचित जाति के लोग ही है वह भारतीय संविधान की रक्षा करने में विफल रहे हैं, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग अनुसूचित जाति की प्रगति के आंकड़े नहीं जुटाता है, जोकि उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है,🙏 


सन 2015 में मेरे द्वारा लगाई गई आरटीआई का जबाव आज तक उसने नहीं दिया है, जिसमें अनुसूचित जाति की प्रगति के आंकड़े मैंने मांगे थे, मिडिया समाचारों में जो प्रगति दिखाई दे जाती है वह उनके अपने आंकड़े हैं, अपने राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए है कोई भी सरकारी संस्था का आंकड़े नहीं है 🙏


यदि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने सरकार को अनुसूचित जाति की जातिवार प्रगति के आंकड़े उपलब्ध कराए होते तो माननीय सर्वोच्च न्यायालय का 1 अगस्त 2024 का आदेश इस प्रकार ना आता, और भारत बंद करने की जरूरत ना पड़ती 🙏भारत बंद के लिए मात्र एक ही दोषी संस्था है वह भारत का राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग है 🌹🙏


उपरोक्त सभी बिंदुओं पर हमको नए सिरे विचार करना पड़ेगा🙏


 सामाजिक चिंतक अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏9335122064

Monday, 19 August 2024

क्रीमी लेयर और आरक्षण कोटा


🐘 *बसपा का भारत बंद आंदोलन को पूर्ण समर्थन*

🐘🐘🐘 💪💪💪


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🍁 *एससी एसटी वर्गों के आरक्षण में उपवर्गीयकरण व आरक्षण में क्रीमीलेयर लागू करने के दिनांक 01/08/24 के फैसले के विरुद्ध कल दिनांक 21/08/24 के भारत बंद को बहुजन समाज पार्टी द्वारा पूर्ण समर्थन प्राप्त हैं ।*


🍁 *इस भारत बंद में बहुजन समाज पार्टी द्वारा आवाहन किया जाता है की* 👇

*1) मा.सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायधीशों की पीठ ने एससी एसटी वर्गों के आरक्षण में उपवर्गीयकरण व क्रीमीलेयर लागू करने का जो फैसला सुनाया हैं उसे संसद तुरंत रद्द किया जाए ।*

*2) केंद्र सरकार द्वारा संसद में विशेष सत्र बुलाकर संविधान संशोधन विधेयक बिल लाकर उसे भारी बहुमत से पास कर ओबीसी एससी एसटी वर्ग के आरक्षण को संविधान की 9वी सूचि में डालकर उसे पूर्णतः संविधानिक सुरक्षा प्रदान की जाए ।*

*3) न्यायधीशों की नियुक्ति में कॉलेजियम सिस्टम बंद कर न्यायधीशों की नियुक्ति के लिए आल इण्डिया जुडेशरी सर्विस का गठन करके उसमे संविधानिक आरक्षण लागू करके न्यायधीशों की नियुक्ति की जाये ।*

*4) जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी भागीदारी के तहत सम्पूर्ण देश में जातिनिहाय जनगणना की जाए ।*

*5) सभी देशवासियों को समान न्याय के तहत ओपन कैटेगिरी का भी वर्गीकरण करके उनपर भी क्रीमीलेयर की शर्त लगाईं जाए ।*

*6) देश में प्रायवेट सेक्टर में भी ओबीसी एससी एसटी वर्ग के लिए सक्तिपूर्ण आरक्षण लागू किया जाए ।*

*7) देश में जाती निर्मूलन के लिए TC में जाती का उल्लेख करना बंद किया जाए व जाती का दाखला बंद करके सिर्फ प्रवर्ग का ही प्रमाणपत्र दिया जाए ।*

*8) सम्पूर्ण देश में विभिन्न सरकारी संस्थानों विभागों में ओबीसी एससी एसटी के लिए आरक्षित सम्पूर्ण रिक्त पदों को सक्तिपूर्वक भरा जाए ।*

 *9) बीजेपी की NDA सरकार मा.सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायधीशों की पीठ ने एससी एसटी वर्गों के आरक्षण में उपवर्गीयकरण व क्रीमीलेयर लागू करने का जो फैसला सुनाया हैं उसे लागू ना करने का सिर्फ आश्वासन ही ना दे । जबकि संसद में विशेष सत्र बुलाकर उपरोक्त सभी मांगो को संविधान संशोधन बिल लाकर उसे पास करे ।*


🍁 *बहुजन समाज पार्टी नागपुर के सभी जिल्हा शहर विधानसभा सेक्टर बूथ स्तरीय सभी आजी माजी पदाधिकारियों कार्यकर्ताओ तथा आम जनता को सूचित किया जाता हैं की देश की सबसे बड़ी बहुजन नेता बीएसपी सुप्रीमों परमादरणीय बहन कुमारी मायावतीजी इनके दिशानिर्देशों से तथा केंद्रीय प्रभारी व राज्यसभा सांसद मा.रामजी गौतम व बहुजन समाज पार्टी महाराष्ट्र के सम्मानीय प्रदेशाध्यक्ष मा.एड.सुनील डोंगरे सर के मार्गदर्शन में व नागपुर जिल्हाध्यक्ष मा.योगेश लांजेवार के आदेशों से एससी एसटी वर्ग के आरक्षण में उपवर्गीकरण के विरुद्ध दलित आदिवासी बहुजनों के बुधवार दिनांक 21 अगस्त 2024 के भारत बंद को बहुजन समाज पार्टी का पूर्ण समर्थन प्राप्त हैं ।*


🍁 *अतः नागपुर ग्रामीण की तहसीलों में बसपा के बैनर और झंडे के साथ सामूहिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते हुवे माननीय महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबंधित तहसील के मा.तहसीलदार को निवेदन सौंपा जाए । साथ ही नागपुर शहर की अपनी अपनी विधानसभा में बसपा के बैनर और झंडे के साथ सामूहिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करते हुवे फिर नागपुर के संविधान चौक में एकत्रित होकर वहा भी शांतिपूर्वक प्रदर्शन करते हुवे जिल्हाधिकारी कार्यालय में जाकर माननीय महामहिम राष्ट्रपति के नाम मा.जिल्हाधिकारी को निवेदन दिया जाए ।*


🍁 *साथ ही पुरे देश के बसपा कार्यकर्ताओ से अपील हैं की सम्पूर्ण देश में भी शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों की तहसीलों एवं गावों में बसपा के बैनर और नीले झंडे के साथ शांतिपूर्वक प्रदर्शन करके महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबंधित जिल्हाधिकारी/ तहसीलदार को निवेदन सौंपा जाए ।*


🍁 *क्या हैं पूरा मामला ?* *जानने समझने के लिए पूरी पोस्ट पढ़े* 👇


🍁 *देश की सर्वोच्य अदालत मा. सुप्रीम कोर्ट में डॉ. न्यायमूर्ति डी.वाई.चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली 7 सदस्यीय बेंच ने 01 /08 /24 को SC -ST वर्ग के आरक्षण के उपवर्गीकरण (Subclassification) के पक्ष में फैसला सुनाकर SC - ST वर्ग के आरक्षण के उपवर्गीकरण को मान्यता प्रदान की हैं और जिसको लेकर और भी बहोत सी बाते कही गई है ।*


🍁 *मा. सुप्रीम कोर्ट ने "दविंदर सिंह बनाम" पंजाब राज्य मामले में पारित आदेश के अनुसार टिपणी की है की अब राज्य सरकारे अनुसूचित जाती के रिज़र्वेशन कोटे में भी कोटा दे सकेगी । याने एससी एसटी कैटेगिरी में आनेवाली अलग-अलग जातियों में रिजर्वेशन कोटे का बटवारा किया जा सकेगा । सामान्य शब्दों में अब राज्य सरकारे अनुसूचित जाती व जनजाति के आरक्षण की सूचि के भीतर आरक्षण के उपवर्गीकरण के अंतर्गत नई सूचि बना सकेगा।*


🍁 *सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के विरुद्ध सबसे पहले हम बहुजनों की सबसे बड़ी राष्ट्रीय नेता बीएसपी सुप्रीमों परम आदरणीय बहन कुमारी मायावतीजी ने दिनांक 04 अगस्त 2024 को व उसके बाद x (ट्विटर ) में कई पोस्ट करके और उसके बाद फिर दिनांक 10 अगस्त 2024 को पुनः प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर इस फैसले पर अपनी असहमति जताई हैं । माननीया बहनजी ने चिंता जताई की मा.सुप्रीम कोर्ट के इस गलत फैसले से अनेको समस्याएं सामने आने लगेगी ।*


🍁 *माननीया बहनजी ने बताया की मा.सुप्रीम कोर्ट ने 01 /08 /24 को एससी एसटी वर्ग के उपवर्गीकरण (subclassification)के पक्ष में फैसला सुनाकर बिस वर्ष पूर्व साल 5 नवंबर 2004 के पांच न्यायधीशों के संविधानिक पीठ द्वारा "ई.वी.चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य" मामले में दिए गए फैसले को ही पलट कर रख दिया हैं । जिसमे अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जातियों के भीतर किये जानेवाले वर्गीकरण को मान्यता देने से इंकार कर दिया गया था. उस मामले में ये भी कहा गया था की "अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर उपवर्गीकरण नहीं किया जा सकता हैं । क्योकि वे एक ही समूह याने सामान वर्ग में आते हैं ।"* 


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2004 के अपने निर्णय में ये भी कहा था "क्योकि अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लोगो ने जो अन्याय अत्याचार सहे है वे एक वर्ग और एक समूह के रूप में सहे हैं तथा ये एक बराबर का वर्ग हैं । जिसके भीतर किसी भी प्रकार का वर्गीकरण करना उचित नहीं होगा।"* 


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2004 के निर्णय में ये भी कहा था की "अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के भीतर किसी भी प्रकार का उपवर्गीकरण भारतीय संविधान के मूल भावना के विपरीत होगा।"*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट ने अपने वर्ष 2004 के इस फैसले के द्वारा समानता के अधिकार का उल्लंघन करने के कारण आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा पारित "आंध्रप्रदेश अनुसूचित जाती अधिनियम 2000 "को भी रद्द कर दिया था।*

 

🍁 *अपने साल 2004 के निर्णय में मा.सुप्रीम कोर्ट ने ये भी माना था की "ये वर्गीकरण इन जातियों के भीतर अलग अलग व्यवहार करके समानता के अधिकार का उल्लंघन करेगा।"*


🍁 *लेकिन इस वर्ष 2024 में मा.सुप्रीम कोर्ट के 7 न्यायधीशों की पीठ के दिनांक 01/08/2024 के निर्णय ने वर्ष 2004 के निर्णय को ही पलट के रख दिया हैं । जबकि इस निर्णय से अनेकों मतभेद उतपन्न होंगे।*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 01/08/2024 को निर्णय लेने के बाद केंद्र और राज्य सरकारों के बिच में ही मतभेद की स्थिति उतपन्न होगी। क्योकि अभी तक केवल संसद के पास किसी भी जाती को या जनजाति को अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति में सम्मिलित करने या बाहर करने का पावर हैं। जिसे माननीय राष्ट्रपति द्वारा अपने आदेशों से क्रियान्वित किया जाता हैं और जिसे बदलने का किसी भी राज्य सरकार को अधिकार नहीं हैं ।*


🍁 *परन्तु अब दिनांक 01/08/2024 के निर्णय के बाद जहा जो पार्टी सत्ता में होगी वो अपनी अपनी राजनीति के हिसाब से इस निर्णय का सही गलत फायदा उठाकर इस वर्गीकरण को ही अदलती-बदलती रहेगी।जिसके साथ साथ राज्य की सरकारे अपने अपने वोट बैंक के लिए मनचाही जातियों को आरक्षण का अनुचित लाभ देने का प्रयास करेगी ।*


🍁 *इस प्रकार से इस आदेश से ऐसी अनेको समस्याएं उतपन्न होगी जिसके कारण एक प्रकार से एससी व एसटी को मिल रहा आरक्षण ही समाप्त हो जाएगा। फिर इसका नतीजा ये होगा की अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति वर्ग आरक्षण से ही वंचित रह जाएगा और उनके हिस्से का आरक्षण भी किसी ना किसी रूप में सामान्य वर्ग को ही दे दिया जाएगा।*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनी दिनांक 01/08/2024 के इस निर्णय में इस बिंदु पर भी पर्याप्त विचार व्यक्त नहीं किये गए हैं की अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति के किन लोगो को क्रिमिलियर की श्रेणी में रखा जाएगा और ये तय करने का क्या मानक होगा की किन लोगो को अब आरक्षण की आवश्यकता नहीं हैं. इस कार्य के लिए अब राज्य सरकारों को राजनीति करने का पूरा मौक़ा मिल जाएगा ।*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद यदि अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति के भीतर उपवर्गीयकरण किया जाता हैं तो वर्तमान में लागू आरक्षण के अनुसार सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अनेकों पद रिक्त रह जायेगे। क्योकि जिन सिमित वर्ग की उपजातियों को आरक्षण दिया जाएगा उसमे वित्त सापेक्ष उतने अभियार्थी उपलब्ध नहीं हो पाएंगे और ऐसी स्थिति में बची हुई रिक्तिया अंत में सामान्य वर्ग के हिस्से में ही चली जायेगी । जिससे समूचे दलित व् आदिवासी समाज के पिछड़े हुवे लोगो को काफी नुकसान होगा और उनमे असंतोष की भावना उतपन्न होगी ।*


🍁 *इसके साथ साथ मा.सुप्रीम कोर्ट के दिनांक 01 ऑगस्ट 2024 के निर्णय अनुसार अब राज्य सरकारों को ये अधिकार होगा की वे संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के अंतर्गत माननीय महामहिम राष्ट्रपति के द्वारा घोषित एससी व एसटी जातियों के समूह का उपवर्गीकरण करके आरक्षण का लाभ उन विशिष्ट कुछ जातियों को दे सकते है और ऐसा करते समय एससी व एसटी के समूह में बची हुई जातियों को उससे वंचित रख सकती हैं । क्योकि राज्य सरकार की निगाह में उन जातियों को अब आरक्षण की आवश्यकता नहीं हैं।क्योकि उन जातियों में से कुछ लोग सामाजिक तौरपर एससी व एसटी वर्ग की अन्य जातियों से बेहतर स्तर पर हैं । मा.सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस उपवर्गीयकरण के पक्ष में जो जोरदारी से दलील रखते समय बीजेपी द्वारा केंद्रशासित सरकार के Attorney General , Solicitor General, पंजाब में आम आदमी पार्टी के महाधिवक्ता, हरियाणा व चंडीगढ़ से अधिवक्ताओ द्वारा ये महत्वपूर्ण तथ्य नहीं रखा गया की वर्गीयकरण के तहत जिन जातियों को लाभ से वंचित कर दिया जाएगा उन जातियों में अभी भी लाखो व्यक्ति ऐसे होंगे जिनको आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया हैं और अब उन्हें अनुच्छेद 341 एवं 342 के तहत एससी व एसटी वर्ग के समूहों में होते हुवे भी हमेशा के लिए आरक्षण से वंचित रहना पडेगा । जो की किसी भी प्रकार से न्यायसंगत व उचित नहीं होगा ।*


🍁 *ये पूर्ण रूप से असंवैधानिक भी होगा तथा ये सभी उपवर्गीयकरण वाली जातिया आपस में ही कोर्ट कचहरी अदालतों में वर्षों तक लड़ते झगड़ते रहेंगे और अंत में ये सभी लोग फिर आरक्षण से वंचित रह जायेगे ।* 


🍁 *साथ ही मा.सुप्रीम कोर्ट के समक्ष "दविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य" मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र के वकीलों और राज्य सरकार के तरफ से भी सत्ताधारी दल के वकीलों ने ही अपना पक्ष रखा हैं। परन्तु माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिनांक 01/08/2024 के निर्णय पे अब तक किसी अन्य राज्यों की सरकारों ने अपना पक्ष नहीं रखा हैं । जिससे अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति के लोगो में मा.सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लेकर काफी भ्रान्ति की स्थिति बनी हुई हैं।*


🍁 *मा.सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई के दौरान समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद जो की वरिष्ठ अधिवक्ता भी हैं तथा इनके साथ साथ बीजेपी ने केंद्र में अपनी सरकार की ओर से मा. Attorney General , Solicitor जनरल तथा कुछ राज्य सरकारों के वकीलों द्वारा उसमे भी खासकर आम आदमी पार्टी द्वारा शाषित पंजाब सरकार की ओर से पंजाब के एडवोकेट जनरल, हरियाणा एवं चंडीगढ़ में बीजेपी की ओर से उनके वकीलों द्वारा उपवर्गीयकरण के पक्ष में तथ्यों को तोड़ मरोड़कर प्रस्तुत करते हुवे बाबासाहेब डॉ भीमराब आंबेडकर द्वारा संविधान सभा में लंबे विचारविमर्श के बाद बनाये गए आरक्षण के सिद्धांतों के साथ छेड़छाड़ करने का कार्य किया गया हैं जो की आरक्षण को पूरी तरह समाप्त करने की मानसिकता के तहत उठाया गया गंभीर गलत कदम हैं ।*


 🍁 *साथ ही मा.सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिनांक 01/08/2024 को दिए गए निर्णय के बाद अनुसूचित जाती एवं जनजाति के लोगो के भीतर आपसी द्वेष की भावना बढ़ेगी । जिससे समाज में विभाजन की भावना को और अधिक बढ़ावा मिलेगा । जो की राष्ट्र की एकता और अखंडता पर करारा प्रहार करने जैसा होगा । जबकि "अनुसूचित जाती व जनजाति कोई साधारण जाती नहीं हैं । ये केवल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 व 342 के अधिसूचना के जरिये अस्तित्व में आई हैं और ये अनुसूचित जातियों व जनजातियो का एक मिश्रण हैं और एक बार अधिसूचित होने के बाद फिर ये समरूप समूह बन जाता हैं।"*


🍁 *साथ ही राज्यों की सरकारों के द्वारा ये उपवर्गीयकरण अनुच्छेद 341 एवं 342 के तहत मा.माननीय राष्ट्रपतिजी के अधिसूचना का उल्लंघन होने के साथ साथ ये पूर्ण रूप से असंवैधानिक भी होगा ।क्योकि कोई भी राज्य सरकार मा.माननीय राष्ट्रपतिजी के पावर को खत्म नहीं कर सकती हैं। क्योकि ये संविधान के अनुच्छेद 341 भाग 2 एवं 342 का उल्लंघन होगा।*

 

🍁 *साथ ही इससे ये हमेशा ही खतरा बना रहेगा की अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति को दिया जाने वाला आरक्षण ही ख़त्म हो जाएगा। जबकि अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगो के वर्गीयकरण का एकमात्र मुलभुत आधार "सामाजिक गैरबराबरी अर्थात छुवाछुत व जातपात" रहा हैं। ऐतिहासिक तोर पर "सामाजिक गैरबराबरी की वजह से ही आरक्षण दिया गया है।" तो ऐसे में जाती के आधार पर प्रताड़ना झेलने वाले समुदाय के बिच आरक्षण का बटवारा करना पूर्ण रूप से अनुचित असंवैधानिक व गलत हैं। क्योकि "दलित व आदिवासियों के आरक्षण का उद्देश्य ही जातपात और छुवाछुत की बुराइयों को दूर करना था।"*


🍁 *साथ ही दिनांक 01/08/2024 के मा.सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार अब राज्य सरकारे अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति का उपवर्गीयकरण कर सकती है जो की असंवैधानिक है अनुचित हैं। इतना ही नहीं बल्कि अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति समुदाय का ये उपवर्गीयकरण जिसे मा.सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी है उसे अब राजनैतिक दलों द्वारा राजनैतिक हथियार के रूप में उपयोग किया जाएगा। जहा एक तरफ राजनैतिक दल अपने राजनैतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कुछ अनुसूचित जाती व कुछ अनुसूचित जनजाति के लोगो को हाशिये पर धकेल देंगे और उनके लिए पक्षपात का माहौल बनाकर अपना उद्देश्य पूरा करेंगे। वही दूसरी तरफ अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति के इस उपवर्गीयकरण के कारण काफी पद रिक्त रह जायेगे और आगे चलकर उन पदों के अनारक्षित श्रेणी में तबदीली हो जाने के प्रबल संभावनाएं होगी ।*


🍁 *अतः जिस मुख्य उद्देश्य के लिए परमपूज्य बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर जी ने संविधानिक अधिकार के तहत अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों को आरक्षण दिया था उसे अब एक प्रकार से प्रभावहीन बना दिया जाएगा अर्थात ख़त्म कर दिया जाएगा ।*

 

🍁 *वैसे भी खासकर बीजेपी कांग्रेस व समाजवादी पार्टी आदि हमेशा से ही एससी एसटी को मिल रहे आरक्षण के विरुद्ध रहे हैं और इसलिए इनके वकीलों ने उपवर्गीयकरण की काफी जोरदारी से सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी दलीले भी रखी हैं और इसे ख़त्म करने की सिफारिश में ये बीजेपी कांग्रेस समाजवादी जैसी पार्टिया हमेशा प्रयासरत रहती है।*


🍁 *समाजवादी पार्टी ने तो संसद के भीतर ही पदोन्नति में आरक्षण संबंधी बिल को बीजेपी और कांग्रेस की मिली भगत से फाड़ दिया था । जिसे आज तक केंद्र सरकार संसद में दुबारा नहीं ला सकी हैं। जिसकी वजह से मा.सुप्रीम कोर्ट ने "नागराज" के निर्णय के तहत आज एससी व एसटी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण संबंधी लाभ से वंचित रहना पड़ रहा है। तथा अब इसी प्रकार से दिनांक 01/08/2024 के निर्णय के तहत हमेशा के लिए ही एससी व एसटी वर्ग को आरक्षण से वंचित कर दिया जाएगा। इससे फिर बीजेपी कांग्रेस व समाजवादी पार्टी आदि को आरक्षण ख़त्म करने के लिए संविधान बदलने की भी जरुरत नहीं पड़ेगी।*


🍁 *ये ही कारण है की इन पार्टियों ने केंद्र सरकार व राज्य सरकारों की तरफ से उचित पैरवी भी नहीं की हैं और क़ाफी कुछ उपवर्गीयकरण के पक्ष में दलीले रखी है। जिससे मौजूदा चल रहे आरक्षण के विरुध्द निर्णय आया हैं।*


🍁 *यदि बीजेपी का NDA गठबंधन व इंडिया अलायंस के सभी पार्टियों की नियत ठीक होती और वो एससी व एसटी को मिल रहे आरक्षण में छेड़छाड़ आदि करते हुवे उसे ख़त्म नहीं करना चाहते तो फिर परमादरणीय बहन कुमारी ने सभी पार्टियों से अपील करि की है की ये सभी पार्टिया इस विषय पर इस मुद्दे पर देश के समूचे एससी व एसटी समाज के समक्ष अपना पक्ष स्पष्ट करे और इसी चल रहे संसद सत्र में संविधान में उचित संशोधन लाकर ये स्पष्ट करे की अनुच्छेद 341 व अनुच्छेद 342 के तहत माननीय राष्ट्रपति द्वारा घोषित एससी व एसटी जातियों के संबंध में भविष्य में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ व उपवर्गीयकरण करने का अधिकार किसी को भी नहीं होगा। तथा इन सभी जातियों को आरक्षण प्राप्त होने के लिए एक समूह के रूप में ही देखा जाएगा। ये इनको संविधान में उचित संशोधन विधेयक लाकर उसे पास करना चाहिए। ये सब लाकर इनको संविधान की 9वी अनुसूची में इसको शामिल करना चाहिए ताकि फिर भविष्य में कभी भी जो एससी एसटी का जो आरक्षण हैं, उसके साथ किसी भी प्रकार का छेड़छाड़ उपवर्गीयकरण आदि ना हो सके ।*


🍁 *हालांकि ये जो नौबत आई है ये नौबत नहीं आती यदि इसको बहोत पहले ही संसद द्वारा संविधान की 9वी सूचि में डाल दिया जाता ।*


🍁 *बहुजन समाज पार्टी ने लोकसभा और राज्यसभा में भी इस मामले को अनेको बार उठाया हैं। लेकिन पूरी साजिश के तहत हर बार इसे ताल दिया गया । क्योकि जब बीजेपी पावर में रहती है तो वो भी उसको टालमटोल करती हैं और जब कांग्रेस पावर में रहती हैं तो वो भी इस मामले को टालमटोल कर देती हैं।*

 

🍁 *इससे स्पष्ट हैं की चाहे कांग्रेस हो बीजेपी हो या अन्य पार्टिया हो इनकी एससी एसटी के मामले में इनकी विकृत जातिवादी सोच कतई बदली नहीं हैं। परमादरणीय बहनजी ने कहा हैं की मुझे नहीं लगता है ऐसा कुछ ये पार्टिया कर पाएगी । उन्होंने आगे कहा की इसके साथ साथ मेरी इस देश की सभी अनुसूचित जाती व अनुसूचित जनजाति वर्गों के लोगो से ये ख़ास अपील भी हैं की इस समय इस निर्णय से उतपन्न स्थिति को अपने व अपने बच्चो के भविष्यों तथा अपने संविधानिक अधिकारों को नुकसान होने से बचाने के उद्देश्य से तथा परमपूज्य बाबासाहेब डॉ भीमराव आंबेडकर के द्वारा अपने अथक प्रयासों से इन वर्गों को जो संविधानिक अधिकार दिलाये गए हैं तो उन्हें खत्म होने से बचाने के लिए इस स्थिति को अपने लिए एक "आपातकालीन की स्थिति" समझते हुवे हमे एकजुट होना पडेगा । तथा मात्र अपने अपने राजनैतिक स्वार्थ व दबाव से प्रेरित व भयभीत ना होकर यहाँ सभी राजनैतिक पार्टियों के ऊपर दबाव डालकर उपवर्गीयकरण के विरुद्ध संविधानिक संशोधन लाने के लिए इन्हें मजबूर करना पडेगा ।*


🍁 *परमादरणीय बहन कुमारी मायावतीजी ने इस खास अपील के साथ ही मा.सुप्रीम कोर्ट से भी पुरजोर अपील करि की वे देश में एससी व एसटी वर्गों के हितो में अपने दिनांक 01/08/2024 को दिए गए फैसले पर खुद ही पुनर्विचार करके इसमें मेरी इन सब बातो को ख़ास ध्यान में रखते हुवे जरुरी बदलाव लाये, तबदीली लाये, वरना इन वर्गों में से आरक्षण के पात्र लोगो को बड़ा भारी नुकसान होगा ।*


🍁 *परम आदरणीय बहन कुमारी मायावतीजी ने मा.सुप्रीम कोर्ट से इस ख़ास अपील के साथ ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुवे कहा की बीजेपी कांग्रेस द्वारा नियुक्त वकीलों के कारण ही मा.सुप्रीम कोर्ट को ये उपवर्गीयकरण का आदेश देने में आसानी हुई हैं । इससे इनका इंटेंशन साफ़ दिख रहा है की बीजेपी कांग्रेस स्वयं एससी एसटी वर्ग के आरक्षण को खुद खत्म ना कर मा.सुप्रीम कोर्ट के न्यायधिशो के फैसलों के जरिये खत्म करना चाहते हैं और इसमें ये लोग काफी हद तक कामयाब भी हो गए हैं और बहुजन समाज पार्टी इस फैसले को लेकर बहोत चिंतित हैं ।*


🍁 *परम आदरणीय बहन कुमारी मायावतीजी ने बताया की जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी तब एससी एसटी वर्ग के पदोन्नति में आरक्षण मामला जब प्रभावहीन हो गया था तो तब हमने इसे प्रभावशाली बनाने के लिए कांग्रेस पे दबाव बनाकर एससी एसटी वर्ग के पदोन्नति में आरक्षण के संशोधन विधेयक बिल को संसद में लाया ।तब कांग्रेस बीजेपी नहीं चाहती थी की एससी एसटी वर्ग के लोगो को पदोन्नति में आरक्षण मिले इसलिए कांग्रेस बीजेपी ने खुद कुछ ना कर सपा के जरिये भरी संसद में इस पदोन्नति में आरक्षण के बिल को फाड़ा और इस बिल को पास नहीं होने दिया और अभी तक ये बिल पास नहीं हो पा रहा हैं ।*

 

🍁 *माननीया बहन कुमारी मायावतीजी ने बताया की आरक्षण के कारण एससी एसटी वर्ग के मुश्किल से 10% लोगो की हालत ठीक हुई होगी लेकिन बाकी 90% लोगो की हालत तो जस की तस बनीं हुई हैं।*


🍁 *ऊपर से जिन 9-10 % लोगो की हालत सुधरी भी होगी लेकिन सामान्य जनरल लोग तो फिर भी उनको पुरानी नजरो से ही देखते हैं । उनके प्रति इनकी जातिवादी मानसिकता में सुधार कहा हुवा हैं।*


🍁 *ऊपर से माननीय सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यदि उन जातियों को निकाल दिया जाएगा तो जो 90% लोग जिनको अभी आरक्षण की जरूरत हैं, वो तो और ज्यादा पिछड़ जायेगे। क्योकि इस निर्णय के अनुसार उनको आरक्षण अब मिलेगा ही नहीं ।*

 

🍁 *बीजेपी कांग्रेस चाहे तो संसद में संविधान संशोधन विधेयक लाकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदल सकती हैं। "सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को बदलने का पावर संसद में हैं।"*


🍁 *गर बीजेपी की NDA सरकार ऐसा नहीं करती और ये संविधान संशोधन बिल लाने के लिए उसे संविधान की 9वी सूचि में लाने के लिए इंडिया गठबंधन के कांग्रेस सपा ऐसा करने को बीजेपी की NDA सरकार को मजबूर नहीं करते है तो एससी एसटी और ओबीसी वर्ग ने समझ जाना चाहिए की बीजेपी कांग्रेस समाजवादी पार्टियों की एससी एसटी ओबीसी वर्ग के प्रति नियत साफ़ नहीं हैं।*


🍁 *जबसे मा.सुप्रीम कोर्ट का एससी एसटी वर्ग के विरुद्ध उनके आरक्षण में उपवर्गीयकरण और क्रीमीलेयर का फैसला आया है तबसे इस मुद्दे को लेकर संविधान की किताब दिखा दिखा कर बीजेपी द्वारा संविधान बदलने का डर दिखा–दिखा कर जिस कांग्रेस सपा ने संविधान बचाने के लिए वोट माँगा था। वो ही कांग्रेस सपा इस मुद्दे पर मुँह में टाला लगाकर बैठी है । इस बात को हमारे उन उच्चशिक्षित लेकिन भावनिक लोगो ने समझने की जरुरत है जिन्होंने कांग्रेस सपा को भर भर के वोट दिया हैं ।*


🍁 *साथियों बीजेपी कांग्रेस ये अलग ना होकर एक ही पार्टिया हैं । दोनों चोर चोर चचेरे फुफेरे मौसेरे भाई हैं । इस बात को हमे समझकर अब तो भी भविष्य में बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस सपा को भी अपने वोटिंग पावर का सही उपयोग करके करारा जवाब देने की जरुरत आन पड़ी हैं...* 


✍️

*–मा.अभिलेश वाहाने*

*बसपा नागपुर जिल्हा सचिव व पश्चिम नागपुर विधानसभा इंचार्ज*

8806088007

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Friday, 16 August 2024

डंकल राज बनाम रविदास Raj

 🌹अति आवश्यक सूचना दिनांक 17 अगस्त 2024


आर्थर डंकल की अर्थव्यवस्था बनाम संत शिरोमणि रविदास की अर्थव्यवस्था 🙏


भारत में दलितों का शोषण लंबे समय से हो रहा है, बाबा साहब ने इस शोषण को रोकने के लिए जिस संविधान का प्रतिपादन किया, उसका आधार संत शिरोमणि गुरु रविदास का दिया गया सिद्धांत रविदास राज था 🙏


 रविदास राज आर्थिक समानता का सिद्धांत देता है वही डंकल की अर्थव्यवस्था का सिद्धांत आर्थिक विषमता को जन्म देता है 🙏


डंकल की सोंच 1985 तक केवल यूरोपिय देशों में लागू थी, जो दो तरह के समाज बना रहा था एक पूंजीवादी दूसरे गरीब 🙏


 यह इस प्रकार का सिद्धांत है, जो पूंजी का केंद्रीकरण करता है, और जिन राष्ट्रॉ के पास पूंजी अधिक होगी, उनके अहंकार भी बड़े होंगे 🙏 इस सिद्धांत में पूंजी सरकार के पास तो होती है परंतु आम जनता के पास नहीं होती है, 🙏 धन कुछ बहुराष्ट्रीय कंपनियों के पास आकर एकत्रित हो जाता है, आम जनता कंगाल हो जाती है 🙏 बहुराष्ट्रीय कंपनियां, राज्य सरकारों से ज्यादा ताकतवर हो जाती है 🙏


भारत अभी जातिवाद के कोढ़ से मुक्त भी नहीं हुआ था कि मनुवादी अर्थव्यवस्था के समान डंकल अर्थव्यवस्था को संपूर्ण विश्व पर लागू कर दिया गया 🙏 और सन 1991 में भारत में उत्पन्न हुए राजनीतिक हालातो के कारण भारत को भी इसका सदस्य होना पड़ा, और सन 1991 में नई औद्योगिक नीति भारत में लागू की गई 🙏


भारत में तो पहले ही पूंजी कुछ चंद्र लोगों के पास होती थी, जिनको जमींदार/ सामंती कहा जाता था, जिन्हे आम जनता को लूटने की खुला छूट थी, इस लूट में जातिगत आर्थिक शोषण की प्रमुख था 🙏 जाति-जाति का अंतर करके विभिन्न आधार पर जातियों की आर्थिक लूट की जाती थी 🙏


दूसरी तरफ पुरोहित और पंडित आम जनता से घंटा बज-बाया करते ताकि आम जनता विद्रोह ना करें और भाग्य भरोसे रहे 🙏


 रविदास राज के सिद्धांत के आधार पर भक्त डॉ. अंबेडकर ने भारतीय संविधान में रविदास राज को स्थापित कर दिया, और राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में बता दिया सरकार को क्या करना है! और मूल अधिकारों के अंतर्गत यह बता दिया कि सरकार को क्या नहीं करना है 🙏


सन 1935 में जब ब्रिटिश सरकार ने भारत के धर्म को मान्यता देने की व्यवस्था की तो बाबू मांगू राम के प्रयास से बाबा साहब रविदास राज की व्यवस्था से परिचित हुए 🙏 बाबा साहब ने संविधान बनाते समय विभिन्न देशों के संविधानों का अध्ययन किया और उसमें रविदास राज की व्यवस्था को खोजा और उसके परिणामों का अध्ययन किया 🙏


 परन्तु जो खुद को रविदासिया कहते थे अहंकार से ग्रस्त थे, अहंकार उनके शीर्ष पर था, एक अच्छी राज्य व्यवस्था का सिद्धांत होने के बावजूद सिखों के आपसी मतभेद होने के कारण बाबा साहब ने इस धर्म को ग्रहण नहीं किया 🙏 


क्योंकि धर्म का पहला मूल है, मानव को मानसिक रूप से स्वस्थ करें, इसका सिद्धांत बाबा साहब को, बौद्ध धर्म में मिला 🙏 बाबा साहब बौद्ध धर्म की मात्रा एक ही पुस्तक लिख सके जोकि बौद्ध धर्म का संक्षिप्त इतिहास बताती है 🙏


 बाबा साहब जीवित रहते तो अगली पुस्तक में बताते कि बौद्ध धर्म क्या है परंतु यह हो ना सका, और बाबा साहब की अकाल मृत्यु हो गई 🙏बौद्ध धर्म को समझने की जिम्मेदारी उन्होंने भिक्षुओं पर डाल दी🙏 परंतु यह (भिक्षु) अज्ञानी पुरोहितों और पंडितों के ही मौसेरे भाई निकले, गणेश के प्रतिमा को ना पूजकर बुद्ध की प्रतिमा को पूजने लगे🙏 क्योंकि ब्राह्मण कुल के अधिकतम लोग भिक्षु होने लगे 🙏 जिन्होंने बाबा साहब द्वारा पुनः स्थापित बौद्ध धर्म का सत्यानाश कर दिया 🙏


सचखंड डेरा बलला जो आज अपनी आयु 100 वर्ष बताता है, उस समय शैशव अवस्था में था, और आगे चलकर, इसके अपने ही संत इतने अहंकारी हो गए कि उन्होंने अपने डिसीप्लिनरी कमेटी को भंग कर दिया, और उस से पृथक हो गये 🙏


बिना नियंत्रण इकाई के कोई भी संगठन किसी भी समय अहंकारी हो सकता है, सचखंड डेरा बल्ला में यह साफ-साफ दिखाई देता है 🙏 और यह दोनों आपस में लड़ने लगे, जो आजकल हरि और सोहम के नाम से जाने जाते हैं 🙏


इसको भारतीय संविधान के परिपेक्ष में देखना चाहे तो आसानी से समझ सकते हैं, जिस प्रकार भारत में न्यायपालिका और कार्यपालिका है, और दोनों आपस में टकराते रहते हैं, परंतु भारतीय संविधान के कारण अभी भी दोनों का अस्तित्व बना हुआ है🙏 इसी प्रकार खुरालगढ़ आदबांशियों की न्यायपालिका है, और सचखंड डेरा बल्ला कार्यपालिका थी 🙏


आगामी पीढ़ी इस चीज को ना समझ पाए, इसलिए मूर्खतापूर्ण ढंग से सन 2010 में अखिल भारतीय रविदासिया धर्म बना दिया गया 🙏 इसमें आज भी कोई बौद्धिक कार्य नहीं हो रहा है,🙏 रविदास राज स्थापित करने का काम नहीं हो रहा है 🙏


ऑथर डंकल के आर्थिक सिद्धांत के विपरीत रविदास राज को कैसे स्थापित किया जाए इस पर कोई काम नहीं हो रहा है, बल्कि घंटा बजाना और आरती अरदास सिखाया जा रहा है🙏


विदेशी रविदास संगठन भी इस षड़यंत्र को समझने में सक्षम नहीं है 🙏 जबकि रविदास राज की स्थापना के लिए वे सचखंड डेरा बल्ला को भरपूर दान दे रहे हैं 🙏


 कृपया नीचे के बिंदुओं को फिर से समझो 


आर्थर डंकल (26 अगस्त 1932 - 8 जून 2005) एक स्विस ( पुर्तगाली में जन्मे) प्रशासक थे। उन्होंने 1980 और 1993 के बीच टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौते के महानिदेशक के रूप में कार्य किया। डंकल ने जिनेवा में ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज से शिक्षा प्राप्त की।


 व्याख्या-डंकल प्रस्ताव नाम का एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता हुआ था। वही डंकल प्रस्ताव वर्तमान में विश्व व्यापार संगठन के रूप में अस्तित्व में है। जबकि पहले डंकल प्रस्ताव को गैट के नाम से जाना जाता था, गैट वार्ता के आठवें दौर (उरुग्वे दौर) की वार्ता में मंतभेद उत्पन्न होने से 1990 में ब्रुसेल्स वार्ता भंग हो गई।


दिसंबर 1990 में अमेरिका एवं यूरोपीय समुदाय के मध्य उभरे कृषि सब्सिडी विवाद के कारण जब उरुग्वे वार्ता टूट गयी तब तत्कालीन गैट महानिदेशकऑर्थर डंकल द्वारा दिसंबर 1991 में प्रस्तावों की एक सूची प्रस्तुत की गयी, जिसे डंकल ड्राफ्ट या डंकल टेक्स्ट कहा गया।


 डंकेल मसौदा पाठ - आर्थिक उपनिवेशवाद का प्रस्ताव अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा भारत सरकार द्वारा GATT वार्ता के 8वें दौर पर हस्ताक्षर करने के लिए दी गई सहमति पर कड़ी आपत्ति जताती है (डंकेल मसौदा)।


नगोजी ओकोन्जो-इवेला ने 1 मार्च 2021 को डब्ल्यूटीओ महानिदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया। वह एक वैश्विक वित्त विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री और अंतर्राष्ट्रीय विकास पेशेवर हैं, जिन्हें एशिया, अफ्रीका, यूरोप, लैटिन अमेरिका और उत्तरी अमेरिका में काम करने का 40 वर्षों से अधिक का अनुभव है।


 इसी के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं 🙏


 अर्थशास्त्री, समाजवादी अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064


नोट :- उपरोक्त विषय की डिग्रियां तो मेरे पास है, परंतु उपाधियाँ स्वनिर्मित है 🙏 ताकि पाठक समझ सके उपरोक्त लेख में किन-किन विषयों को सम्मिलित किया गया 🙏

वार्ता प्रतिक्रिया लेख 16 अगस्त

 🌹वार्ता-प्रतिक्रिया लेख दिनांक 16 अगस्त 2024 


मैं कहूंगा तो लोगों को ज्यादा बुरा लगेगा, इसलिए कबीर की वाणी से कुछ प्रसंग उठाता हूं 


(1)

 गुरु लोभी शिष लालची,

 दोनों खेल दांव,

 दोनों बूड़े बापूरे,

 चढ़ी पाथर नाव 🙏


(2)

जाका गुरु है आंधरा,

चेला खरा निरंध 

अंधे को अंधा मिला,

पड़ा काल के फंद🙏 


(3)

 गुरु किया है देह का,👌

 सतगुरु चिन्नहा नँही 👌

 भवसागर के जाल में,

 फिर फिर गोता खांहि 🙏


(4)

 गुरु कीजिए जानि के,

पानी पीजे छानि

बिना विचारे गुरु करें 

परै 84 खानि 🌹


अनेकार्थी शब्द बहुत भ्रम पैदा करते हैं 🌹 और कबीर तो उलट वास के उस्ताद - पता नहीं कौन सा शब्द किस अर्थ में प्रयोग कर देवें, जिन्होंने जाना है वही कबीर की वाणी को समझ सकेंगे 🌹 "गुरु" शब्द का वास्तविक अर्थ स्थान के अनुसार समझ सकेंगे 🌹


 देह धारी गुरु तो केवल घंटा बज-बाएंगे, और फिजूल के विषय पर चर्चा करे और कराएंगे🌹 


दलित उद्योगपति हों अथवा सवर्ण उद्योगपति, जब तक की सरकार की अर्थनीति चेंज नहीं होती, उसी अर्थव्यवस्था में काम करना होगा 👏


इसलिए व्यापारिक संगठनों की समस्याएं अलग है 🌹 और सभी धार्मिक संगठनों को व्यापारिक संगठनों से अपनी जीविका के लिए धन मिलता है 👏


परंतु रविदास राज के समर्थकों को, आर्थिक समानता के विषय पर काम करना होगा, और भारत में फैली मनुवादी अर्थव्यवस्था को समाप्त करने के लिये काम करना होगा 🌹


सामाजिक संगठन कर्मठ होते हैं, परंतु किसी भी आध्यात्मिक सोच को नहीं रखते, अधिकांश समय उनका झुकाव व्यापारिक संगठन जैसा होता है🌹


धार्मिक संगठन ही अपने ज्ञान से सामाजिक और व्यापारिक संगठन का मार्गदर्शन कर सकते हैं🌹 शासन की नीति व्यवस्था को बदल सकते हैं 🌹


धार्मिक संगठन ने मनुष्य को पशु समाज से श्रेष्ठ बनाया है, परंतु जो धार्मिक संगठन पशु की ही पूजा करने लगे, उनका समाजवाद पशु संस्कृति से अधिक नहीं हो सकता है 🌹


शब्दों, चिंन्हो और झंडे के लिए लड़ना, उद्देश्य विहीन हो जाना है 🌹👏🌹


 गुरु ग्रंथ साहिब गुरु है,

 गुरु ग्रंथ साहब के अंदर के सभी गुरु को भक्त कहा जाता है, ताकि गुरु ग्रंथ साहब को गुरु कहा जा सके🌹


कभी कल्पना करके सोचिए, गुरु ग्रंथ साहब में संत शिरोमणि गुरु रविदास के 40 शब्द ना होते तो संत शिरोमणि गुरु रविदास कहां होते हैं 😭 क्या कोई और पुराना ग्रंथ है, जो संत शिरोमणि गुरु रविदास के बारे में कुछ कहता हो 🌹


सिख धर्म से दलित संतो को अलग करने का अभियान सन 1928 में बाबू मांगू राम ने चलाया, और उसके बाद आदधर्म की स्थापना की, आदधर्म का पृथक ग्रंथ श्री ईश्वर दास द्वारा संकलित किया गया है, जो सन 1960 में पूरा हुआ🌹


इसने तथाकथित हिंदुओं के महाकाव्य को इतिहास बना दिया है, अर्थात ब्राह्मणवाद के ही समर्थन में लिखा गया प्रतिवादी ग्रंथ है 🌹


 सन 2010 में अखिल भारतीय रविदासिया धर्म बनाया गया🌹 और गुरु ग्रंथ साहब से रविदास वाणी को निकाल कर अमृतवाणी बनाया गया 🌹


 क्या हमें गुरु ग्रंथ साहब के प्रति कृतज्ञता नहीं होना चाहिए 🌹 मूर्ख सिख, मूर्ख ग्रंथ पाठी और सिक्ख समाज विरोधी लोगों के कारण अर्जुन देव द्वारा संकलित गुरु ग्रंथ साहिब की महिमा काम नहीं हो जाती है 🌹 उसको उसी रूप में याद किया जाना चाहिए👏


 मेरा बाप मेरा बाप है, सभी मेरे बाप को बाप कहें यह कहलाना कदापि उचित नहीं है, गुरु ग्रंथ साहब में 14 भक्त और 10 भट्ट के ज्ञान से सुशोभित होता है, ग्रंथ गुरु है - गुरु गोविंद साहब भी गुरु नहीं है 🌹 गुरु अर्जन देव भी गुरु नहीं है 🌹 कोई भी देह धारी गुरु नही है, जब जब गुरु ग्रंथ साहब के परिपेक्ष में बात रखी जाएगी🌹


कल तीन लोगों से बड़ी महत्वपूर्ण चर्चा हुई, इसमें अंतरराष्ट्रीय संत, अंतरराष्ट्रीय संगठन के गणमान्य सदस्य, और दिल्ली के प्रतिष्ठित रविदास मंदिर के प्रबंधक रहे 🌹


 मेरी एक छोटी सी पोस्ट पर प्रश्न उठाकर उन्होंने चर्चा को आरंभ किया, मैं "रविदास" कहता हूं🌹 उन्होंने मुझ पर आरोप लगा कि मैंने उनके गुरु का नाम सम्मान से नहीं लिया, यह तो बिल्कुल बच्चों वाली बात है " मेरी मम्मी मेरी मम्मी का झगड़ा है" मेरी मम्मी कहे या अम्मी क्या फर्क पड़ता है


🌹 रविदास के अतिरिक्त लगने वाले सभी शब्द उपाधियां है 🌹यदि मैं उन्हे परमपिता रविदास कहूं तो? कहना है तो उनको यही कहा जाना चाहिए, क्योंकि वह चमार जाति के परमपिता हैं, संपूर्ण चमार जाति उनसे सुशोभित होती है🌹


 परंतु देहधारी गुरुओं को तो अपना संगठन पृथक दिखाना है, इसलिए उनका उपसर्ग और प्रत्ये अलग होना चाहिए😂


 उन्होंने अभी एक बड़ी कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए जो कि चंडीगढ़ में हुई, सिख धर्म के संतों को निर्देशित कर दिया है कि वह संत शिरोमणि गुरु रविदास को भक्त ना कहे, गुरु कहे, अगर कोई सिख संत रविदास जी के मंदिर में आता है, और संत रविदास को भक्त कहता है, तो अमृतवाणी पढ़ने का अधिकारों उससे ले लिया जाएगा, उसे अपने मंदिर में नहीं बुलाया जाएगा 😂


 मुझे वीडियो भी भेजा गया मेरे साथ चर्चा भी हुई, परंतु मैं यह नहीं समझ पाया इसमें धार्मिक बात कौन सी थी 🌹 यह सभी बातें तो फसादी थी 👏


 यह सब तो फसाद के बिंदु है, इससे समाज का कोई कल्याण नहीं होता है, संगत में आए समाज के लोगों का समय खराब किया गया, और पैसा बर्बाद किया गया, इस कांफ्रेंस से गुरु रविदास को कोई खुशी नहीं मिली होगी 🌹


अगर चर्चा इस विषय पर होती कैसे रविदास राज को स्थापित किया जाए, तब संत शिरोमणि गुरु रविदास को खुशी होती, क्योंकि उनकी इच्छा तो थी ऐसा चाहूं राज मैं.......


 गुरुओं की जीविका व्यापारियों पर निर्भर है, उनके मंदिरों की भव्यता व्यापारियों पर निर्भर है👌

व्यापारी सरकारी अर्थव्यवस्था की नीति पर निर्भर है, और अर्थव्यवस्था मनुवादी है, वह पहले भी शूद्र कहे जाने वाले श्रमिकों के शोषण की पक्षधर थी और आज भी व्यापारिक है जाने वाले शूद्र का ही शोषण करती है 


ऐसी दशा में किसी भी मंदिर गुरुद्वारा को व्यापारियों द्वारा दान इस बात के लिए होगा, जिन कर्मचारी और श्रमिकों ने मनुवादी अंधविश्वास को जानकार छोड़ दिया है, उनको संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम पर अंधविश्वास में फंसाए रखो, संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम पर घंटा बजाओ, संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम पर आरती और अरदास कराओ ताकि संत शिरोमणि गुरु रविदास के दर्शन के हिसाब से यह कभी भी " सब सम बसें" की मांग ना करें 🌹


 और गुरु भक्ति में लीन रहे, व्यापारियों के खिलाफ कोई विद्रोह ना करें🌹


 जहां तक गुरु शब्द का सवाल है, गुरु शब्द बहू अर्थी है - कबीर साहब शरीर वाले गुरु की महिमा का बखान नहीं कर रहे हैं, उनका गुरु तो कोई और है, 



 जिस प्रकार संत रविदास ने भी कहा है कि मेरा राम अयोध्या का राजा राम नहीं है, और उन्होंने सभी से राम-राम करवाया 🌹


यह कौन मूर्ख गुरु है, जिसने जय रविदास का सूत्र बनाया😂


 जहां जय होगी तो दूसरे की पराजय होगी, मतलब सदैव फ़साद चलता ही रहेगा🌹


 मनुवादी पहले सीताराम कहते थे, जब उसको राजनीति का रंग दिया गया, तो जय श्री राम कहां जाने लगा🌹 ताकि दूसरों को नीचा दिखाया जा सके, हमेशा तनाव बना रहे👏 और राजनीतिक रोटी सिकती रहे 👏


 जय श्री राम कहने वाले

 और जय रविदास कहने ने वाले दोनों ही फसादी हैं, जब बाबू मांगू राम जी ने जय रविदास कहा , तब राजनीतिक हालात कुछ और थे 🌹


 परंतु आजाद भारत में आप जय रविदास कह रहे हैं, इसका मतलब आप फसाद फैला रहे हैं, जो संत रविदास ने कहा आप वहीं कहें 🌹


 मेरी सबको राम राम 👏


 अब देता हूं अपनी वाणी को विराम 🌹


 साधक कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064

Wednesday, 14 August 2024

11 से 14 अगस्त के व्हाट्सएप पोस्ट

 [10/08, 10:07 pm] kamleshmittra: 😂 मेरे हाथ में मोती है 🙏 मुट्ठी बंद करो, तो मोती छिटक 😭जाते हैं 🙏


मैं क्या करूं🙏🌹 एक को मनाऊं तो दूसरा रूठ जाता है😭


अगर मेरी लिखा पढ़ी से गेट नहीं खुला, वह तो सत्ता में थे 🙏 तो क्या गेट वो ही बंद कराए हुए थे 🙏


जब इतने दिन से गेट बंद था तो आज गेट खुल वाने क़ी क्या जरूरत पड़ गई😂


 कोई गणमान्य भी नहीं आया था 🙏


 आज मेरा दिमाग थका हुआ है, फीडबैक रिपोर्ट कल लिखूंगा🙏🌹

[11/08, 9:18 am] kamleshmittra: 🌹🙏फीडबैक सूचना दिनांक 11 अगस्त 2024


कल सबसे हंसी खुशी का दिन था, कल के कार्यक्रम की भव्यता देखते ही बनती थी 🙏 कार्यक्रम के प्रबंधक धन्यवाद के पात्र हैं ❤️🙏


खुशियों को गिनकर बताना मुश्किल है फिर भी कुछ प्रयास करता हूं


1. तुगलकाबाद रविदास मंदिर के पुजारी रहे, संत बीके सिंह जी भी कल प्रांगण में उपस्थित थे 🙏


2. 9/10 अगस्त 2019 को लाठियां खाने और डिटेन होने के बाद यह उनका पहला आगमन था, मेरी जानकारी के अनुसार🌹


3. वह कभी भी 10 तारीख की पूजा में उपस्थित नहीं हुए, उनका शुरू से ही मानना रहा है, 10 अगस्त को हमारा मंदिर तोड़ा गया था, हमारे युवाओं को जेल में डाला गया था, यह हमारे समाज के लिए शोक दिवस है, इस दिन को शोक दिवस के रूप में मनाना चाहिए 🙏 


4. उनका भारी विरोध है कि हमारे गुरु जी की प्रतिमा अभी भी माल खाने में पड़ी है, तो प्रांगण में हम पूजा किसकी करते हैं🙏( जिस मूर्ति में प्राण है वह माल खाने में है )


5. मैं उनको मनाते मनाते थक गया, और कल जब उनका प्रांगण में प्रवेश हुआ मैं अनुपस्थित था 🙏 1:30 बजे अपनी टीम के साथ मैंने प्रांगण में प्रवेश किया तो सबसे पहले व्यवस्था का जायजा लिया 🙏 जैसा कि जनवरी 2024 से मेरा रूटीन है 🙏 अगर मैं देखूंगा नहीं तो लिखूंगा क्या?


6. श्री बीके सिंह जी जिस सम्मान के हकदार थे शायद वह उनको नहीं मिला, और उसका सारा गुस्सा उन्होंने मुझ पर उतारा 😭❤️


7. हँलाकि यह श्री रिशिपाल जी की जिम्मेदारी थी, कि वह अपने प्रांगण के पुराने मोतियों को संभाले🙏 मेरा क्या है मैं तो मुसाफिर हूं आज हूं कल नहीं रहूंगा 😂


8. और सम्मान का क्या है, जितना भी दो कम है, लेने वाले का लोभ बढ़ता जाता है, मैं देखता हूं रिशिपाल जी बांटते बांटते थक जाते हैं, और फिर नए सिरे से बांटने लगते हैं😂


9. मुझे वह दिन भी अच्छी तरह याद है जब मैं दिल्ली के किसी चमार को नहीं जानता था, मैं मित्रा हूं और मिश्रा में गिना जाता था, तब श्री रामचंद्र जी ने तुगलकाबाद श्री रविदास मंदिर के संबंध में मुझे सूचना दी कि मंदिर खतरे में है और जब तक मैं इस केस को समझ पाता, एंक्रोचमेंट रिमूव के आदेश दे दिये गये 🙏

10. मैं मंदिर को देखना चाहता था, श्री रामचंद्र जी के साथ मैं आया भी था, परंतु चारों तरफ से रास्ता बंद था, हमारी गाड़ी जाम में फंस गई, हताश और निराश होकर हमको वापस लौटना पड़ा 🙏

11. श्री ऋषिपाल जी ने मंदिर बचाने का आवहन किया था और सभी लोग दौड़ पड़े, इसलिए अपने सभी मोतियों को एक धागे में पिरोना तो श्री ऋषि पाल जी को ही पड़ेगा 🙏

12. कल प्रांगण में दूसरा विषय बहन रानी चौपड़ा का था वह प्रांगण के अंदर श्री गुरु दयाल लाली जी के साथ बातचीत करते हुए नजर आईं, जबकि इस प्रांगण में 28 फरवरी 2021 को प्रवेश करने के लिए, उन्होंने भारी जद्दोजहद की थी, परंतु उनका लंगर फेंक कर उनको अपमानित किया गया था 🙏

13. गुरु जी के भक्तों का सम्मान नहीं होगा, तो प्रांगण में बधाएं आती रहेगी, और प्रांगण के प्रबंधकों को भारी कष्ट और अपमान का सामना करना पड़ेगा🙏

14. सभी गुरु भक्तों का सम्मान होना चाहिए, भक्ति के बस में बसते हैं भगवान, यह बहुत पुरानी कहावत है🙏

15. तीसरा खुशी का विषय था, कल हरि और सोहम का मिलन हो गया, दोनों ने एक टेबल पर बैठकर विचार साझा किये 🙏

16. परंतु अफसोस है मैं यहां भी पीटा गया😂 संत श्री हितकारी महराज जी ने मेरे ऊपर आरोप लगा दिया कि मैं एक पक्ष को ही सुनता हूं 😭

17. मुझे लगता है इस प्रांगण में सबसे ज्यादा मार खाने वाले दो ही लोग हैं, सबसे ज्यादा श्री रिशिपाल जी को पीटा जाता है, और उसके बाद मुझे पीटा जाता है 👏

18. भाई मैं तो मुसाफिर हूं, जिस दिन मुझे लगेगा अपने मंदिर संभाल लिया, मैं चल दूंगा, किसी बहकावे में ना आयें मुझे कोई पद नहीं चाहिए, किसी भी पद का लोभ मुझे ना दें 🙏 

19. कृपया लीगल नोटिस पर ध्यान दें, सभी को आम सभा में लेते हुए कार्यकारिणी का चुनाव करायें 🙏 बोर्ड स्वतंत्र रूप से अपना कार्य करता रहे मुझे कोई आपत्ति नहीं है, कृपया बोर्ड में सभी संतो को सम्मिलित करने का प्रयास करें 🙏

20. तुगलकाबाद श्री रविदास मंदिर बोर्ड संतों की एक सभा होगी, और कार्यकारिणी गुरु भक्त प्रबंधकों की एक सभा होगी, उसका चुनाव आमसभा द्वारा किया जाएगा, गुरु भक्तों की एक सामान्य सूची बनाकर मैने दे दी है, बोर्ड इसका परीक्षण निरीक्षक और विस्तार करें 🙏


 प्रतिनिधि गुरु भक्तों का टोला

 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064


नोट : इस क्रम में अन्य फीडबैक सूचनाएं भी आ सकती है क्योंकि यह ग्रुप केवल भड़ास निकालने के लिए नहीं है, मुझे बहुत सोचना पड़ता है क्या ना लिखूँ 🙏


 श्री जोगिंदर नरवाल जी को कल भारी फीवर था, फिर भी वह प्रांगण में आये, समाधियों पर डाली जाने वाली चादर उनके पास थी 🙏 परंतु जब मैं प्रांगण में पहुंचा तो अन्य चादर समाधियों पर पड़ी थी,


परंतु वह स्थान जहां पर गुरु जी की प्रतिमा स्थापित थी कोई चादर नहीं डाली गई, अनजाने में लोग उसे पर चलते रहे 😭


 मैं सभी से इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं 🙏👏

[12/08, 10:00 am] kamleshmittra: 🙏🌹प्रतिभा की चोरी, सूचना दिनांक 12 अगस्त 2024 🙏


जब मैं पतंजलि योगपीठ में था, और जिस दौरान पतंजलि योगपीठ में ही रहता था, बाहर के भ्रमण पर नहीं होता था🙏


तो बाबा रामदेव के नाम पर आने वाले अथवा भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के नाम से आने वाले पत्रों को पढ़ा करता था और उनका जवाब तैयार करता था 🙏


पत्रों का जवाब दो तीन तरह से तैयार किया जाता था🙏


 ऐसे पत्र जिनमे बाबा रामदेव आचार्य बालकृष्ण अथवा डॉक्टर जयदीप आर्या से किसी की भेंट वार्ता का वर्णन करते हुए कोई जवाब मांगा जाता है तो मैं उनसे पूछ लेता था इसमें क्या जवाब देना है 🙏


सामान्य चिताओं का जवाब संगठन की नीति के अनुसार मैं स्वयं दे दिया करता था, अधिकांश पत्र ऐसे ही होते थे🙏 जो कांग्रेस के शासन के भ्रष्टाचार और उत्पीड़न पर अपना सुझाव रखते थे 🙏


 कुछ विशेष प्रकृति के पत्र होते थे, जो भूल बस हमको दे दिए जाते थे, या गलत/अधूरा पता होता था, पत्र के विषय को समझते हुए मैं उनको संबंधित विभाग को ट्रांसफर कर दिया करता था🙏 क्योंकि पतंजलि योगपीठ बहुत बड़ा संगठन है, बाबा रामदेव के तीन ट्रस्ट एक ही भूमि पर काम कर रहे हैं, पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, दिव्या योग मंदिर ट्रस्ट, भारत स्वाभिमान ट्रस्ट🙏


🌹ऐसे पत्र जिन को किसी सरकारी विभाग को लिखा गया होता, तो उनका निस्तारण मैं अपने स्तर पर करता था, जबकि वह सारा कार्य ऐसा माना जाता है जैसे बाबा रामदेव ने किया है, अथवा आचार्य बालकृष्ण ने किया है या डॉक्टर जयदीप आर्य ने किया है 🙏


इसी चीज को लोक प्रशासन की भाषा में लाल फीताशाही कहा जाता है 🙏


जिसकी कार्य में योग्यता होती है जिसका श्रम होता है, उसके नाम का कहीं कोई उल्लेख नहीं आता है 🙏 सामंतवादी मानसिकता के लोग उसका नाम लेना भी पसंद नहीं करते है जिसने वास्तव में काम किया है, और सभी सामंतवादी इस षड्यंत्र का संगठनात्मक रूप से पालन करते हैं, और प्रतिभाओं का शोषण करते हैं, प्रतिभा की चोरी करते हैं 🙏 यह अंग्रेजी और मनुवादी व्यवस्था का अंग है, या यूँ कह लीजिए राज तांत्रिक व्यवस्था का अंग है, राजतंत्रिक प्रशासन है 🙏 लोकतांत्रिक प्रशासन कैसा होना चाहिए, इस पर तो कोई विचार ही नहीं करता है, अंग्रेजों द्वारा बनाई गई प्रशासनिक व्यवस्था पर आज भी काम चल रहा है, 🌹तो लोकतंत्र का फायदा जनता को कैसे मिलेगा🙏


लोकतांत्रिक शासन की प्रशासनिक व्यवस्था भी तो लोकतंत्र के अनुसार ही होनी चाहिए🙏 प्रमोशन और ट्रांसफर में लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन होना चाहिए, वेतन वृद्धि में भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन होना चाहिए🙏


 मैं जो विषय दे रहा हूं🙏


 इस पर रविदासिया विचारधारा के / अंबेडकर विचारधारा के बुद्धिजीवियों को विचार करना चाहिए🙏 अगर वह खुद को अनुयाई कहते हैं 🙏 आज की नौकरशाही तो बहुत ही सुखद है, गैर जवाब दे ही है 🙏 मक्खन बाजी, भाई भतीजाबाद और संगठनात्मक भ्रष्टाचार से पूरा प्रशासन चलता है 🙏


परंतु वे लोग इस पर विचार नहीं करेंगे, जो अंग्रेजी व्यवस्था और मनुवादी व्यवस्था के अंग हो चुके हैं🙏 भले ही वे सभी चमार हों 🌹


उपरोक्त विषय सामाजिक संगठनों के लिए आंदोलन का विषय है 🙏

 

उपरोक्त विषय राजनीतिक संगठनों द्वारा शासन-प्रशासन में लागू करने का विषय है,


उपरोक्त विषय धार्मिक संगठनों के लिए चित्त को अवस्थित करने के लिए है 🙏 क्योंकि जब तक चित्त स्वीकार नहीं करता उस का विद्रोह होता ही रहता है 🙏


अब अपनी बात को समाप्त करता हूं - जिन पत्रों का जवाब मुझे ही देना होता था, डॉ जयदीप आर्या उस पर चिड़िया बैठालते थे अथवा उनके हस्ताक्षर मैं ही करने के लिए अधिकृत था🙏उस बार-बार की टाइपिंग से बचने के लिए, मैंने एक कामन फॉर्मेट बनाया था, और उस पर पुष्टि के लिए डॉक्टर जयदीप आर्य को भेज दिया 🙏 डॉ जयदीप आर्या से मैंने विचार विमर्श किया, उन्होंने मेरे कार्य की भर्शना की, उस पत्र को उनकी टेबल पर छोड़कर मैं चला आया 🙏 उसकी सॉफ्ट कॉपी कंप्यूटर पर उन्हें भेज दी थी 🙏


 मैं अन्य कार्य के लिए दिल्ली आ गया, जब 20-25 दिन बाद मैं पतंजलि योगपीठ वापस लौटा तो एक आपत्ति पत्र मेरे पास आया🙏 मैंने रिकॉर्ड रूम से उसे पत्र की फाइल निकल वाई और रिकॉर्ड को चेक किया, तो यह पाया डॉक्टर जयदीप आर्या आने वाले पत्रों को बिना पढ़े, मेरे द्वारा बनाए गए कामना फॉर्मेट को भेजते रहे जिसकी उन्होंने भर्शना की थी,( प्रतिभा की चोरी की) क्योंकि पूछने वाले ने पूछा कुछ और था और जवाब उसे कुछ और दिया गया 😂


 दूसरे के काम की चोरी करके अपने नाम का ठप्पा लगाने के दुष्परिणाम इस प्रकार आते हैं 😂


वर्तमान समय में मैं इस प्रकार की समस्या से जूझ रहा हूं, लगभग 10 साल बाद पतंजलि योगपीठ इस घटना को लिपि बध्य कर के आपके साथ शेयर कर रहा हूं🙏


 मुझे अपने पत्र की ड्राफ्टिंग इसलिए समझ में आ गई, क्योंकि उस पर टाइपिंग त्रुटि हो गई थी मैंने सोचा था वार्ता के बाद इस लिपकीय त्रुटि को ठीक कर लेंगे🙏 परंतु जिस पत्र को मैं उनकी टेबल पर छोड़ आया था, उसकी टाइपिंग त्रुटि को भी वह ठीक नहीं कर सके और उसी प्रकार उस कामन फॉर्मेट को भेजते रहे, और एक बुद्धिजीवी ने उसे पर ऑब्जेक्शन कर दिया, इस प्रकार डॉक्टर जयदीप आर्य की चोरी पकड़ी गयी, अन्यथा मुझे पता ही नहीं लगता कि मेरे द्वारा बनाए गए कामन फॉर्मेट का कोई प्रयोग कर रहा है 😂


 नकल के लिए भी अकल की बहुत जरूरत होती है, हम तो शिक्षक रहे हैं, कापी देखकर पहचान लेते हैं किसने किसकी नकल की है 🙏


हो सकता है कल मुझे कुछ खुलासे करने पड़े 🌹🙏 पतंजलि योगपीठ की उपरोक्त घटना सन 2014 से पहले की है 🙏


सबकी मंगल कामनाओं के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं


 जय गुरुदेव - धन गुरुदेव


 यादें एक विचार 

 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

9335122064

[12/08, 11:55 am] kamleshmittra: फाइल सूचना दिनांक 12 अगस्त 2024 🙏 मूल सूचना - 


🌹🙏सार्वजनिक अति आवश्यक सूचना दिनांक 9 अगस्त 2024 🙏🌹


तुगलकाबाद रविदास मंदिर तोड़े जाने की पांचवी वर्षगांठ कल है 🙏


आप सभी धर्म सेवक बंधुओ से निवेदन है, भारी संख्या में तुगलकाबाद रविदास मंदिर पहुंचे, संभावना है कल नई कार्यकारिणी के चुनाव की घोषणा की जाए 🙏🌹


और अपनी बात भी रखें/कहे 🙏


 🙏कुछ वादियों के अनुरोध पर, प्रिंसिपल सेक्रेटरी प्रधानमंत्री कार्यालय, 

प्रिंसिपल सेक्रेटरी हाउसिंग मिनिस्ट्री 

और संत श्री निरंजन दास जी को 9 जुलाई 2024 को लीगल नोटिस भेजा गया था जिसकी समय सीमा 30 दिन थी 🙏


उसके अनुसार:- सभी गुरु भक्तों एवं गुरु भक्त मंदिर समितियां को अधिकार दिया जाना है 🙏


A. सभी 96 गुरु भक्तों को

1. कार्यकारिणी के चुनाव में मत देने का अधिकार, 

2. एवं किसी के गुरु भक्त होने अथवा ना होने के वेरिफिकेशन करने का अधिकार🙏

B. गुरु भक्त मंदिरों के प्रतिनिधि को 

1. तुगलकाबाद रविदास मंदिर की कार्यकारिणी के पदों पर चुनाव लड़ने का अधिकार🙏

2. गुरु भक्त सभी रविदास मंदिरों को चुनाव में मतदान करने का अधिकार🙏


C. गुरु भक्त अन्य समितियों, गुरु भक्त अन्य सदस्यों को कार्यकारिणी के चुनाव में मत देने का अधिकार, 

1. जिन्होंने शासन को पहले प्रतिवेदन कर रखा है /

2. अथवा माननीय सर्वोच्च न्यायालय में और हाई कोर्ट में वादी रहे हैं 🙏


 कल कोई नया प्रस्ताव आता है तो उस पर भी विचार किया जाएगा, अन्यथा लीगल नोटिस की भावना के अनुसार आगे की कार्रवाई आरंभ की जाएगी🙏


 प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064

[12/08, 9:25 pm] kamleshmittra: 🌹क्रमिक सूचना दिनांक 12 अगस्त 2024


संत श्री निरंजन दास जी के डेरे से मौखिक सूचना प्राप्त हुई है, संबंधित लीगल नोटिस निर्देश के साथ संत हितकारी महाराज जी को, और उनके विशेष सचिव श्री एम.आर. बाली जी को भेज दिया गया है 🙏


डेरा सचखंड बल्ला की प्रशासनिक बिंग को बता दिया गया है, लीगल नोटिस पर संत श्री हितकारी महाराज जी और श्री एम. आर. बाली द्वारा लिखित रूप में किसी भी सूचना से अवगत नहीं कराया गया है🙏 इसलिए प्रशासनिक बिंग से लिखित सूचना का अनुरोध किया गया है 🙏


सभी की मंगल कामनाओं के साथ अपनी बात को विराम देता हूं 🙏


प्रतिनिधि वादीगण अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 🙏

मो. 9335122064


नोट :- कृपया अगली सूचना का इंतजार करें 🙏


अब तक दिल्ली के 18 मंदिरों का मैंने भ्रमण कर लिया, वहां के प्रबंधन कमेटी हमारे संपर्क में, 


कुछ ऐसे मंदिर भी पाए गए, जो घरेलू सीमा में है, उनका कोई प्रबंधन नहीं है 🙏 वह देव नगर के गुरु रविदास मंदिर को ही अपना प्रमुख मानते हैं 🙏


और कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जिन्होंने देव नगर के गुरु रविदास मंदिर को अपना प्रमुख मानने से इनकार किया🙏


 इसलिए सभी मंदिरों की सूची मैं ग्रुप में शेयर कर दे रहा हूं, कृपया सूची देख ले वें 🙏 और अपने अधिकार के संदर्भ में निर्णय लें 🙏


 सरकारी बोर्ड द्वारा जिन मंदिरो को स्वीकृति दी जाएगी उनके प्रतिनिधि के पास दो प्रकार के अधिकार होंगे, 


1. तुगलकाबाद गुरु रविदास मंदिर कमेटी के पदाधिकारी के पद पर चुनाव लड़ने का अधिकार

2. तुगलकाबाद गुरु रविदास मंदिर कमेटी में मतदान का अधिकार

उपरोक्त मात्र एक प्रस्ताव है, जिसे लीगल नोटिस का अंग माना जाना चाहिए 🙏

[13/08, 10:25 am] kamleshmittra: इस ग्रुप ने अपने अधिकतम सदस्यों की सीमा को प्राप्त कर लिया है, पेंडिंग रिक्वेस्ट तभी अप्रूव हो पाएंगी जब कोई इस ग्रुप को छोड़ता है🙏🌹


 जिनकी रिक्वेस्ट पेंडिंग है चाहे तो वह आर्थिक समानता के समर्थक ग्रुप के सदस्यता ले सकते हैं, वह ग्रुप भी हमारे द्वारा संचालित होता है और उसमें संवाद की भी सुविधा है 🙏

[13/08, 10:31 am] kamleshmittra: यह दोनों ही ग्रुप संत शिरोमणि गुरु रविदास की विचारधारा को अग्रसारित करने के लिए बनाए गए हैं -


 इस ग्रुप में गुरु रविदास जी के मंदिर को प्रमुखता दी गई है जबकि आर्थिक समानता के समर्थक ग्रुप में गुरु रविदास जी के विचार को प्रमुखता दी गई है 🙏 ऐसा चाहूं राज मैं.....

[13/08, 2:48 pm] kamleshmittra: 🌹चिंतन लेख दिनांक 13 अगस्त 2024


आज मैं कुछ लिखना तो नहीं चाहता था, क्योंकि कई पत्रों के ड्राफ्टिंग पेंडिंग है, और क्लाइंट के रिप्लाई भी कोर्ट में सबमिट करना है 🙏


परंतु श्री अच्छे लाल जी ने 5 मिनट में ही मेरा मन विचलित कर दिया है, मेरा पेट खाली है, क्योंकि कुछ बनाने की इच्छा नहीं थी, सोचा चने उबालकर खा लूं वह भी जलकर काले हो गए 😭

बर्तन साफ कर रहा था तभी अच्छे लाल जी का फोन आ गया🙏

 एक लंबे समय से मेरी, आश्रम अथवा होटल में खाने की आदत है, बनाने की कभी आदत नहीं रही, जब इंजीनियरिंग कॉलेज में था तब मेस में खाता था, और उससे पहले की जिंदगी तो और भी बुरी थी, मिल गया तो खा लिया 🙏


उमर कम थी इसलिए कहीं भी खाने मिल जाता था, ईमानदारी और प्रतिष्ठा थी, इसलिए कहीं भी खाने को मिल जाता था🙏 इससे कोई यह अनुमान ना लगा ले कि मेरे बाप के घर में खाने को नहीं था😂 परंतु मेरे लिए नहीं था😭


 उन्होंने प्रतिदिन 10 X 07 (कभी-कभी 06 दिन) घंटे से अधिक की सरकारी ड्यूटी करके अपने प्रतियोगिओं से ज्यादा कमाया और खुद को स्थापित किया, वह अपने गांव (सूद्र और सवर्ण ) में सबसे पहले सरकारी नौकरी करने वाले व्यक्ति थे, और शहर में अपना मकान बनाने वाले भी पहले व्यक्ति थे 🙏


परंतु इस अंधी दौड़ में हमारा बचपन खो गया🙏 क्योंकि घर में ना संस्कार थे, ना संस्कृति, ना कोई आध्यात्मिक गुरु, सरकारी पुस्तकों से वैज्ञानिक बुद्धि का व्यक्ति था 🙏 प्रतियोगिता इतनी चरम पर थी, जिसने सामाजिकता को खो दिया था🙏


विज्ञान के साथ-साथ अज्ञान गहरा होता है, क्योंकि अभी बहुत कुछ अज्ञात है, ना तो हर चीज को आंख से देखा जा सकता है और ना ही हर चीज (तत्व और अनुभूति) कान से सुना जा सकता है, 


वैज्ञानिक बुद्धि केवल दो इन्द्रियों पर जोर देती है, आंख से देख लिया कान से सुन लिया, तब तो ठीक है अन्यथा अंधविश्वास है🙏


 मैं अपनी खोज में पाता हूं अंबेडकरवादियों का बुद्धिस्टों का और खुद को नास्तिक कहने वालों की यह चरम मूर्खता है 🙏


कल भी एक श्री धर्मवीर जी नाम के व्यक्ति से लंबे चर्चा हुई, वे भी वैज्ञानिक बुद्धि के व्यक्ति थे, और संत रविदास जी की पूजा के घोर विरोधी थे 🙏 क्योंकि रविदासिया संतों ने समाज के बीच कोई काम किया ही नहीं है 🙏 और आज भी वह काम करना नहीं चाहते हैं पदों पर कब्जा करना चाहते हैं, वह एक पद से संतुष्ट नहीं है🙏 एक प्रचारक को अध्यक्ष होने की क्या जरूरत है!


धन का लोभ, पद का लोभ, यही तो समाज के विनाश का कारण है🙏 और बात लोभ तक हो तो भी ठीक है परन्तु वे पद की आपा से भरपूर हैं 🙏 उनकी तृप्ति एक पद से नहीं होती है, और उस के पद का काम कोई दूसरा कर दे, नाम उनका चला रहे🙏


हमारे समाज के यही राक्षस है, जो पूरे समाज की संभावित सुख समृद्धि को खा रहे हैं🙏


आज अच्छे लाल जी ने मुझे फिर छेड़ दिया 🙏 खुद को खोकर मैंने बहुत कुछ पाया है, मेरी मृत्यु अज्ञानता में नहीं होगी, जो जानेंगे नहीं वह अज्ञानता में ही मरेंगे🙏


अब मूल प्रश्न पर आते हैं, अच्छे लाल जी तीन प्रश्नों से दुखी थे 🙏


 वे सुप्रीम कोर्ट के आरक्षण सम्बन्धी आदेश से दुखी थे 🙏


वह इतने दुखी थे कि वह रविदास राज को समझ पाने में सक्षम नहीं थे 🙏


जिनके पास धन है परंतु सत्ता नहीं है वह समझते हैं जैसे तैसे सत्ता मिल जाए तो सब ठीक हो जाए 🙏


इसी प्रकार धन के महत्वाकांक्षी लोग समझते हैं पैसा मिल जाए तो सब कुछ ठीक हो जाए 🙏


 मैंने दोनों प्रकार के दुखी लोगों को निकट से देखा है 😭


 मुझे लगता है आज रोटी मिल जाए तो सब ठीक हो जाए 😂


असंतुलित दौड़ हमेशा दुख का कारण है, ❤️


 तुगलकाबाद रविदास मंदिर की सरकारी कमेटी के लोग समझते हैं, वह चोर दरवाजे से इस पर बने रहे तब सब ठीक रहेगा🙏


 चुनाव लड़कर वह पद पर आना नहीं चाहते हैं, जनतंत्र में जनतंत्र का पालन करना नहीं चाहते, और खुद को अंबेडकर का अनुयाई कहते हैं 🙏


 पिछले कई दिनों से लोभ लालच के प्रस्ताव आ रहे हैं, जब मुझको ललचाया गया है, तो उनको भी ललचाया गया होगा, जो लीगल नोटिस में वादी हैं 🙏


 परंतु वादी भी माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं पढ़ते ना समझते हैं 🙏 वादी एजेंट मालिक नही होता 😂


 इसलिए ना तो लोभ लालच में आए, ना ही दूसरों को लोभ लालच में डालने का प्रयास करें😂


देश की आजादी के समय डॉक्टर अंबेडकर को समझाया गया था, अंग्रेजों को चले जाने दो, फिर दलित और सवर्ण आपस में समझौता कर लेंगे वह समझौता आजादी के 75 साल बाद भी नहीं हुआ😂


तुगलकाबाद रविदास मंदिर पर सामंती चमारों की तरफ से भी ऐसा ही प्रस्ताव आ रहा है, पहले सरकार से जमीन ले लेते हैं फिर आपस में देख लेंगे🙏


 कृपया सभी गुरु भक्तों को पहले अधिकार देने का कष्ट करें, बाबा साहब के साथ हुए धोखे से हम सभी ने बहुत कुछ सीखा है 🙏


अन्यथा ध्यान रखें यह कोम उधम सिंह की वंशज है, सात समुंदर दूर भी दुश्मन को नहीं छोड़ती है 🌹


 सभी की मंगल कामनाओं के साथ, सद्बुद्धि की अपेक्षा करते हुए, अपनी बात को विराम देता हूं🙏


प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064

[13/08, 4:36 pm] kamleshmittra: मेरी माँ के मुझसे किए गये कुछ सवाल , जो मुझसे ही नहीं आप सब से भी पूछे गये हैं। “जब मैं रविदास मंदिर(तुगलकाबाद) केस में अंदर था , हमें दिल्ली बुलाया गया था। मंच पर बुलाकर मेरी माँ को माइक दिया गया, लेकिन वो कुछ कह नहीं पाईं—बस आँखों से आँसू बहते रहे। उस समय सबने कहा था, "आप क्यों रो रही हैं? आप भाग्यशाली हैं कि आपका बेटा इस कारण अंदर गया। हम सब भी तो आपके भाई और बेटे हैं। हम कभी न आपको भूलेंगे और न ही आपके बेटे को। वो हमारा भी भाई और साथी है।"


आज, जब सचमुच डूबते को तिनके का सहारा चाहिए, तो वही लोग जो कभी हमारे साथ खड़े थे, अब चुप हैं। न अब कोई बोल पा रहा है, न कोई देख पा रहा है, और न ही कोई सुन पा रहा है।


आप सभी से मेरी विनम्र प्रार्थना है कि कृपया इस स्थिति को समझें और मेरी उम्मीदों को टूटने न दें। आपकी थोड़ी सी मदद हमारे लिए बहुत मायने रखती है।


धन्यवाद,

अशोक रावत 9568246024

[13/08, 9:37 pm] kamleshmittra: 🙏 शाम के समाचार निम्लिखित है, 


आज दिनांक 13 अगस्त 2024 को भी कार्यकारणी भंग कर नये चुनाव कराने की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है 🙏


30 जुलाई को प्रधानमंत्री कार्यालय से मिनिस्ट्री आफ हाउसिंग को लेटर ट्रांसफर किये जाने की लिखित सूचना प्राप्त हुई🙏 


कल 12 अगस्त 2024 को डेरा सचखंड बल्ला के प्रशासनिक विभाग से लेटर ट्रांसफर किए जाने की मौखिक सूचना प्राप्त हुई🙏 


 इस बीच ज्ञात हुआ है कि वादी एजेंटो को धमकाया और बरगलाया गया है 🙏 उन सभी की चाल उखड़ी उखड़ी नजर आ रही है🙏


इसलिए stakeholder को स्वयं सामने आना पड़ सकता है 🙏 और अगर ऐसा होता है तो प्रतिवादी को भारी जुर्माना चुकाना होगा 🙏


4/5 जून 2011 को बाबा रामदेव द्वारा चलाए गए आंदोलन के पश्चात माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर बाबा रामदेव को भारी जुर्माना चुकाना पड़ा था 😭


 जस्टिस अरुण मिश्रा ने अपने आदेश में हर चीज का इलाज कर रखा है 😂


सुप्रीम कोर्ट के आदेश से खेलोगे तो जेल जाने से खुदा भी नहीं रोकेगा🙏


सुप्रीम कोर्ट में झूठ बोलने की सजा यह मिली की मंदिर ढा दिया गया 🙏


अभी वक्त है सुधर जाओ, हरि और सोहम में समाज को बांटने की कोशिश मत करो🙏 गुरु भक्तों को उनके अधिकार सम्मान पूर्वक दे दो 🙏


कुछ लोगों की मंशा थी कि चेयरमेन श्री निरंजन दास जी इस्तीफा दे दें और वे चोर दरबाजे से चेयरमेन हो जाए परंतु यह हो ना सका 🙏


पहले संत हो जाओ फिर चेयरमेन भी हो जाना 🙏


 संत प्रमुख के चुनाव का उन्हीं लोगों ने विरोध किया, जो दुसन्त है, और संत का चोला ओढ़े हैं 😂


 20-25 अगस्त के बीच कुछ नए खुलासे हो सकते हैं🙏 समाज को जितना उलझाओगे अपनी मान प्रतिष्ठा गबाओगे 🙏🌹


प्रतिनिधि अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064

[13/08, 10:42 pm] kamleshmittra: अंबानी को जेल हो सकती है, अगर प्रशासनिक रिपोर्ट से यह प्रूफ हो जाए, कर्मचारियों को फिजूल में निकाला गया है, बेटे की शादी के खर्चे को मैनेज करने के लिए निकल गया परंतु इस विषय का मुकदमा कौन लड़ेगा🙏 जिसके अगले महीने की रोटी की जुगाड़ नहीं वह मुकदमा कहाँ से लड़ेगा 😭(under right to live)


सामंती चमारों को तो अपने घर भरने से फुर्सत नहीं है 🙏चमार मजदूरों की लड़ाई कौन लड़ेगा🙏


 जब कोटे में कोटा सिस्टम आया, और लगने लगा कि अगले चुनाव में रिजर्व सीट से नहीं लड़ सकेंगे तब 131 सांसद मोदी के पास विरोध करने पहुंच गए 🙏


 परंतु मजदूरों के काम के घंटे 8 से बढ़कर 12 किए गए उसके लिए आज तक एक भी सांसद मोदी के पास विरोध करने नहीं गया 🙏


 सामंती चमारों थोड़ी शर्म करो🙏🌹


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

[14/08, 9:04 am] kamleshmittra: 🌹संशोधित प्रतिक्रिया दिनांक 14 अगस्त 2024 


अंबानी को जेल हो सकती है, अगर प्रशासनिक रिपोर्ट से यह प्रूफ हो जाए, कर्मचारियों को फिजूल में निकाला गया है, बेटे की शादी के खर्चे को मैनेज करने के लिए निकाला गया परंतु इस विषय का मुकदमा कौन लड़ेगा🙏 जिसके अगले महीने की रोटी की जुगाड़ नहीं वह मुकदमा कहाँ से लड़ेगा 😭(under right to live)


सामंती चमारों को तो अपने घर भरने से फुर्सत नहीं है 🙏चमार मजदूरों की लड़ाई कौन लड़ेगा🙏


 जब कोटे में कोटा सिस्टम आया, और लगने लगा कि अगले चुनाव में रिजर्व सीट से नहीं लड़ सकेंगे तब 131 सांसद मोदी के पास विरोध करने पहुंच गए 🙏


 परंतु मजदूरों के काम के घंटे 8 से बढ़कर 12 किए गए उसके लिए आज तक एक भी सांसद मोदी के पास विरोध करने नहीं गया 🙏


 जब पूरे देश में बेरोजगारी फैली है, तब काम के घंटे को कम कर दिया जाना चाहिए ताकि सबको रोजगार मिल सके, और इसका कड़ाई से पालन होना चाहिए, लेकिन प्रतिनिधि सामंती चमारों को यह बात समझ में नहीं आएगी क्योंकि वह तो मलाई खा रहे हैं और जनता को बरगला रहे हैं 👏


 मोदी ने शिक्षा के बजट में कटौती करके, उस बजट को अंधविश्वास फैलाने पर खर्च कर रहा है, मंदिर और मंदिर समितियां को पैसा बांट रहा है, सामंती चमार उस पैसे को बटवाने में जोर-जोर से लगे हैं 👏


 कोई भी सामंती चमार कितना बड़ा भी बगुला भगत हो जाए, ना तो मेरी आंख से बच सकता है और ना ही मेरी कलम से 🌹👏


 सामंती चमारों थोड़ी शर्म करो🙏🌹


 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

[14/08, 10:36 am] kamleshmittra: 🙏🌹अति आवश्यक सूचना दिनांक 14 अगस्त 2024 



सभी 96 (अब 95)गुरु भाइयों को 

सभी 105 मंदिर कमेटियों को 

एवं अन्य गुरु रविदास एवं अंबेडकर समितियां को 

एवं इच्छुक अन्य गुरु भक्तों को 


सूचित किया जाता है कि तुगलकाबाद रविदास मंदिर से संबंधित कल शाम की सूचना डालने के पश्चात रात्रि 11:00 बजे हमारे पास एक फोन आया है, उन्होंने अपना परिचय डेरा बलला के एडवोकेट के रूप में दिया🙏


तुगलकाबाद रविदास मंदिर की तथाकथित सरकारी कमेटी द्वारा की जा रही गतिविधियों सहित समस्त जानकारी अर्जित की, उन्होंने एक-मत व्यक्त किया कि सभी लोग केवल मंदिर चाहते हैं, मंदिर कमेटी में सदस्यता नहीं चाहते हैंl 


मैंने उन अधिवक्ता महोदय को सूचित कर दिया है, कि कुछ गुरु भक्तों / समितियों के लिखित प्रत्यावेदन हमारे पास है इसलिए आप यह नहीं कह सकते कि कोई मंदिर कमेटी का सदस्य होना नहीं चाहता है 🙏


विशेष सूचना यह है कि जिन गुरु भक्तों और समितियां ने अभी तक अपने प्रतिवेदन लिखित रूप में हमको नहीं भेजे हैं यथा शीघ्र भेजने का कष्ट करें🙏


 क्योंकि तथाकथित सरकारी कमेटी लोग बिना चुनाव लड़े ही पद पर बने रहना चाहते हैं 🙏


सरकारी झटपट कमेटी(बोर्ड) गुरु भक्तों की कमेटी नहीं है 😂


 लाखों लोगों की भीड़ में से, तार्किक आधार पर लगभग 300 लोगों की सूची मैंने उनको भी दे दी है, सरकारी झटपट कमेटी उसका विस्तार कर सकती है👏 और गुरु भक्तों की कमेटी बना सकती है🙏 गुरु भक्तों की कमेटी बनाना ही होगा, क्योंकि यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है 🙏


बोर्ड - संतो और समाज के गणमान्य व्यक्तियों की एक सभा होगी जो समाज को सुसंगठित करेगी (जैसा कि सरकारी झटपट कमेटी में प्रलक्षित है)🙏 तुगलकाबाद रविदास मंदिर की कार्यकारिणी को निर्देशित कर सकेगी और अपना अधिकारों और कर्तव्य का विस्तार कर सकेगी 🙏


Note:- पिछले कई दिनों से (96 गुरु भाइयों अब 95 में से ) एक गुरु भाई आर्थिक मदद की गुहार लगा रहा है, सरकारी झटपट कमेटी के सदस्यों से भी आर्थिक मदद की गुहार लगा चुका है परंतु मेरी जानकारी में नहीं है, सरकारी झटपट कमेटी ने उसकी कोई मदद की हो 👏


एक गुरु भाई ने आत्महत्या कर ली थी, इसलिए अब गुरु भाइयों की संख्या 95 है अगर इस गुरु भाई को कुछ हुआ तो मैं सरकारी झटपट कमेटी पर हत्या का मुकदमा चलाऊंगा 👏 


जो संत बने घूमते हैं, उन्होंने रविदास राज की अर्थव्यवस्था को लागू करने के लिए कुछ नहीं किया है, मनुवादी अर्थव्यवस्था लागू है, और व्याजी हमारे गरीब समाज का खून चूस रहे हैं, परंतु यह सब संत घंटा बजाने में मस्त है 🙏 अपनी चरण बंदगी कराने में मस्त है 🙏


झटपट कमेटी को बोर्ड में बदलना होगा🙏


 काउंसिल फॉर पेटीशनर

 अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064

[14/08, 12:49 pm] kamleshmittra: सूचना-2 दिनांक 14 अगस्त 2024 


 उपरोक्त फॉर्म सरकारी कमेटी का सदस्य होने के लिए सदस्यता फॉर्म उपलब्ध है 🙏


आप इसको प्रिंट करा लें, और भर कर मुझे भेज सकते हैं 🙏


 घोषित सूचना के अनुसार यह 30 अप्रैल 2024 तक मेरे पास आ जाना चाहिए था परंतु संतों की सभा के प्रतिनिधि संत श्री के. सी रवि जी ने कहा था इतनी जल्दबाजी मत करो, अभी लोगों को समझने दो🙏


 इसलिए इसको 2 महीने और बढ़ा दिया गया और 9 जुलाई को लीगल नोटिस जारी की गई थी 🙏


 मैं एक ही काम में उलझा नहीं रह सकता, क्योंकि केस जितना लंबा चलता है, अधिवक्ता का खर्चा उतना अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि अधिवक्ता का दिमाग उसी कार्य में लगा रहता है, और उसे अपने जीवन को सरवाइव भी करना होता है 🙏


यह एक सामाजिक कार्य है, परंतु फिर भी मुझे उचित आर्थिक सहयोग नहीं मिल रहा है 🙏


 जून और जुलाई में संत श्री के. सी रवि जी द्वारा कोई आर्थिक सहयोग नहीं दिया गया है, जबकि जनवरी-फरवरी मार्च अप्रैल और मई में उन्होंने आर्थिक सहयोग किया था🙏


इस लीगल नोटिस के लिए ₹400 प्राप्त हुए, जोकि वादी एजेंट द्वारा दिए गए हैं 🙏


अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064

[14/08, 3:23 pm] kamleshmittra: महोदय,


जिसने जाना हो उससे जानो, किताबों में बड़ा धोखा है😍


गुरु हृदय बथु को कहा जाता है, उस पर ध्यान लगाया जाता है 🙏 तब स्मृति की अतुल्य गहराइयों में पहुंच जाता है🙏


जब साधक ध्यान की गहराइयों में उतरने में सक्षम हो जाता है, तब हृदय बथू पर ध्यान लगाकर, गर्भ स्मृति में प्रवेश कर जाता है 🙏


 इसको आप इस प्रकार समझ सकते हैं, जिनको नदी में गोता लगाने का अभ्यास नहीं है, वह नदी की अतुल्य गहराइयों में से मोती नहीं निकाल सकते है 🙏


 नदी और समुद्र में जाने के लिए, गोताखोर सूट बन गए हैं, परंतु स्मृति की अतुल्य गहराइयों में जाने के लिए अभी कोई सूट नहीं बना है, वहां पर हृदय बथु के मार्ग से ही जाना पड़ता है, उस मार्ग को गुरु के नाम से भी जाना जाता है😂


 गुरु को साधने की एक व्यवस्था है जिसे शब्द कहते हैं, यह एक बैसाखी के समान है, बैसाखी के साथ चलने वाला व्यक्ति दौड़ में विजई नहीं हो सकता है, चलने में सक्षम हो जाने पर इसको छोड़ना ही पड़ता है 😂 जिसे गोता लगाने का अभ्यास नहीं है, वह जिद बस गोता लगाएगा तो अपनी मौत को गले लगाएगा 😭


जिस प्रकार शिशु को चलने के लिए धकेला की जरूरत होती है, उसके बाद धकेला को छोड़ देने की आवश्यकता होती है, इसी प्रकार गुरु तक पहुंचाने के लिए, शब्द एक धकेला है 😂 गुरु तक पहुंचते ही धकेला को छोड़ देना चाहिए, तभी स्मृति क़ी अतुल्य गहराइयों में कोई पहुंचता है 🙏 सभी इसी मार्ग से जाते हैं🙏


 संत जी क्या समझ में आया?


 साधक कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064

Friday, 9 August 2024

क्रिमी लेयर :- एक राजनीतिक

 😍🌹सूचना दिनांक 9 अगस्त 2019 (संशोधित सूचना 2019 को 2024 पढे एवं अन्य )


🌹 क्रीमी लेयर अनुसूचित जाति पर आरएसएस की सोच का असर, एक खतरनाक राजनीति है 🙏 बाबा साहब द्वारा बनाए गए संविधान का बार-बार अपमान कैसे सहेगा भारत 🙏🌹


संत रविदास का भक्ति आंदोलन, आरएसएस द्वारा थोपा गया पाखंडवाद है 🙏


 संत रविदास का रविदास राज, पाखंडवाद का विरोधी है 🙏


बाबा साहब का भारतीय संविधान, दलगत और जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर है 🙏 परंतु क्रिमी लेयर चमारों ( SC/ST 131 सांसद) (अपवादों को छोड़कर) ने अपने लोभ के लिए भारतीय संविधान को बार-बार घायल किया है🙏


आरएसएस के प्रवक्ता राजीव दीक्षित के कथन अनुसार बाबा साहब भारतीय संविधान 1950 के समर्थक नहीं थे, उन्होंने( बाबा साहब) भारतीय संविधान को कचरा कहा था🙏


 आरएसएस के दूसरे प्रवक्ता पूर्व जस्टिस डीडी बसु ने जो संविधान का पोस्टमार्टम किया उससे भारतीय संविधान के प्रति लोगों की आस्था कम हुई🙏


 जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस संविधान की भूरी भूरी प्रशंसा की जाती है 🙏


 भारतीय संविधान में 105 संशोधन 131 सांसदों की मूर्खता के कारण हुए भारतीय संविधान 1950 के अनुसार, सन 1951 में ही अनुसूचित जाति जनजाति आयोग का गठन कर दिया गया होता, तो भारतीय संविधान में एक भी संशोधन करने की आवश्यकता नहीं पड़ती🙏


 कांग्रेस की मूर्खतापूर्ण नीति के कारण, अनुसूचित जाति जनजाति आयोग का गठन बीपी सिंह के शासनकाल में 1989 में हुआ, जिसने 1995 से कार्य करना शुरू किया🙏


 इसके लिए क्रीमी लेयर वाले चमार दोषी हैं 🙏 इन सभी चमारों की पेंशन बंद कर देनी चाहिए🙏 चाहे वह राजनीति में रहे हो अथवा प्रशासनिक अधिकारी🙏


क्रीमी लेयर वाले चमारो ने - गरीब चमारों का भी कोई संरक्षण नहीं किया है, केवल अपनी औलादो को विदेश में सेटल करते रहे हैं, और उनके लिए कोठियां बनाते रहे हैं 🙏


 इन चमारों ने अपने परिवार के अन्य सदस्यों के लिए भी कार्य नहीं किया है,🙏


 मैं खुद चमार हूं और इस सच्चाई को भली भांति जानता हूं, इसलिए टीका टिप्पणी बहुत सोच कर करना 🙏 हमारे परिवार खानदान और रिश्तेदारों में अधिकारियों की एक बहुत बड़ी फौज, ब्रिटिश काल से ही रही है 🙏


 पुनः कह दूँ मैं माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पक्ष में हूं, परंतु राजनीति इसका जिस प्रकार से अनुपालन करेगी उसके विरोध में हूँ 🙏 


बिना आर्थिक गणना के क्रीमी लेयर जातियों को अलग नहीं किया जा सकता है, इसके लिए संपूर्ण देश के नागरिकों की सभी जातियों की आर्थिक और सामाजिक हैसियत की गणना होना आवश्यक है🙏 उसी के बाद माननीय सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय लागू किया जा सकता है, ( इंदिरा साहनी केस में पहले भी ऐसा कहा जा चुका है, परंतु सरकारों ने उसका पालन नहीं किया है, यह आदेश उसी के क्रम में है ) अन्यथा नही, अगर कोई राज्य सरकार ऐसा करती है तो उसे न्यायालय में चुनौती दिया जाना चाहिए 🙏


 बिना संविधान संशोधन किये इस समस्या का समाधान हो सकता है, परंतु 21 अगस्त 2024 का आंदोलन, राजनीतिक रोटी सेकने के लिए होगा और भारतीय संविधान को एक बार फिर घायल किया जाएगा👏


यह क्रीमी लेयर चमारों की बेवकूफी के कारण होगा🙏


सभी की मंगल कामनाओं के साथ अपनी बात को समाप्त करता हूं 


अधिवक्ता कमलेश कुमार मित्रा 👏

मो. 9335122064


नोट :- भारतीय संविधान के अनुसार, सदन के नेता का किसी पार्टी का नेता होना जरूरी नहीं है 🙏


 परंतु दल बदल विरोधी कानून संसद में बनाया गया और संसद में लागू होता है, और विप भी जारी की जाती है🙏


यह गैर संवैधानिक गतिविधि है, किसी भी सांसद ने इसको न्यायालय में चुनौती नहीं दी, क्योंकि हमारे 131 सांसद बुद्धि विवेक से पैदल रहे हैं 🙏


अधिवक्ता की मजबूरी यह है कि वह अपने ही मामले में अधिवक्ता नहीं हो सकता है 🙏 और दलित समाज में विवादी बहुत पाए जाते हैं परन्तु खोजो तो वादी एक भी नहीं मिलता है 🙏


अनुसूचित जाति समाज की रक्षा तभी हो सकेगी जब संविधान की रक्षा भी होती रहे 🙏


मीठा मीठा गप-गप कड़वा कड़वा थू थू से काम नहीं चलेगा🙏


आर्थिक समानता के लिए संघर्ष जरूरी है, देश की संपूर्ण संपत्ति का एक बार समान बटवारा हो जाना चाहिए 🙏


हजार साल में हुए असंतुलन को फिर नए सिरे से संतुलित किया जाएगा, यह भविष्य की बात है🙏


105 संशोधन ने बाबा साहब को केवल दलितों का नेता बना दिया है, जबकि बाबा साहब ने भारतीय संविधान को जातिवाद की मूल भावना से ऊपर उठकर लिखा था🙏


पहली संसद के पढ़े लिखे गद्दारों ने बाबा साहब को धोखा दिया था, बाबा साहब ने उस समय के पढ़े-लिखे लोगों के लिए कथन किया था 🙏 आज के लोगों के लिए नहीं कहा था 🙏 परंतु उन गद्दारों की फसल आज भी अनुसूचित जाति समाज को हानि पहुंचा रही है 🙏


 सामाजिक संगठन राजनीतिक संगठन की तरह काम कर रहे हैं 🙏


 और धार्मिक संगठन, मनुवादी शहंशाह की तरह काम कर रहे हैं 🙏